रिपोर्टरों को निर्देश- वसूली करो या नौकरी छोड़ो!

जागरण प्रबंधन नाम-नंबर छापने के लिए ग्राम प्रधान उर्फ मुखिया से पांच हजार रुपए मांग रहा : बिहार में दैनिक जागरण के स्ट्रिंगर और रिपोर्टर इन दिनों हलाकान हैं. उन्हें प्रत्येक ग्राम पंचायत से पांच हजार रुपये वसूलने के निर्देश दिए गए हैं. जो इस निर्देश का पालन नहीं कर रहा है, उसकी नौकरी चली जा रही है. जो लोग आनाकानी कर रहे हैं, उन पर जबर्दस्त दबाव बनाया जा रहा है. नौकरी से हटाने की खुली धमकियां दी जा रही हैं. यह सब काम हो रहा है पांच हजार रुपये वसूलने के लिए. जागरण की तरफ से ‘दैनिक जागरण पंचायत दर्शिका 2010’ नाम से एक बुकलेट छपवाया जा रहा है जिसमें ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर सांसद तक का नाम और फोन नंबर होगा. इस काम के लिए पंचायतों, विशेषकर मुखिया से पांच हजार रुपये वसूले जा रहे हैं. वसूली लीगल दिखे, इसके लिए बाकायदा फार्म भी छपवाया गया है. इस फार्म पर काफी नैतिक बातें की गई हैं. एक फार्म भड़ास4मीडिया के पास भी है, जिसे नीचे प्रकाशित किया गया है.

इस फार्म में गांधी जी, पंचायती व्यवस्था, विकास, योजनाएं… जैसे संभ्रांत जुमलों-शब्दों का इस्तेमाल कर पंचायत दर्शिका के कानसेप्ट को सरकारी स्कीम के रूप में पेश किया गया है. इस कानसेप्ट की लफ्फाजी को अगर एक बार आप ध्यान से पढ़ लें तो समझ में आ जाएगा कि किस तरह जागरण समूह पैसा बटोरने के लिए रोज नए-नए आइडियाज सामने ला रहा है और टूल के रूप में अपने संपादकीय विभाग का इस्तेमाल कर रहा है. वसूली फार्म में सबसे नीचे नकद प्राप्ति रसीद है. इसमें एमाउंट शो नहीं किया गया है. सिर्फ प्राप्त राशि का विवरण लिखने को कहा गया है. पर सूत्र बताते हैं कि प्रत्येक पंचायत से पांच हजार रुपये की डिमांड है. इस वसूली का जिम्मा इलाकाई रिपोर्टरों-स्ट्रिंगरों के मत्थे मढ़ दिया गया है. फार्म में सबसे उपर जो इंट्रोडक्शन दिया गया है, वो इस प्रकार है….

”प्रियवर,

प्रजातंत्र की सफलता का मूल मंत्र, नीति निर्धारण में जनता की सहभागिता है। यह सहभागिता जितनी ही सतही स्तर पर होगी, उतना ही सफल यह प्रजातंत्र होगा। गांधी जी के सपनों का भारत गांव में निवास करता था। पंचायती व्यवस्था उसी भारत के निर्माण की एक कड़ी है। लगभग 23 वर्षों के पश्चात बिहार में पंचायती चुनाव संपन्न हुआ है। उत्साह से त्रिस्तरीय व्यवस्था में हर नागरिक ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है।

आज अंतरराष्ट्रीय संस्थान, केंद्र सरकार, राज्य सरकार या अन्य समाजसेवी संस्थाएं हर कोई अपनी योजनाओं, कार्यक्रमों को इन्हीं प्रतिनिधियों के माध्यम से अंजाम देना चाहती हैं। लेकिन समग्रता में इनके विषय में जानकारी के अभाव में इन योजनाओं के क्रियान्वयन में कठिनाइयां आ रही हैं। प्रतिनिधि शासन व्यवस्था में बिना इनकी भागीदारिता के विकास कार्य संभव नहीं है। इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए भारत का सर्वाधिक प्रसारित एवं लोकप्रिय अखबार दैनिक जागरण ने एक पंचायत दर्शिका प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। इस दर्शिका में जिले के हर चुने हुए प्रतिनिधि ग्राम पंचायत सदस्य से लेकर संसद सदस्य के संबंध में जानकारी यथासंभव उपलब्ध रहेगी।

इस दर्शिका का वितरण सहयोगकर्ता, बिहार के सांसद, बिहार विधानसभा सदस्य, बिहार विधान परिषद सदस्य, विभागीय सचिव, विभागीय प्रमुख, बिहार में कार्य कर रहे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थान के सदस्यों के बीच किया जाएगा.

यही है वो फार्म जिसे रिपोर्टरों को थमाया गया है और प्रत्येक ग्राम प्रधान उर्फ मुखिया से पांच हजार रुपये लाने को कहा गया है.

पढ़ा आपने.

पैसा कमाने के लिए क्या जबरदस्त लफ्फाजी की है जागरण वालों ने!

भई, पैसा कमाओ, खूब कमाओ, इतना कमाओ कि एकमात्र तुम्हीं अमीर रह जाओ… पर कमाई के इस धंधे में अपने रिपोर्टरों को काहे भ्रष्ट बनने को मजबूर कर रहे हो? क्या तुम लोगों ने मार्केटिंग विभाग का खात्मा कर दिया है? या फिर यह तय ही कर लिया है कि रिपोर्टर को चरम भ्रष्ट करके मीडिया का सत्यानाश कराके ही मानेंगे? शायद इसी उद्देश्य से हर मौके पर वसूली के काम के लिए रिपोर्टरों को आगे कर देते हो! चुनाव हो या फोन नंबर की डायरी छापने का धंधा, रिपोर्टर के गर्दन पर लात रखकर सवार हो जाते हैं जागरण के मालिक और मैनेजर.

जानकारी के मुताबिक पटना जिले के बिहटा और पाली के रिपोर्टर वसूली अभियान में साथ न देने के कारण हटा दिए गए हैं. कई आत्मसम्मानी रिपोर्टर वसूली के नाम पर शर्म से गड़े जा रहे हैं पर नौकरी बचाने की मजबूरी के कारण पहली बार खबर की जगह पैसे की बात मुखिया लोगों से करने को मजबूर हो रहे हैं. यह भी पता चला है कि रिपोर्टर को वसूली सिर्फ मुखियाजी लोगों  से ही करने को कहा गया है. मुखिया पैसे देने के बदले अपने नीचे के चार अन्य प्रतिनिधियों का नाम बताएगा. उन चारों का नाम, नंबर पता भी दर्शिका में शामिल होगा. अब ये मुखिया के उपर है कि वह इन चारों से एक-एक हजार रुपये वसूल कर हिसाब बराबर करेगा या फिर खुद अपनी जेब से जागरण को दे देगा.

आजकल ग्राम प्रधान उर्फ मुखिया नए टारगेट हैं वसूली के. भ्रष्ट मीडिया वाले कई जगहों पर मुखिया उर्फ प्रधान को उनके भ्रष्टाचार को पब्लिश करने, टीवी पर दिखाने की धमकी देकर डराते-वसूलते हैं. अब अखबार मालिक दर्शिका छापने के नाम पर प्रत्येक ग्राम पंचायत से पांच-पांच हजार रुपये की खुली वसूली करने लगे हैं. संभव है, इस खबर को पढ़कर कई अन्य अखबार मालिकों को भी पैसे कमाने का यह ‘जागरणी फंडा’ पसंद आ जाए और अपने मैनेजरों की बैठक बुला लें. आजकल तो बस एक ही होड़ है… पैसा लाओ, पैसा कमाओ, पैसा लाओ, पैसा कमाओ, पैसा लाओ, पैसा कमाओ…..

उम्मीद करते हैं कि आगरा में एक बड़े आंतरिक आयोजन में जुटे दैनिक जागरण के मालिक और संपादक वसूली में रिपोर्टरों को लगाने के इस गंदे धंधे पर भी सोच-विचार करेंगे और अपने संपादकीय विभाग को नैतिक रूप से समृद्ध बनाएंगे. कायदे से तो जागरण समूह को, इस देश के नंबर वन मीडिया हाउस को, पंचायती व्यवस्था को मजबूत करने के लिए, लोकतंत्र को ताकत देने के लिए और गांधी जी के सपनों के भारत को विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ाने के लिए खुद अपनी तरफ से पंचायत दर्शिका छपवाकर निःशुल्क बंटवा देना चाहिए. ऐसा इसलिए भी करना चाहिए क्योंकि एक बड़ा मीडिया हाउस होने के नाते जागरण समूह पर सामाजिक जिम्मेदारी भी है. कारपोरेट रिस्पांसबिलिटी भी तो कोई चीज होती है न! आप मीडिया होने के नाम पर सरकार और जनता से सहयोग लेते रहेंगे, बदले में किसी को कुछ देने की जगह खबरों के नाम पर पैसे वसूलेंगे… फोन डायरी छापने के नाम पर पैसे वसूलेंगे…. और सबसे बड़ी बात, वसूली में अपने उन लोगों को लगाएंगे जिन पर कलम के जरिए देश को आगे ले जाने का दायित्व है, जनता की आंखें खोलने का दायित्व है…. झूठ को सामने लाने का दायित्व है… करप्ट का पर्दाफाश करने का दायित्व है….

क्या रिपोर्टरों से वसूली कराने के फैसले से जागरण के रिपोर्टरों की कलम नहीं कुंद हो रही है, कलम की धार नहीं खत्म हो रही है, भ्रष्ट नेताओं और करप्ट ब्यूरोक्रेट्स के खिलाफ लिखने में कलम नहीं कांप रही है…. पर ये सब दैनिक जागरण के मालिकों को मंजूर है क्योंकि उन्हें पैसा कमाना है, टर्नओवर पिछले साल से भी आगे ले जाना है…. नए-नए आइडियाज से बिजनेस बढ़ाना है…. क्योंकि…

इन्हें बहुत सारा पैसा कमाना है…..

कमाते ही रहना है….

दुनिया भर से ज्यादा कमाना है…..

लेकिन ये भी जानते हैं कि जब ये मरेंगे तो इनके साथ एक फूटी कौड़ी भी नहीं जाएगी.

आपको क्या लगता है, एकाध रुपये इनके साथ स्वर्ग या नरक में जाएंगे?

लेखक यशवंत सिंह भड़ास4मीडिया के एडिटर हैं.

Comments on “रिपोर्टरों को निर्देश- वसूली करो या नौकरी छोड़ो!

  • Ramnandan Kumar says:

    Jagran walon sharm karo…….Sirf paise se kuchh nahi hota hai….Izzat-Pratishtha bhi kuchh hoti hai…..Dainik Jagran per banned lagna chahiye….Desh ko lootne walon per case honi chahiye….Jagran patna unit mein jo corruption hai, agar uski pole khule to yah sabse badi khabar hogi….

    Reply
  • ghanshyam rai says:

    जिस तरह से आपके लेखों को पढ़ने के बाद मन में उबाल आता है उससे तो एक बात साफ है कि आने वाले दिनों में आपका यह चैनल भडास फोर मीडिया एक दिन लोगों का सबसे पसंदिदा चैनल होगा हमारे जानकारी के अनुसार आज के समय में ही यह पतृकार भाईयों के लिए एक मंच बन गया है आपसे यहीं निवेदन है कि इसी तरह से हम सभी के विचारों को समाज के सामने उजागर करते रहिए एक दिन जागरण क्या कोई भी समूह आपके पीछे की कतार में खड़ा रहेगा
    यही हमारी शुभकामना है
    घनश्याम राय
    गाजीपुर उत्तर पदेश

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  • braj kishore singh,hajipur, vaishali says:

    ye to bhaiya chhote akhbarwale karte hain kathit roop se duniya ke sabse bade samachar patra ko aisa karne ki kya aavasyakta pad gaee.mujhe nahin lagta company ghate men hai.ek aur baat jagran apne stringeron aur reporteron ko itna vetan bhi nahin deti jitna lane ko kah rahi hai.

    Reply
  • braj kishore singh,hajipur, vaishali says:

    bhai jagran jo kuchh bhi kar raha hai vo sab to chhote akhbaron ke totke the.jagran ko ghata to hua nahin hai fir vo aisa kyon karne laga.pahle se hi patrakaron ke samman men bhari kami aa chuki hai ab lagta hai samapt hi ho jayegi.

    Reply
  • sir ji namaskar main aapka ye channela har roj padta hunn or main bhi mathura main ek channela ka stringer hunn .baise to yahan bhi dalal har din badte ja rahe hai kyun ki aaj ke samay main jahan logon ki jarurat bad rahi hai bahi ab bahut sare chor channel onair ho gaye hai ki bash unke baare main sayad jitna wo kar rahe hai main yahan par likh nahi sakta hunn . or sabse badi baat hai ki ab jo naya channnel aaraha hai wo sabse pahle kahta hai ki hum imaandar channel lane wale hai magar jab suru hota hai to reporter to door ki baat hai ek bechara stringer bhi inse baat karle to sabse pahle yahi baat hogi ki humko kya doge ab aapne eshe samay main har dil ka dardh ujagar karne ka jo plat form diya hai uski agar tahdil se shukriya kiya jaye to galat nahi hoga .main ab apne mathura ki hi baat karta hunn kyun ki main mathura ki nagri ka hi hunn yahan par jitne bhi bade channelon ko jo chala rahe hai bo sab ye maan lijiye ki sarb gun sammpan hai ab ese logon ki baat kya likhun jinmain sari khubi hai to .agar unke khilaf koi baat bhi kare to ye unko nagwar bhi gujarti hai or fir unkr bahi gun samne aate dikhte hai …….. ek stringer bash aap mera name na chappe

    Reply
  • vikas shukla says:

    media is samay sirf khabron ko chapne ke liye nahi balki moti kamai ka sadhan ban gayi hai. yadi reporter ye sab nahi karenge to unhe hata diya jayega, aise mein reporter ko to wasooli karne ki khuli chut di ja rahi hai
    vikas shukla, Unnao UP

    Reply
  • santosh kumar jha says:

    Aakhir Jagran ko No. 1 kisne banaya? Peet patrakarita aur is prakaar ki ghinauni harkat karne waale media house ka janta dwara pratirodh karna chahiye.
    Santosh Kumar Jha
    Sr. sub editor
    Pratah Khabar
    Guwahati

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  • suneel pathak says:

    बनिये की नौकरी है, जो चाहे करवा लें वहीं कम है। रिपोर्टरों को मानक पत्रकारिता की सीख दी जाती है और प्रैक्टिकली कम तन्‍ख्‍वाह और अनुचित तरीके से धन वसूली करने की जिम्‍मेदारी सौंप दी जाती है।

    तुम्‍हारा भी भला होगा जागरण प्रबंधन

    Reply
  • Randhir Kumar says:

    Aadarniye Yashwant ji
    Pranam.
    Aapne jo likha hai woh 100% satya hai .yeh koi nayi baat nahi hai. Media mein naam aa jane ke liye har koi betab rahta hai taaki garib logon par rob jamaya ja sake.Yeh to kisi book mein naam chhapne ki baat karte hai. 5000 rupaye koi badi cheese nahin hai.kuchh reporter to 10000 rupaye ki maang karne lage hai.Mukhiyaji bhi khush hain ki kaun apne jeb se dena hai, Ward sadasya se hi to lena hai.Jab khabar chhapne ke liye paisa vasool karte hai to Khushi se dete hai ,sambandh to usi zamane se hai,sirf content badal gaya hai. Stringer reporter khaskar aisi harkatein zyada karte hain.itna hi nahi ab to police station ki dalali, prakhand mein dalali,anchal mein dalali ya phil Zila mein dalali ab aapko reporter log in chhutbaiye netaon ke saath milkar kandhe se kandha milakar dalali karte nazar aayenge, Driving licence. Passport banvaana ho. FIR likhwani ho Jhoothi Gawahi dilwani ho aur to aur gundon se milkar suraksha tax (Extortion Money) Ki Maanwali ho ye log sab kuchh karte hai,Kyonki paise kamana hai. samaj mein rasookh banana hai.samaj ko ek nayi diha deni hai.sir aapne kabhi gaur kiya hai ki callgirl ke baare mein yeh log call boy hai .callgirl 2 –4 ghante ke liye aati hai sirf bistar ke liye yeh log har jagah vyapt rahte hai sarv sukh dene ke liye, paise do aur jo bhi kaam karvaana ho , hamesha taiyyar rahte hain.Kabhi kabhi to kisi badi kaam ke liye ladki ka bhi bandobast karte hain.Kuchhto aise bhi log hain ki apne parivaar ki auraton ki seva bhi khuleaam dete hai sirf paison ke liye.Paisa hi inka Imaan hai, Bhagwan hai,Pratishtha hai. sir Uthakar jine ka sadhan hai.Teh Nitish ji ka Bihar har hai.ab sabkuchh Yani White Collar ke saath, White paperki Jugalbandi Mein Ab to crime bhi White ho gaya hai.Ab to bhagwan hi Bihar ko bacha sakta hai.Kahte hai ki press Loktantra ki 4thi stambh hoti hai Lekin usi Loktantra ki kursi ki 4thi stambh ke sahare Bihar mein bhrashtachar us kursi ki dono haath ban chuki hai. jo jis level mein hai usi level mein mein Bihar ko loot raha hai.Hanshi aati tab jab BPL mein naam likhane ke liye bhi Garibon se paise liye jaate hain.
    Bas Bhagwaan bharose hai Bihar .Shayad ab Emergency hi Bihar ko bacha le .
    Aapka
    Randhir Kumar

    Reply
  • sumer singh says:

    jagran ka paliganj ka reporter mai hi tha jise mukhia se vasuli ka virodh karne ke karan hata diya gya hai.naokari se hata diya gaya lekin savbhiman se samjhota nahi kiya .ab tak pali me jagran ko reporter nahi mila hai .Bihta me jagran ka yahi hal hai

    Reply
  • rajesh shandilya says:

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    Reply
  • patrkarita ko kafi sarmsaar karne wala wakiya hai yeh…..
    iss parkar ki pase kamane wali tarkipe kisi b akhbar ko jayada din nahi chalne degi… meri sabhi patakar bhaiyo se yahi nivedan hai ki….. sach ka saath kabhi nai chaode,,,, or samaj ko sahi raah dikaye…

    Reply
  • Yashwant ji,
    u r such a hero of journalism. u r daring and doing something new in our paper industrie. apka check laga hai in bade bade publications par inke kalabazari print karne ke himmat warn kise me nahi hai
    good

    Reply
  • UPDESH AWASTHEE says:

    पाती पत्रकार साथियों के नाम
    कुरुक्षेत्र से अपने साथी राजेश शाण्डिल्य ने विगत सत्रह जनवरी को इस विषय पर अपना कमेंट पेस्ट किया, परन्तु उन्होंने चाणक्य या इसके किसी फेमिली फोंंट में लिखा था अतज् आप पढ़ नहीं सके। आज मेरी नज़र पड़ी तो उसे जस का तस प्रकाशित कर रहा हूं। राजेश जी की तरह बहुत से साथी हैं जो अच्छा लिख सकते हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम कि भड़ास पर जो हिन्दी छपती है वो कैसे बनती है। वे अपने अखबार के फोंट में ही टाइप करना जानते हैं। मैं भी पहले अपने निजी फोंंट के अलावा किसी दूसरे फोंट में टाइप नहीं कर पाता था। यशवन्त जी ने मुझे इन्टरनेट की हिन्दी सिखाई। अब वे सबको तो सिखा नहीं सकते अतज् मै ही कभी कभी अपने साथियों की मदद कर दिया करता हूं। यदि आप भी अपने कमेंट भड़ास में छपवाना चाहें और आपको इन्टरनेट की हिन्दी नहीं आती हो तो कृपया अपना मेटर मुझे मेल कर दें। मै आपकी प्रतिक्रियाएं छाप दूंगा।
    कृपया मुझे इस पते पर मेल करें
    updeshawasthee@rediffmail.com

    राजेश शाण्डिल्य जी की प्रतिक्रिया शब्दशज् इस प्रकार है

    यशवन्त जी,
    प्रणाम।
    पत्रकारिता जगत में जो ताजातरीन खबरें बी4एम माध्मय से इस क्षेत्र के लोगों मिल रही हैं, उसके आपकी व पूरी टीम की जितनी सराहना की जाए वह कम हैं। मैं बी4एम नियमित पाठक हूं। यह बात आज किसी से छिपी नहीं है कि मीडिया का मिशन क्या बन कर गया है। खैर, इनका मिशन जो भी हो,मगर भड़ास के मिशन को इसकी लोकप्रियता सिद्ध कर दिया है। अगर आज मीडिया प्रभाव उगाही करने के लिए उपयोग हो रहा है, तो इसमें मीडिया घराने ही नहीं, बल्कि उनके सहयोगी बन रहे भी पूरे जिमेदार हैं। दुनिया में अभी रोजगार के साधन इतने कम नहीं हुए कि ठग, चोर व डाकुओं के संस्थानों में नौकरी करके पहले उनके पेट भरें और फिर उनके फैंके टुकड़ों से अपना। ये विचार मेरे किसी एक संस्थान के बारे में नहीं हैं, बल्कि तमाम उन संस्थानों के बारे में हैं, जो बड़े-बड़े मंचों पर खड़े होकर नैतिकता, देश प्रेम और लोकतन्त्र की आवाज उठाने का न केवल दम भरते हैं, बल्कि समाज में फैले भ्रष्टाचार को पानी पी-पीकर कोसते हैं। यहां मेरा सिर्फ ये कहना है कि स्थिति जब या तब सुधरे, मगर आप अपना अभियान के माध्यम से लोगों को ऐसी खबरें जरुर देते रहें, ताकि मीडिया के नाम पर लूट-खसौट में लगे पत्रकारों को और मीडिया संस्थानों को ये कान रहे कि उनकी भी खबर कहीं चल रही है।
    राजेश शाण्डिल्य
    कुरुक्षेत्र

    Reply
  • jagran patna ko paise ki kami ho gayi hai ,JAGRAN VALE BIHAR KO LUTNE AAYE HAI/.PATRKARO KI PARTISTHA NHI BACHEGI .SABHI PATRKAR EAK HOKAR LARE

    Reply

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