शिबली व विजय की तरफ से हजार-हजार रुपये

ऐसे दौर में जब पत्रकारिता राडियाओं के कारण आम जन की नजरों से गिर चुकी है, तब न्यू मीडिया के लोग फटेहाली में जीते हुए भी मिशन को जिंदा रखे हुए हैं, आगे बढ़ा रहे हैं और इस मिशन के संचालन के लिए किसी पूंजीपति या सरकार के दरवाजे पर दस्तक देने की जगह, दांत निपोरने की बजाय जनता के सामने सीना तान कर चंदा मांग रहे हैं, मदद की अपील कर रहे हैं.

राडियाओं से संपर्क साध कर, राडियाओं के संपर्क में रह कर सत्ता, सरकार और उद्योग जगत से ढेरों लाभ पाने वाले पत्रकारों को कभी अपनी पत्रकारिता के लिए चंदा मांगने की जरूरत नहीं पड़ती क्योंकि उनकी पत्रकारिता न तो जन के लिए होती है और न ही उनके पत्र में कारिता होती है. वे पत्रकारिता का इस्तेमाल खुद के नाम व दाम को चमकाने-बढ़ाने के लिए करते हैं. वे बेहद सतर्क होकर लिखते बोलते और जीते हैं क्योंकि उनके हर लिखे बोले जिए से जाने किस राडिया का, राडिया के जाने किस क्लाइंट का नुकसान हो जाए. वे बहुत कुछ जानकर भी छिपाते हैं, बहुत कुछ देख कर भी अंधे बन जाते हैं क्योंकि उन्हें अंधा बने रहने, गूंगा बने रहने के लिए राडियाओं, सरकारों, उद्योगपतियों, मालिकों से निर्देश मिले हातो हैं और बदले में लाखों करोड़ों अरबों के लाभ मिले होते हैं. सो, उन्हें चंदा मांगने की जरूरत नहीं पड़ती. और, इस देश में अब चंदा मांगना लगभग भीख मांगने जैसा हो गया है क्योंकि समय बदलने के साथ सोच भी बदल गई है.

मार्केट इकोनामी में गलत-सलत किसी भी तरीके से पैसे कमा लेने को सफलता माना जाता है, सो अगर आप चंदा मांगते हैं तो फिर सामने वाले की निगाह में पागल या भिखारी ही माने जाएंगे क्योंकि आप गलत-सलत न करके ईमानदारी व मिशन के नाम पर चंदा मांग रहे हैं तो शायद आप इस दुनिया के प्राणी नहीं हैं, या फिर जरूर कुछ छिपा रहे हैं. फिर भी हम तो चंदा मांगेंगे क्योंकि अभी कई मौके मिलने के बावजूद बेईमान नहीं बन सका हूं और ईमानदारी से इस पोर्टल के संचालन के लिए जो पैसे चाहिए, उसे कोई ईमानदारी से देने को तैयार नहीं होता क्योंकि कोई किसी को पैसा देता है तो साथ में कई गूढ़ उद्देश्य भी सौंप देता है जिसे करने-बढ़ाने को हम लोग कतई तैयार नहीं हैं. इस बारे में पहले भी कई बार, बार-बार लिख चुका हूं इसलिए दोहराने का फायदा नहीं और खुद को महान कहलाने का शौक नहीं लेकिन आज लिखने का बहाना वो हजार रुपये का चेक बना है जो भड़ास4मीडिया के पास पहुंचा है. भेजा है पत्रकार एएन शिबली ने. उन्होंने अपने मेल में लिखा है- ”यशवंत भाई, सलाम, एक मामूली सी सहायता के तौर पर मैंने एक हज़ार रुपए का चेक आपके अकाउंट में डाल दिया है. मैंने यह चेक बैंक ऑफ बड़ौदा के भारत नगर ब्रांच में डाला है. बैंक स्टाफ ने कहा है दो दिन में पैसा आपको मिल जाएगा. अकाउंट में पैसा आ जाए तो प्लीज़ मुझे इन्फॉर्म कर दें. चेक की फोटो कॉपी संलग्न है.”

शुक्रिया शिबली जी. आपने हजार रुपये कम नहीं भेजे हैं. आप सौ रुपये भी भेजते तो काफी होता क्योंकि यह हम लोगों मोटीवेट करता है कि हम ईमानदारी से अपना काम करें, आप जैसे लोग हमारे साथ हैं और पूंजी के लिए, इस पोर्टल के संचालन हेतु पूंजी के लिए, पोर्टल को किसी पूंजीपति के हाथों को गिरवी न रखें.

एक अन्य पत्रकार साथी विजय ने हजार रुपये नगद भड़ास4मीडिया के लिए दिए हैं. उनका भी आभार.

यशवंत

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Comments on “शिबली व विजय की तरफ से हजार-हजार रुपये

  • यशवंत भाई
    मेरे हज़ार रुपए की क्या औकात है। मेरी दुआ है की आप अपने मिशन में सफल रहें.

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  • sikanderhayat says:

    madad to ham jese chutbyeye lekhak bi karna chahte magar kya kare bhai jaha chapta ha vaha pese nahi milta jaha pese milte to vaha par pehle sa he sarkari naukri kar rahe ya apne bangle ya aalisahan flat ke ac kamre ma band ho kar shanti se andhadund surakshit lekhan kar rahe mahan lekhak kisi or k leya space hi nahi chodte uper se har editor chahne laga ha ki english media and news chanels ki tarah uske charo taraf bi glaoumar kuo na ho uski frastrasion k bi shikar ham hi hote ha

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  • ABHISHEK TIWARI says:

    Dear Sir !
    Suprabhat…………
    VASTAV ME AAP KA PRAYASH SARAHANIY HAI .
    AAGE BHI HAME APE LEKHO SE PRABHAVIT KARTE RAHIYEN.
    THANKS.
    ABHISHEK TIWARI ‘SANDEEP’
    AZAD HIND MANCH VARANASI UP.
    TCI SCS LARO AHMEDABAD
    Mb.-09974817839 . [b][/b][b][/b]

    Reply
  • ABHISHEK TIWARI says:

    Dhirajlal Hirachand Ambani was born on 28 December 1932, at Chorwad, Junagadh in Gujarat, When he was 16 years old, he moved to Aden,Yemen. Initially, Dhirubhai worked as a dispatch clerk with A. Besse & Co. Married to Kokilaben. Dhirubhai also worked in Dubai for sometime. He returned to India and founded the Reliance Commercial Corporation with an initial capital of Rs 15000. Dhirubhai set up the business in partnership with Champaklal Damani from whom he parted ways in 1965.

    Dhirubhai started his first textile mill at Naroda, near Ahmedabad in 1966 and started the brand “Vimal”. Dhirubhai Ambani is credited with having started the equity cult in India. With the passage of time, Dhirubhai diversified into petrochemicals and sectors like telecommunications, information technology, energy, power, retail, textiles, infrastructure services, capital markets, and logistics.

    Dhirubhai courted controversy all throughout his life. Many a times, he has been accused of unethical business practices and has been accused of having manipulated government policies to suit his own needs. He was involved in an open spat with Nusli Wadia of Bombay Dyeing. The end to this tussle came only after Dhirubhai Ambani suffered a stroke. While Dhirubhai Ambani was recovering in San Diego, his sons Mukesh Ambani and Anil Ambani managed the affairs. The Indian Express had turned the guns against Reliance and was directly blaming the government for not doing enough to penalize Reliance Industries. The battle between Wadia – Goenka and the Ambanis took a new direction and became a national crisis. Gurumurthy and another journalist, Mulgaokar consorted with President Giani Zail Singh and ghost-wrote a hostile letter to the Prime Minister on his behalf. The Indian Express published a draft of the President’s letter as a scoop, not realizing that Zail Singh had made changes to the letter before sending it to Rajiv Gandhi. Ambani had won the battle at this point. Now, while the tussle was directly between the Prime Minister Rajiv Gandhi and Ramnath Goenka, Ambani made a quiet exit. The government then raided the Express guest house in Delhi’s Sunder Nagar and found the original draft with corrections in Mulgaokar’s handwriting. By 1988-89, Rajiv’s government retaliated with a series of prosecutions against the Indian Express. Even then, Goenka retained his iconic stature because, to many people, he seemed to be replaying his heroic defiance during the Emergency regime.

    Dhirubhai Ambani won many words and accolades during his life. In November 2000, he was conferred the ‘Man of the Century’ award by Chemtech Foundation and Chemical Engineering World for his contribution to the growth and development of the chemical industry in India. In June 1998, he was awarded the Dean’s Medal by The Wharton School, University of Pennsylvania, for setting an outstanding example of leadership. Dhirubhai Ambani was also named the “Man of 20th Century” by the Federation of Indian Chambers of Commerce and Industry (FICCI).

    Dhirubhai Ambani suffered a “brain stroke: on June 24, 2002 and was admitted to the Breach Candy Hospital in Mumbai. He had suffered another stroke in February 1986 which had paralyzed his right hand. He passed away on July 6, 2002. On Dhirubhai Ambani’s first death anniversary, the Union Government released a postage stamp in his memory.

    Get to know about some more Indian Businessmen
    Mukesh Ambani Ghanshyam Das Birla Arun Sarin Amar Bose Azim Premji Sunil Bharti Mittal Dhirubhai Ambani Lakshmi Niwas Mittal J.R.D. Tata Ratan Tata Swaraj Paul Kiran Mozumdar Shaw

    ABHIHEK TIWARI

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  • surendra kumar shuklabhramar5 says:

    आदरणीय यशवंत जी -आप के ब्लॉग -पोस्ट -मंच पर आकर बहुत ख़ुशी हुयी सराहनीय योगदान आप का सब को एक साथ एक मंच पर लाने का -बहुत सुन्दर लेख व् रचनाएँ संग्रहित दिखीं -हम भी कदम बढ़ाये हैं कुछ दूर चलने को आप सब के साथ –समर्थन और सुझाव देते रहें -धन्यवाद
    ढेर सारी शुभ कामनाएं आप को —

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