कितना बुरा हाल है हिंदी मीडिया का. अमर उजाला के मालिक के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दायर कर दी, और इसकी खबर सभी हिंदी अखबार और न्यूज चैनल पी गए. किसी अखबार में एक लाइन नहीं. अगर कहीं भूले भटके होगी भी तो उसमें अमर उजाला और अतुल माहेश्वरी का नाम न होगा. इंटरनेट पर गूगल व याहू के न्यूज सेक्शन में जब सीबीआई, अंकुर चावला, अतुल माहेश्वरी, चार्जशीट आदि हिंदी शब्दों के जरिए खबरों को तलाशा गया तो कोई रिजल्ट न आया.
पर जब अंग्रेजी में atul maheshwari लिखकर गूगल के न्यूज सेक्शन में सर्च किया गया तो चार रिजल्ट आए. टाइम्स आफ इंडिया, हिंदुस्तान टाइम्स और कुछ अन्य इंग्लिश वेबसाइट्स पर सीबीआई चार्जशीट वाली खबर प्रकाशित है. अंग्रेजी वालों ने प्रकाशित तो किया. भले ही दबा कर, बचा कर, लेकिन हिंदी वाले तो पूरी की पूरी खबर पी गए. यही चार्जशीट अगर किसी गैर मीडिया शख्सियत के खिलाफ दाखिल हुई होती तो हिंदी अखबार वाले मूल खबर के साथ एक अलग से विशेष पेज प्रकाशित करते जिसमें विस्तार से जिक्र होता कि अपराध क्या है, कब हुआ, कैसे हुआ, कौन-कौन फंसा, सीबीआई पर कहां कहां से दबाव पड़े और जो लोग फंसे हैं उनकी अतीत क्या रहा है…. आदि इत्यादि. लेकिन मीडिया वाले जब खुद नंगई (रिश्वत दिलवाना, देना, जज को पटाना, दूसरे का हिस्सा हड़पने की कोशिश करना… ये सब नंगई ही तो है) करते हुए पकड़े जाते हैं तो सबके सब एक साथ चुप्पी साध लेते हैं.
इन मीडिया हाउसों के पैसे से चलने वाली मीडिया वेबसाइट्स भी चुप्पी साध लेती हैं क्योंकि मीडिया वेबसाइट्स का मतलब ही है मीडिया हाउसों का पीआर करना, अच्छी अच्छी खबरें छापने, ब्रांड बिल्डिंग के लिए सफलता की छोटी खबर को बढ़ा चढ़ा कर पेश करना, भ्रष्ट और अनैतिक मालिकों को हीरो की तरह पेश करना. पर भास्कर घराने का अंदरुनी विवाद रहा हो या अमर उजाला का, भड़ास4मीडिया ने इस प्रकरण को बिना डरे, बिना हिचके लगातार प्रकाशित किया और डंके की चोट पर प्रकाशित किया. बहुत से बड़े नामों के खिलाफ खबरें आईं तो उन्हें भी प्रकाशित किया गया. इन खबरों को रोकने के लिए कई तरह के दबाव आए पर भड़ास4मीडिया ने कभी किसी से कोई समझौता नहीं किया.
पर सवाल यही है कि क्या ऐसी खबरें छापने का ठेका सिर्फ भड़ास4मीडिया के पास है. उस भड़ास4मीडिया के पास जो व्यवस्थित व संगठित उपक्रम नहीं है, जो संसाधन विहीन, बाजार विरोधी है. धारा के खिलाफ, पूंजी के खिलाफ, बाजार के खिलाफ चलने, तैरने, बोलने का कोई भी भावुक जज्बा देर तक कायम नहीं रहता. इसका अंत होता है, देर-सबेर. तो फिर क्या मान लिया जाए कि इस देश में अखबारों, न्यूज चैनलों के जरिए प्रायोजित सच, आंशिक सच, बाजार-सत्ता हितैषी सच ही जन-मानस तक पहुंच पाएगा, बाकि सचों का गला मुंबई-दिल्ली के मीडिया सेठों की कोठियों के पिछवाड़े बने सरवेंट क्वार्टर में घोंट दिया जाएगा ताकि सच को गरीब बताकर उसकी जवान मौत को जांच का विषय बनने से रोका जा सके!
-यशवंत
एडिटर
भड़ास4मीडिया












Rajesh Vajpayee Jansandesh Unnao
October 6, 2010 at 8:01 pm
Dekha-padha-guna aur ab samajh may aya ki YASHWANT kya hai.
such likhaney ki himmat ka paryayvachi bankar jo chamka hai us roshani ko
kahatey hai
YASHWANT
A rey bade honey ka dambh bharnay waley media jagat k pratisthano kuch sarm baki rakho taki desh k pathak tumahey baray mein thodi akchi dharna banaye rakhey.
Ravinder Singh
October 6, 2010 at 7:30 pm
yashwant ji essa hi khuch us wakt bhi hua tha jab…. JAGARAN ne haryana ke patrkaro ki purskar Rashi Wapis leni chahi thi…… Lekin Meri Khabar Bhadas par lagne ke Baad JAGARAN ne Apne Patrkaro ki Rashi Wapis kar di thi…… Itna hi nhi mere Zile ke JAGRAN wale Patrakar Bhai bhi is liye Mujse Naraj Ho gaye ki mene unki Khabar Bina unki jankari ke Bhadas Par Daal di…… Matalb Annyay karne Wale or Sahne Wale ek Saman darje ke he…..
Rizwan Mustafa
October 6, 2010 at 9:03 pm
garib patrkaro ki mazduri marenge unko dalali karne ke liye uksayenge to hashr to in baniyao ka theek kaha hoga, yeh akhabar bhi sirf dam kamane ke liye kar rahe hai, jute rahiye yashwant bhai
sandip thakur
October 6, 2010 at 10:47 pm
yashwantjee,Prabhu chawala,Ankur chawala ya Atul maheshwari itne wari top nahi hain jeske bare mein hindi media lekh na sake.chargesheetwali khabar DElhi,Mumbai $ Pune se publish hone wale hindi daily HAMARA MAHANAGAR mein page one per chapi hai.Aap ki nazaro se yeh newspaper gujra nahi is leye aap ne apni bhadas hindi paper aur patrakaro per nekali haio.khabar ki hard copy bhej raha hun,plese publish it.aur haan,khabar mein sare accused ka naam bhi hai.
Sandip thakur
Metro Editor
Hamara Mahanagar
aasif
October 7, 2010 at 12:58 am
ek hindi paper mai aaj ye news chapi hai. yashwant ji, dla delhi edition date 06 oct ka page 2, agra edition page 14 aur jhansi edition page 8 dekhe.
neeru
October 7, 2010 at 1:53 am
very good yashwant ji,
keep it up. aapki lekhni me khafi dam hai…….
BIJAY SINGH
October 7, 2010 at 4:06 am
sach kahte hain yashwant bhai.
sach to chapna hi chahiye.
यशवंत
October 7, 2010 at 5:58 am
दिल्ली से प्रकाशित हमारा महानगर अखबार में मेट्रो एडिटर संदीप ठाकुर ने इस प्रकरण पर खबर प्रकाशित की है. पूरी खबर भड़ास4मीडिया के पास आई है. हमारा महानगर व संदीप ठाकुर को बधाई, कि उन्होंने साहस के साथ खबर का प्रकाशन किया. प्रकाशित खबर इस प्रकार है….
प्रभु चावला के बेटे सहित छह के खिलाफ सीबीआई की चार्ज शीट
संदीप ठाकुर
नई दिल्ली। ‘इंडिया टुडे’ के संपादक और ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर प्रभु चावला के बेटे अंकुर चावला सहित छह अभियुक्तों के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने चार्ज शीट दायर की है। मंगलवार को पटियाला हाऊस में दायर चार्ज शीट में कहा गया है कि छह अभियुक्तों ने उत्तर प्रदेश के एक बड़े मीडिया हाऊस को फायदा पहुंचाने के लिए मिल-जुलकर अपराधिक षड्यंत्र के तहत रिश्वतखोरी का खेल खेला था।
लंबी जांच के बाद जिन छह अभियुक्तों के खिलाफ चार्ज शीट दायर की गई है उनमें अंकुर चावला (वकील), आर. वासुदेवन (कंपनी लॉ बोर्ड के तत्कालीन सदस्य), मनोज बंथिया (तत्कालीन कंपनी सेक्रेट्री), अतुल महेश्वरी (अमर उजाला ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर), विकास शुक्ला (अंकुर चावला का निजी सहायक) और हर्षवर्धन लोढ़ा (चार्टड एकाउंटेंट) हैं।
सीबीआई सूत्रों के मुताबिक गत वर्ष नवंबर महीने में जूनियर चावला ने बतौर वकील उत्तर प्रदेश के एक बड़े अखबार ‘अमर उजाला’ ग्रुप के आपसी अंदरूनी झगड़े को निपटाने के लिए 10 लाख रुपए की रिश्वत देने के लिए तत्कालीन कंपनी सेक्रेट्री मनोज बंथिया से संपर्क साधा था। बंथिया ने कंपनी लॉ बोर्ड के सदस्य आर. वासुदेवन को भी रिश्वत की पेशकश की थी। ऐन वक्त पर सीबीआई ने छापा मारकर मामले का पर्दाफाश किया था। इस सिलसिले में बंथिया और वासुदेवन दोनों को गिरतार किया गया था, जबकि दलाल की भूमिका निभाने वाले अंकुर चावला से कड़ी पूछताछ की गई। बताया जाता है कि अंकुर चावला को सीबीआई उनके पिता प्रभु चावला के रसूख और राजनीतिक गलियारों में ऊंची पहुंच के कारण गिरतार नहीं कर पाई, लेकिन उनसे इस मामले में कड़ी पूछताछ की गई थी।
गिरतारी के बाद सीबीआई ने बंथिया और वासुदेवन के ठिकानों पर छापेमारी कर करीब डेढ़ करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्ति का पता लगाया था। अंधी कमाई का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वासुदेवन के दिल्ली और चेन्नई स्थित घर और लॉकर से सीबीआई को 85 लाख 33 हजार रुपए नगद मिले थे। वासुदेवन पर अरबों रुपए के सत्यम घोटाले की छाया भी पड़ी थी। उस समय वासुदेवन दक्षिणी क्षेत्र के रिजनल डायरेक्टर होने के साथ-साथ कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के (इंविस्टीगेशन और इंस्पेक्शन) के निदेशक भी थे। सीबीआई सूत्रों ने बताया कि इस मामले में जांच के दौरान अधिकारियों को भारी दबाव के तहत काम करना पड़ा था, क्योंकि मामले से जुड़े अधिकांश लोग ऊंची पहुंच वाले हैं। लेकिन जांच अधिकारियों ने तमाम दबावों और परेशानियों के बावजूद जांच का काम पूरा किया और आज पटियाला हाऊस के स्पेशल जज के कोर्ट में चार्ज शीट दायर की गई। सीबीआई द्वारा इस सिलसिले में मंगलवार को जारी एक बयान चौंकाने वाला है। सीबीआई ने कहा है कि जांच तो पूरी हो चुकी है, लेकिन यह अंतिम सत्य नहीं है। कानून की नजर में कोई भी अभियुक्त तब तक मुजरिम नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि उस पर लगाए गए आरोप सिद्ध न हो जाएं।
Hemant Tyagi(Journalist) Ghaziabad
October 7, 2010 at 10:20 pm
very well said yashwat ji
Manish kumar malhotra
October 8, 2010 at 10:02 pm
Good Yashwant Ji,
Inke saath to Isse bhi bura hona chahiye ye log bekasur logo ko saja dete hai, ye to suruat hai.
prashant awasthi
October 11, 2010 at 2:11 pm
ऐसा नहीं है यशवंत जी
आप सभी लोगों ने गौर नहीं किया कि डीएलए ने 6 अक्टूबर के अंक में इस खबर को छापा था
वासुदेवन समेत छह के खिलाफ चार्जशीट
– आरोपियों में अतुल माहेश्वरी और वकील अंकुर चावला का भी नाम
शशिशेखर त्रिपाठी
October 11, 2010 at 4:15 pm
बिल्कुल सही कहा यश्वंत जी, किसी के दोष देखने वाले को सबसे पहले खुद को बेदाग रखना होगा। कुलमिलाकर एंटीवायरस ही जब वायरस से प्रभावित हो जाए तो स्थिति खराब हो जाती है.. इसलिए सभी मीडिया से जुड़े लोगों को ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे उनकि छवि धूमिल हो… भले ही वह हम हो .. या आप हो… या किसी अखबार का मालिक हो… क्योंकि ऊपर वाले के सर्वर में सबकी रिपोर्ट सेव होती रहती है…. ऊपर वाले की चार्टशीट जब आती है तब हलका भारी सभी तुल जाते हैं
सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
October 13, 2010 at 3:40 am
यह कबर तथाकथित राष्ट्रीय स्तर के हिंदी अकबारों में तो नहीं ही आयी। इसलिए यशवंत जी की उलझन अपनी जगह सही है।