एडिटर दिनेश जुयाल को रास नहीं आए एनई अवधेश गुप्ता

अमर उजाला, कानपुर से खबर है कि न्यूज एडिटर के पद पर कार्यरत अवधेश गुप्ता ने इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के मुताबिक अवधेश नौ महीने पहले ही दैनिक जागरण, कानपुर से इस्तीफा देकर अमर उजाला, कानपुर के हिस्से बने थे. अमर उजाला में अवधेश की ये दूसरी पारी थे जो काफी छोटी रही. इस बात की चर्चा जोरों पर है कि संपादक दिनेश जुयाल खुद अवधेश गुप्ता को जागरण से अमर उजाला ले आए लेकिन वे 9 महीने तक ही अपने साथ रख सके. सूत्रों के अनुसार अवधेश अभी नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं. जल्द ही उनके किसी दूसरे ग्रुप में ज्वाइन करने की संभावना है. संभावना है कि वे दैनिक जागरण, नोएडा के साथ एक बार फिर से नई पारी की शुरुआत करें.

दो दशक से ऊपर का यह साथ खत्म हुआ

दस दिन पहले ही वीरेन दा और राजुल जी ने आश्वस्त किया था कि भाई साहब अब ठीक हैं, घर आ गए हैं। राजुल जी ने रात को बात करने की सलाह दी, जबकि वीरेन दा ने कहा कि अतुल जी जल्दी ही खुद फोन करेंगे। सुबह उनके बारे में चर्चा कर ही रहे थे कि दोपहर सवा बजे फोन पर मनहूस खबर मिली। अब वह कभी फोन नहीं करेंगे, न सुनेंगे और न बुलाकर समझाएंगे। दो दशक से ऊपर का यह साथ खत्म हुआ। 22 साल पहले उन्होंने ही मुझे मेरठ में बतौर सीनियर सब एडीटर नौकरी दी थी। मैं रात की पाली में काम करता था। गढ़वाल संस्करण छपने के बाद ही भाई साहब घर जाते थे और पहुंचते ही उनका फोन आता था। वह पेज और कॉलम नंबर गिना कर गलतियां बताते थे, और अगले संस्करण में उन्हें दुरुस्त करने को कहते थे।

संपादक दिनेश जुयाल ने मेरे साथ मारपीट की!

अमर उजाला, सैफई (इटावा) के पूर्व संवाददाता सुघर सिंह ने अमर उजाला, कानपुर के संपादक पर आरोप लगाया है कि उन्‍होंने उनके साथ मारपीट की.  उनका कहना है कि इस मामले में उन्‍होंने पुलिस में शिकायत की लेकिन मामला दर्ज नहीं हुआ है. मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर इस पूरे प्रकरण की जांच सीओ नजीराबाद, कानपुर सिटी निहारिका शर्मा कर रही हैं. इस मामले में अमर उजाला, कानपुर के संपादक दिनेश जुयाल का कहना है कि यह बिल्‍कुल झूठा और बेबुनियाद आरोप है. सुघर के बारे में कई शिकायतें मिली थीं. ब्‍लैकमेलिंग की भी शिकायत लगातार मिल रही थी. उसे कई बार चेताया गया, इसके बाद भी जब उसकी शिकायतें कम नहीं हुई तो उसे अखबार से निकाल दिया गया. इसके चलते ही वह तमाम तरह के अनर्गल आरोप लगा रहा है.

आफर लेटर में लिखा पद न मिला तो खफा हुए

अमर उजाला, कानपुर से खबर है कि स्थानीय संपादक दिनेश जुयाल की वादाखिलाफी के कारण हिंदुस्तान, कानपुर से इस्तीफा देने वाले एक पत्रकार ने अमर उजाला में काम करने से मना कर दिया. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करीब 15 दिन पहले अमर उजाला, कानपुर आफिस में वैभव शर्मा ने नई पारी की शुरुआत की थी. वे हिंदुस्तान, कानपुर से आए थे.

दिनेश जुयाल बनेंगे अमर उजाला, कानपुर के संपादक

दिनेश जुयालअमर उजाला, कानपुर के संपादक का भी नाम तय हो गया है। उम्मीद के मुताबिक, दिनेश जुयाल ही नए एडिटर होंगे। भास्कर, लुधियाना से इस्तीफा देने वाले अभिजीत मिश्रा को लखनऊ का आरई बनाए जाने के बाद से यह माना जाने लगा था कि अमर उजाला प्रबंधन अपने जमे-जमाए एडिटरों से छेड़छाड़ करने की जगह नए भर्ती किए गए लोगों को संपादक के खाली पदों पर एप्वाइंट करेगा।

नवीन जोशी को ही रिपोर्ट करेंगे अशोक पांडेय

दिनेश जुयाल के इस्तीफे से हिंदुस्तान प्रबंधन में हड़कंप : पुराने लोगों को रोकने की कवायद में जुटा एचआर : हिंदुस्तान, कानपुर के रेजीडेंट एडिटर बने अशोक पांडेय को लखनऊ के वरिष्ठ स्थानीय संपादक नवीन जोशी को ही रिपोर्ट करना होगा, यह बात अब तय हो चुकी है। इसके लिए एचआर ने बाकायदा एक आंतरिक मेल जारी कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक अशोक पांडेय के हिंदुस्तान, लखनऊ में ज्वाइन करने के बाद बैठक लेने और नवीन जोशी की बजाय सीधे शशि शेखर को रिपोर्ट किए जाने संबंधी सूचनाओं-खबरों के भड़ास4मीडिया पर प्रकाशित होने के बाद हिंदुस्तान में पहले से जमे वरिष्ठों में हलचल मच गई। इस परिघटना की तरफ एचआर के लोगों का ध्यान आकृष्ट किया गया और इस प्रवृत्ति को खतरनाक बताते हुए कई तरह की आशंकाएं जताई गईं।

हिंदुस्तान, देहरादून के आरई का इस्तीफा!

दिनेश जुयालदिनेश जुयाल के अमर उजाला जाने की चर्चा : खबर है कि दैनिक हिंदुस्तान, देहरादून के स्थानीय संपादक दिनेश जुयाल ने इस्तीफा दे दिया है। उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक दिनेश जुयाल अपने पूर्व संस्थान अमर उजाला वापस लौट रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि दिनेश जुयाल ने आज शाम दैनिक हिंदुस्तान, देहरादून के संपादकीय विभाग के कुछ लोगों को अपने इस्तीफे के बारे में जानकारी दे दी है। कहा जा रहा है कि वे अमर उजाला में मेरठ, कानपुर या देहरादून की यूनिट संभालेंगे। कुछ लोग उनके लखनऊ जाने की भी चर्चा कर रहे हैं पर अभी परिदृश्य स्पष्ट नहीं है। शशि शेखर के अमर उजाला से हिंदुस्तान जाने के बाद दोनों मीडिया हाउसों के संपादकीय विभागों में मची उथल-पुथल थमने का नाम नहीं ले रही है। जितने मुंह उतनी बातें हो रही हैं। कई तरह की अफवाह हवा में तैर रही है।

दिल्ली का एक दिन का स्थानीय संपादक

[caption id="attachment_14749" align="alignleft"]प्रिंटलाइन23 अप्रैल 2009 की दैनिक हिंदुस्तान, दिल्ली की प्रिंटलाइन में स्थानीय संपादक के रूप में दिनेश जुयाल का नाम[/caption]दिल्ली ने बहुतों को बनते-बिगड़ते-उजड़ते-बसते देखा है। ‘कुर्सी मद’ में चूर रहने वालों की कुर्सी खिसकने पर उनके दर-दर भटकने के किस्से और दो जून की रोजी-रोटी के लिए परेशान लोगों द्वारा वक्त बदलने पर दुनिया को रोटी बांटने के चर्चे इसी दिल्ली में असल में घटित होते रहे हैं। दिल्ली के दिल में जो बस जाए, उसे दिल्ली बसा देती है। दिल्ली की नजरों से जो गिर जाए, दिल्ली उसे भगा देती है। दिल्ली में स्थायित्व नहीं है। दिल्ली में राज भोगने के मौके किसी के लिए एक दिन के हैं तो किसी [caption id="attachment_14750" align="alignright"]प्रिंटलाइन24 अप्रैल 2009 की दैनिक हिंदुस्तान, दिल्ली की प्रिंटलाइन में स्थानीय संपादक के रूप में प्रमोद जोशी का नाम[/caption]के लिए सौ बरस तक हैं, बस, दिल्ली को जो सूट कर जाए। पर यहां बात हम राजे-महाराजाओं या नेताओं की नहीं करने जा रहे। बात करने जा रहे हैं हिंदी पत्रकारिता की। क्या ऐसा हो सकता है कि दिल्ली से दूर किसी संस्करण के स्थानीय संपादक का नाम उसी अखबार के राष्ट्रीय राजधानी के एडिशन में बतौर स्थानीय संपादक सिर्फ एक दिन के लिए छप जाए? ऐसा मजेदार वाकया हुआ है और यह हुआ है वाकयों के लिए मशहूर दैनिक हिंदुस्तान में। जी हां, दैनिक हिंदुस्तान, दिल्ली का 23 अप्रैल 2009 का अंक देखिए। इसके अंतिम पेज पर बिलकुल नीचे प्रिंटलाइन पर जाइए। इसमें स्थानीय संपादक का नाम प्रमोद जोशी नहीं लिखा मिलेगा। वहां नाम लिखा मिलेगा दिनेश जुयाल का। दिनेश जुयाल भी दैनिक हिंदुस्तान में हैं और स्थानीय संपादक हैं, लेकिन वे दिल्ली के नहीं बल्कि देहरादून संस्करण के स्थानीय संपादक हैं। 23 अप्रैल को जिन पत्रकारों की निगाह प्रिंटलाइन पर पड़ी, वे सभी चौंके थे।