छिनाल प्रकरण : …थू-थू की हमने, थू-थू की तुमने…

ज्ञानपीठ की प्रवर परिषद से हटा दिए जाने, केंद्रीय मंत्री से माफी मांग लेने और सार्वजनिक तौर पर अपने कहे पर खेद जताने के बाद भले ही विभूति नारायण राय का ‘छिनाल प्रकरण’ ठंडा पड़ता दिख रहा हो लेकिन इसकी टीस अब भी ढेर सारे लोगों के मन में है. खासकर कई महिलाएं इस बवाल और विवाद के तौर-तरीके से आहत हैं. इनका मानना है कि विभूति नारायण राय ने जो कहा, उससे उनका छोटापन दिखता है, लेकिन विरोध करने वालों ने कोई बड़प्पन नहीं दिखाया.

विभूति कहां गलत हैं!

सिद्धार्थ कलहंस: प्रगतिशीलता की होड़ है, हो सको तो हो : गोली ही मारना बाकी रह गया है विभूति नारायण राय को। बसे चले तो भले लोग वह भी कर डालें। प्रगितशीलता के हरावल दस्ते की अगुवाई की होड़ है भाई साहब। न कोई मुकदमा, न गवाही और न ही सुनवाई। विभूति अपराधी हो गए। सजा भी मुकर्रर कर दी गयी। हटा दो उन्हें कुलपति के पद से। साक्षात्कार पर विभूति ने सफाई दे दी। पर प्रगतिशील भाई लोग हैं कि मानते नहीं। सबकी बातें एक हैं- बस विभूति को कुलपित पद से हटा दो।

वीएन राय के विवादित इंटरव्यू को पूरा पढ़ें, यहां

‘नया ज्ञानोदय’ पत्रिका के उस पेज का लिंक हम यहां दे रहे हैं, जिसमें वीएन राय ने एक सवाल के जवाब में हिंदी लेखिकाओं को ‘छिनाल’ कहा. इंटरव्यू में एक जगह वीएन राय ने कहा है- ‘लेखिकाओं में यह साबित करने की होड़ लगी है कि उनसे बड़ी छिनाल कोई नहीं है…यह विमर्श बेवफाई के विराट उत्सव की तरह है।’ एक लेखिका की आत्मकथा,जिसे कई पुरस्कार मिल चुके हैं,का अपमानजनक संदर्भ देते हुए राय कहते हैं,‘मुझे लगता है इधर प्रकाशित एक बहु प्रचारित-प्रसारित लेखिका की आत्मकथात्मक पुस्तक का शीर्षक हो सकता था ‘कितने बिस्तरों में कितनी बार’।’

विभूति के इन वंशजों को कौन दुत्कारे!

: उन्होंने तो माफी मांग ली, पर उनके चेले अपने शब्दों पर शर्मिंदा हैं या नहीं? : दिल्ली से निकलने वाली एक राष्ट्रीय स्तर की पत्रिका का एक सहायक संपादक जो कभी विभूति की कृपा पर विदेशों की सैर कर चुके हैं, वो खुलेआम विभूति के समर्थन में बयानबाजी कर रहे हैं. यही नहीं, दफ्तर की महिलाकर्मियों के सामने विभूति के ‘छिनाल’ वाले घटिया बयान को लेकर छींटाकशी भी कर रहे हैं। वे अपने पुरुष साथियों से कहते फिर रहे हैं- ”क्या जरूरत थी विभूति को सच बोलने की। सच ही तो कहा है. क्या झूठ बोला है. देखो सच बोल कर कैसे फंस गया बेचारा.”

सच में ऐसा बोला तो हटेंगे वीएन : सिब्बल

छिनाल प्रकरण उपर तर पहुंच गया है. केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल का बयान आ गया है. उन्होंने कहा है कि अगर टिप्पणी की गई है तो यह संपूर्ण नारी समाज का अपमान है. महिलाओं के खिलाफ ऐसी टिप्पणी उनके सम्मान को आहत करने वाली और मर्यादा के प्रतिकूल है. इस संबंध में आई खबरों का पता लगा रहा हूं. अगर यह सही हुआ तो कार्रवाई होगी.

पहले ‘छिनाल’ कहा, अब इसकी व्याख्या की

: छिनाल का मतलब वेश्या नहीं, इसका अर्थ है अविश्वसनीय : मेरा मकसद किसी की भावना को ठेस पहुंचाना कतई नहीं : लेखिकाओं को छिनाल कहने पर मचे विवाद के बाद विभूति नारायण ने सफाई में मुंह खोला है. विभूति नारायण राय के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में कुछ महिला लेखिकाएं ये मान के चल रही हैं कि स्त्री मुक्ति का मतलब स्त्री देह की मुक्ति है.

उनकी लेखिकाएं बीबियां ‘छिनाल’ हैं?

: वीएन राय ने मेरे लिए कहा था- ‘तब तक बचोगी’ : वीएन राय से बड़ा लफंगा नहीं देखा : ‘छिनाल’, ‘वेश्या’ जैसे शब्द मर्दों के बनाये हुए हैं, हम इनकों ठेंगे पर रखते हैं : वीएन राय लेखिकाओं को ‘छिनाल’ कहकर अपनी कुंठा मिटा रहे हैं। उन्हें लगता है कि लेखन से न मिली प्रसिद्धि की भरपाई वह इसी से कर लेंगे। मैं कुछ याद दिलाना चाहूंगी।

विभूति अपनी लेखिका पत्नी को ‘सही जगह’ बिठाएं

: छिनाल शब्द दिमागी दिवालियेपन की उपज : रवींद्र कालिया भी इस्तीफा दें : यह तो हद हो गई! अगर सीमा पार कर उद्दंड-अश्लील बन जाने का भय न होता तब मैं यहां श्लीलता की सीमापार वाले शब्दों का इस्तेमाल करता! वर्धा स्थित महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के उप-कुलपति विभूतिनारायण राय ऐसे दुस्साहस के लिए उकसा रहे हैं।

पगला गए हैं वीएन राय, इलाज कराओ

: वाचिक बलात्कार के अपराधी को सज़ा दो : बीएसएफ के पूर्व अधिकारी और वर्धा के महात्मा गाँधी विश्वविद्यालय के कुलपति, विभूति नारायण राय ने महिला लेखकों के बारे में जिस तरह की बात कही है, वह असंभव लगती है. लेकिन बात उनके बहुत करीबी साहित्यकार की निगरानी में छपी पत्रिका में कही गयी है, इसलिए गलत होने का कोई सवाल ही नहीं है.

‘छिनाल’ बोल कर फंस गए वीएन राय

कुलपति विभूति नारायण के ग्रह नक्षत्र खराब चल रहे हैं. दलित विरोधी होने और चोर गुरुओं को संरक्षण देने जैसे आरोपों से इधर थोड़ी राहत मिली थी कि उन्होंने ‘छिनाल’ शब्द बोलकर खुद को फिर फंसा लिया है. भारतीय ज्ञानपीठ की साहित्यिक पत्रिका ‘नया ज्ञानोदय’ ने ‘बेवफाई’ विषय के शीर्षक के साथ अपने ख़ास अंक में विभूति राय का साक्षात्कार किया था.