पत्रकारिता के पाठ्यक्रम में सुधार की जरूरत : गोविन्द सिंह

देहरादून। हिन्दुस्तान के एसोसिएट एडिटर गोविन्द सिंह का मानना है कि आज की पत्रकारिता को और अधिक गुणवत्तायुक्त बनाने के लिए उसके वर्तमान पाठ्यक्रमों में सुधार की सख्त जरूरत है। गोविन्द सिंह एसएस जीना परिसर के हिन्दी व पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित एक गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।

‘कादंबिनी’ के दो-दो संपादक!

मृणाल पांडेय के जमाने में विष्णु नागर ‘कादंबिनी’ छोड़ नई दुनिया गए तो विजय किशोर मानव को इस पत्रिका का संपादक बना दिया गया. यह बात अगस्त महीने 2008 की है. समय का पहिया ऐसा चला कि हिंदुस्तान प्रबंधन ने मृणाल पांडेय के हाथों ‘हिंदुस्तानियों’ की जमकर छंटनी कराने के बाद उनके भी चले जाने की स्थितियां निर्मित कर दी.

विजय किशोर मानव की जगह लेंगे गोविंद सिंह!

कादंबिनी के नए संपादक गोविंद सिंह होंगे. यह करीब-करीब तय हो गया है. अभी संपादक के रूप में विजय किशोर मानव काम देख रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक वे जल्द ही रिटायर होने वाले हैं. उनके रिटायर होने के बाद कादंबिनी को गोविंद सिंह के हवाले कर दिया जाएगा. फिलहाल गोविंद को एडिट पेज का काम दिया गया है. कार्यकारी संपादक पद पर हिंदुस्तान ज्वाइन करने वाले गोविंद की यह 11वीं नौकरी है. पहली नौकरी में वे हिंदी अनुवादक बने थे. पोस्टिंग देहरादून के आईसीएआर (इंडियन काउंसिल आफ एग्रीकल्चरल रिसर्च) में हुई. वहां मन नहीं लगा तो 82 में टाइम्स के ट्रेनी जर्नलिस्टों के बैच में सेलेक्ट होकर मुंबई चले आए. वहां धर्मयुग और नवभारत टाइम्स में ट्रेनिंग ली.

गोविंद सिंह को भी ‘हिंदुस्तानी’ बनाएंगे शशि शेखर

अमर उजाला के एक्जीक्यूटिव एडिटर गोविंद सिंह ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने प्रबंधन को इस्तीफे का नोटिस भेज दिया है. हालांकि उनका इस्तीफा अभी स्वीकार नहीं किया गया है और अमर उजाला प्रबंधन से उनकी बातचीत जारी है. गोविंद अमर उजाला छोड़कर ‘हिंदुस्तान’ जाने की तैयारी कर चुके हैं. उन्हें ‘हिंदुस्तानी’ बनने का न्योता शशि शेखर की ओर से आ चुका है. शशि शेखर जबसे अमर उजाला छोड़ ‘हिंदुस्तान’ के मुख्य संपादक बने हैं, अमर उजाला के वरिष्ठों को एक-एक कर ले जाने में लगे हुए हैं. सुधांशु श्रीवास्तव, प्रताप सोमवंशी, अशोक पांडेय के बाद अब गोविंद सिंह भी शशि की टीम का हिस्सा बनने जा रहे हैं. 

डीपी पर भारी पड़ेंगे एनपी?

ईई की संख्या 5 हुई : शशि शेखर के जाने के बाद अमर उजाला में किसी को ग्रुप एडिटर के पद पर लाने की जगह एक्जीक्यूटिव एडिटर के रूप में काम देख रहे देवप्रिय अवस्थी उर्फ डीपी अवस्थी को ही संपादकीय विभाग का नेता अघोषित रूप से मान लिया गया है. हालांकि डीपी के अलावा चार अन्य एक्जीक्यूटिव एडिटर भी इस अखबार में हैं लेकिन अमर उजाला के निदेशक अतुल माहेश्वरी डीपी अवस्थी से ही सारे कामधाम की रिपोर्ट लेते हैं इसलिए अघोषित रूप से उन्हें ही ग्रुप एडिटर जैसा माना जाने लगा है. इसके पीछे भी वजह है. सुधांशु श्रीवास्तव के इस्तीफा देकर हिंदुस्तान जाने के बाद इनपुट का काम भी डीपी अवस्थी को दे दिया गया. डीपी आउटपुट का काम पहले से ही देख रहे थे. इस तरह इनपुट-आउटपुट, दोनों का काम देखने के कारण सारी यूनिटों व संपादकों से कोआर्डिनेशन का डायरेक्ट का काम डीपी अवस्थी के जिम्मे आ गया. नरेंद्रपाल सिंह उर्फ एनपी के एक्जीक्यूटिव एडिटर के पद पर आने से ईई की संख्या कुल पांच हो गई है. शंभूनाथ शुक्ला, गोविंद सिंह, डीपी अवस्थी और उदय सिन्हा, ये चार एक्जीक्यूटिव एडिटर पहले से कार्यरत हैं.