फिर लौटेंगे छोटे से ब्रेक के बाद

कई बार लगने लगता है कि चीजें यूं ही चलती चली जा रही हैं, बिना सोचे-विचारे. तब रुकना पड़ता है. ठहरना पड़ता है. सोचना पड़ता है. भड़ास4मीडिया को लेकर भी ऐसा ही है. करीब डेढ़-दो महीने पहले भड़ास4मीडिया के दो साल पूरे हुए, चुपचाप. कोई मकसद, मतलब नहीं समझ आ रहा था दो साल पूरे होने पर कुछ खास लिखने-बताने-करने के लिए. पर कुछ सवाल जरूर थे, जिसे दिमाग में स्टोर किए हुए आगे बढ़ते रहे, चलते रहे. पर कुछ महीनों से लगने लगा है कि जैसे चीजें चल रही हैं भड़ास4मीडिया पर, वैसे न चल पाएंगी. सिर्फ ‘मीडिया मीडिया’ करके, कहके, गरियाके कुछ खास नहीं हो सकता. बहुत सारे अन्य सवाल भी हैं.

‘जनम अकारथ बीतने’ जैसा भाव गहराया हुआ है. कुछ नए प्रयोगों को करने न करने की दुविधा है. उम्र और मनःस्थिति के एक खास पड़ाव पर आने के बाद कुछ नई चीजें सूझ रही हैं, समझ आ रही हैं, आध्यात्मिक किस्म की. उन्हें गहरे उतरकर पकड़ना, जानना चाहता हूं. इन पर विस्तार से बात करेंगे, हफ्ते भर के ब्रेक से लौटकर.

फिलहाल दिल्ली से बहुत दूर किसी इंटीरियर में, किसी बेहद दूरस्थ गांव में पड़ा हुआ हूं. इसे समर वैकेशन कह लीजिए, छोटा सा ब्रेक बोल लीजिए, दो कदम आगे बढ़ने के लिए एक कदम पीछे हटना कह लीजिए.

यह मैं हमेशा याद रखता हूं, अगर आप पैसा पैदा करने की मशीन नहीं है, आपका काम सिर्फ पैसा केंद्रित नहीं है, तो आप जरूर खुद के बारे में, अपने काम के बारे में बार-बार थिंक, री-थिंक करेंगे. सोचेंगे. रुकेंगे. विचारेंगे. कुछ फैसले लेंगे. खुद में कुछ बदलाव लाएंगे. ज्यादा दूर तक देखने की कोशिश करेंगे. अन्यथा, किराने की दुकानों और हमारे-आपके कामों, हमारी-आपकी दुकानों में कोई खास फर्क नहीं है. अन्यथा, पैसा पैदा करने वाली कंपनियों और देश-समाज के हित में लगी संस्थाओं में कोई फर्क नहीं रहेगा.  उनकी परेशानियां अलग किस्म की होती हैं जो पैसे वाले होते हैं. जिनके जीवन में जीवन चलाना ही सबसे बड़ा सवाल हो, उनकी दिक्कतों को निजी भी मान सकते हैं या फिर उन जैसों की दिक्कतों को देश-समाज के आगे खड़े कुछ सवालों में से एक बता सकते हैं. 

आप भी सोचिए, हमारे बारे में, भड़ास के बारे में और खुद के बारे में. लौटते हैं, मिलते हैं, बतियाते हैं, कुछ दिनों में. 

आभार

यशवंत

एडिटर, भड़ास4मीडिया

yashwant@bhadas4media.com

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Comments on “फिर लौटेंगे छोटे से ब्रेक के बाद

  • pankaj kumar singh 09951879247 says:

    yashwantji,

    samajh me nahin aata ki aapke es patra ko kya kahun, break patra, satya patra,kaal patra.ye samanya khabar nahin hai,koi sampadkiya nahin hain,vidai sandesh bhi nahin hai,awkash ke liye niwedan bhi nahin hai.
    shayad yah aage ka step udhane se pahale ka chintan patra hai,lekin akhir kya wajah hai ki etane krantikari portal ke editior ko kisi anya option ke bare me sochana par raha hai,wo bhi delhi se dur.
    shayad bhadas kinhi jhnjhwaton ka samana kar raha hai,hamesha se achhe chijon ki umra chhoti hoti rahi hai,lekin hume bharosa hai ki b4m ki umra hamari umra se badi hogi,,,

    pankaj kumar singh
    etv

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  • ashish goswami says:

    yasvantji. aap jo bhi likhe sirf such likhe……kai log bhadas4media mai apne niji hitoin ko dhyan mai rakh kar apna lakh prkashit kava lete hai…jane anjane…india ka bahter/aakrmk web portal par sandeh uttpann hota….2sal ki bahut badai……..

    Reply
  • SHASHI RANJAN says:

    YASHWANT BHAI…..FIRST OF ALL…LET ME SAY ‘CONGRATS’ FOR D WONDERFUL WORK U HAVE DONE….AND R DOING….THROUGH BHADAS…
    SUMTIMES….WHEN U WRITE SUMTHING AGAINST US…IT PAINS….BT, THAN, AS A JOURNALIST, I THINK…IT WAS RIGHT…N…SULD NT PAIN….

    ANYWAY….GUD…TAT U R ON ‘VACATION’…ENJOY…AND THINK SUMTHING ‘NEW’……

    HOPE U SEE SUMTHING ‘NEW’…..AFTER UR ‘BREAK’…..WHISHING U ALL D BEST…KEEP GOING…..

    Reply
  • sapan yagyawalkya says:

    आदरणीय ,आपने जो किया है,वह मूल्यांकनों के पैमाने से कहीं बहुत ज्यादा ऊपर है. सोचना केवल इतना है कि यह सब चलता रहे. इसके लिए अपनी चिंताएं-अपने सोच को बाँट भी दें तो कोई बुराई नहीं है .भले ही ब्रेक के बाद. -सपन याज्ञवल्क्य , बरेली (म.प्र.)

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  • na to ye break hai aur na hai summar vacation aur na hai do kadam piche hatna. ye to bus khud ko energy se fill up karne ka modam hai. nayi uarja nayi kiran ke sath fir aagaj hoga. enjoy.

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  • alakh niranjan says:

    कहते हैं कि आदि शंकराचार्य के सामने भी सवाल उपस्थित हो गया था ततःकिम,ततः किम,ततः किम ! लगता है कि वही सवाल आपके सामने आ गया. मेरा तो आपसे यही कहना है कि करते जाओ जो करना है.
    करते जाओ जो करना है
    जग में किसको क्या होना है?
    क्या पाना है, क्या खोना है
    कब हँसना है कब रोना है!
    सब बातें यहाँ अनिश्चित हैं
    निश्चित तो केवल मरना है!
    करते जाओ जो करना है!!
    जग करता नहीं प्रतीक्छा है
    बस करता सदा समीक्छा है
    होती सब काल परीक्छा है
    जो समय चूकता रहता है
    उसको बस आँहें भरना है
    आप तो करते जाओ जो करना है.

    Reply
  • yashvantji shayad apko kuch smay ke baad ye pravas vyarth lag raha ho lekin ye sachmuch apne kaam se kaam rakhne vale patrakaro ke liye bahuupyogi hai. isko maatr gariyane ka manch kehna sarasar galat hoga.haan isme sakaratmak badlav bhi kye ja sakte hai.story bar behas ho sakti hai. partakar ko apni khabar chapvane ke liye kya papad belne pade aur kaise vo vijit hua khabar chapvane me. patrikarta ke chetra me kya dikkate hai kaise nipta jaye inpar bhi charcha ho sakti hai jo naye bachho ke liye bahut labhkari hogi.

    Reply
  • MAYANK-BIG FAN OF YASWANT JI says:

    यसवंत जी लगता है , आप बोर हो रहे है और रही बात पैसे की …पैसा भी मिलेगा जब आप किसी के कहने पर गलत छापना शुर करेगे और किसी राज नेता और पार्टी के मोहरा बनोगे …और आप ये सब करने वाले हैं नहीं. तो फिर क्यों अपना सर खपा रहे हैं महान कार्य करना है तो बोर होना छोड़ दो …महत्मा गाँधी , विवेकानन्द को,भगत सिंह को किसी पुरुस्कार या पैसा डिगा नहीं सकता …ऐसा भी नहीं है की लोग आपको वेबसाइट मे विज्ञापन नहीं दे रहे हैं ..लगे रहो फल भी मिलेगा ,आपका नाम समूचे मीडिया जगत मे फैल चूका है ……आप ने समाज को एक राह दिखाई है ………मेरा नाम है मयंक-कोड-यशवंत बिग फेन ऑफ़ इंडिया ) …आप ने मेरे बहुत से लेख प्रकाशित किये हैं ….और सब सच होते है अब बस स्टिंग ऑपरेशन पर ही ध्यान दीजिये …समाज पर और भी कम करने हैं आप को /
    नमस्कार सर …फिर लौटेंगे छोटे से ब्रेक के बाद

    One big fan of yaswant sir……………code……YASWANT – THE BIG FAN OF INDIA

    Reply
  • yashwant@bhadas4media.com
    Behtar hai ki aapne ye samajh liya ki media ko gariyane bhar se kaam nahin chalega.
    Yahi karan hai ki hum UNI ke andolan ko chala rahe hai jo vetan-bhatte ke trade union

    brand economism ke liye nahin balki Hindustani media ko Subhash Chandra jaise seth ke

    monopoly capital ke badhte shikanje se bachane ke liye 7 September 2006 ko shuru hua tha

    aur ab bhi jaari hai usko workers ke multi-state cooperative structure ke maalikana roop

    mein chalane ke sapne ke saath (UNI IS OURS ka hamara nara khokhla nahin hai)

    Aaj jaroorat ‘ Awami Media ” ( People’s Media ) ki hai jiske baare mein aapne shayad isi

    naam se Delhi se 20 saal pehle chapne wale ek journal mein Lucknow mein tab padhi thee

    jab hum sab Media Manch ke ek seminar mein ” Azadi aur Media” vishay par charcha kar

    rahe the.

    Agar humne People’s Media ka sapna dekha aur jiya hai to hamara koi apna isko aaj nahin

    toh kal poora bhi karega.

    Ek salah- Aap Gabriel Garcia Marquej ka Spanish novel ke English mein translated novel ,

    ONE HUNDRED YEARS OF SOLITUDE – padhen aapne CHOTE SE BREAK mein .

    Uska nayak mystical realism genre ka maana gaya hai . Woh aapko naye roop mein aage

    badhne ke liye prerit karega.

    Reply
  • vivek sharma says:

    sahi soccha,
    aaj-KAL mai bhi ghar batkar yahi soch raha hoo ki patkaritya sai kya paya, jindgi mai agai badnai kai liya atmm-chintan bohat jarori hai, jisssai khud ko pata chal jai ki mai kya karna chata tha, kya kiya, kyo kiya, kya mila? atmm-santustti mili ya nahi ? saath din tak socohiyai, phir nayi urjja kai sath kaam par lotai.

    Reply
  • agar aap ruke ho to shayaad kuch aur oonchi chalaag maroge…badiyaaa hai ! kuch aur naye prayog ki ummind hai …

    Reply
  • Haresh Kumar says:

    भड़ास4मीडिया के दो वर्ष सफलतापूर्वक पूरा होने पर आपको हार्दिक बधाई। आशा है आप आगे भी यूं ही मीडिया में हो रहे गलत कार्यों को लोगों के सामने लायेंगे।

    Reply
  • mangesh yadav itarsi ju( mp) says:

    भड़ास4मीडिया के दो वर्ष सफलतापूर्वक पूरा होने पर आपको हार्दिक बधाई। आशा है आप आगे भी यूं ही मीडिया में हो रहे गलत कार्यों को लोगों के सामने लायेंगे।

    mob. 9926367909[i][/i]

    Reply
  • chintan behad jazuri he. mera pesha hi likhana he aur auro ke liye likhta ho aur paise nahi milte he to taklif hoti he. iske bad bhi likhna to choda nai ja shakat. aap bhi soche aur naya kare. interviwe ka silsila ruk sa gaya he. ise satat chalane chiyehe,

    Reply
  • a n shibli says:

    इस बेहतरीन वैबसाइट के लिए आपको बहुत बहुत बधाई चलिये ब्रेक के बाद आकार और भी अंदर की शानदार खबरें देते रहिए। आपकी यह वैबसाइट कमाल की है इसकी जितनी भी तारीफ की जाए कम है। देखेंगे की वापसी पर आप क्या क्या तबदीली लाते हैं।
    ए एन शिबली
    हिंदुस्तान एक्सप्रेस

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  • Jasbir Chawla says:

    Bas…lage raho…lage raho…lage raho.Yahi niyti hai.Santusta ho sakte hain to ho jaaiye.Asntusta hokar bhee kahin to BHADAS nikalenge.Phir “Bhadas” kaya bura hai?

    Reply
  • Jasbir Chawla says:

    Bas…lage raho…lage raho…lage raho.Baahar jaakar bhi BHADAS nikalni hai.Phir Bhadas men hee sahee.Sukrat ne kaha tha ki “Santusta suwar hone se asanusta Sukrat hona behtar hai”.Yahee niyti hai Yaswantjee.

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  • Naresh Dewan "shelly" says:

    Yashwant ji ….Badhai ho…. Issi tarah karwaan badhta chale.. badhtaa chale……
    Meri Hardik Shubhkaamnayein…. naresh dewan Shelly

    Reply

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