दिल्ली में वो चार ‘लड़कीबाज पत्रकार’ कौन हैं?

फेसबुक पर अजीत अंजुम

अजीत अंजुम ने अभी-अभी स्पष्ट किया है कि ये चार ‘लड़कीबाज’ लोग संपादक स्तर के नहीं हैं, पत्रकार हैं और न्यूज चैनलों में मध्यम स्तर पर कार्यरत हैं. अजीत अंजुम का कहना है कि ‘लड़कीबाज संपादक’ शब्द लिखे जाने से ऐसा प्रतीत हो रहा है कि कास्टिंग काउच के आरोपी एडिटर रैंक के हैं जबकि ऐसा है नहीं. अजीत अंजुम के मुताबिक वे फेसबुक पर भी अपने स्टेटस में यह अपडेट डालने जा रहे हैं कि लड़की ने जो नाम बताए हैं, वे नाम संपादक स्तर के लोगों के नहीं है. वे मध्यम स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों के नाम हैं. अजीत अंजुम द्वारा नई जानकारी देने के बाद अब इस खबर के शीर्षक में ‘लड़कीबाज संपादक’ हटाकर उसकी जगह ‘लड़कीबाज पत्रकार’ लिखा जा रहा है. -एडिटर

फेसबुक पर न्यूज24 के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम का दरबार जारी है. आजकल वो मुंबई में बैठकर दरबार लगा रहे हैं. दिल्ली और न्यूज24 से काफी दिनों से कटे हुए हैं. कंपनी के दूसरे ढेरों कामों में तल्लीन हैं. वे दिल्ली रहें या मुंबई, पटना रहें या पोरबंदर, पर फेसबुक पर उनकी सक्रिय मौजूदगी हमेशा एक समान रहती है. नेट की दुनिया में सशरीर कहीं होना मायने नहीं रखता. नेट पर आपकी शख्सियत बिना शरीर वाले अदृश्य ‘भूत’ सरीखी होती है. नेट पर अदृश्य मौजूदगी की दस्तक दूसरे अदृश्य ‘भूतों’ तक पहुंच ही जाया करती है. कुछ घंटों पहले अजीत अंजुम ने मुंबई प्रवास के अपने एक अनुभव के बारे में फेसबुक पर लिखा-

Ajit Anjum : हमारे मुंबई दफ्तर में एक लड़की मुझसे मिलने आई थी. उसकी बातें सुनकर मेरे होश गुम हैं. मास कम्युनिकेशन का कोर्स करने के बाद उस लड़की ने दिल्ली के कई संस्थानों में नौकरी के लिए चक्कर लगाया. तीन चार ऐसे लोगों से उसका सामना हुआ कि उसने दिल्ली में नौकरी न करने का फैसला किया. उसने उन लोगों के नाम भी मुझे बताए. मीडिया में कास्टिंग काउच. जिनके नाम बताए, उनमें से दो की कहानियां पहले भी सुन चुका हूं.

अजीत अंजुम का इतना लिखना था कि कमेंट करने वालों की मानो लाइन लग गई. ऐसे विषयों पर नैतिक बनने, सिद्धांत बघारने, सलाह देने और इसे शोचनीय-चिंतनीय-निंदनीय बताने वालों की बाढ़ आ गई. अभी तक अजीत अंजुम के इस विचार पर 136 लोगों ने अपना-अपना अदृश्य मुंह खोला है. आखिर मामला सेक्स से जो जुड़ा है.

सेक्स है तो हमारे समाज व इसके लोगों का मुंह खुला का खुला रह ही जाता है. दरअसल हम लोगों का माइंडसेट जमाने से ऐसा ही है. सेक्स ऐसा सब्जेक्ट है जिसकी जिस तरह से भी चर्चा कर दी जाए, लोगों में कौतुक, रहस्य व उन्माद पैदा हो जाता है. लोग सब कुछ जान लेने को आतुर हो जाते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सेक्स लोगों के जीवन से गायब है. है भी तो बहुत घटिया, स्थूल, रहस्यमय और अबूझ रूप में. दिमाग, सोच व जीवन से सदियों से बाहर खदेड़ दिए गए, प्रतिबंधित किए गए, गैर कानूनी व असामाजिक घोषित किए जा चुके सेक्स की जरूरत हर व्यक्ति के जीवन में हर रोज उतनी ही होती है जितना रोज-रोज भोजन करना या अन्य दैनिक आधारभूत क्रियाकलाप के साथ जीना. पर हम सभी ऐसा प्रदर्शित करते हैं कि सेक्स से हमारा दूर-दूर तक कोई नाता नहीं है. हम सेक्स पर बात नहीं करते. हम सेक्स के अनुभवों को शेयर नहीं करते. अगर कोई अनुभवों को सभ्य तरीके से शेयर करता है तो उसे हम पोर्नो मान गालियां देने में देरी नहीं लगाते. हम सेक्स के दर्शन पर लिखते-पढ़ते नहीं. सेक्स शब्द लिखने, बोलने, कहने से बचते हैं. लेकिन सार्वजनिक तौर पर जिसके होने से हम इनकार करते हैं, निजी तौर पर हम उसी के लिए चिंतित रहते हैं, उसी को पाने-जीने की कोशिश करते हैं.

मनोवैज्ञानिक फ्रायड पर भरोसा करें तो अपोजिट सेक्स के व्यक्ति के सामने होने पर हम उसके सेक्स के बारे में किसी न किसी रूप में जरूर सोचते हैं. यहां ‘किसी न किसी रूप में’ का मतलब ‘किसी न किसी रूप में’ ही है. पहनावा, पारिवारिक जीवन, जीवन साथी, व्यक्तित्व, व्यक्तित्व के आकर्षक बिंदु, खुशबू, अंदाज, नैन-नक्श, बातचीत का तरीका, सहजता-सरलता… आदि के बारे में सोचते हुए हम सेक्स की तरफ सोचने लगते हैं. सेक्स का स्थूल अर्थ एक दूसरे के साथ हमबिस्तर होना होता है और है भी यही लेकिन सेक्स दरअसल सही कहा जाए तो अपोजिट सेक्स का साथ है. अपोजिट सेक्स के प्रति आकर्षण और इसका इजहार, उसके साथ वक्त बिताने की इच्छा, उससे बात करने की तमन्ना… बेहद सहज-सरल मानवीय इच्छाएं हैं. इनमें कोई स्वार्थ नहीं है. स्वार्थ है तो इतना कि आप मेल हैं और सुंदर फीमेल का साथ आपको अच्छा लगता है या आप फीमेल हैं तो सुंदर मेल का साथ आपको अच्छा लगता है.

मीडिया में काम कर रहे एक वरिष्ठ पत्रकार नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहते हैं- ”अपोजिट सेक्स के साथ रहने-होने की इन निःस्वार्थ इच्छाओं में स्वार्थ भी घुस जाए तो किसे क्या फरक पड़ता है जब तक कि कोई जोर-जबरदस्ती न हो. जोर-जबरदस्ती किसी भी पक्ष की तरह से हो, वह गलत है क्योंकि यहां भी बात निजता की है, व्यक्ति की निजी आजादी का है. पर अगर दोनों पक्ष सहमत हैं और वे अपनी सहमति का सार्वजनिक नुमाइश नहीं कर रहे हैं तो उनके पीछे क्यों पड़ना चाहिए? पैसे वाली महिलाएं सैकड़ों पेड ब्वायफ्रेंड रखती हैं, पैसे वाले पुरुष सैकड़ों पेड गर्ल्स (उर्फ कालगर्ल्स) के साथ जुड़े होते हैं लेकिन इनकी चर्चा इसलिए नहीं होती क्योंकि ये समाज के वे एलीट लोग होते हैं जिनके लिए नैतिकता व नियम-कानून कोई मायने नहीं रखते बल्कि दूसरे शब्दों में सिस्टम इनके भोग-विलास व जीवन व्यापार को स्मूथ चलते देने रहने के लिए काम करता लगता है. देश के ब्यूरोक्रेट्स, नेता, उद्योपति… इनके निजी जीवन की जासूसी कराके देखिए. सेक्स को विराटता के साथ ये जीते हैं. चूंकि इन्हें इसी जड़ मानसिकता वाले भावुक हिंदी भाषी समाज में रहना है सो अपने किस्से-कर्म को बेहद गुप्त रखते हैं.

इनका सार्वजनिक जीवन बेहद पवित्र दिखता है और हम उसी के आधार पर उन्हें नेक, भला, जांबाज जाने क्या क्या मान लेते हैं. पर अपने निजी जीवन में ये बेहद खुले होते हैं. किस पुरुष उद्यमी के जीवन में (अपवादों को छोड़) दर्जनों लड़कियां नहीं हैं! वे दर्जनों लड़कियां इसलिए नहीं बोलतीं क्योंकि वे उद्यमी द्वारा ओबलाइज की जा चुकी होती हैं. पर अगर उसी उद्यमी के इंप्लाई के जीवन में कोई एक लड़की आ जाए और वह बेचारा उसे ओब्लाइज न कर पाए तो वह लड़की तूफान खड़ा कर सकती है, माया मिली न राम के अंदाज में. कुछ न कुछ तो सबको मिलना चाहिए. हमारे पुरुष प्रधान समाज में पुरुष मुक्त है, उन्मुक्त है, इसलिए सेक्सुवली वह कीमती नहीं है. परदे में रखने की परंपरा स्त्री को है, नैतिक बने रहने की आकांक्षा समाज स्त्री से ज्यादा करता है इसलिए सेक्सुवली स्त्री ज्यादा महत्वपूर्ण है. अगर स्त्री कुछ कहती है तो मान लिया जाता है कि वह पवित्र गाय सच में सही बोल रही है. पुरुष जो कहेगा-करेगा, यह माना जाएगा कि यह तो कामुक सांड़ है और इसने जरूर कोई हरकत की होगी. कल की पवित्र स्त्रियां आज अब कामुक मादाओं में तब्दील हो रही हैं. इस तब्दीली को अब घर परिवार स्वीकारने लगा है. ये बात बड़े शहरों तक में हैं. मादा पक्ष में पहनावे और चाल-चलन में अगर सेक्सुवलटी का पक्ष उभार पर हो तो हम लोगों को अब कोई दिक्कत नहीं होती. बाजार यही चाहता है.

मार्केट इकोनामी में कुछ भी ढंका छुपा नहीं है. सब खुला है. तो देह भी खुलेगा. सेक्स भी खुलेगा. पर समाज इसकी इजाजत नहीं देता. वह बंद रखना चाहता है. वह नैतिक बने रहने का आग्रह करता है. निजी तौर पर हम सेक्सुवली चाहे जितने अराजक हो जाएं लेकिन एक परिवार के मुखिया के तौर पर जब सोचते हैं तो इच्छा करते हैं कि परिवार के बाकी लोग सेक्सुवली नियंत्रित व नैतिक हों. यह सदिच्छा सदियों की उस जड़ सोच की उपज है कि सेक्स सिर्फ बच्चे पैदा करने जैसा कोई कर्म है या सेक्स कोई घटिया काम है या सेक्स अदर्शनीय-अकथनीय क्रिया है या सेक्स चोरी-छुपे अंधेरी रात में घटित होने वाला कोई तंत्र है…. बाजार उसी द्वंद्व को मजा ले रहा है. बाजारवादी इसी द्वंद्व पर पैसे बना रहे हैं. पोर्नो का इतनी बड़ी इंडस्ट्री इसलिए चल पा रही है क्योंकि सेक्स को लेकर बाजार व समाज दो एक्सट्रीम हैं, दो छोर है और हम इन दोनों छोरों में भुखाए दौड़ रहे हैं, गलत-सही, गलत-सही बतियाए जा रहे हैं.

जब हर काम के पीछे मंशा पैसे बनाना हो, तो कोई पैसे बनाने के लिए हर काम करे तो क्या गलत है? गलत उन लोगों को जरूर लगेगा जो नैतिक हैं, परिवार व समाज जैसी संस्था को जीते रहे हैं. अनैतिक उन्हें नहीं लगेगा जो पैसे वाले हैं, जो बाजार के खिलाड़ी हैं, जो एलीट हैं, जिनके जीवन में समाज व परिवार कभी एजेंडे में नहीं रहा हो. जिनके जीवन में कभी सिद्धांत व समाज जैसे शब्द आए ही न हों. ध्यान दें. हर काम के पीछे मंशा पैसे बनाना हो… मतलब, कई बार लोग नैतिक काम करते दिखते हैं लेकिन उसका मकसद सत्ता हासिल करना होता है, यश हासिल करना होता है, यश के जरिए पैसा हासिल करना होता है, यश के जरिए हुई मार्केटिंग के सहारे ब्रांड क्रिएट करना हो और ब्रांड के जरिए पैसा बनाना हो…. गहराई से देखिए,

अंततः सारी तरह की नैतिकता, कर्म, प्रवचन, भाषण, व्यापार, बाजार दर्शन, उद्यम, बदलाव, विकास की नदियां आखिर में जाकर पैसे रूपी समुद्र में गिरती हैं और वहीं से मोक्ष को पाती हैं, तृप्त हो जाती हैं, अशांत कामनाओं का नाश कर लेती हैं तो बाजार के इस दर्शन में देह पर नियंत्रण की बहस सार्थक कैसे है. देह स्त्री का है, देह पुरुष का है. एक देह अगर दूसरे देह का हिसाब लगाता है, उसका मूल्य लगाता है, उसका दीर्घकालिक हित समझाता है और बदले में देह की मांग करता है तो यह व्यापार विनिमय भले हमें अनैतिक लगे लेकिन बाजार की नजरों में कई अनैतिक नहीं है. बाजार की नैतिकता यही है कि चाहे जिस भी चीज के सहारे कमा लिए गए लाभ को नैतिकता कहते हैं. साधन महत्वपूर्ण नहीं है. साध्य पूरा होना चाहिए. साधन की पवित्रता का दर्शन जाने कब का बेमानी हो चुका है. हमारे समाज में ऐसी संख्या बहुमत में आज भी है, कल भी रहेगी और परसों भी रहेगी जो नैतिकता की बात करेगी, जो सेक्स की नैतिकता-अनैतिकता को जीवन-मरण का प्रश्न बना लेगी, जो आचरण की पवित्रता के आधार पर अपने हीरो को तय करेगी….  ऐसा इसलिए क्योंकि यही क्लास असली कंज्यूमर है. बाजार का कंज्यूमर. बाजार रूपी राजा का प्रजा. बाजारवादी सत्ता के वंचित जन.

अगर सभी बाजारवादी हो जाएं तो बाजार व्यवस्था के चूलें हिल जाएंगी. फिर उपभोक्ता कौन रहेगा. सभी लोग सभी कुछ बेचने के लिए तैयार रहेंगे तो खरीदार कौन होगा. तब दुनिया से बाजार व्यवस्था गायब होने का खतरा पैदा हो जाएगा. तब समाजवाद व सामूहिकता की बातें होने लगेंगी. शायद वो दौर भी आएगा लेकिन अभी वक्त है. ज्यादा नहीं, छह पीढ़ियों का और वक्त है. लगभग ढाई तीन सौ साल का. तब तक तो बाजार के लोगों के नियम अलग व समाज के लोगों के नियम अलग होंगे. इन नियमों की फांस में जिसकी गर्दन फंस गई उसे समाज गरियायेगा, बाजार लुभाएगा. जिसने अपनी गर्दन नहीं फंसाई वह कमजोर बना रहेगा क्योंकि वह मात्र कंज्यूमर रहेगा और कंज्यूमर के इंट्रेस्ट की कभी रक्षा की ही नहीं जा सकती क्योंकि कंज्यूमर से मुनाफा वसूला जाना नैतिक नियम हो तो कोई उसे लूट ले तो कहां अनैतिक होता है.

अजीत अंजुम ने मीडिया में कास्टिंग काउच की जो बात कही है, वह इसलिए है क्योंकि मीडिया में लाभ है. मीडिया में आने वालों को अच्छा लाभ मिलता है. वे सेलिब्रिटी बन जाते हैं. वे बाजार के दुलारे हो जाते हैं. वे सिस्टम के सम्मानीय हिस्से हो जाते हैं. वे ऐशो-आराम में जीने लायक हो जाते हैं. अगर इतने सारे लाभ किसी को मीडिया में आने से मिलता हो तो मीडिया में आने वाले गेट पर बैठे इंस्पेक्ट रूपी संपादक अगर इंट्री के बदले कोई फीस मांगते हैं तो उसे कैसे बुरा कहा जा सकता है क्योंकि वे इतने सारे लाभ देने वाले दरवाजे में घुसने के लिए लगी लाइन में से किसी एक को अंदर आने का मौका देते हैं व बदले में कुछ चाहते हैं तो गलत कैसे है? बाजार तो यही कहता है न कि कुछ तुम दो तो कुछ मैं दूं. अगर बाजार के हितों की रक्षा में न्यूज चैनल, मीडिया हाउस, अखबार, सत्ता आदि कार्य कर रहे हों तो बाजार के नियमों को कैसे गलत ठहरा सकते हैं.

लाख हल्ला गुल्ला किया गया कि टैम की टीआरपी के हिसाब से कार्यक्रम नहीं बनने चाहिए या मीडिया का मतलब विज्ञापनदाता की इच्छा अनुरूप बनाए गए प्रोग्राम नहीं होते लेकिन इसका असर न्यूज चैनलों पर नहीं पड़ा क्योंकि न्यूज चैनल इसलिए शुरू ही नहीं किए गए हैं कि समाज की बुराइयों के खिलाफ अभियान चलाया जा सके या समाज के गरीब लोगों की चेतना को उन्नत किया जा सके ताकि वे समझदार व उन्नत चेतना वालों के साथ कंधे से कंधा मिला कर चल सकें व ढेर सारे आदिम दुगुर्णों से मुक्त हो सकें. ये चैनल बिजनेस के उद्देश्य से लाए गए हैं. वे मुनाफा कमाने के लिए खोले गए हैं. इसीलिए चैनलों में आपस में मार मची होती है कि ज्यादा से ज्यादा टीआरपी लाओ. ज्यादा टीआरपी लाने के चक्कर में अच्छे संपादक बाहर होते जा रहे हैं व मीडियाकर किस्म के लोग संपादक बनते जा रहे हैं. मीडियाकर किस्म के लोगों को पता होता है कि टीआरपी न्यूज दिखाने से नहीं आती, ड्रामा क्रिएट करने व इसे सबसे ड्रामेबाज तरीके से एक्सक्लूसिवली पेश करने से मिलती है.

तो हमारी आपकी नजर में जो ये मीडियाकर लोग हैं वे सही मायने में बाजार के हीरो हैं. हम आप समाज की नजरों में भले विद्वान व आदर्श पुरुष हों पर बाजार की नजरों में एक घटिया व आउटडेटेड बुद्धिजीवी से ज्यादा नहीं. एक ऐसे समय में जब पैसा ही माई-बाप बना हुआ हो, जिन्हें पैसा नहीं मिला वे पैसे के लिए लड़ रहे हैं, जिनके पास है वह उसे बचाने व बढ़ाने के लिए जुटे हुए हैं, जो इससे बिलकुल वंचित हैं वे इसे जबरन हासिल करने के लिए बंदूक-लाठी लेकर सिर पर वार कर रहे हों…. तब कास्टिंग काउच जैसी चीज कोई अप्रत्याशित नहीं है. अप्रत्याशित है तो सिर्फ यह कि बाजारवाद के अति सक्रिय विस्तार के दौर में सेक्स अब भी दुविधा की चीज है. सेक्स अब भी बेहद पठनीय व सनसनीखेज विषय बना हुआ है. फर्जी नैतिकतावादियों से भरे इस देश में रिश्वत व देह चुपचाप लेने का चलन है. आदमी से रिश्वत लो, महिला से देह. लेना वाला अगर महिला हुई तो वो महिला से रिश्वत ले सकती है और किसी आदमी से देह. कई बार लोग अच्छी खासी मुद्रा रिश्वत लेने की जगह देह मांग लेते हैं. मिडिल क्लास, जो बातचीत व सामूहिक दर्शन में तो बेहद नैतिक होता है लेकिन लाभ दिखते ही अनैतिक बनने में सेकेंड भर का देर नहीं लगाता, इस समय का सबसे ड्रामेबाज जीव है. वह एक साथ बाजार व नैतिकता दोनों जी रहा है. जहां जिसकी गोटी फिट हो जाए.

इस मिडिल क्लास से कोई उम्मीद भी नहीं करना चाहिए क्योंकि मिडिल क्लास सुखों का लालची हो गया है और सुखों को बढ़ाना चाहता है पर सुख नहीं बढ़ने पर वह क्रांति की बातें करना लगता है और ज्योंही उसके हित सध जाते हैं, वह बाजार की भाषा बोलने लगता है. जो लोग हाशिए पर हैं, वे भी विकास के दायरे में आते ही उपभोक्तावादी बन जाते हैं और बेहतर खाना, बेहतर जीवन स्तर, बेहतर पहनावा, बेहतर रहन-सहन के आगोश में नए इंद्रियजन्य सुखों की ओर उन्मुख हो जाते हैं. बाजार व बाजारवादी आका भी यही चाहते हैं कि कोई बाजार की बुराइयों के बारे में सोचने लायक कोई रह ही न जाए, कोई स्वस्थ विचार पैदा ही न हो पाए इसलिए सबको इंद्रिजन्य भोग-उपभोग में फंसा दो और इसी को जीवन जीने का अंतिम लक्ष्य बना दो. इसीलिए ढेर सारे कपल पूरे जीवन सेक्स व समृद्धि को ही जीवन जीने का लक्ष्य मानकर जीते रहते हैं. बड़े शहरों के मालों में खाए-अघाए और सेक्स के लिए पगलाए लोगों की भीड़ दिख जाएगी. इन्हें किसी विचार या विचारधारा से कोई मतलब नहीं. बाजार विचार को ही खत्म कर देता है. शरीर से उपर नहीं उठने देता. अच्छा खाना, अच्छा सेक्स, तरह-तरह का खाना, तरह तरह के सेक्स, अच्छा पहनना, तरह-तरह के कपड़े, अच्छी नींद, तरह-तरह के सपने, अच्छा परिवार, तरह-तरह के परिजन, अच्छी कमाई, तरह-तरह के धंधों से कमाई.

पूछिए जरा उस मजूर से.  सुबह से शाम तक दूसरे के खेतों में मजूरी करती लड़की कब जवान हुई व कब झुलस गई, उसे व उसके पति को पता ही नहीं चला. सेक्स न तो दोनों की सोच में रह गया और न जीवन में. कड़ी धूप में दिन भर ईंट-गारा या कटाई-बुवाई-निराई-गुड़ाई करने के बाद रात में खाते ही चिंताओं-तनावों को दगा दे कब नींद के आगोश में लुढ़क जाते हैं, इन्हें पता ही नहीं. लेकिन हम मिडिल क्लास लोग एंयर कंडीशनों में कूल होते अपने सिर-खोपड़ी से नानवेज-एल्कोलहल के हैंगओवर में उन्मादित हो रहे शरीर तक जाने किस किस तरह के संदेश भेजते रिसीव करते रहते हैं और अंततः उपयुक्त समय-अवसर देख आइडिया को इंप्लीमेंट कर देते हैं.

जो पकड़े नहीं जाते वे अच्छे ‘मैनेजर’ साबित होते हैं. और जो पकड़ गए वे बेचारे ‘चोर’.

अजीत अंजुम ने एक लड़की के कहने पर ‘चार चोरों’ को पकड़ लिया है लेकिन सही कहा जाए तो वे चारों ‘निर्दोष चोर’ हैं. छुटभैय्ये चोर हैं जिन्हें चोरी करने का सलीका नहीं पता बल्कि ये यूं ही चलते-फिरते वक्त किसी की पाकेट में हाथ डालकर पैसे निकाल लेने की हड़बड़ी भरी बालोचित तमन्ना पाले रहते हैं (इन छुटभैय्ये चोरों की लिस्ट में मुझे हर हाल में मानिए).

पूछिए उन चोरों से जो दरअसल चोरी करने निकलते ही नहीं और शाम तक अच्छा खासा माल उनके पास पहुंच जाता है. पूछिए कास्टिंग काउच के असली सौदागरों से. उन तक लड़की पहुंचते-पहुंचते हिप्पोनेटाइज हो जाया करती है और खुद कपड़े उतारकर अपने को परोस देती है और खुशी-खुशी लौट जाती हैं, जल्द ही फिर से इस ‘त्वरित अदभुत अनुभवों की रहस्यमय दुनिया’ में लौटने का वादा करके.

चलिए, पढ़ते हैं कि अजीत अंजुम के फेसबुकी विचार पर किन लोगों ने क्या-क्या प्रतिक्रियाएं दी हैं….


Anu Chauhan : mai cooment karungi sabse pahle kyuki ye positive hai.

Deepak Sharma : very bad.

Ramesh Singh : tajjub hai

Ajit Anjum : चार साल पहले ऐसी ही एक लड़की मुझे दिल्ली दफ्तर में मिली थी . उसी की कहानी सुनकर मैंने हंस के कहानी विशेषांक की योजना बनाई थी . वो लड़की तीन दफ्तर में घूम चुकी थी और घंटों मेरे पास रोई थी . उसकी कहानी आज मुझे मुंबई की इस लड़की से मिलती -जुलती सी लगी . क्या ऐसे लोग हमारे बीच हैं …

Shubhomoy Sikdar : Tajjub ki kya baat. Infotainment industry mein casting couch koi nai baat nahi hai.

Anu Chauhan : media ka ye sacha hai maine apni pahli do job isliye hi chodi…magar mai tab tak koi job nai chodti jab tak ki us person ki sachai sabke samne na aa jaye ..meri pahli job me mere senior ko nikal diya gaya or dusri job me maine apne boss ke muh par file markar uski haqikat pure office ke samne samne laai……

Ronny Khan : sir yeh baat sun kar ab to kuch azeeb sa bhi nahi lagta… media may aise baate aksar sunne ko milti rehti hai..

Rahul Tripathi : pata nahi sir sach kya ho..ho skata hai yah sirf arop ho

Ajit Anjum : बहुत देर से उस शख्स का चेहरा मेरी आंखों के सामने था , जिसके बारे में वो लड़की बता रही थी . नौकरी की तलाश में भटक रही किसी लड़की से कोई इस हद तक बात कर सकता है , मैं यकींन नहीं कर पा रहा था . लेकिन वो सौ फीसदी सच कर रही थी , इसके सबूत भी उसके पास थे .

Rahul Tripathi : or ho sakta hai …kadva sach ho ….kuch bhee ho sakta hai !

Sumit Nagpal : I know a girl who faces this every other day because she is a freelancer… So many “casting couch” type people r there in every office…

Deepak Sharma : aisa kahin bhi ho sakta hai ,sawal mansikta ka hai . aur agar media mass com students aisa bardasht karenge to patrkarita ka siddhant lupt ho jayega .

Thakur Vishal : yes ofcorse sir

now they are hunting upcumin1s this is so bad 4 our profession. we hav 2 think deeply abt this otherwise evry1 knows da future

Sudesh Srivastava : अजित जी वाक़ई shocking है. ऐसोँ को expose करने की ज़रूरत है. एक स्टिँग के बारे मेँ क्या ख़याल है? ऐसा तो नहीँ कि मीडिया अपनी काली भेड़ोँ को चीन्हने से परहेज करता है या सकुचाता / घबराता है?

Ajit Anjum : अनु जी, मैंने भी इस लड़की को यही कहा कि तुमने उसे एक्सपोज क्यों नहीं किया . काश , लड़कियां अगर ये तय कर ले कि ऐसे लोगों को एक्सपोज किया जाए तो एक डर तो उनके मन में रहेगा …

Adarsh Kumar Inqalab : यह बेहद नकारात्मक स्थिति है।

Alok Kumar : सबूत चाहिए तो ई-मेल बताइए

Ajit Anjum : वैसे होता तो ये दुनिया के हर क्षेत्र में है . हर जगह ऐसे लोग मौजूद हैं . मीडिया में भी हैं .

Raj Sharma : मीडिया में कास्टिंग काउच……ये तो होता है और होता रहेगा ? जहा ग्लामर है वह काउच तो होगा ही क्योकि जिस दफ्तर के केबिन मैं कुर्शी के साथ काउच भी होगा और अगर वह अजित अंजुम हुए तो कुछ नहीं होंगा और अगर ———– होगा तो कास्टिंग काउच पर तो क्या कही भी होंगा ?

Anuranjan Jha : अजीत जी.. “क्या ऐसे लोग हमारे बीच हैं” .. की जगह ये लिखना चाहिए कि हमारे ही बीच ऐसे लोग हैं। कास्टिंग काउच फिल्म नगरी से ज्यादा मीडिया में है। पिछले कई सालों में कई लड़कियां हमसे भी ये शिकायत कर चुकी हैं। बहुत कंट्रोल कर रहा हूं उंगलियां नाम लिखना चाहती हैं। आप उपाय बताइए इससे कैसे इस पेशे को निजात दिलाई जाए।

Sudesh Srivastava : @ अनु: काबिले तारीफ़ हिम्मत दिखाई आपने। These people should be exposed publicly!

Soumit Mohan : ladkioo see meela toh sahi…ladko se toh log milte hee nahi…

Anu Chauhan : mujhe ab koi ladki jab kahti hai to mai usko ye kahti hu usko sabke samne marna chaiye tha..aise log job nai bas bachcho ko use karte hai…mai aapko bata nai sakti us magazine ke malik ne apne cabin me bula kar kya baate ki…jab mujhe gussa gaya to maine apni file uske muh par mari..or uski ache se utarii…vo dar gaya or bahar aakar apne pa se … See morebola isse kisi se baat mat kar ne do ye job chod rahi hai….but maine pure off ko bataya ki vo kaisa banda hai.. but harain tab hui jab ek mahila ne kaha ki anu ji yaha ki sachai aap bahar kisi se mat kahiyega…. man hua us mahila ke hi di laga du…

Om Prakash Pandey : even i have also recommended one of my known to one of gentleman(who is at present in Delhi in a news channel working as political editor and his office is situated at CP….he is nephew of a well known media personality(late)…..though girl went with reference of ours…again he asked for extra favours…..and that BASTARD is still there…will expose him very soon as we are preparing a story on him.

Santosh Kumar : ताज्जुब आपके होश उड़ने पर नहीं, हैरानी इस पर कि आपको इस कड़ुवे सच की जानकारी इतनी देर में हुइ…..

Ajit Anjum : जी नहीं , संतोष जी मैं सुनता तो रहता हूं .कई बार सुनी -सुनाई बातें भी होती हैं . कई बार दो लोगों का निजी रिश्ता भी हो सकता है लेकिन आज लड़की ने ऐसे दो लोगों के बारे में बताया , जिन्हें मैं और मेरे जैसे बहुत से लोग जानते हैं . नौकरी मांगने गई लड़की से पहली बार में भी ये सज्जन मिले और जिस तरह से बातें की , फिर उसे फोन करके परेशान करते रहे , हैरानी हो रही है .

Gurminder Singh : shame on these type of people

Saurabh Sengupta : Ajit jee…dhire dhire main apka kayal hone laga hoon…aap kuch sensible batein karte hain….waise ye toh batayiye ki qualification…experience aur knowledge hone k bavjood bhi jin logon k sath aisa ho raha hai use kya karna chahiye…

Anu Chauhan : but sawal ye hai ye gandgi aids ki tarah falti ja rahi hai or ise kaise roka jaye??? kisi ke pass iska solution hai to batayega?????

Om Prakash Pandey : @Ajit, Ji kahin ye vohi sajjjan to nahee hai…jinke baare me mai kah raha hoon…….aaap samjh gaye honghe mera ishara kis or hai !!!!! unkee harakate bhi aisee hin rahee hai !!!

Anuranjan Jha : दोस्तों.. मैं तो इतना जानता हूं कि शोषण किसी का तभी हो सकता है जब वो शोषित होना चाहता है … किसी लड़की के साथ अगर कोई इंडिसेन्ट प्रपोजल रखता है तो वो लड़की उसका विरोध खुलेआम क्यों नहीं करती जैसा अनु चौहान ने अपनी कहानी में बताया। कुछ लड़कियां कहती हैं कि वो डरती हैं .. मेरा मानना है कि वो आगे बढ़ने के लिए कुछ भी करना चाहती हैं। हिम्मत होनी चाहिए खुलेआम विरोध होना चाहिए ।

Om Prakash Pandey : aaap keejiye expose…mai naam deta hoon aapko…khuleaaam yahin likhta hoon……..keejiye expose..!!!

Anu Chauhan : anuranjan ji, aapki baat sahi hai lekin jab bachche course karke aate hai to vo anjan hote hai or media me aise kaiya log baithe hai jo pahle in bachcho ko bahlate hai fir aisa mahol creat kar dete hai…mai kar dete hai ki jab vo bachche samjhte hai tab bhut der ho chuki hoti hai…aaj mere yaha ..or jaise ajit g ko naam pata hai lekin vo kudh unka naam yaha nai likhna chayenge..fir vo bachche to bhut chote hai……

Ajit Anjum : सरेआम चाटा मारने की दो -चार घटनाएं हो जाए , तो ऐसा करने वाले डरने जरूर लगेंगे . करियर बनाने के लिए संघर्ष कर रही लड़कियां डर जाती हैं और ऐसे लोगों का हौसला बुलंद होता जाता है . किसी से दोस्ती अपनी जगह है लेकिन नौकरी दिलाने के नाम या पर या प्रोमोशन दिलाने के नाम पर एक्सप्लाइटेशन करने वालों का अगर सार्वजनिक अभिनंदन होने लगे तो हालात कुछ सुधरेंगे जरूर . लेकिन इसका दूसरा पक्ष भी है अनु जी …

Vipin Choudhary : aese logo kee naam ujagar hone chaheye ajit jee taaki aage aur log aesa kartee hu so baar sochee.

Anuranjan Jha : अनु जी … माफ कीजिएगा … मास कम्यूनिकेशन का कोर्स करके मीडिया में आने वाला कोई भी इतना बच्चा नहीं होता कि उसे अपना भला बुरा समझ में नहीं आता हो। रही बात एक्सपोज करने की तो जिन संस्थानों को मैं लीड कर चुका हूं वहां भी शिकायतें आईं .. मैंने उनसे कहा – दो जोरदार थप्पड – मैं तुम्हारे साथ हूं… बावजूद इसके उनको हिम्मत नहीं हुई ये हिम्मत कौन पैदा करेगा।

Om Prakash Pandey : if it is mutually done …that i can understand….but job ke naam pe…promotion ke naaaame…to kataee sweekarya nahee kiya ja sakata hai..or mai jinkee baat kar raha hoon wo shaadee shuda..do bachho ke baap….or ek bahut hi naamee jo gujar chuke hai..industry aaaj bhi jinhe media me pita ka darja detee hai….ke bhateeje hai..or aisa kritya karte hain……

Anu Chauhan : mujhe laghta hai ki media course ek subject casting couch ka hona chaiye or usmne in looser logo ko hi lecture lene dene bhejna chaiye …ye khudh bata payenge ki un se kaise new generation ko bachaya jaye…..

Om Prakash Pandey : or unka bhi boycaat keejiye ..jinke baare me aapko khabar hai…wo aaapka channel join na kar paaayein…inka samjaaik bahishkaar hona jaroori hai…!!!!

Aadarsh Rathore : कास्टिंग काउच हर जगह है

Anu Chauhan : nai ajit g mera ye kahnne ka matlab nai tha… aapko us ladki ne jo naam bataye vo aapne yaha nai bataye. kya apko nai lagta ki aap galat logo ko bacha rahe hai?

Saurabh Dubey : kon see badi baat hai ye roj ki kahanee hai…

Durgesh Singh : jamane bhar ka wastage journalism mein aa raha hai…upar ki kursiyon pe aise log baithe huyein hain…to neeche ki halat gutter chhap hi hogi…ajit jee… hans ka poora visheshank maine padha tha..kai anubhav the…i…ab ajooba nahi lagta…

Anu Chauhan : lekin sawal ye bi hai aap se jo ladki mumbai me milne aai aapne use kya advise di???

Satish Mishra : mera mannna hai ki indino jitne bhi choote motte news channel hai,,, unsaab channel main ye khani ek aam si baat hai….aur rozana aaisa hota hai….

Rahul Singh : ager noukari mil jaati to baat saamne aati…..??????

Anuranjan Jha : ठीक कहते हैं आप सतीश जी .. अनप्रोफेशनल चैनलों ने ही सबसे ज्यादा कबाड़ा किया है।

Ronny Khan : aisa nahi hai.. aal bhi aise jimmedar channel hai jo… media may fail rahe virus ko time 2 par clear karte rehte hai.. magar aise channel kuch he hai..

Anu Chauhan : anuranjan g hamare yaha student intern ke liye aate hai..aap un se baat kijiye vo ye decide nai karpate hai ki kya sahi hai or kya galat…ye hi nai ek pro ladki ki nai nai job lagi vo ek feature editor ke pass gai or boli ki sir meri first job hai plz is se laga dijyega …..abhi vo gate tak hi gai thi ki us bande ka ph usko aaya or vo bola … See morerealse to lag jayegi but tumhare lips bhut aache hai agar ek kiss mil jaye to..chunki vo meri dost thi isliye mujhe us se pata chal gaya..or jis bande ne kaha thaki beti bhi us ladki se 10 badi hogi..sochiye…

kya kare ye media hai…yaha hamam me sab nange vali kahawat sahi baithti hai….

Saquib Ahmed : अब पहले वाली बात कहाँ रही…जितनी तेज़ी से न्यूज़ चैनल खुले है…पत्रकारिता का स्तर भी गिरता जा रहा है..ग्लैमर,पैसा और आगे दूसरों से आगे बढने की चाह ने युवाओं की सोच समझ पे पर्दा डाल दिया है. जिसका फायदा ऊंचे पदों पे अपना ईमान बेच कर बैठे कुछ लोग उठा रहें हैं..उन्हें शायद ये नहीं मालूम है की आज भी पैसे से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता…आज भी ऐसे लोग हैं जिनमे सच को सामने लाने की हिम्मत है…

Pankaj K. Choudhary : time for media persons to look in the crime. Media no longer provides solution, it has become the problem. It does not heel the wound, it inflicts upon us the wound

Ajit Anjum : yaha hamam me sab nange vali kahawat sahi baithti hai…. अनु जी . इस बात से मैं इत्तेफाक नहीं रखता . कुछ ऐसे लोगों की वजह से पूरी मीडिया को एक सा न समझें . यकींन मानिए , ऐसे गंदे लोग बेहत अल्पमत में होंगे .

Ravi Prakash : मीडिया में ऐसी घटनाओं का कोई स्थान नहीं होना चाहिए. लेकिन यह बात सौ फीसदी सच है. ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए. अजीत जी, आप भी इनके नाम सार्वजनिक कर दीजिये. ऐसे लोगों के नाम छुपाने का कोई निहितार्थ समझ नहीं आता. हाँ, इसका दूसरा पार्ट भी है. मॉस कॉम करके आने वाले इतने बच्चे नहीं होते क़ि उन्हें इसका अभाष नहीं हो.

Anu Chauhan : bilkul sahi kaha…aapne lekin vo editor shab aaj ek channel me hai…but isko roka kaise jaye….agit ji aap nai jante aapko to 1-2 lakiya hi mili hongi jinke sath hui hai ..ham har dusre din aisi ladkio ki pareshanya sunte hai…but mujhe lagta hai jis din ladkio ne sabke samne in logo ko thapad marne or job paane ka chota lalach chod diya us din ye khatam ho jayega…

Gopal Jha : मीडिया से लोग ज्यादा उम्मीद कर बैठे हैं, यह मीडियाकर्मियों के लिए गौरव की बात है लेकिन उम्मीदों पर खड़ा उतरना भी तो जरूरी है,,,लिहाजा ऐसी ख़बरें हमें आत्ममंथन के लिए प्रेरित करती हैं

Soumit Mohan : Sawal yeha casting couch ka nahi hai….koi kisi ke sath zaberdasti nahi karta lekin sabhi naukri mai ‘mutual understanding’ per kaam hota hai…media main top post per baithe hua devta log hee iiske leeye zimeedar hai…kisi main itna dum nahi hota ke merit wale ladko ya ladkio ko bula ker naukri de…agar aap kisi ko ‘jante’ hai toh hee aapse … See morebaat kee jati hai nahi to cv bhi log nahi dekhte…kya BAG ho ya phir ZEE…sabhi jagah yehi haal hai. News ya entertainment channel main itna dum hota hee nahi…hota toh naukri advertise karke naukri dee jati…yeha toh bhaiya aur babuji ki pairvi chalti hai….Solution toh neekalna padega…..MAKE COMPULSORY COMMON ENTERANCE WRITTEN TEST FOR NEWS CHANNELS….ON THE PATTERN OF CAT.

Ronny Khan : je bilkul thik kaha ajit sir aapne.. aur media ki bhi mazburi hai ki vo aise logo ko cha kar vhi expose nahi kar sakti…. kyuki mohalle may aag lagai to dhua apne ghar may bhi aayega..

Shagun Singhal Garg : one cannot generalize the whole media into one category… casting couch is a part of the whole industry.. there are good people and there aare bad people.. there are talented people who are not allowed to work..there are super loosers who are occupying positions of authority…women need to be stronger and should BE VOCAL ABOUT THEIR IDENTITY AND THEY DESERVE EVERY BIT OF THE RESPECT!

Shagun Sonis : ye bate bilkul such h mai student hu MBA (media & event mgt) ki mai ne training k liye kai sari media chanal me koshisha ki but uha un ka hi ji ka jogad ya fir ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,?

Anu Chauhan : ajit g aapka ye subject hamko aacha laga..pahle do subjec nari-purush ki jung lagi…. fir kisi issue par apne comment dungi….bye ..nd gud nyt..

Gireesh Pandey : लड़की को शोषण करना …कुर्सी पर बैठे लोगों के लिए आम बात बन गया है….अगर हर संस्थान में ऊपर बैठे लोग इस बात पर कड़क हो जाये और खुद भी अच्छा संदेश दे..तो समस्या खत्म हो जायेगी..ईमानदारी से आत्मा के अन्दर झाककर बोलिए सब जानते हैं इस कड़वी सच्चाई..लेकिन पहली बार अजीत सर ने पब्लिक फोरम पर इस बात को उठाया है..यह अजीत सर और उनके जैसे मीडिया गुरुओं को मि… See moreलकर इसके लिए अभियान चलाया जाना चाहिए…ताकि एक अच्छा माहौल तैयार हो…और हम अपनी बहनों और लड़कियों को भी बेहिचक मीडिया में भेज सकें..साथ ही ऐसी लड़कियों और पुरुष अधिकारियों जो इसको आम बनाते जा रहे हैं..उनका Morale down करना चाहिए…

Sundeep Sharma : ऐसा क्या सुना है…. आप ने???

Ashish Jain : सच में शर्मनाक है यह सब कुछ …..एक मशहूर दार्शनिक सिमोन द बोवा ने कहा था कि लड़की पैदा नहीं होती, बनाई जाती है। लोग उन्हें तरह-तरह से बनाते हैं,इसके बाद उनका काफी विरोध हुआ था ,पर अब धीरे-धीरे समझ आता है वो कही न कहीं तो सहीं थे , मैं समझ सकता हूँ .उस लड़की के दर्द को …..उस सिसकियों को आवाज़ जिन्हें सिर्फ वो सुन सकती है ,सर आप खुद सोचिये एक वक. के बाद यह बहस ख़त्म हो जायेगी, फिर कोई नया विषय होगा, लेकिन उसकी सुबकिया हमेशा जिंदा रहेंगी, उस के बाद क्या होगा ? यह तो हर जगह है….शायद सच है, की सुबकियों और सिसकियों को ताले जड़ लो… इसने झूठी दिलासाये मिलती है…… समझ नहीं आता की यहीं प्रोफेशनलिज्म तो नहीं… जिसने अपना घटिया रूप तैयार कर लिया है….. यह इंसानियत का सबसे घटिया स्तर है ,टूटते हुए सपनो को ढोना वास्तव में बहुत मुश्किल होता है , आँखों में आसूं तो उन लोगो के भी आये होंगे जिन्हें पहली बार एहसास हुआ होगा की खबर के धंधे में बहुत कुछ गन्दा है ,लेकिन हम कुछ नहीं कर सकते …………….

Jagriti Rajpoot : हिम्मत से सच कहो तो बुरा मानते हैं लोग , रो रो के बात कहने की आदत नहीं रही.. इन चंद शब्दों में साड़ी कहानी छुपी है …

Rahul Kumar : aaj halat yah hai ki agar ladka media me job karta hai to use reputed mana jata hai lekin ladkiya karti hai to use shak ki najar se dekha jata hai, kuchhek upar k post par baithe logo ne aisa mahol bana diya hai….jisse ye sub ab aam lagne laga hai….sawal tali ki nahi media aur usme aane wali mahilao ki asmitta ka hai….akhir ese kaise bachaya jaye….

Diben Singh : Kain baaten is taraha chhipi rahati hain ke paas raha kar bhi hum dekh nahi paate.visual media ka haal najdeek se dekhaneke baad mera TV dekhne ko bhi man nahi karataa hai ! Aap ko yaha sab kuchh bataya jaata to Aap yakeen nahi kar paate.Yakeen to ab bhi nahi ho raha hoga.

Rimmi Kashyap : ye koi nai baat nhi hai .. lakin a zrurt hai usse rokne ki wrna media mai bs aadmi he nzar aaynge..

Sarvesh Singh : बस तीन चार नहीं हैं, और भी कई हैं, जिनके सफेद चेहरे के पीछे सबकुछ काला है।

Satya Prakash Mishra : bahut jyada hai ..aur university ke professors bhi yahi kar rahe hain ajj kal ache no dene me aur PHD karane me nahi yakin hota tto jara sting kar ayiye har ke chamber me ab jamer laga huwa hai ..but aapka chanel karega nahi ..maalik hai na iska koi uuse koi na koi jugaad log bitha hee lenge

Rimmi Kashyap : sb sachai jaante hai bt koi b aage aakar isko khtm krne ki koshish nhi krta ..

Ajay K Sinha : i know few channels who are involve…………one og them is situated in the heart of capital city…..

Sandeep Sharma : Media Main Bhi Aisa hota hai………

Rimmi Kashyap : hummm..

Ajay K Sinha : Aisa kahan nahin hota hai

Bhopal Mtfc : nari ka samman karen

Paridhi Nigam : mujhe andaza toh tha…..aapki baat padhkar yakeen ho gaya Sir…….

Tanwir Alam : ye india hai yahan sab chalta hai…….ye dirty hum logon ki jammedary hai hatana

Pankaj K. Choudhary : media walo se logon ne ab umid karna chod diya hai

Ashwani Kumar : ye bahut hi khatarnaak samasya hai aise logon ki to band bja deni chahiye

Ajit Anjum : मैं जिस कंपनी में हूं , वहां के बारे में आप किसी भी लड़की से बात कर लें . वहां मैनेजमेंट की तरफ से लाउड एंड क्लीयर मैसेज है . अगर किसी ने किसी लड़की के के साथ कुछ भी ऐसा -वैसा किया, तो उसकी खैर नहीं. एक्सप्लाइटेशन तो दूर की बात है. मामूली शिकायतों पर हमने कई लोगों को मिनटों के भीतर नौकरी से निकाला है. सेरआम माफी मांगने के बाद भी बख्शा नहीं है. बीएजी और न्यूज 24 की किसी भी लड़की से पूछ लीजिए. उन्हें इस बात का अहसास है कि वो सुरक्षित हैं . जहां तक मेरे नाम जानने और न बताने की बात है तो अब ये बात पुरानी है. किसी लड़की के हवाले से मैं किसी का यूं ही नाम लिख दूं , ठीक नहीं होगा. मैं तो कहता हूं लड़कियों को आगे आना चाहिए. आज जिस लड़की ने मुझसे बात की वो बाद में काफी देर से अफसोस में रही कि मैंने उन दोनों को चांटा क्यों नहीं मारा, दिल्ली छोड़कर क्यों चली गयी….

Rajender Kumar Sharma : Ajit jee jo bo rahe hein woh kaatne ko taiyar rehana parega… naam to mein bhee nahin le sakta… lekin kal tak kuchh logon ko ek baap ke kisse kehate suna tha.. aaj wo hee log uske beti ke baatein chatkare lekar kar rahe hein…

Abyaz Khan : सर ये मसला बहुत पुराना है… मीडिया में काम करने वाले लोग उन लोगों के नाम भी जानते हैं, जो ऐसा करते हैं.. लेकिन सब अपनी नौकरियां बचाने के चक्कर में रहते हैं.. आप वाकई काबिले-तारीफ़ हैं.. कि आपने इस मसले को पब्लिक फोरम में उठाया है.. लेकिन आपकी बात बिल्कुल वाज़िब है.. कोई दो-चार झापड़ रसीद कर दे.. अगले दिन से ये कहानियां सुनने को फिर नहीं मिलेंगी…

Sajid Khan : sir kam se kaam inshaaron mai to bta hi dijyen un logo ke naam ..chaliyen naam mat batyen..kam se kam isharon mai un ke sasthanon ke naam hi bta dijyen…

Vimal Kumar : aap log jo kar rahe hai use itihas kabhi maaf nahi karega.

Aarushi Ana Singh : media ki loby hai agar aap loby mein shamil hain to hi aap noukari pa sakte hai chahe aap telented hain ya nahi hai , kyonki hamare media mein mouth publicity bahoot kaam aati hai , baat agar shoshan ki ho rahi hai to mahilaye kyon shoshit ho rahi hai aaj bhi media mein mahilaon ko wo jagah nahi di jaati jo jagah unhe milni chahiye , jab porosh … See morejob magne jate hai to unka shoshan kyon nahi kiya jata ,bahoot aasan hai is vishay par baat karna bahas karna par ise khatma karna bahoot mushkil . mahilaon ko unki jagah to deni chahiye par kitna waqt lag jayega ye kisiko maloom nahi

Rana Mallick : Anjum ji, Burai ka koi brand nahi hota, wo har jagah panap sakti hai, aur bure log har jagah ho sakte hai…

Sweta Kumari : Iska ek sbse bara karan hai “REFRENCE” ..kyuki jb koi achhe institute se study krta hai or uske paas abability hoti hai phir bhi use jald job nhi mil pati hai .. kuch log apna sayma kho dete hai..lekin is field me dheeraj or smjhdari dono honi chahiye…..

Ravish Shukla : sir yee pilpile aam hoten hai har jagah hai…lakin inke liye ek sare hai….jahniyat ko saaf rakho ladkiyan yon..bhi hansti bolti hai…

Ritesh Lakhi : Aur sub theek hai…debate bahut achhi chul rahi hai… lekin Ajit ji debate generate karne mein aap lamisaal hain…mubaarkbaad is baat ke liye ki ek commanding position pur hote huye aise issues ko public domain mein discuss karna ek chunauti hai… kyoonki chaahe unchaahe aap kai murtabaa auron ke numaayindgi karte hain…vo log theek bhi ho sakte hain aur galut bhi… but it is a healthy debate… i like it

Satish Kumar Mishra : aapko aashcharya hua kya????????????????????????? media ab dalali ka bhi kam karti hai aapko nahi pata???????????????? police public se leti hai aur media ke log police se

Rana Mallick : Anjum ji, aisa nahi hai ki sirf mediam me hi bahusankhyak log achhe hai, har field me bahusakhyak log achhe hi hote hai, aur badmash kam… farq sirf itna hota hai ki bahusakhyank achhe shant rah jate hai aur bahut thore se badmash sabse jyada gaate hai, aisa har jagah hota hai….aapko isliye tajjub ho raha hai kyoki isme media ka naame bhi aa gaya, jabki ab tak media sirf doosro ka naam liya karta tha.

Sweetii Pandey : “Ajit Ji aise gande logo ke naam sarvjanik hona hi chahiye?…akhir bataye to sahi kaun hai ye dusht log”…apke reply ka intzar

Deoki Nandan Mishra : ye kise ruk sakta haii anjum ji

Sanjay Kumar Srivastava : अजीत जी, अच्छी बात यह है कि यह जान कर आपको आश्चर्य हुआ और बुरी बात यह कि सामना न करके उसे शहर से पलायन करना पड़ा..

Anshu Das : dis is reality.. sir jee.. corrupt.:(

Tarun Goyal : ji sir, aaj ki date mein media ki naukri ko casting couch ka dhabba laga hi diya hai kuch senior posts ke adhikariyon ne …

Ajita Jain : Lekin aapne naukri di ya nahi???

Prabhat Kumar : सर, इस तरह के पूरे प्रकरण में आप किसको दोष देंगे, मामला दोनों तरफ से चलता है। आप ही बताइए, कि कोई अगर समझौते की शर्त रखता है और सामने वाला मान जाए अपनी नौकरी या बेहतरी के लिए …. तो दोषी दोनों ही हुए ना। आज की युवा पीढ़ी में जिस तरह तेजी से आगे बढ़ने की भूख है, उसका फायदा ही तो उटा रहे हैं चंद ऎसे लोग। मुंबई वाली लड़की ने दिल्ली में कोई समझौता नहीं किया तो क्या आज वो जिंदा नहीं है या फिर नौकरी नहीं कर रही है…. मुझे लगता है वो उन तमाम ऎसी लजड़कियों से ज्यादा खुश होगी जो शॉर्टकट के जरिए कामयाबी हासिल करती हैं।

Ajita Jain : Kehte hain aadmi tab tak hi imandar rehta hai jab tak use beimani ka mauka na mile……halanki har kisi par ye baat lagoo nahi hotii!

Anshu Das : @prabhat jee.. gar aisaa na kare to kya kare.. naukri to milti nhi jha jaoo. waha ek lag tarh ki bhookh nazar aati hai… doshi wo log hai jo.. unke kamjori pe nishana sadhte hai… aur aisa har jagah har department mai hota hai.. to hum jaise yuva peedhi kya kare.. jiske bhi kuch khwab hai.. wo apne khwab toote to nhi dekh sakte na..

Ashutosh Dwivedi : ji ha yahi halat ho gai hai hamari sharaft ki…app jaise varith logo ke pas agar ye bat pahunch rahi to iske liye kuchh karna bhi ab apki jimmedari banti hai…….ameen

Hasan Jawed : ab sudhar aa rha h…

Prabhat Mohan : sir ye to sach hai isiliye unse kuchh milne ki asha me unhe jald naukri de dete hai ye manyawar log aur phir uska shoshan shuru ho jata hai.

Prabhat Mohan : sir one more incident where i want to remember you.sir you willbe surprised to know not a hindi newspaper cover it and even t.v channels accept ndtv…..you r straight and candid so i want share..one M.P. from rajya sabha parvej hashmi threaten a sho and send him police line.because he dare to evacuate his illegal capture of jamia university land… See more….one hindi news paper editor said to reporter M.P. is big and congress party is ruling party and he is from cong and S.H.O is smaller in front of sho.so leave it…..only indian express and mail today cover it thats why they r indian express and ndtv……now who police wil fight against powerful people……this whole episode hurt me.and give me a lesson truth and honesty result insult..l

Vartika Tomer : media me aaye hue sirf 4 saal hue hain.. ise meri acchi kismat kh lijie ya bhgwaan ki daya ki mujhe aaj tak aisa koi kadwa anubhav nhi hua…media me aise log muojood hain ..lekin bhut kam hai.. mai AIR me kaam karti hun.. whan ka maahauul itna accha hai ki sb hame bacchon ki tarh treat karte hain..isse pahle 2 news chan. me intern kar chuki hun ….. See morejitna pata chala hai wo yh ki ..ladkiyon ko himmat or dhairya se kaam lena chaaiye.. jhan tak ho sake aisi koshish karen ki jis pr aapko shq ho wo aapke aas-paas fatakne se pahle bhi 4 baar soche.. iska ek sabse saral upas ye hai ki MEDIA ME UNCHE PADON PR BHI BARAABAR KI TAAADAT ME MAHILAAYEN HON OR UNHEN KARYASTAL PR BARABRI KA SAMMAN MILE..SHESH PHIR KABHI..

Kuldeep Bhardwaj : sir finally a gud thing has been raised by u … The truth has n nos of evidence around u …just have a fair look at your end u ill get it the maximum examples:……a humble request plz do somthing for it ….yes u can do it somthing extra ordinary ….i have all the strong hopes ….

Arun Sinha : sir this is not only in channels but i know some media schools too where such dirty games are played.girls be alert because sometimes whom u find as ur helping hands and whom u trust, initiates first to play with ur innocence.this dirty jach system in media should be banned,otherwise there’s no solution for such activities. and dont be so friendly with anybody at ur working palce unless u dont get their motives well.

Sweetii Pandey : hey such kind of people everywhr, u need to choose a rite track

Fermina Mukta Singh : Many congratulations, Anjum sahib, for such a daring FB Status! You speak your mind. Keep it up burning high. Media ki jitni bhi female anchors se meri mulaqat huin hai, unka kehna hain ki unke alawa aur sab ke saath ‘casting couch’ experience ho chuka hain. Apki wo baat durust hain ki jab ladkiyaan khud hi aage nahin ayengi, aur samjhauta ke naam par exploitation ko embrace karti rahengi, jaisa ki bollywood ki galiyon mein bhi hota rehta hain.to aesa hi chalta rahega.

Ravindra Pancholi : अजीत जी, यह बात अब आम है की फिल्म इंडस्ट्री की सारी बुराइयाँ मीडिया में गहरे तक पैठ चुकी हैं.पहले घूस में सोने चाँदी के सिक्के चलते थे,फिर कागज के सिक्के चले और आजकल जब कुछ ना चले तो चमड़े के सिकक्के १००% सफलता की गॅरेंटी है.इसके लिए वे जो किसी भी कीमत पर सफल होना चाहते हैं और भेड़ की खाल ओड कर बैठे हमारे ही भाई बंद हैं, ज़िम्मेदार हैं.

Rajnish Agrawal : ऐसा होता है इसमें नया क्या है..पर जिसने मजबूरी का फायदा उठाया..वो हम लोगों में से एक पत्रकार बिरादरी का है..ये हमारी विंडमना है कि हम ऐसी स्टोरी को चटखारे लेकर सुनते है..पर इसके खिलाफ कभी नहीं सोचा..ऐसे लोगों के खिलाफ किसी संस्थान ने कोई कदम नहीं उठाया है..ना उठायेगा

Adv Raj K Singh : मीडिया में “कास्टिंग काऔच”- क्या सही में चौका देने वाली बात है ??॥अजित ज़ी – एस मीडिया रूपी रंगमंच पर बड़ा नाटक है!..

Niraj Kumar Vishwakarma : मीडिया में शोषण नई बात नहीं है…लेकिन यह सर्मनाक है

Firoz Shaikh : Ajit ji Bilkul sahi likha aapne , mene bahut se patrkar dekhe hai jo is baat par chuppi sadh lete hai … is mudde ko bahas bnana jaruri hai ………..

Anindita Samaa : Delhi Kaunsa behtar hai …agar maine aapko kuch logon kee dastanein batayenn to hosh udh jayenge aapke Sir !

Pravin Jha : aisa dhadalle se ho raha hai. isliye to log jyada ladakiyo ko prefer karte karate, ladako me 96% yogyata hai aur ladkiyo me 4% to chance pahale girls ko hi mlta hai

Anindita Samaa : @pravin Jha : tere dimaag aur teree zehniyat se pata chalta hai kee tere kya yogyata hai ….Dont make such sweeping statements ! Freak!

Suhasini Raj : she should have taken the hidden cam while doing the rounds for the interviews. That would set the buggers straight for their lives

Khawar Jalees : ye sirf debate ka batter nahin hai sir, balki koi action zaroori hai..aakhir shuruaat to honi chahiye…sochan ye hai ki kaise…aur agar shuruaat ho gayee to ye gandagee khatm chahe na ho…check to lagega…logon ke andar dar baithana zaroori hai.

Himanshu Singh : सर, मुझे तो हर चैनल के उच्चे पद पर बैठे लोगों के बारे में पता है। इनका शिकार तो सबसे पहले एंकर ही होती हैं। अगर उनकी सेलेक्शन हो भी गई तो उनसे काम नहीं लिया जाता, जब तक वो अपन बॉस को खुश नहीं करती बेचारी ऑन स्क्रीन नहीं आ सकती। इसमे गलती दोनो साईड की है। मैने ये देखा है अगर कोई लड़की कहती है कि मुझे एंकर बनना है तो वो बन भी जाती हैं किसी ना किसी चै… See moreनल में। आखिर एक लड़के को एंकर बनने में इतना स्ट्रगल क्यों करना पड़ता है, जब कि एक लड़की सिर्फ चाह दे कि मुझे एंकर बनना है तो वो कहीं ना कहीं बन ही जाती हैं। आखिर लड़कियों पर इतनी मेहरबानी क्यों?

Prashant Pandey : ये बात छेड़ने के लिए साधुवाद अजीत सर..

Ajit Anjum : हिमाशूं , आपका कमेंट पर मुझे एतराज है . आप ऐसा कह कर उन तमाम एंकर्स के बारे में अपमान जनक टिप्पणी कर रहे हैं , जो प्रतिभाशाली हैं . चंद लोग ऐसे हो सकते हैं , लेकिन सबको आप ऐसा नहीं कह सकते . बहुत ही आपत्तिजनक है आपकी टिप्पणी …

Ritu Kant Ojha : Ajit ji aapke liye mere dil mein respect kai guna badh gayi. It needs lot of courage and character to write such things in public forum. From media schools to nearly all channels “this” is happening and we all know this. I cannot believe some of the people here are expressing surprise!! Exploitation of women is an open secret in media and is an old news. Somebody wrote above that a woman cannot be exploited if she doesnt want. I agree to an extent. There are many examples of female journos who presented themselves for exploitaion for promotions. I personally was asked one of the trainees 3 years back that how can she come close to the boss. I never knew what I jokingly said in reply will be taken seriously. She is quite successful and she has no regrets. But that is an exception. I think TIGHT SLAP will set the tone in our industry.

Avinash Tripathi : ajit sir kuch logo ki harqat ki wajah se jaha media ke bade pado pe baithe log ko shanka ki nazar se dekha ja raha hai wahi apni pratibha aur yogyata se apna safar tai karne wali anchors n reporters ko bhi sandeh ki naar se dekha jayega… sarvatha anuchit hai.. bt aise logo ko samaj ke saamne apko lana chahiye….aapne aagaz kiya hai to anzaam bhi dijiye…ab apki zimmedari bhi banti hai…

Ritu Kant Ojha : Mr Himanshu, by saying this you are insulting all women in media. I will request you not to form such an opinion nor propogate it. As I said in my previous status, such girls who are ready for exploitation are exeption. Most of the anchors and reporters wok in a news channel as hard as we do. The problem is that women being preferred for anchoring is problem of our medium. This is obvious that a viewer tends to watch a on air pretty female face more than a handsome male anchor. And hence world over female anchors are more in demand. I request you to refrain from such generalisation. I have worked in 4 companies and never did I feel that if you are good in your work, take initiative, are not part of any “lobby” you will not rise. There is huge demand of good trained journos and will remain for some more time. Blaming the fairer sex is not justified.

Saurabh Sengupta : Ajit jee aur tamam log jo iss bahas ka hissa banein hain unka dhyan iss baat per kendrit karwana ahunga ki jab har tarah ki naurkri k cayan ki prakriya mein kamobesh pardarshita hai toh media mein kyun nahin….meri rai mein iss samasya se kuch had tak nijat dilwane mein pardarshita kargar hogi…kyunki tab shayad kisi ladki ko kisi boss k chamber mein jakar naukri mangne ki jarurat na pade…

Khalid Hasan : Shame shame shame…..

Amit Kumar Singh : ये पत्रकारिता की कौन सी पड़ाव है?

Khalil Sharif Girkar : aaj kal yehi chal raha hai. bahut hi sharmnak

Arin Meggy : very bad

Shagun Kashyap : meri nazar mai har jagah aisa hota hai…par y depend karta hai k aap khud kaise hai…. agar ap sahi hai to sab sahi hai…bina apki marzi koi kuch nahi kar sakta….haan ladki hone k naate ap agar iske liye awaz nahi uthate to aap kahin na kahin galat hai aur ise sirf isliye seh rahe hai kyonki apko naukari karna hai aur khub paise kamaane hai… See more… See More…. aaj jo bhi isse pidit hai wo apni zindagi se zyada sirf paisa kamana chahte hai…bade afsoos ki baat hai… par meri soch hat kar hai…. aapki izaat aur respect is dunia m sabse ANMOOL hai….aur use kayam rakhna sirf apke khud ke haath me ha…. Gud Discussion Anjum Jee…

Shashi Shekhar : मामूली शिकायतों पर किसी को मिनटों के भीतर नौकरी से निकाल देना….यहाँ तो सरासर नाइंसाफी है…हो सकता है शिकायत किसी दुर्भावना या अन्य कारणों से किया गया हो…और वास्तव में जिसके विरूद्ध शिकायत की गई उसकी गलती ना हो….

Raj Sharma : sir ..ye koi nai baat nahin hi…ladkiyon ka explaoytation hota hi

Pravin Dubey : सर, ये सभी जगह हो रहा है दरअसल हमारा सिस्टम ही करप्ट हो चला है…चूँकि हम मीडिया में हैं तो हम यहाँ के मामलों को जल्दी देख लेते हैं….कौन सी फील्ड ऐसी है जहाँ का प्रभावशाली व्यक्ति लड़कियों या महिलाओं को देखकर लार ना टपकाता हो. कुछ गिने छुने बॉस ऐसे होते हैं जिनके संस्कार बहुत प्रबल हैं और वे इसे गलत मानते हैं, अन्यथा चाहे सरकारी विभाग हो या प्राइ… See moreवेट सभी जगह ये चल रहा है.मैं अजीता जैन की बात से भी थोड़े हद तक सहमत हूँ. मध्य प्रदेश में एक फोर्थ क्लास क्लर्क जिसे पति के मरने के बाद अनुकम्पा में नौकरी मिली है वो प्यून है और एक गाँव में पदस्थ है. चूँकि वो बेहद सुन्दर है तो उसके चक्कर में कई बड़े अधिकारी भोपाल से उस गाँव का दौरा करने जाते हैं. हालाँकि अभी तक उसकी आबरू साबुत है लेकिन पता नहीं कब ये भेडिये उसे नोच लें. ये चारित्रिक पतन समाज का है जो हर जगह दिख रहा है.

Sachchida Nand Dwivedi : अजीत जी बहुत पहले आपने बालीवुड में कास्टिंग काउच का खुलासा किया था हमने आपको बहुत सराहा था लेकिन अपने भीतर की गंदगी को उजागर करते समय आपके हाथ क्यों काप गए सर हिम्मत कीजिए अजीत जी हम आपके साथ है वैसे आप सभी के नाम जानते है

Shagun Kashyap : Mera media industry ka experience yahi kehta hai k agar aap compromising nahi to apko pareshan kiya jayega…. par y aap par hai k aap in ghatiya baton se pareshan hote hai ya fir uska muh tod jawab dete hai…. kyonki ek journalist ka kaam hai galat ke khilaf awaz uthana na ki apni awaz ko kho dena is bheed mai….bhale hi thodi pareshaniyan raah m aayengi, late increments honge,late position milegi…par sahi raah hi apko dur lak lee jati hai…galat raah kabhi nahi…..

Sachin Yadav : आप के समाचार चैनलों में क्या कभी कोई नौकरी निकलती है. और आप ये बताइए आप को भी नौकरी संबंधो के आधार पर मिली थी या फिर कही विज्ञापन निकला था और भर कर आप नौकरी पा गए. सर एक से एक काबिल सड़क की ठोकरे खा रहे हैं. और फ्री के इन्टरन न्यूज़ चैनल चला रहे हैं.

Shashank Journalist : sir ye midea ko badnaam karne ki sirf ek sajish hoti ye kuch lutere hote hain jo paisa kamane ke liye itne niche tak ja shakta hain.


Comments on “दिल्ली में वो चार ‘लड़कीबाज पत्रकार’ कौन हैं?

  • sushil Gangwar says:

    Hum jhoot nahi bolte lekin sub bolte hai . Esa hi kuchh haal media ka hai Aub tak film or modeling badnaam tha . Deere deere media bhi usi line aakar khada ho gaya hai. Ye bikul sach hai ki media me casting ouccccccccccc hota hai. ye baat ro rokar sunaane vali nahi ki nahi hai un ladkiyo ke sath casting ouccccccc huaa. Aapne unke liye kya kiya ? Kya Ajit ji aap bhi kuchh kar sakte hai ese logo ke liye bhatak gaye vah bhi ek media job ke liye ?

    Sushil Gangwar
    http://www.sakshatkar.com

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  • santosh pandey says:

    bhai sahab kya abhi tak aap so rahe the . is tarah ki harkte to lagabhag har sansthna me hai.. kaunn sahi -kaun galat ye kaise pata chalega. ab abhiya chediye .

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  • sanjeev tiwari says:

    media me yesi harkat to samanya hai.log kisi ka najayaj phayada uthana achhi tarah jante hai.media me der rat tak kam karwate hai. uske bad kya karwate hai ………………bhagwan malik hai. rahi bat ajit ji ki to etane bade aadmi ne es mudde ko uthaya hai o sadhuwad ke patra hai. ab yah harkat delhi mumbai se nikalkar chhote-chhote sahro tak phail raha hai.

    Reply
  • महंत अगड़ध्त्त नाथ says:

    बोरिंग। महाबोरिंग।
    मीडिया वालों से ईमानदार किस्से तो घसियारिनों और घरेलू नौकरानियों के पास होते हैं।

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  • KOI BADI BAAT NAHI HAI….MEDIA HI BIKA HUA HAI….YAHAN HAR KHABAR BIKTI HAI…to casting couch kyo naho honge

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  • veerendra bansal says:

    ajit ji yadi aap ese logo ke cehre venakab nhi karenge toh aap vi usmei barabar k bghidar kahe jayenge

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  • chandan roy.. says:

    aapki baat sahi hai aur media me aisa ho bhi raha hai. jo sarasar galat hai. par iska ek dusra pahlu ye bhi hai.”mai apnee hamumra 5 aisi ladkiyon ko to delhi me janta hoon jinhone shartiya shortcut apnakar ek achhi naukri aur mukaam media me hasil kar liya … to bechare kitne aise tathakathit chutbhaiye chor man masos kar hi rah jate hai.. aur mauka pakar.. bahti ganga me dubki lagane se nahi chukte.
    baharhaal galat to galat hai..
    par is samandar me badi machhliyaan bhi hai.. jinpar koi haath nahi dalta.
    par expose karna chahiye… Naam sahit.
    ek dussahas to kisi na kisi ko karna hi hoga.

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  • shankar suman says:

    सबसे पहले मैं ये साफ़ कर दूँ कि मेरा इरादा किसी कि तौहीन करना नहीं है लेकिन फिर भी मैं पत्रकारिता के चाचाओं से जानना चाहता हूँ कि ऐसे चार पत्रकार का नाम बताएं जो दावे के साथ कह सकें कि वो लड्किबाज़ नहीं हैं . बात सिर्फ इतनी है कि जिनकी पोल पट्टी खुल गयी वो लड्किबाज़ हो गए बाकी सफ़ेदपोश, जैसे कि उनसे बड़ियाँ और चरित्रवान कोई इस संसार में है ही नहीं ……..मैं जनता हूँ कि मेरी इन बातों से बहुत लोगों को तकलीफ होगी , लेकिन जैसा कि पहले ही कहा है किसी को उकसाना मेरा इरादा नहीं है ………बस सच्चाई ये है कि हमाम में सब नंग्गे हैं. धन्यवाद

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  • Ajay Singh Chauhan says:

    Media, Film aur Fashion Industry mein Jitni Tezi Se Ladkiyon ka Shoshan Badha Hai wo kisi dusri field mein nahi badha hai. Phir bhi hamaare deash mein yeh other countries ke comparision bahut kam hai. Sawaal Ye Nahi Hai Ki Yeh Sab Kitna Kam Hai Ya Zyada bcoz Ek Zindagi bhi Maayne Rakhti Hai. Pichle Dino Meri Baat Ek Ladki Se Hui Woh UK mein Job karti hai , but she is from India, Usney Bataya ki Uska Boss Khule-aam usko one night ke liye offer karne ke saath hi Promotion ka bhi Laalach deta hai aur Mana Karne Par Boss ka Jawab Uski Ghatiya Soch ki Kalai Kholta Hai, Uske words kuch is Prakar they “….agar itni hi shareef ho to ghar mein baitho job kyon karti ho.” Ab Aap Hi Bataaiye Kya Kiya Jaana Chahiye Aise Logon Kaa ? Kisi bhi Problem Ka Solution 3 Tier Hota Hai, Pehla Problem Ko Pehchaan karna, Doosra Reason Pata Karna aur Teesra Usey Solve Karna. Agar Gahraai Se Dekhein To Is Mahoul ke liye Hum Sabhi Jimmedaar Hain…Wo Baat Alag Hai Ki Hum Dusro Ko Samjhaane mein hi Apni Mahaanta Samajhte Hain. Pichle Ek Din Ek Movie Aayi Naam Theek se dhyan nahi hai but shayad “Pankh” naam tha. Us movie mein itni ghatiya Script aur Dialougue they ki aap bhi sharam se paani paani ho jaayein… Aakhir kya paros rahe hain hamaare filmy director aisi films banaakar , Haalaanki yeh movie maine nahi dekhi, iska trailor maine “Prince” movie ke Interval mein dekha. Ek Baar to man mein aaya ki movies dekhna hi chodh du. LSD Jaisi Filmein Khud to ghatiya hain hi Social Enviroment ko bhi ganda kar rahi hain. Laut te hain apni baat mein to Iska Antim Solution Yehi Hai ki Hum kisi Laalach mein naa aayein aur naa hi kabhi Samjhauta karein aur kabhi Situation se Compromise karna bhi padey to Saamne waale ko Benakab Karne ke baad. Mai bhi Mass Communication ka student hu aur Print Media se bhi Juda hu, Mere Khyal Se Gals ke liye Electronic Media mein Stability nahi hai, Yeh bhi ek Kadwa Sach Hai Ki Zyadatar Gals Electronic Media ke Glamour ko dekhkar bina soche samjhe is field ko chunti hain.

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  • pooja singh says:

    koi bhi ladai ladna aasan nahi hota.. Mujhe bhi kuch aise kadwe anubhav huye hein.. Yahan tak ki dhamki bhi mili hai.. Lekin khud ko akela pa k naukri chhodna hi sahi laga..

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  • pankaj ohri cameraman lko says:

    सर, ये सभी जगह हो रहा है दरअसल हमारा सिस्टम ही करप्ट हो चला है…चूँकि हम मीडिया में हैं तो हम यहाँ के मामलों को जल्दी देख लेते हैं….कौन सी फील्ड ऐसी है जहाँ का प्रभावशाली व्यक्ति लड़कियों या महिलाओं को देखकर लार ना टपकाता हो. कुछ गिने छुने बॉस ऐसे होते हैं जिनके संस्कार बहुत प्रबल हैं और वे इसे गलत मानते हैं, अन्यथा चाहे सरकारी विभाग हो या प्राइ… See moreवेट सभी जगह ये चल रहा है.अजीत जी, यह बात अब आम है की फिल्म इंडस्ट्री की सारी बुराइयाँ मीडिया में गहरे तक पैठ चुकी हैं.पहले घूस में सोने चाँदी के सिक्के चलते थे,फिर कागज के सिक्के चले और आजकल जब कुछ ना चले तो चमड़े के सिकक्के १००% सफलता की गॅरेंटी है.इसके लिए वे जो किसी भी कीमत पर सफल होना चाहते हैं और भेड़ की खाल ओड कर बैठे हमारे ही भाई बंद हैं, मीडिया में ऐसी घटनाओं का कोई स्थान नहीं होना चाहिए. लेकिन यह बात सौ फीसदी सच है. ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए. अजीत जी, आप भी इनके नाम सार्वजनिक कर दीजिये. ऐसे लोगों के नाम छुपाने का कोई निहितार्थ समझ नहीं आता. हाँ, इसका दूसरा पार्ट भी है. मॉस कॉम करके आने वाले इतने बच्चे नहीं होते क़ि उन्हें इसका अभाष नहीं हो. सर हिम्मत कीजिए, हम आपके साथ है वैसे आप सभी के नाम जानते है
    pankaj ohri

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  • not_in_media says:

    I read most of the comments. Anu.. I feel sorry for u.. bcos aapnai bhi badawa diya iss casting coush koo…Aap media person hai.. aao ko toh atchi tarah malum hoga kiii aap kiya kar sakti thi…. Your female colleague requested u not to inform it outside n u did the same… aap ko toh police station jaa kar fir lodge karna chahiye…. agar koi women complain karti hai toh bahut bada issue banta hai… n the best part yeh hota… TV channels and newspaper ko masala chahiye….

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  • Pramod Kaushik, News Editor,Sarvottam Times says:

    Respected Anjum Ji
    aise logon ko sarvajanik roop se thappad marne ki baat se shayad kuch sudhar ho jaye.Lekin jab aaj tak kisi pratisthit media sansathan ke unche pado par aaseen log hi aise logon ke naam tak lene ki himmat nahi juta paye hai to lakho rupaye kharch karne ke baad mass com karne wali berojgaar ladki yeh himmat khan se la payegi.

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  • sushil Gangwar says:

    न्यूज24 के मैनेजिंग एडिटर अजीत अंजुम ने Facebook पर दरबार लगा रखा है। आजकल Facebook पर बड़े से बड़े लोग अपना मेसेज लिख रहे है। Bhadas4media.com पर छपा लेख दिल्ली में वो चार ‘लड़कीबाज पत्रकार’ कौन है – काफी अच्छा है । आप अपने लेवल से लोगो की मदद कर रहे । अजीत जी मै आपको बताना चाहता हू कि मीडिया में केवल लडकियों के शोषण के साथ लडको का भी खुले आम शोषण हो रहा है। मै उन बड़े पत्रकारों के नाम नहीं लेना चाहता हू। जो आज भी सीसे के पीछे बैठ कर वह सब कर रहे है जो उन्हें सही मायने में नहीं करना चाहिए । अदनी सी नौकरी के लिए सब कुछ ललेने वाले बह बड़े लोग साफ़ सुथरे कपडे जरुर पहनते है लेकिन मन हमेशा मचलता रहता है। जिस्म के नाम पर नौकरी देने वाले दलाल मीडिया से लेकर फिल्म – मोदेलिंग और बड़े बड़े कॉरपोरेट वर्ल्ड में कुंडली मारे बैठे हुये है । हम जानते है मीडिया में आने से लाभ है वरन जलील होने से अच्छा है कि कुछ और करे और ऐसे विषेले सापो से बचकर ही रहे ।
    Editor
    sushil Gangwar
    http://www.sakshatkar.com

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  • Nitin Yadav V T W News Bulandshahr Up says:

    Na jane media ko ho kya gaya hai sub pagal hote ja rahe sharm to mano kisi ko rahi nahi dosto iska naam ganda mat karo ye he is kalug mai gareebo ko sambhale hai, pls media ko media rahne do kotha mat banao.9761837006 VTW News Network & Voice this week news paper

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  • ANUPNARAYANSINGH says:

    DELHI HI NAHI DAIS KAI ANYA SAHRO MAI BHI AJJ KAL PATRAKARITA MAI MUKAM HASIL KAR CHUKAI LOG NAI LARKYO KAI SATH APNI KHWAHIS PURI KARTAI HAI PATNA MAI BHI EK JANAB HAI JO MAHILA PATRKARO KAI BEACH KAMDAV KAI RUP MAI JANAI JATAI HAI NAI LARKIO KO CHANS DANAI KAI CHAKAR MAI UNKA JAM KAR SOSAN KARTAI HAI. ANJUM JI AAP BHI UNSAI PARICHIT HAI AISAI KAMUK LOGO KI PARTAL BHI HONI CHAHIA.PATNA MAI NEWS CHANALO MAI KAI RANGIN KAHANYA BANI HAI NAI LARKIA BHI JALD AGAI BADHANAI KAI LIYAI NASAMAGH BAN KAR ATAMSAMARPAN KARTI HAI——-ANUP NARAYAN SINGH SUBEDITOR BIHARI KHABAR

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  • Kaushal K. Vaidya says:

    मीडिया इंडस्ट्री में कुछ अनप्रोफेशनल और कमीने किस्म के लोग इस तरह की हरकत करते हैं और तो और ऐसे लोग दिमागी तौर पर दिवालिए होते हैं.. ऐसी घटना सुनकर काफी दुख होता है.. ऐसे में फिलहाल मीडिया में एक मुकाम रखने वाले लोगों को इस पर अंकुश लगाने की कोशिश जरूर करना चाहिए….

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  • spells in silence says:

    internet par baithkar sekhi bagharne or khudh ko media jagat ke paak-saaf chehra sabit karne se acha hota ki bare-bare pado ko gaddi-nashin karne wala media ke purodha milkar gandgi saaf karte, par nahi G wo tto sirf face book par batkahi or thothi chinta dikha kar, khud ko in-sabse pare kar lenge!!! gandgi saaf karne me khatra jo hai!!!! ish se behtar tto ye hota muni mahoday ki aap doosron ke zhakhm na kuredein, kam se kam media industry ke paak-daman ka jhoota ehsaas to bana rahga, akhirkar kaam to galatfahmi se hi chlani hai!!!
    kyun???

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  • dilip anjana says:

    casting couch in media is not so new . it is as old as it is running in bolywood. all the editors and the journalist are not same but few are hannituated in this and they think it as a game and they play with their future. specially in hindi jounalism what i have seen that the editors are blind they only see who butters them even they dont know to write a single sentence.

    Reply
  • yeh ek kadva sach hai,aur iske liye ladkiya khud zimeidar hai.Ek naukri ke liye is hadd tak gir jati hai ki aap soch bhi nahi saktei.Lekin iska khamiyaza un ladkiyo ko uthana padta hai jo sahi hai or media mei aagey badna chahti hai or naam kmana chahti hai .Lekin kuch logo ki vjahse unke liye media mei survive karna behad mushkil ho jata hai.Iska agr the end krna hai toh ladkiyo ko khud aana hoga.Nahi toh woh din door nahi jab nek or shareef ladkiyo ka media se nata khatam ho jayega.

    Reply
  • casting couch media ke sath judne vala naya sabd to nai par haan itna zaruur hai tmam khamiyoo ke baavjud bhi media me pratibha pehchanne valo ki kami nai hai.ye aisi jagah hai jaha kala ke kadrdano ki koi kami nai hai.jinko kaam nai karna hai unke liye har jagah shortcut hai.par ye dono smanantr chalne vali do duniya hai jinki nabhinal judi hui hai.

    Reply
  • Deepika Sharma says:

    Sir ye sab toh barso se chala aa raha hai, par isse koi rok paayega tabhi to kuchh achha ho paayega…..
    sir please isko rokne ke liye kuchh kijiye……

    Reply

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