स्टेटमेंट की जगह लीगल नोटिस

कहते हैं कि अगर कहीं अंदर ही अंदर कुछ हो रहा होता है तभी उसका बाहर जोरदार खंडन किया जाता है. पर्ल ग्रुप के न्यूज चैनल पी7न्यूज में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है. पर प्रबंधन बाहर यह जताने-दिखाने की कोशिश कर रहा है कि सब ठीक है. इसी क्रम में पर्ल ग्रुप व पी7न्यूज के लिए काम करने वाली एक लीगल फर्म ने अपने ‘क्लाइंट्स’ की तरफ से एक नोटिस जारी किया है.

नोटिस में पी7न्यूज को लेकर अफवाह उड़ाने वालों को चेतावनी दी गई है. पहले कहा जा रहा था कि पी7न्यूज के संचालन को लेकर शीर्ष स्तर पर जो आंतरिक फेरबदल हुए हैं, या जिम्मेदारियों में जो बदलाव किए गए हैं, उसके बारे में अधिकृत स्टेटमेंट जारी किया जाएगा ताकि बाहर फैले भ्रम को दूर किया जा सके. लेकिन अभी जो स्टेटमेंट की जगह लीगल नोटिस जारी हुआ है, वह यह कहीं नहीं बताता कि पी7न्यूज में निदेशक त्रयी सहजपाल, सुब्रत, केसर का दखल बढ़ गया है, अन्य निदेशकों के सक्रिय कर दिए जाने से अभी तक इकलौते निदेशक की तरह और आल इन वन के रूप में काम देख रहे ज्योति के अधिकार पहले से कम हुए हैं.

दूसरे निदेशक भले ही पी7न्यूज को लेकर अब तक निष्क्रिय या साइलेंट रहे हों, पर उनकी सक्रियता अब बढ़ गई है. पी7न्यूज से जुड़े फैसले लेने के मामले में दूसरे निदेशकों की भी चल रही है. ज्योति नारायण के करीबियों पर गाज गिराई जा रही है. प्रकाश सिंह का वीओआई से जाना इसी का संकेत माना जा रहा है. पिछले दिनों कई जर्नलिस्टों ने एक साथ पी7न्यूज से इस्तीफा दिया था पर उन सबको वापस बुलाया गया. अंदरखाने इसे दूसरे निदेशकों के दखल से जर्नलिस्टों की वापसी करार दिया गया. हाल-फिलहाल ज्योति नारायण के पीए का तबादला कर दिया गया है और श्रीकांत त्रिपाठी के शुक्रवार के दिनों में पीए रहे शख्स को कार्यमुक्त कर दिया गया है. इसको भी लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं.

सूत्र बताते हैं कि पर्ल ग्रुप के चेयरमैन भंगू के यहां मीडिया प्रोजेक्ट व पी7न्यूज को लेकर पर्ल ग्रुप के कई निदेशकों व वरिष्ठ पदों पर आसीन अधिकारियों ने ज्योति नारायण की कार्यशैली की शिकायत की थी. भंगू ने कई स्तरों पर आ रही शिकायतों को देखते हुए मीडिया प्रोजेक्ट में दूसरे निदेशकों व कुछ वरिष्ठों को भी इनवाल्व कर दिया ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई एक व्यक्ति सर्वेसर्वा न बन सके. सूत्रों के मुताबिक इसी कारण पर्ल ग्रुप के निकलने वाले अखबार की जिम्मेदारी ज्योति नारायण को देने की जगह ‘शुक्रवार’ मैग्जीन से विदा किए गए श्रीकांत त्रिपाठी को सौंपी गई.

हालांकि यह अखबार अभी तक निकल नहीं सका है और इसके निकलने की फिलहाल कोई संभावना भी दिख नहीं रही है लेकिन श्रीकांत त्रिपाठी ‘शुक्रवार’ मैग्जीन से विदा होकर भी पर्ल ग्रुप के हिस्से बने हुए हैं और वे वह सारी सुविधाएं पा रहे हैं जो ‘शुक्रवार’ के संपादक रहते हुए हासिल कर रहे थे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योति नारायण से खफा चल रहे श्रीकांत त्रिपाठी पर चेयरमैन भंगू ने अपना हाथ रख दिया. सूत्र यह भी बताते हैं कि चेयरमैन भंगू कंपनी में आंतरिक लोकतंत्र कायम रखने के लिए शीर्ष स्तर के हल्के-पुल्के विवादों को हवा देते रहते हैं ताकि सच्चाई कहीं न कहीं से उन तक पहुंच जाए. इस कारण कोई जानकारी दबी छिपी रह नहीं पाती और हर एक नकारात्मक-सकारात्मक घटनाक्रम उन तक पहुंचता रहता है.

इनटरनल डेमोक्रेसी के समर्थक भंगू ने पर्ल के मीडिया प्रोजेक्ट को लेकर कई शिकायतों के बाद अब ढेर सारे लोगों को इस प्रोजेक्ट का पार्ट बना दिया है. जाहिर है कि अन्य निदेशकों की सक्रियता के कारण पी7न्यूज को अब तक अकेले हैंडल कर रहे ज्योति नारायण का रुतबा कम होगा. प्रबंधन आंतरिक मतभेद बाहर न आने देने के लिए इस बदलाव को अधिकृत तौर पर स्वीकार नहीं कर रहा पर पिछले महीने भर के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो समझ में आ जाता है कि धुआं है तभी आग की चर्चाएं हो रही हैं. फिलहाल, हम यहां पर्ल ग्रुप के लिए काम करने वाली एक लीगल फर्म की ओर से जारी नोटिस के कुछ अंश को यहां दे रहे हैं-


Excerpts of the legal notice

We are concerned, for our client i.e. Pearls Broadcasting Corporation Limited, having its office at C-55, Sector-57, Noida – 201 301.

1. Our client is a Company incorporated and registered under the Companies Act, 1956 and is engaged in the business activities relating to entertainment and other allied activities.

2. In November 2008, our client has launched electronic channel “P 7 News” with its vision to encompass all the aspects of good electronic media.  Our client is running the news channel “P 7 News” with perfection, performance and passion, under the supervision and control of experienced persons in the Board of Directors of our client, which consists inter-alia Mr. Jyoti Narayan, Mr. M.L. Sehjpal and Mr. Kesar Singh.

3. Our client, since the launch of “P 7 News” has been successful to cover all the areas from fashion to philosophy, entertainment and music, science and technology and almost all aspects of human life and is growing manifold successfully by achieving difficult task in most simple, sincere and real way.

4. It has recently come to the notice and knowledge of our client that certain rumors and misleading statements and facts have been published in a section of the media regarding the management and other officials of our client.

5. There is no dispute or misunderstanding whatsoever between the management of our client or any of its officials. All the allegations and concocted stories put forth by a section of the media are nothing but an abuse of power of press and media and are nothing but a classic example of defamatory practice.

6. In the aforesaid circumstances, under the instructions of, for and on behalf of our client, we hereby call upon media persons to immediately restrain and desist themselves from publishing any kind of defamatory statement or representation concerning our client.

Yours sincerely,

ZEUS Law Associates

For Pearls Broadcasting Corporation Ltd

Comments on “स्टेटमेंट की जगह लीगल नोटिस

  • राजू जेंटलमैन says:

    यशवंत जी,
    पी7 चाहे जो भी नोटिस दे, लेकिन हकीकत तो यही है कि यहां सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। अगर ठीक चल रहा होता तो यहां कुछ लोगों को अप्वाइंट कर लिया गया। उन्हें बाकायदा ऑफर लेटर देकर बुलाया गया और उन्हें ज्वाइन कराने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। दफ्तर के कई कर्मचारियों ने उन्हें बधाई और स्वागत संदेश भी दे दिए। उन्हें दफ्तर बुलाकर बाकायदा ज्वाइनिंग के फॉर्म भरवाए गए और फिर उन पत्रकारों को मना कर दिया गया। मैं पी7 न्यूज में ही काम करता हूं। मुझे पता है यह सब जानकारी। जिन्हें ऑफर लेटर दिए गए, वे बेचारे अपने पुराने दफ्तरों से इस्तीफे दे चुके हैं। वे दोनों ही ओर से गए। अपने पुराने दफ्तरों से इस्तीफे भी दे दिए और नए दफ्तर में ज्वाइनिंग भी नहीं मिला। ऐसी मिसाल आपको पहली ही बार मिलेगी। ऐसे में यह कहना कि पी7 में सबकुछ सही चल रहा है, ठीक नहीं होगा। जब ऐसा हो सकता है तो अंदरखाने वाले कर्मचारियों से क्या होगा, इसे लेकर आशंका का माहौल गर्म हो रहा है।

    Reply
  • राजू जेंटलमैन says:

    शौर्य जी,
    लगता है आप भी हमारी ही बिरादरी के यानी पी7 में ही काम करने वाले सज्जन या सजनी हैं। आप चैनल के हित के बारे में इतना सोचते हैं तो आपको अपने नाम से कमेंट देना चाहिए। ताकि चैनल प्रबंधन आपकी बात को हकीकत में जान-समझ सके। भगवान न करे आप बेरोजगार हो जाएं तो आपको पता चलेगा कि आप किस खेत की मूली हैं। वैसे भी जिन्हें आप वाक् योद्धा बता रहे हैं, उनमें से कई बेहतरीन पत्रकार हैं और उन्होंने ना सिर्फ बेहतरीन बल्कि अच्छा काम किया है और उनके काम के आगे आपका वजन तौला जा सकता है। हमारी तो मजबूरी है कि अपनी नौकरी बचाने के लिए बेनामी होकर बात रखनी पड़ रही है। आपकी प्रतिक्रिया से नहीं लगती कि आपको कोई मजबूरी है तो फिर अपने नाम से क्यों नहीं कमेंट करते। औकात पता चल जाएगी।

    Reply
  • मुझे पूरी उम्मीद थी कि जिस कामेंट में हकीकत होगी उसे आप पब्लिश नहीं करेंगे….

    Reply
  • यशवंत जी….
    आपने जो भी लिखा..या फिर पब्लिस किया उससे ये तो साफ है कि आपकी जानकारी अंदरखाने तक है…लेकिन जो तथ्य प्रकाशित किये गए हैं वो वास्तविकता के करीब शायद नहीं है….मेरे पहले दो पंक्ति से आपको लगे कि मैं पी-7 का हिस्सा हूं लेकिन मैं साफ कर देना चाहता हूं कि पी-7 से मेरा कोई लेना देना नहीं है…फिर भी जितना जानता हूं उस चैनल के बारे में उसी के आधार पर लिख रहा हूं….मुझे उम्मीद है कि शायद सच्चाई आप प्रकाशित न करें लेकिन पढ़ने के बाद थोड़ी रौशनी जरूर आपको मिलेगी…
    आपके प्रकाश सिंह के बारे में लिखा कि उसका जाना ये साबित करता है कि ज्योति नारायण का आधिकार कम हुआ है…प्रकाश सिंह जैसे लोग जो कि चैनल के भीतर दामाद की तरह काम कर रहे थे…उसका पहले चले जाना शायद चैनल के हित में होता…ऐसे लोगों को बाहर करने पर तो आपको हर्ष होना चाहिए…जो अपने साथ काम करने वाली लड़की के साथ बदतमिजी करता हो…चैनल से बाहर किये जाने पर भी किसी लड़की को फोन कर ये कहता हो कि एच आर मेरे हाथ में है तुम मेरे कमरे पर आओ मैं नौकरी लगवा दूंगा…ऐसे लोग मेरी नजर में मीडिया के लिए कोढ़ हैं…और कोढ को कैंसर बनने से पहले खत्म कर देना शायद सबके हित में है…
    यशवंत भाई…आपके लेख के बाद किसी जेंटलमैन ने ये लिखा है कि कुछ लोगों को पत्र देकर वापस कर दिया गया…वो अपने संस्थान से भी गए और यहां से भी..जिस भी सज्जन की ये व्यथा है वो जायज तो क्या चैनल के हित में नहीं है…क्योंकि जितना मैं जानता हूं जितने लोगों को पत्र दिया जा रहा था…या दिया गया था…वो शायद निकम्मों की फौज में कुछ सैनिक और बढाने के लिए ही था…उन कमजोर कंधों की बदौलत शायद पी-7 जो जंग लड़ने की तैयारी कर रहा था…नये मैनेजमेंट ने बचा लिया…क्योंकि पहले ही कम थे क्या जो और भरे जा रहे थे…
    यशवंत भाई…बाहर रह कर चैनल के बारे में लिखना बहुत आसान है लेकिन कभी जाकर वहां काम करने वाले लोगों की योग्यता का आकलन करें…समझ में आ जाएगा कि अब तक किस मापदंड के सहारे अधिकारी रखे गए…एक दो बार मुझे उस चैनल में जाने का मौका मिला है…कुछ मेरे जानकार वहां काम भी करते हैं…उनसे जब कहानी सुनता हूं तो शर्म आती है ये सोचकर भी कि हम भी उस चैनल में न सही लेकिन कम से कम उस जमात के हिस्से तो हैं….चंद कायदे के कर्मचारी रख लिये जाते तो शायद चैनल का भला हो जाता…लेकिन रखता भी तो कौन…सबसे बड़ा सवाल यही है….
    यशवंत भाई यहां वाकयोद्धा बहुत हैं…कर्मयोद्धा शायद इक्के दुक्के ही हैं….लेकिन उम्मीद की जा सकती है कि अब शायद कुछ भला हो…..

    Reply
  • Punjab Staff says:

    Dear Sir, p7 ka ye haal to hona he tha kyonki jo patiala ke staff se mahnat karne wale hai unko to salary de nahi jati jo rishteydar hai unko free ke salary de jati hai aur patiala walo ke sath bhedbhav rakha jata hai jinhone is channel ki shuruat ki patiala wale mehnat karte reh jate hai aur credit inke rishteydar le jate hai aur to aur sare bande wo rakhe hue hain jo kahi na kahi se nikale gaye hai
    aur p7 main ajkal h.o.d bane hue hai. bechare patiala wale to 2 saal se itni kam salary main kam kar rahe hai aur unko tourcher kar rahe hai aur na he unki salary badai jati hai yahan pe to sher ghass kha rha hai aur gadhe ghosh kha rha hai ye haal hai p7 news channel ka bechare patiala walo ki bhi suno.
    Thanks
    Punjab Staff

    Reply

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *