चार्जशीट वाली खबर किसी हिंदी अखबार में नहीं

कितना बुरा हाल है हिंदी मीडिया का. अमर उजाला के मालिक के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दायर कर दी, और इसकी खबर सभी हिंदी अखबार और न्यूज चैनल पी गए. किसी अखबार में एक लाइन नहीं. अगर कहीं भूले भटके होगी भी तो उसमें अमर उजाला और अतुल माहेश्वरी का नाम न होगा. इंटरनेट पर गूगल व याहू के न्यूज सेक्शन में जब सीबीआई, अंकुर चावला, अतुल माहेश्वरी, चार्जशीट आदि हिंदी शब्दों के जरिए खबरों को तलाशा गया तो कोई रिजल्ट न आया.

अतुल माहेश्वरी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

कंपनी लॉ बोर्ड (सीएलबी) रिश्वत कांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अपनी जांच पूरी कर चार्जशीट दाखिल कर दी है. चार्जशीट स्पेशल सीबीआई जज ओपी सैनी की पटियाला हाउस स्थित अदालत में दाखिल किया गया. चार्जशीट में अमर उजाला के निदेशक अतुल माहेश्वरी, सीएलबी के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष आर. वासुदेवन, कंपनी सेक्रेटरी मनोज बंथिया, चार्टर्ड एकाउंटेंट हर्षवर्धन लोढा, सीएलबी में अमर उजाला के वकील अंकुर चावला और विकास शुक्ला के नाम हैं.

कोर्ट में अतुल माहेश्वरी की घेरेबंदी शुरू

: कोर्ट ने सीबीआई को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा : अगली सुनवाई 17 जनवरी को : आज दिल्ली हाईकोर्ट के कोर्ट नंबर तीस में अमर उजाला के मालिकों के झगड़े की सुनवाई शुरू हुई. अशोक अग्रवाल की तरफ से दायर याचिका पर उनके वकीलों ने अपना पक्ष रखा. अतुल माहेश्वरी व सीबीआई की तरफ से भी वकील पेश हुए. कोर्ट ने सुनवाई के बाद अतुल माहेश्वरी को नोटिस भेजने / जवाब देने / पक्ष रखने और सीबीआई को पूरे मामले में स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा.

अशोक अग्रवाल ने किया अतुल पर मुकदमा

: साथ में सीबीआई को भी कोर्ट में घसीटा : सुनवाई आज होगी : अमर उजाला समूह के मालिक अतुल माहेश्वरी फिर नई मुसीबत में फंसने जा रहे हैं. उन्हें अमर उजाला ग्रुप के चेयरमैन अशोक अग्रवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में घसीटा है. साथ ही सीबीआई पर भी मुकदमा ठोका है. सूत्रों के मुताबिक अशोक अग्रवाल ने अपनी याचिका में सीबीआई पर अतुल माहेश्वरी के मामले में ढील बरतने, अतुल पर कंपनी विवाद निपटाने में अनैतिक तरीके अपनाने समेत कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

अशोक अग्रवाल के करीबियों पर गिर रही गाज

प्रभात रंजन दीन एंड कंपनी को नया काम मिला : भास्कर के डिप्टी एडिटर मानवर्द्धन कंठ हिंदुस्तान पहुंचे : दैनिक जागरण के आनंद राय और विजय उपाध्याय का ट्रांसफर : दैनिक जागरण सेंट्रल डेस्क के विजय झा ने भास्कर का दामन थामा : अमर उजाला, मेरठ से रामानुज का इस्तीफा : दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर से कई महत्वपूर्ण सूचनाएं मिली हैं. ये सूचनाएं आनंद राय, राजेश शुक्ला, सुरेंद्र प्रसाद सिंह, विजय झा, मानवर्द्धन कंठ, प्रभात रंजन दीन, अतुल कुमार, विजय सिंह यादव, राजेश पटेल से संबंधित हैं. सबसे पहले सुरेंद्र सिंह के बारे में. अमर उजाला, आगरा के चीफ रिपोर्टर के रूप में लंबे समय से कार्यरत सुरेंद्र सिंह इस संस्थान से कार्यमुक्त हो गए हैं.

अतुल माहेश्वरी व अशोक अग्रवाल में नया झगड़ा

अमर उजाला के कर्ताधर्ताओं की एक और कंपनी में झगड़ा शुरू हो चुका है. सूत्रों के अनुसार कोलकाता में रजिस्टर्ड एक फाइनेंस कंपनी के दो तिहाई हिस्सेदार अतुल माहेश्वरी और राजुल माहेश्वरी हैं. अशोक अग्रवाल व अन्य भी इस कंपनी के हिस्सेदार हैं लेकिन अल्पमत में हैं. अशोक अग्रवाल व अन्य ने इस कंपनी में पक्षपात, बंटवारे आदि से संबंधित एक शिकायती अर्जी कोलकाता स्थित कंपनी लॉ बोर्ड (सीएलबी) के आफिस में लगा दी है.

अजय की मेहनत है डीएलए : अशोक अग्रवाल

डीएलए का चौथा स्थापना दिवस सुलहकुलनगरी आगरा में धूमधाम से मनाया गया. आगरा के सेंट पीटर्स कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में हजारों की संख्या में नागरिक उपस्थित थे. समारोह में अमर उजाला पत्र समूह के चेयरमैन अशोक अग्रवाल ने कहा कि मैं बहुत रोमांचित हूं. उन्होंने सम्मानित शख्सियतों को अंतर्मन से बधाई देते हुए कहा कि आज डोरीलाल जी का सारा परिवार यहां मौजूद है, अगर कोई एक नाम खो रहा है तो वह नाम है, मेरे छोटे भाई अनिल का. उन्होंने कहा कि सबसे छोटे भाई अजय अग्रवाल की लगन, परिश्रम, परिस्थितियों से जूझने की क्षमता का परिणाम है डीएलए.

पूरा अमर उजाला खरीदेंगे अशोक अग्रवाल?

कंपनी लॉ बोर्ड में ठोंक सकते हैं दावा : अग्रवाल परिवार फिर से एकजुट हो गया : अमर उजाला के संस्थापक स्वर्गीय डोरीलाल अग्रवाल के परिजन फिर से एक हो गए हैं. अजय अग्रवाल और सौरभ आनंद को अमर उजाला से जब अलग किया जा रहा था तो अशोक अग्रवाल अपने ही भाई और भतीजे के विरोध में खड़े हो गए थे. वे तब अतुल माहेश्वरी-राजुल माहेश्वरी के साथ थे. अब जब अशोक अग्रवाल को भी अमर उजाला से अलग करने की तैयारी हो गई है तो उन्हें अपनी गलती का एहसास होने लगा है. स्वर्गीय अनिल अग्रवाल के पुत्र सौरभ आनंद, अशोक अग्रवाल और अजय अग्रवाल, तीनों लोगों का मिलाकर एक जमाने में अमर उजाला में कंट्रोलिंग शेयर हुआ करता था. पर अजय अग्रवाल और सौरभ आनंद को उनके हिस्से का पैसा देकर अमर उजाला से अलग कर दिए जाने के बाद अग्रवाल परिवार की तरफ से अशोक अग्रवाल लगभग 18 फीसदी के मालिक रह गए हैं. अमर उजाला के करीब 26 फीसदी शेयर उस विदेशी कंपनी (डीई शॉ) के पास है जिसने कई सौ करोड़ रुपये उधार दिए हुए हैं. इन्हीं पैसों से अजय अग्रवाल और सौरभ आनंद के हिस्से की रकम अदा कर उन्हें अमर उजाला से विदा किया गया. इस वक्त करीब 54 या 56 फीसदी शेयर अतुल माहेश्वरी और राजुल माहेश्वरी के पास है. मतलब, कंट्रोलिंग शेयर माहेश्वरी बंधुओं के पास है.

सीबीआई क्यों है अंकुर चावला और अतुल माहेश्वरी पर मेहरबान?

अमर उजाला में ‘इंडिपेंडेंट प्रेसीडेंट’ नियुक्त करने के मामले में ‘फेवरेबल डिसीजन’ देने के लिए रिश्वत लेने वाले कंपनी ला बोर्ड के सदस्य आर. वासुदेवन की जमानत याचिका पर पिछले दिनों सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने जो गंभीर टिप्पणियां मामले की जांच एजेंसी सीबीआई पर की हैं, उसकी एक कापी भड़ास4मीडिया के हाथ लगी है. कोर्ट की कुछ टिप्पणियों को यहां प्रकाशित भी किया जा रहा है.

अतुल माहेश्वरी से पूछताछ, वासुदेवन को जमानत

कोर्ट ने वासुदेवन से कहा- हर हफ्ते सीबीआई मुख्यालय में हाजिरी लगाएं और शहर छोड़कर न जाएं : खबर है कि एयू-सीएलबी रिश्वतकांड में केंद्रीय जांच ब्यूरो के अधिकारियों ने पिछले महीने दिसंबर के मध्य में अमर उजाला के निदेशक अतुल माहेश्वरी को सीबीआई मुख्यालय बुलाकर कई घंटे पूछताछ की थी. यह पूछताछ कंपनी ला बोर्ड के तत्कालीन कार्यवाहक अध्यक्ष आर. वासुदेवन को अंकुर चावला और मनोज बंथिया के जरिए रिश्वत दिए जाने और अमर उजाला के मालिकाना हक में झगड़े के संबंध में की गई. सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने पूछताछ के लिए अतुल माहेश्वरी को नोटिस भेजा था. अतुल माहेश्वरी नियत तारीख को नियत समय पर सीबीआई मुख्यालय पहुंचे. सूत्रों के मुताबिक सीबीआई के अधिकारियों ने अतुल माहेश्वरी से अंकुर चावला और मनोज बंथिया से रिश्तों, संपर्क, मालिकाना हक संबंधी झगड़े के नए-पुराने मामलों के बारे में काफी गहराई से सवाल किए.

पीटीआई की कापी का एक साथी ने भेजा अनुवाद

शुक्रिया भाई. अनुवाद करके तुरंत भेजने के लिए. पर आपने अपना नाम न छापने और बताने को कहा है, सो, मैं नहीं बता रहा. पर आपके प्रति आभार जताने का हक तो है ही. साथी ने जो अनुवाद भेजा है, वह पूरा का पूरा यहां प्रकाशित किया जा रहा है. -यशवंत, भड़ास4मीडिया


अतुल माहेश्वरी और अंकुर चावला गए कहां!!!

एयू-सीएलबी रिश्वतकांड : कोर्ट ने सीबीआई को लगाई कड़ी फटकार : कल दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीके शाली ने सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई. कोर्ट ने पूछा- ‘सीबीआई यह क्यों नहीं पता लगा रही कि सीएलबी के मेंबर को दस लाख रुपये रिश्वत देने के लिए आए कहां से?’ न्यायमूर्ति वीके शाली ने सीबीआई से कहा- ”मैंने पूरी इनवेस्टीगेशन रिपोर्ट पर नजर मारा. पेज एक से पेज 110 तक पढ़ डाला. कहीं पर भी अंकुर चावला और अतुल माहेश्वरी के बारे में कुछ नहीं है. ऐसा क्यों? फिर दस लाख रुपये रिश्वत के आए किधर से? कैसी जांच हो रही है! रिसेप्शन वाले, होटल क्लर्क, नौकरों की जांच-पड़ताल कर रहे हो. उन सभी की इनक्वायरी कर रहे हो जिनका इस प्रकरण में सीधे कोई भूमिका नहीं दिख रही है. लेकिन उनकी नहीं कर रहे हो जो सीधे-सीधे इसमें शामिल हैं. मुझे जानना है कि दस लाख आए कहां से? वैसे, यह साफ-साफ दिख रहा है कि रिश्वत देने के सोर्स कौन हैं. सिर्फ फोन से बातचीत के तथ्य मिले हैं, वही काफी कुछ इशारा कर रहे हैं.”


सरकारी गवाह बनेंगे वकील अंकुर चावला?

अमर उजाला –  सीएलबी रिश्वत कांड में आरोपियों की हिरासत बढ़ी : खबर है कि अमर उजाला – कंपनी ला बोर्ड (सीएलबी) रिश्वत कांड में प्रभु चावला के वकील पुत्र अंकुर चावला सरकारी गवाह बनकर केंद्रीय जांच ब्यूरो का सहयोग करने के लिए तैयार हो गए हैं। उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस रिश्वतकांड में खुद को बुरी तरह फंसते देख अंकुर चावला सारी सच्चाई उगलकर खुद को माफी पाने लायक बनाना चाहते हैं। अंकुर चावला के सरकारी गवाह बनने से सीबीआई का भी काम आसान हो जाएगा क्योंकि सीबीआई के लिए सबसे बड़ी मछली तो आर. वासुदेवन हैं।

Prabhu, Jhilmil colony, Chawla

विवेक शुक्लाIn his outstanding piece on Prabhu Chawla, Bhai Alok Tomar made one error that he used to live in Vivek Vihar. Fact of the matter is that Chawla had an ancestral home in Jhilmil Colony, which is at shouting distance from Vivek Vihar. He lived in Jhilmil colony for decades together. He has deep roots there. Not many people perhaps know that he is responsible for the making of Yamuna sports complex, which is very close to Jhilmil colony.His father got house in that area as plots were allotted to refugees of Pakistan in late 50s and early 60s.  And when his father passed away, the then president of India, Giani Zail Singh came at his house. Chawla stayed in Vivek Vihar for some years on rent in perhaps house number C-145. One more thing. He used to enact the role of Raja Dashtrath in Jhilmil colony Ramlila before he made big in the world of journalism.

अंकुर चावला- जैसी ”प्रभु” इच्छा

आलोक तोमरकेंद्रीय लॉ बोर्ड के सदस्य और कार्यकारी मुखिया आर वासुदेवन हालांकि अमर उजाला अखबार समूह से दस लाख रुपए रिश्वत मांगने और सात लाख रुपए पाने के मामले में तिहाड़ जेल में बंद हैं लेकिन अब तक उनके ठिकानों पर हुई तलाशी में एक करोड़ चालीस लाख रुपए नकद और करीब एक करोड़ रुपए के गहने बरामद किए जा चुके हैं। वासुदेवन कुख्यात सत्यम घोटाले की भी जांच कर रहे थे। उन्हें रकम पहुंचाने वाला कंपनी सेक्रेटरी मनोज बाठिया भी हिरासत में है। लेकिन इस पूरे मामले के सूत्रधार वकील अंकुर चावला से पूछताछ हुई, बाठिया के साथ बिठा कर तथ्यों की पड़ताल हुई और उसके बाद उसे घर जाने दिया गया। आखिर अंकुर चावला देश के सबसे चर्चित संपादक प्रभु चावला के बेटे हैं। प्रभु चावला जिंदगी भर दिल्ली में जमुना पार विवेक विहार में रहे और मगर बेटे का कार्यालय डिफेंस कॉलोनी जैसी शानदार बस्ती में है।

चावला से सीबीआई ने पूरे दिन की पूछताछ

वासुदेवन के पास से एक करोड़ रुपये मिले : अभी चौथा लाकर खोला जाना बाकी : सीबीआई हिरासत खत्म, जेल भेजा गया : अंकुर चावला और मनोज बंथिया का कराया जाएगा आमना-सामना : अतुल माहेश्वरी से भी होगी पूछताछ : अमर उजाला के मालिकों के मुकदमे में निर्णय प्रभावित करने के लिए कंपनी लॉ बोर्ड के तत्कालीन सदस्य और कार्यवाहक अध्यक्ष आर. वासुदेवन को रिश्वत दिए जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है। आर. वासुदेवन की सीबीआई हिरासत अवधि आज पूरी होने के बाद उन्हें अदालत ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं रिश्वत की रकम वासुदेवन तक पहुंचाने वाले निजी कंपनी सेक्रेटरी मनोज बंथिया की सीबीआई हिरासत अवधि एक दिन के लिए और बढ़ा दी गई है। बंथिया से कल भी पूछताछ होगी। इस बीच, अमर उजाला के निदेशक अतुल माहेश्वरी के पक्ष में कंपनी लॉ बोर्ड में मुकदमा लड़ने वाले प्रभु चावला के वकील बेटे अंकुर चावला से सीबीआई ने आज पूरे दिन पूछताछ की।

अतुल माहेश्वरी और अंकुर चावला को नोटिस

सीबीआई ने पूछताछ के लिए बुलाया : अतुल माहेश्वरी और अंकुर चावला बुरे फंस सकते हैं। संकेत मिलने लगे हैं। सीबीआई के सूत्र बोल रहे हैं। काफी कुछ अभी तक आफ द रिकार्ड था। लेकिन गिरफ्तार लोगों से रिमांड पर हुई पूछताछ से बहुत कुछ ठोस संकेत मिलने शुरू हो गए हैं। कंपनी ला बोर्ड (सीएलबी) में पहुंचे अमर उजाला के मालिकों (डायरेक्टर्स) के झगड़े में एक पक्ष को राहत न देने के लिए दी गई घूस के मामले में अमर उजाला के अतुल माहेश्वरी और प्रभु चावला के वकील पुत्र अंकुर चावला अब सीबीआई के निशाने पर आ गए लगते हैं। सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक आज अतुल माहेश्वरी और अंकुर चावला समेत कई लोगों को नोटिस जारी किया गया है।

पीटीआई की खबर को ही पब्लिश कर रहे मीडिया हाउस

अमर उजाला के निदेशकों के विवाद में निर्णय प्रभावित करने के लिए रिश्वत दिए जाने और सीबीआई की छापेमारी की खबर कई मीडिया हाउसों ने अपनी वेबसाइटों पर प्रकाशित कर दी हैं पर अभी तक जो तस्वीर है उसमें किसी भी खबर में सिवाय आर. वासुदेवन और मनोज संथिया के नाम के, किसी का नाम नहीं आया है। फिलहाल हम यहां दो एनडीटीवी प्राफिट और सकाल टाइम्स की वेबसाइटों पर प्रकाशित खबरों को अपने पाठकों के लिए साभार प्रकाशित कर रहे हैं। हिंदी में राजस्थान पत्रिका और सहारा समय की वेबसाइटों पर भी यह खबर है जिनके लिंक नीचे दिए गए हैं। यहां यह उल्लेखनीय है कि ज्यादातर मीडिया हाउसों ने बजाय अपने रिपोर्टर की खबर प्रकाशित करने के, इस मामले में न्यूज एजेंसी पीटीआई पर निर्भर रहना ज्यादा उचित समझा है।  -एडिटर, भड़ास4मीडिया

पीटीआई ने छापेमारी की आधी-अधूरी खबरें रिलीज की

पीटीआई की वेबसाइट पर जारी खबर की हेडिंग अमर उजाला के निदेशकों के झगड़े में शिकायतकर्ता पक्ष को राहत न मिलने देने के लिए रिश्वत दिए जाने और सीबीआई के छापे से संबंधित खबर देश की प्रमुख न्यूज एजेंसी प्रेस ट्रेस्ट आफ इंडिया (पीटीआई) ने भी अपनी वेबसाइट पर जारी कर दी है। संबंधित खबरों को पीटीआई की वेबसाइट से कापी कर यहां साभार प्रकाशित किया जा रहा है। इन खबरों को ध्यान से पढ़िए। इसमें कंपनी ला बोर्ड के सदस्य आर. वासुदेवन और कंपनी सेक्रेटरी मनोज बंथिया, जिन्हें सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है, के अलावा और किसी भी शख्स या समूह का नाम नहीं दिया गया है। अंकुर चावला का नाम पीटीआई की दूसरी खबर में सिर्फ इस रूप में दिया गया है कि उनके खिलाफ भी सीबीआई ने शिकायत दर्ज की है। इससे जाहिर है कि मीडिया हाउसों व समाचार एजेंसियों पर इस मामले में शामिल अन्य चरित्रों के नाम-पहचान और उनकी भूमिका का खुलासा न करने के लिए किस कदर दबाव डाला गया है। आखिर पहचान सहित खबर छपे भी तो कैसे, पीटीआई के सब्सक्राइबर यही अमर उजाला और आज तक जैसे अखबार व न्यूज चैनल ही तो हैं।  सोचिए, अगर यह प्रकरण किसी राजनीतिक दल से जुड़ा होता तो ये मीडिया वाले किस कदर उसे तूल देते और कितने तरह के स्टोरी एंगल्स निकालते।  -एडिटर, भड़ास4मीडिया

प्रभु चावला के पुत्र समेत तीन के यहां छापेमारी

सीबीआई की प्रेस विज्ञप्ति का एक अंश

अमर उजाला निदेशकों के विवाद में शिकायतकर्ता पक्ष को राहत न मिलने के लिए रिश्वत देने की शिकायत पर सीबीआई ने बिछाया जाल : कंपनी ला बोर्ड के सदस्य को घूस लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया : एक कंपनी सेक्रेटरी भी पकड़ा गया : प्रभु चावला के वकील पुत्र अंकुर चावला के जरिए तय हुई थी रिश्वत की रकम : अंकुर चावला समेत तीन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज : देश में कई जगहों पर छापेमारी : अमर उजाला के चेयरमैन अशोक अग्रवाल और निदेशक अतुल माहेश्वरी के बीच मनभेद की खबर अब न सिर्फ पुष्ट हो गई है बल्कि यह भी स्पष्ट हो गया है कि कंपनी ला बोर्ड में शिकायत दर्ज कराने वाले अशोक अग्रवाल के पक्ष में निर्णय न होने देने के लिए कंपनी ला बोर्ड के एक सदस्य, जिनके पास यह मुकदमा सुनवाई के लिए आया था, को रिश्वत दिया गया। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने छापे मारकर कंपनी ला बोर्ड के सदस्य,  जिसका नाम आर. वासुदेवन है, को गिरफ्तार कर लिया है। साथ में रिश्वत की रकम देने के लिए बिचौलिए का काम करने वाले एक निजी कंपनी सेक्रेटरी को भी पकड़ा है।

अतुल माहेश्वरी व अशोक अग्रवाल में मनभेद!

फिर बंटा तो कहीं का नहीं रहेगा देश का एक प्यारा हिंदी अखबार ‘अमर उजाला’ : मतभेद हों तो उसे दूर कर लिया जाता है पर अगर मनभेद शुरू हो जाए तो इसका इलाज तलाश करना पाना बड़ा मुश्किल होता है। कभी अजय अग्रवाल को अमर उजाला से बाहर करने के लिए एक साथ मिलकर मोर्चेबंदी करने वाले अतुल माहेश्वरी और अशोक अग्रवाल के बारे में बताया जा रहा है कि इनका आपसी मतभेद बढ़कर मनभेद में तब्दील होने लगा है। इस कारण अमर उजाला इन दिनों चौतरफा चुनौतियों से घिर गया है। बाहर तो बाहर, अब अंदरखाने का विवाद भी बढ़ने और नया रंग लेने लगा है। अमर उजाला निदेशक मंडल के सदस्यों के बीच आपसी खींचतान फिर शुरू होने की खबर है।