
स्वर्गीय गीता
इसी कारण गीता चल बसी. गीता उस वक्त सड़क पर थी जब माया सड़क पर प्रकट होने वाली थीं. उनका बुलंदशहर में दौरा था. पुलिस-प्रशासन ने सब चाक-चौबंद रखने के चक्कर में मुष्यता और संवेदनशीलता को भी लाकअप में बंद कर रखा था ताकि परिंदा तक पर न मार सके और उनकी माया मैडम की सुरक्षा में तनिक न दाएं-बाएं हो. बड़े पद पर बैठी एक दलित की बेटी के सुरक्षा चक्कर में उनके अफसरों ने दलित की एक दूसरी बेटी को सड़क पर तिल-तिल कर मार डाला. इससे संबंधित खबर आप पढ़ चुके हैं, अब देखें वीडियो. इस वीडियो को देखने के बाद भी यूपी के बड़े अफसरों का कुछ नहीं होगा क्योंकि यूपी में सस्पेंड सिर्फ थानेदार या दरोगा होता है, आईपीएस तो भगवान के यहां से राजपाठ करने के लिए आए हैं, सो लखनऊ से लेकर बुलंदशहर गाजीपुर तक के जिले-जिले में तैनात होकर ये आईपीएस अफसर राज कर रहे हैं.
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मायाराज में एक गीता का मरना













sushil shukla Shahjahanpur up
February 28, 2011 at 7:01 am
ye to maya ki maya hai.abhi aage-aage dekho hota hai kya.jab hamari janta bsp ko vote degi to aisa hi hoga…isiliye to kahte hain ki soch samajh kar vote karna chahiye.kyunki aap ek raja ko chun rahe hote hain.maya ki maya ko aur koi nahi sirf maya hi samajh sakti hai…it is truth”””””””
sunil kaushik kanina haryana
February 28, 2011 at 2:05 pm
😮 sharmnak
naveen
February 28, 2011 at 7:05 pm
mantri mantri mantri sirf mantri is desh me keval mantriyo ki jaan , jaan hai. aam admi ki jaan majak
taras ata hai apne par ki hume UP ke nagrik hain
mahila cm ke daure ke liye mahila ki bali
thu thu
m raj bulandshahr
March 1, 2011 at 10:12 am
प्रदेश में सब कुछ उल्टा पुल्टा चल रहा है. प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती का रविवार 27.2.2011 को बुलंदशहर जनपद का दौरा अपने आप में अजीब था. एक जनपद पर विकास कार्यों को देखने के लिए उन्होंने दो से दस मिनट का समय दिया. इन सब कार्यों पर लाखों रूपयों की बर्बादी हुई. जो सड़के रातों रात बनी माया के जाते ही अपने स्थान से हटने लगी. कागजों में हकीकत से अलग केवल आकडे बाजी की गयी. मुख्य मंत्री के आकाश में उड़ने से पहले उनके नजदीक ही एक दलित महिला ने इस कारन दम तोड़ा की मायावती को लोग सामने से कही कोई देख न ले. घंटो सुरक्षा के नाम पर रास्तों को जाम कर दिया . पत्रकारों को भी माया से बहुत दूर रखा गया पूरे शासन और प्रशासन की एक ही मंशा थी की माया केवल वह देखें जो हम चाहे. माया के दौरे के बाद आम जनता की आवाज यह ही निकल कर आ रही थी की माया चुनाव से पहले अपना चुनाव प्रचार करने सरकारी खर्चे पर आई थी. लेकिन उनको शायद नहीं मालूम की ऐसे दौरे उनकी छवि को बिगाड़ तो सकते है लेकिन उनकी अपनी वोट के अलावा अन्य वोट को अपनी तरफ नहीं मोड सकते.
gyanendra.shukla
July 3, 2011 at 2:13 pm
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