पी7न्यूज में उथल-पुथल तेज, रमन से विवाद के बाद हटे राहिल

पीपी7न्यूज से खबर है कि आउटपुट हेड रमन पांडे से विवाद के बाद सीनियर वीडियो एडिटर राहिल चोपड़ा को दशहरा और दीवाली जैसे त्यौहार से ठीक पहले संस्थान से इस्तीफा देना पड़ा है. राहिल चोपड़ा इसके पहले एनडीटीवी और आजतक जैसे चैनलों में काम कर चुके हैं. खबर है कि पी7न्यूज में कई लोगों पर गाज गिराने की तैयारी है.

इसके अलावा इनपुट में कई नई भर्तियां हुई हैं. सहारा में सीनियर प्रोड्यूसर रहे गुरप्रीत सिंह ने एसोसिएट ईपी के रूप में ज्वाइन किया है. सूत्रों के मुताबिक वे अपने कुछ और लोगों को सहारा से पी7 में लाना चाहते हैं. इसके कारण इनपुट और आउटपुट से कुछ और लोगों को निकालने की तैयारी है. सूत्रों का कहना है कि चैनल की हालत लगातार खराब होने के कारण डायरेक्टर केसर सिंह को पीएसीएल कंपनी मैनेजमेन्ट की ओर से फिर अल्टीमेटम दे दिया गया है. इसीलिए पी7न्यूज में आजकल कुछ ज्यादा ही उथलपुथल है. पिछले कुछ समय में केसर सिंह ने चैनल की टीआरपी बढ़ाने के लिए कई प्रयोग किए, लेकिन चैनल अपना स्तर सुधार पाने में नाकाम रहा.

उल्टे लगातार ज्योतिष और दूसरे चैनलों से नकल कर तैयार किए कार्यक्रमों से चैनल की रही सही विश्वसनीयता भी दांव पर लग गई. इसके लिए जिम्मेदार आउटपुट हेड रमन पांडे और इनपुट हेड राजेश कुमार बताए जाते हैं. बीबीसी से आए एडिटर सतीश जैकब भी चैनल को चलाने के रवैये से खुश नहीं हैं. उन्होंने टॉ़प मैनेजमेन्ट को अपनी तरफ से सारी स्थितियों से अवगत करा दिया है. उधर, खबर है कि पी7न्यूज के महाराष्ट्र के स्ट्रिंगरों को सेलरी नहीं दी जा रही है. इससे पी7न्यूज की छवि पर असर पड़ रहा है. दीवाली और दशहरा जैसे त्योहार होने के बावजूद पी7न्यूज प्रबंधन अपने स्ट्रिंगरों को तयशुदा मानदेय नहीं दे रहा है.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

सेबी ने वाकई पीएसीएल के कई ठिकानों पर छापेमारी की या आजसमाज में फर्जी खबर छपी?

इन दिनों पीएसीएल चर्चा में है. यह पर्ल्स ग्रुप की मदर कंपनी है. पी7न्यूज चैनल, बिंदिया मैग्जीन, मनी मंत्रा मैग्जीन, शुक्रवार मैग्जीन यही ग्रुप निकालता है. मध्य प्रदेश में राज्य सरकार ने बिल्डरों और चिटफंडियों के खिलाफ अभियान चला रखा है. इसकी शुरुआत खासकर तब हुई जब कई बिल्डरों और चिटफंडियों ने राज्य सरकार को अपने मीडिया माध्यमों से ब्लैकमेल करना शुरू किया. जब ब्लैकमेलिंग की हद हो गई तो राज्य सरकार ने इन्हें सबक सिखाने के लिए इनकी मूल कंपनियों की चूले हिला दीं.

बड़े अखबारों में विज्ञापन छपवाकर और शहर शहर में होर्डिंग लगाकर राज्य सरकार ने जनता से अपील की कि वे अपना पैसे इन चिटफंडियों को न दें क्योंकि ये कभी भी भाग सकते हैं और इनके पास कानूनी कागजात पूरे नहीं हैं. राज्य सरकार ने अपने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को बिल्डरों व चिटफंडियों को धरने-पकड़ने, संपत्ति जब्त करने, कागजात की छानबीन करने आदि में लगा दिया. तो ग्वालियर संभाग में करीब तीन दर्जन से ज्यादा कंपनियों पर पुलिस व प्रशासन ने गाज गिरा दी जिसमें पीएसीएल भी है. पीएसीएल वालों ने दिल्ली समेत कई राज्यों में विज्ञापन देकर यह स्पष्ट किया है कि वे कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं.

पीएसीएल के खिलाफ नवभारत टाइम्स और स्टार न्यूज में खबरें छपी-दिखाई गईं. यह भी चर्चा है कि पी7न्यूज के कर्ताधर्ता दिल्ली में गोपालदास भवन में फर्जी निवेशकों को इकट्ठा कर उनके इंटरव्यू अपने पक्ष में जोरशोर से प्रसारित कर रहे हैं ताकि मीडिया में खिलाफ बने माहौल को धीरे धीरे ठीक किया जा सके. ताजी सूचना ये है कि आजसमाज अखबार के गुड़गांव एडिशन में पीएसीएल को निशाना बनाते हुए ऐसी खबर छाप दी जिसकी सत्यता संदिग्ध है. कांग्रेसी नेता विनोद शर्मा के इस अखबार में जिसके प्रधान संपादक आजकल महान पत्रकार राहुल देव हैं, में खबर प्रकाशित हुई की पीएसीएल के कई शहरों के आफिसों पर सेबी के अधिकारियों ने छापेमारी की. पूरी खबर पढ़िए और बताइए कि क्या वाकई पीएसीएल के ठिकानों पर देशव्यापी छापे सेबी के लोगों ने डाले हैं?

स्टार न्यूज ने भी पी7 न्यूज की मंदर कंपनी पीएसीएल के खिलाफ खबर दिखाई

नवभारत टाइम्स के बाद अब स्टार न्यूज ने भी पी7 न्यूज चैनल चलाने वाली कंपनी का भंडाफोड़ शुरू कर दिया है। आमतौर पर मीडिया हाउस एक दूसरे की निगेटिव खबरें दिखाने से बचते हैं लेकिन स्टार न्यूज ने शनिवार दोपहर दो बजे के बुलेटिन में पी7 न्यूज चैनल चलाने वाली पीएसीएल के फर्जीवाड़े को लीड स्टोरी बनाया और पांच मिनट तक चैनल पर चलाया।

स्टार न्यूज ने अपने चैनल पर बंपर में पी7 न्यूज चैनल का जिक्र भी किया। पीएसीएल, पी7 न्यूज के अलावा समाचार पत्रिका “शुक्रवार”, बिजनेस पत्रिका ”मनी मंत्रा” और महिलाओं पर आधारित पत्रिका “बिंदिया” भी निकालती है। ग्वालियर में पीएसीएल सहित 33 चिटफंड कंपनियों के फर्जीवाड़े का पता लगने के बाद शनिवार को अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की गई है। इन कंपनियों के खाते सील कर दिए गए हैं, बल्कि इनके कामकाज पर भी रोक लगा दी गई है। स्टार न्यूज ने कमिश्नर के हवाले से बताया है कि ये कंपनिया पालतू जानवरों मुर्गी, भेड़ और बकरी पालन के नाम पर भोले भाले निवेशकों को ठग रही थी। इनमें से पीएसीएल पर फर्जी जमीन दिखाकर निवेशकों को चूना लगाने के नाम पर कार्रवाई की गई है।

स्टार न्यूज ने बंपर बनाकर और कमिश्नर की बाइट के आधार पर पीएसीएल का कच्चा चिट्ठा खोला और उसे धोखेबाज, फर्जी और भोले भाले निवेशकों की खून पसीने की कमाई चूसने वाली कंपनी तक करार दिया। दो दिन पहले नवभारत टाइम्स के बिजनेस रिपोर्टर ने सेबी के हवाले से पीएसीएल के फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ किया था और बिजनेस पेज पर लीड स्टोरी बनाया था। पीएसीएल के खिलाफ सेबी का केस सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। अपने कथित गड़बड़ कामों को दबाए रखने के लिए पीएसीएल ने सन 2009 में मीडिया में निवेश किया। इसके बाद से पी7 न्यूज में कई ऐसे लोगों की भर्ती हुई जो कंपनी को फायदा पहुंचा सकते थे।

कुछ राजनीतिज्ञों के फोन करवाके कई लोग चैनल में महत्वपूर्ण पद पर आ गए हैं। लेकिन उसके बाद भी कंपनी के खिलाफ कार्रवाई रुक नहीं रही है। इसको लेकर कंपनी के संचालक खासे नाराज हैं। हालिया घटनाक्रम के बाद चैनल के प्रबंधकों पर सब कुछ मैनेज करवाने का दबाव बढ़ गया है। खबर है कि चैनल के संचालक बड़े बिजनेस रिपोर्टरों से संपर्क साधने में जुटे हैं, जो सेबी से उसे राहत दिलवा सके।

भंगू भाई, पी7न्यूज में किसने भांग मिलाई!

पी7न्यूज राजनीति का अखाड़ा बन गया है. पर्ल के मालिक भंगू ने अपने इस चैनल को लेकर ऐसी भाव-भंगिमा अपनाई है कि दर्जन भर लोग आपस में लड़े मरे जा रहे हैं और भंगू ताली बजा बजा कर मजे ले रहे हैं. अगर ऐसा न होता तो पी7न्यूज अंदरुनी खबरों की वजह से नहीं बल्कि बड़ी खबरें ब्रेक करने के लिए चर्चा में होता. करीब दर्जन भर से ज्यादा बार कंपनियों के नाम बदल बदल कर जनता को लूट लूटकर अरबों खरबों का साम्राज्य खड़ा करने वाले भंगू ने असल में न्यूज चैनल इस मकसद से नहीं शुरू किया कि उन्हें जनता या पत्रकारिता का भला करना है.

रिजर्व बैंक आफ इंडिया की तरफ से दर्जन से ज्यादा बार प्रतिबंधित की गई चिट-फंड कंपनियों के मालिक और जनता की गाढ़ी खून पसीने की कमाई का लुटेरा सरदार भंगू दरअसल न्यूज चैनल को ले ही आया है इस मकसद से कि वह सत्ता प्रतिष्ठानों को प्रभावित कर, दबाव में लेकर, सम्मोहित कर अपने काम निकलवा सके, करा सके. पी7न्यूज में अगर आप वरिष्ठ पद पर ज्वाइन करने के लिए इंटरव्यू देने जाएंगे तो वहां मैनेजमेंट के लोग आपसे आपके पत्रकारीय ज्ञान के बारे में नहीं पूछेंगे, वे पूछेंगे कि आप किन किन नेताओं को निजी तौर पर जानते हैं और उनसे कंपनी का काम करा सकते हैं.

जी हां, ये जानकारी सोलह आने सच है. पी7न्यूज में शीर्ष पदों पर नौकरी करने के लिए आपको भंगू के काले कारोबार को बचाने-बढ़ाने का ज्ञान-गुर आना चाहिए अन्यथा एक दिन आप किनारे करके फेंक दिए जाएंगे या फिर आंतरिक गृह युद्ध में ऐसे उलझा दिए जाएंगे कि आप के दिन-रात का चैन खत्म हो जाएगा. और, पी7न्यूज में आंतरिक गृह युद्ध चरम पर है. लोग एक दूसरे के खिलाफ गंभीर आरोप लगा रहे हैं. लोग एक दूसरे के खेमों की जासूसी करा रहे हैं. तीन चार गुट आपस में भिड़े हैं और हर गुट का नेता अपनी कुर्सी बचाने के साथ-साथ अधिकार बढ़ाने की लड़ाई लड़ते हुए दूसरे गुट के नेता को निपटाने पर तुला है. केसर सिंह. सतीश जैकब. रमन पांडेय. ज्योति नारायण.

फिलहाल इन चार गुटों के बीच खींचतान मची हुई है. ज्योति नारायण का पी7न्यूज से सीधे तौर पर कोई लेना देना नहीं है लेकिन चैनल को उनके ही नेतृत्व में लांच किया गया था इसलिए उनके रखे कई लोग ज्योति नारायण के संरक्षण-इशारे पर दूसरे खेमों के खिलाफ सक्रिय हैं. केसर सिंह, जो कभी दूरदर्शन के लिए कार्यक्रम बनाया करते था और आज भी उनका यही प्राइम कारोबार है, भंगू की विचित्र भाव भंगिमा के कारण अचानक पी7न्यूज के सर्वेसर्वा बन गए. ज्योति नारायण के जाने के बाद केसर सिंह को सत्ता में लाया गया. रमन पांडेय पुराने लोगों में से हैं. कम चर्चित यह शख्स पी7न्यूज में लांचिंग के वक्त से है और मालिक भंगू का करीबी होने का दावा करता है. इसी कारण एक बार वह पी7न्यूज से बाहर होने के बाद फिर अंदर प्रवेश पा गया और पहले से ज्यादा मजबूत हो गया. राजनीति का माहिर खिलाड़ी रमन पांडे एक तीर से कई लोगों को निपटाने पर तुला हुआ है, खासकर सतीश जैकब से इसकी पटरी नहीं बैठती है.

सतीश जैकब. इन दिनों पी7न्यूज में हैं और बेहद लाचार हैं. रहे होंगे ये कभी महान पत्रकार लेकिन आजकल ये तनख्वाह पाने के लिए इन-उन संस्थानों के चक्कर लगाते रहते हैं और पी7न्यूज में इनकी गोटी बैठी तो यहीं जम गए हैं. पत्रकारिता के जानकार आदमी हैं. भंगू की विचित्र भाव भंगिमा के कारण ये आ तो गए पी7न्यूज में लेकिन ठनठन गोपाल बने हुए हैं. केसर सिंह, रमन पांडेय आदि इत्यादि गुटों ने इनके हाथ-पांव बांध रखे हैं. केसर गुट को डर है कि कहीं ये आदमी भंगू की विचित्र भाव भंगिमाओं को प्रभावित कर उनका बोरिया बिस्तर न बंधवा दे. रमन पांडेय गुट को डर है कि कहीं ये आदमी काम लेने लगा तो उन लोगों की पोल ही खुल जाएगी, सो इसे काम करने लायक रहने ही न दो.

ज्योति नारायण गुट रक्षात्मक मुद्रा में है. इस गुट के ज्यादातर लोगों को पहले ही निकाला जा चुका है. जो बचे खुचे लोग हैं, वे हर गुट को प्रणाम कर अपनी नौकरी बचाने में जुटे हैं और जो गुट मजबूत इन्हें दिखता है, उसकी खासकर चरण वंदना करते हैं. अभी तक तो आप कहानी की भूमिका सुनर रहे थे, स्टार कास्ट समझ रहे थे. अब बाते हैं मूल स्टोरी पर. पी7न्यूज में इन दिनों लेटर भेजो अभियान चल रहा है. अनाम मेल आईडीज से ग्रुप के सभी लोगों को मेल किया जा रहा है. कभी कोई मेल सतीश जैकब के चरित्र की ऐसी-तैसी करते हुए इन्हें पी7न्यूज से निकाल भगाने की मांग करते हुए होती है तो कभी कोई मेल रमन पांडेय को खलनायक बताती हुई इस आदमी से मुक्ति के लिए गुहार लगाती हुई इन उन सभी के मेलबाक्सों में प्रकट होती है.

और, हर गुट मेल की एक कापी भड़ास4मीडिया के पास भेज देता है ताकि उनके खेल में भड़ास भी शामिल हो जाए. पर ऐसा न करते हुए हम सभी गुटों के खेल में शामिल होना चाहेंगे और उन सभी मेलों को यहां प्रकाशित कर रहे हैं, जो पी7न्यूज की आंतरिक राजनीति से जुड़ी हुई है. इन पत्रों को पढ़कर आप एक बात तो तय कर ही लेंगे कि पी7न्यूज चैनल काफी खतरनाक हो चुका है, यहां काम करने के बारे में सोचना खतरे से खाली नहीं है. इस ग्रुप का मालिक सरदार भंगू पत्रकारों को आपस में भिड़ाकर खुद मजे ले रहा है ताकि उसके चैनल के पत्रकार और संपादक, लाचार बनकर न्याय के लिए उसके यहां गुहार लगाते रहें और वह न्याय करने की मुद्रा में आकर अपने धंधे के लिए सबसे मुफीद पत्रकारों-संपादकों को संरक्षित कर बाकी को निपटा सके.

भंगू की विचित्र भाव भंगिमाओं की कथाएं और एक आदमी द्वारा जनता को लूट-चूस कर और सत्ता-सिस्टम को भ्रष्ट-नष्ट कर खरबपति हो जाने की कथाएं आपको तफसील से पर बाद में बताएंगे. पहले आपको पी7न्यूज में चल रहे लेटर भेजो अभियान के लेटरों को पढ़ाते हैं.

 


ये हैं तीन पत्र जो आजकल पी7न्यूज से जुड़े लोगों के पास मेल के जरिए घूम-फिर रहे हैं…

((पत्र नंबर एक))

सतीश जैकब को रमन-केसर निपटाने पर तुले हैं

पी7 में भूकंप आया हुआ है…. करीब दो-ढाई वर्ष पहले अस्तित्व में आए इस नेशनल न्यूज चैनल में नए एडिटर इन चीफ सतीश जैकब (बीबीसी फेम) के ज्वाइन करने के बाद घबराए हुए कुछ लोगों ने कई उल्टे सीधे कदम उठाने शुरू कर दिए हैं…. सतीश जैकब को पर्ल ग्रुप के चेयरमैन ने चैनल की कमान दी है…. उसके बाद जैकब ने आउटपुट हेड रमन पांडे के कामकाज पर उंगली उठानी शुरू कर दी…. रमन पांडे ने कभी भी आउटपुट के कामकाज सुधारने पर जोर नहीं दिया…. उसकी जगह वो डायरेक्टर केसर सिंह को साधने और चंडीगढ़ में बैठने वाले कुछ डायरेक्टरों को खुश करने में ही लगे रहते हैं…. चंडीगढ़ के ब्यूरो चीफ मुकेश राजपूत उनके लिए चंडीगढ़ में लाबिंग करते हैं और इसके बदले में मुकेश की हर उल्टी सीधी खबर चैनल में प्रमुखता से चलती है… मुकेश को पी7 में रमन पांडे ने एक तरह का डायरेक्टर का दर्जा दिला रखा है…. बताते हैं कि रमन पांडे ने कभी भी चैनल को सुधारने या प्रजेंटेशन पर जोर नहीं दिया,  उनको कभी भी किसी ने कंप्यूटर पर कुछ भी लिखते या पढ़ते नहीं देखा….  अपनी कुर्सी बचाने के लिए चैनल में हर नए आने वाले के खिलाफ वो  डायरेक्टर केसर सिंह को भरना शुरू कर देते हैं….. अपनी कुर्सी जाते देख रमन ने केसर सिंह को डर बैठाकर सतीश जैकब का विरोधी बनाना भी शुरू कर दिया है…..यही कारण है सतीश जैकब को न्यूजरूम के कामकाज में जरा भी छूट नहीं दी जा रही  है…. हाल ही में सतीश जैकब के खिलाफ चैनल के सभी स्टाफ के पास फर्जी नाम से मेल भेजा गया, जिसमें बुजुर्ग सतीश जैकब के चरित्र हनन और उनके कामकाज पर सवाल उठाए गए….. मेल में उनको ठरकी, बूढ़ा, चुका हुआ और नास्टिल्जिया में रहने वाला पत्रकार करार देकर खिल्ली उड़ाई गई…. इस साजिश के पीछे सतीश जैकब को नीचा दिखाने की कोशिश थी…. इसके बाद चंडीगढ़ ब्यूरो की मदद से इस मेल को डायरेक्टरों के पास भेजकर सतीश जैकब की इमेज खराब करवाई गई…. इस सारी कोशिशों से अंततः सतीश जैकब को नुकसान उठाना पड़ा….  उनकी बिना जानकारी में रमन गुट अपने विरोधियों को चैनल से बाहर का रास्ता दिखाने में जुटा है… जिस जिस से रमन की नहीं पट रही, केसर सिंह के जरिए उसको सीधा चैनल छोड़ने का फरमान सुना दिया जा रहा है…. चैनल से जुड़े पुराने लोगों को निकालने का क्रम जारी है और अभी 50 लोगों की लिस्ट एचआर को सौंपी जा चुकी है… चैनल में कामकाज का माहौल खत्म हो चुका है…. रमन के खास लोगों को छोड़कर सभी पर नौकरी जाने की दहशत कायम है…. अब तक करीब एक दर्जन लोगों को रमन पांडे नोटिस  दिला चुके हैं…. इनमें से कई लोग अदालत जाने की तैयारी कर रहे हैं…. इसकी जानकारी पर्ल ग्रुप के चेयमैन आफिस तक पहुंची तो डायरेक्टर केसर सिंह को चंडीगढ़ बुलाकर नाराजगी जताई गई…

एक और बात बता दूं. पी7 के नए संपादक सतीश जैकब कुछ समय के लिए इंडिया न्यूज में सलाहकार के तौर पर काम कर चुके हैं… जैकब ने इंडिया न्यूज के कुछ लोगों को जूनियर पोस्ट पर पी7 में ज्वाइन करवाया.. वो अपनी पसंद के कुछ सीनियरों को भी इंडिया न्यूज से लाने की कोशिशों में जुटे हैं… लेकिन इसकी भनक लगते ही इंडिया न्यूज से लोगों को पी7 में लाने पर रमन-केसर लाबी ने रोक लगवा दी है. कुल मिलाकर पी7 में इन दिनों कामकाज का माहौल खत्म हो चुका है. इसका सीधा असर चैनल पर दिखने भी लगा है….

((पत्र नंबर 2))

पी7 से लोगों को निकालने वाले असली हाथ

पी7 न्यूज़ चैनल से एकसाथ इतने सारे लोगों को निकालने को लेकर मीडिया जगत में तरह तरह की अटकलें हैं अच्छा काम करने वालो को भी बाहर निकाल दिया गया है…इसके लिए पी7 के मैनेजमेंट ने उस वक्त के इनपुट हैड राकेश शुकला और आऊटपुट हैड रमण पांडे से छटनी के लिए  नाम की लिस्ट मांगी … लिस्ट मागने के बाद मैनेजमेंट ने बहुत चालाकी के साथ उसे अपने पास रखा और कोई एक्शन नहीं लिया  और सतीश जैकब के आते ही…राकेश शुकला को ही सबसे पहले  हटा दिया…..

लोग ये समझे कि  सतीश  जैकब ने आते ही अपना काम शुरू कर दिया… उसके कुछ दिनो के बाद मैनेजमेंट ने उस लिस्ट पर कारवाई करनी शुरू कर दी …उसके बाद लोगो को यकिन हो गया कि ये सतीश जेकब का ही काम है …..मगर सच्चाई कुछ और ही है… मैनेजमेंट ने सतीश जेकब को एडिटर इन चीफ की कुर्सी तो ज़रूर दे दी मगर उस कुर्सी की पावर नहीं दी….. वो न किसी को निकाल ही सकते हैं और न रख ही सकते हैं …इस के पीछे भी बहुत बड़ा खेल है…सोचने वाली बात ये है…जिस शख्स ने 27 साल बीबीसी अंग्रेजी में काम करने के बाद  दो किताबे लिखी “द अमृतसर – द लास्ट बैटल ऑफ इंदिरा गांधी”..और “द वार इन इराक़”…….

यही नहीं ये शख्स तीन साल तक प्रेस क्लब का अध्य़क्ष रहा और एडिटर गिल्ड का  मेम्बर भी ….सरकार ने भी उसकी काबलियत को देखते हुए लांग एंड  डिस्टिन्ग्विश सर्विसेस का कार्ड दिया …जो भारत में सिर्फ नौ लोगों के पास है …… जो बीबीसी में पहला भारतीय इंटरनेशनल कॉरेस्पोंडेट था बीबीसी से रिटायरर्मेट के बाद इतने काबिल और तजुर्बेकार व्यक्ति के साथ काम करना सब के लिए सम्मान की  बात है……उन लोगो को सच्चाई जानने की ज़रूरत है…जो अफवाह फैला रहे है ….क्योंकि शायद वो भी पत्रकार है……और एक पत्रकार को अक्सर परदे के पीछे का खेल देखना चाहिए ……न कि वो जो दिखाया जा रहा है…….

((पत्र नंबर तीन))

इस सतीश जैकब से बच के रहियो

कामरेड लाल सलाम, लाल सलाम इसलिए की ये नारा क्रांतिकारियों का है… और हम आपके साथ हैं, आपकी तरह, लेकिन अफसोस, की हम क्रांति नहीं कर सकते है… तभी तो लेख के माध्यम से एक ऐसे छद्मवेशी व्यक्ति की जानकारी आपको दे रहे हैं जो पिछले कई सालों से मीडिया इंडस्ट्री को शर्मसार कर रहा है… हम बात कर रहे हैं कथित माननीय सतीश उर्फ सतीश जेकब की जिसको इंडिया न्यूज़ से निकाल दिया गया. जिसे इंडिया टीवी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.

फिर ये आख़िर पी7 के भाग्य में क्यों अटक गया. दरअसल साथियों इन जनाब को बहुत कम लोग जानते है. तभी तो ये अपने बाप दादा का नाम गांव और बल्दियत बताते फिरते हैं.. इंडिया न्यूज़ की कहानी जान लिजिए. मालिकों को सब्जबाग दिखाया. बताया कॉंग्रेस का महारथी हूं. मनु शर्मा को जेल से बाहर निकलवा दूंगा. मालिकों ने धोखा खाया और इसकी बुढ़ापे में नौकरी लग गयी. बाद में वहां के लोगों को पता चला कि इस व्यक्ति को टेलिविजन आता ही नहीं है. दरअसल ये जेकब जी उस जमाने का हीरो अपने आप को बताते हैं जब दुनिया  में सूचना क्रांति आयी नहीं थी. और बीबीसी में काम करने वालों को गोरों का दलाल समझा जाता था. वे गोरे जो हमारे देश पर हाथ साफ किये और हमारे भाईयों  पर जुल्म बरसाये.

खैर इंडियां न्यूज़ पर लौटते है वहां ममता (बदला हुआ नाम) नाम की लड़की से इन्हें प्यार हो गया. चौकिंये मत इस बुढ़े (74 साल) की फितरत ही ऐसी है. दिमाग पर गौर डालिए ….पी7 में ऐसा ही कुछ कर रहा होगा….खैर हरिश गुप्ता समय रहते भाप गये.और इस ………को समय रहते बाहर का रास्ता दिखा दिया.

अब जरा इंडिया टीवी के बारे में जान लिजिए. महामहिम रजत शर्मा को इस माननीय ने अपने जाल में कैसे फांसा. रजत जी को बता आया कि हमारा संबध विदेशियों से ज्यादा है क्योकि मै कनवर्टेड हूं. फाईनेंस दिलवाउंगा …रजत जी का भी बुरा दौर था.इसके बहकावे में आ गए. लेकिन जैसे ही कम्पनी में इन हुआ दूसरे वफादार साथियों के खिलाफ जाल बुनना शुरू कर दिया. यहां भी लड़कियों पर डोरे डालने लगा. हम ये नहीं कह रहे है कि ये सबकुछ वासना के लिए कर रहा था. बल्कि जो लड़कियां इसके करीब थीं वो बताती हैं कि कॉफी पीने के लिए बार-बार परेशान करता था. और नहीं जाने पर कहता था की हमारी तो कोई गर्ल फ्रेन्ड ही नहीं है. रजत जी समझदार थे. बीमारी ज्यादा फैलने के पहले दुकान पर दो लात लगा दी.

बुढ़ापे में दारू पीने का पैसा नहीं था. बेटा बेरोजगार है. बहू को प्रमोट करना था. इस उमर में इतने तनाव…. रास्ता ढूढते पहुंच गया पी7. और आते ही राकेश शुक्ला सर का विकेट गिरा दिया. क्या भगवान इसको माफ करेंगे… खैर आने के पहले.. किसी से फोन कराया. सीधे-साधे मालिकों को, पोलिटिकल पैरवी से नौकरी पा लिया. कोई हमारी आपकी तरह साक्षात्कार देकर नहीं आया. टेस्ट नहीं दिया अपना नहीं तो पोल खुल जाती, स्क्रीप्ट लिखने नहीं आती (हिन्दी टाईप करना नहीं आता, टेस्ट लेकर देख लीजिए फेल हो जायेगा… कंसेप्ट कुछ नहीं है ….रेडियो का गाना गाता है….लोग मज़ाक उड़ाते हैं. और तो और कमाल देखिये जिस छत्रछाया में पेट पालने आया है उसके ही डायरेक्टर का जड़ खोद रहा है.. कहता है कि केसर सिंह को जरूर हटाउंगा मैं निर्मल सिंह को रिपोर्ट करता हूं. पहले तीनमूर्ती जिन्होने इस चैनल के लिए अपनी जवानी दे दी यानि रमन सर, अनुराग सर और खंडुरी सर उनके खिलाफ जहर उगलता है. लड़कियों के प्रति नरम है लेकिन ये खबर जब हरिश गुप्ता और रजत शर्मा के पास पहुंचेगी तो उसके नर्मी का राज बता सकते है.

चैनल में अपने बेटे को बुलाने के पहले गेस्ट के आने का कीमत यानि पैसे तय करवा लिये ..और रोज अपने बेटे को बुलाता रहा गेस्ट स्पीकर के रुप में.यानि लाखों रूपये के आस पास अपने बेटे को दिलवा दी भला हो उस मालिक का जो अब भी इसके कर्मों को माफ कर रहा है. इनको करीब से जानने वाले कहते हैं कि सतीश उर्फ जेकब को पत्रकार कौन मानता है .ये तो विमेनाइजर है जो दिल्ली में अपने घर पर अपनी दारु पार्टी, कबाब ..शबाब के लिए जाना जाता है. खाता है पीता है और वही सो जाता है. हम ये कहानी आपको इसलिए बंया कर रहे है कि आप भी हो जाईये इससे सावधान. जो जात का न रहा है वो किसका होगा.कामरेड बहुत दुख के साथ अपको लाल सलाम

सतीश जैकब ने पी7न्यूज से आठ लोगों को निकाला!

पिछले ढाई साल में पी7न्यूज ने स्टाफ की मेहनत से जो मुकाम हासिल किया, उसे अनदेखी कर पी7न्यूज के पुराने लोगों को बाहर का रास्ता अंदरूनी राजनीति के कारण दिखाया जा रहा है. दो महीने पहले बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार सतीश जैकब के पी7न्यूज में वरिष्ठ पद पर आने के बाद से यह कयास लगाया जा रहा था कि जल्द ही चैनल में बड़ा फेरबदल होगा. और अब उस फेरबदल का दौर शुरू हो गया है.

कुछ दिन पहले मैनेजमेंट ने इनपुट हेड राकेश शुक्ल को बाहर का रास्ता दिखाया था. आज एचआर की तरफ से चैनल की लांचिंग से जुड़े रहे 8 पुराने लोगों को अचानक से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. गौरतलब है कि इसी महीने सभी लोगों का इन्क्रीमेंट होना था लेकिन सब के सब मैनेजमेंट के शिकार बन गए. एचआर ने लोगों को बहार निकाले जाने का कारण मैनेजमेंट का फैसला बताया है. एचआर के मुताबिक मैनेजमेंट इनके काम से संतुष्ट नहीं था इसलिए इनको बहार किया जा रहा है. सूत्रों की मानें तो यह सब सतीश जैकब के इशारे पर हुआ है और इनमें सब ऐसे लोग हैं जिनकी काबिलियत को पी7न्यूज मैनेजमेंट खुद जानता है. इन लोगों ने चैनल के लिए अपना दिन रात एक कर दिया था. लेकिन एकबारगी इन सभी लोगों को एक साथ बाहर किया जाना किसी के गले नहीं उतर रहा है.

इस बड़ी छंटनी के बाद पूरे चैनल में सबके चेहरों के रंग उड़ गए हैं. सब सोच रहे हैं कि आखिर अब और कितने लोग मैनेजमेंट के निशाने पर होंगे. माना यह जा रहा है कि सतीश जैकब अब अपने लोगों की टीम को इस चैनल में लाकर अपनी सेना को मैदान में खड़ा करना चाहते हैं. सूत्रों की माने तो अभी बीस और लोगों के नाम सतीश जैकब की लिस्ट में है जिनको बाहर का रास्ता दिखाया जाना है. पूरे चैनल के कर्मचारी डरे हुए हैं कि अब किसकी बारी है. ज्योति नारायण के जाने के बाद से पी7न्यूज में अंदरूनी राजनीति चरम पर है. इसका शिकार कर्मचारियों को बनना पड़ रहा है.

सड़क दुर्घटना में मुकुंद शाही, जयंत चड्ढा समेत चार की हालत गंभीर

एक दुखद सूचना है. कल रात पी7न्यूज से जुड़े चार लोग सड़क हादसे में बुरी तरह घायल हो गए. क्राइम टीम के मुकुंद शाही, जयंत चड्ढा, एक कैमरा पर्सन और ड्राइवर को कैलाश हास्पिटल में भर्ती कराया गया है. जयंत चड्ढा की हालत नाजुक बताई जा रही है. पता चला है कि पी7न्यूज की यह टीम एक क्राइम शो को शूट कर लौट रही थी. दिल्ली के मथुरा रोड पर किसी गाड़ी से इन लोगों की गाड़ी भिड़ गई.

मुकुंद और जयंत जिस गाड़ी पर सवार थे वह पी7न्यूज चैनल की ही गाड़ी थी. इस हादसे की खबर मिलते ही पी7न्यूज में सब लोग सन्न रह गए. पी7न्यूज प्रबंधन ने घायल मीडियाकर्मियों के बेहतर इलाज के लिए तुरंत प्रयास शुरू कर दिए. इन सभी को कैलाश हास्पिटल में दाखिल कराया गया है. इस घटनाक्रम के बारे में अगर आपको कोई सूचना हो तो भड़ास4मीडिया तक अपनी जानकारी नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए या फिर bhadas4media@gmail.com पर मेल करके भेज सकते हैं.

पी7न्यूज में दो ने इस्तीफे का नोटिस भेजा

: अपडेट : स्वाभिमान टाइम्स जाने की तैयारी : पी7न्यूज से खबर मिली है कि दो पत्रकारों ने प्रबंधन को अपने इस्तीफे का नोटिस थमा दिया है. इनका इस्तीफा अभी स्वीकार किया नहीं गया है. बताया जा रहा है कि ये दोनों लोग हिंदी दैनिक स्वाभिमान टाइम्स से जुड़ने की तैयारी कर रहे हैं.

पी7न्यूज प्रबंधन को इस्तीफे से संबंधित नोटिस देने वाले पत्रकारों के नाम हैं- अमित निधि और शंभू भद्रा. सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी पर भरोसा करें तो अमित निधि की ज्वायनिंग स्वाभिमान टाइम्स में चीफ सब एडिटर के पद पर हो सकती है जबकि दैनिक जागरण में कार्य कर चुके शंभू भद्रा स्वाभिमान टाइम्स में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में नई पारी की शुरुआत कर सकते हैं.

पी7 न्‍यूज छोड़ 15 को न्‍यूज एक्‍सप्रेस से जुड़ेंगे सत्‍येन्‍द्र

सत्‍येन्‍द्र: पंकज शर्मा ने राजस्‍थान पत्रिका ज्‍वाइन किया : पी7 न्‍यूज, कोलकाता के ब्‍यूरो हेड सत्‍येंद्र प्रताप सिंह 31 जनवरी को पद त्‍याग देंगे. वे 15 फरवरी से नए लांच होने वाले टीवी न्‍यूज चैनल न्‍यूज एक्‍सप्रेस कोलकाता के स्‍टेट हेड के रूप में काम करेंगे. सत्‍येंद्र पिछले पचीस वर्षों से पत्रकारिता में हैं. प्रिंट एवं इलेक्‍ट्रानिक मीडिया दोनों पर इनकी समान पकड़ है.

इन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत 1985 में रविवार से सब एडिटर के रूप में की थी. बाद में इन्‍हें रविवार का चीफ सब एडिटर बना दिया गया. संडे आब्‍जर्बर में स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट तथा ब्‍यूरोचीफ रहे. प्रभात खबर के भी ब्‍यूरोचीफ बने. दिल्‍ली में करेंट न्‍यूज के एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर के रूप में भी काम किया. फिर बीएजी के जरिए इलेक्‍ट्रानिक मीडिया से जुड़ गए. बीएजी में ये एडिटोरियल को-आर्डिनेटर और स्‍पेशल करेस्‍पांडेंट रहे. टीवी, लाइव दिल्‍ली को भी पॉलिटिकल एडिटर के रूप में अपनी सेवाएं दीं. भोजपुरी न्‍यूज चैनल हमार टीवी के भी ब्‍यूरोचीफ रहे. यहां से इस्‍तीफा देने के बाद पी7 न्‍यूज से जुड़ गए थे.

डीएलए, दिल्‍ली से पंकज शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर असिस्‍टेंट मार्केटिंग मैनेजर थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी राजस्‍थान पत्रिका, दिल्‍ली के साथ शुरू की है. उन्‍हें डिप्‍टी मार्केटिंग मैनेजर बनाया गया है. पंकज पिछले कई वर्षों से मीडिया से जुड़े हुए हैं.

इंडिया न्यूज और पी7न्यूज जाएंगे राजस्थान

: पी7न्यूज में जल्द आ रहा है नया चैनल हेड : दो चैनलों ने राजस्थान के लिए रीजनल न्यूज चैनल लांच करने की तैयारी शुरू कर दी है. इंडिया न्यूज की एक उच्च स्तरीय टीम आजकल राजस्थान के दौरे पर है. उधर पी7न्यूज ने राजस्थान के अलावा गुजरात में रीजनल न्यूज चैनल लांच करने के प्रयास तेज कर दिए हैं. पी7न्यूज को इसके लिए लाइसेंस भी मिल चुका है. पी7न्यूज से जुड़े एक उच्च पदस्थ सूत्र ने बताया कि मैनेजमेंट ने इन दो राज्यों में चैनल लांच के लिए प्रयास तेज करने को कह दिया है. इसके लिए एक टीम गठित कर दी गई है.

एक अन्य सूचना के मुताबिक पी7न्यूज के लिए एक चैनल हेड की तलाश जोरशोर से हो रही है. कई वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत चल रही है. जल्द ही किसी एक को चैनल हेड के रूप में ज्वाइन कराया जाएगा. उसके बाद पी7न्यूज के कई वरिष्ठों को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है. नए चैनल हेड को अपनी टीम बनाने की पूरी छूट होगी. सूत्रों के मुताबिक केसर सिंह चैनल के संचालन में विफल रहे हैं. चैनल में आंतरिक राजनीति चरम पर है. इस कारण अब किसी प्रोफेशनल व अनुभवी व्यक्ति को लाने की तैयारी की गई है.

ज्योति नारायण के जिम्मे एक और कंपनी

ज्योति नारायण के बारे में सूचना मिली है कि उन्हें पर्ल इनफ्रास्ट्रक्चर का भी काम सौंप दिया गया है. अभी तक वे पर्ल मीडिया की तीन कंपनियों के अलावा पीएसीएल, टूरिज्म से जुड़ी कंपनियों का काम देख रहे हैं. अब उन्हें पर्ल इनफ्रास्ट्रक्चर का भी जिम्मा दे दिया गया है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक ज्योति नारायण को पिछले दिनों पर्ल निदेशक मंडल की हुई एक बैठक में पर्ल इनफ्रास्ट्रक्चर का काम सौंपा गया. नई जिम्मेदारी के कारण ज्योति नारायण पर्ल मीडिया के प्रतिदिन के रुटीन  वाले काम नहीं देखेंगे. वे पर्ल मीडिया के नीतिगत फैसलों में पहले की तरह सक्रिय रहेंगे.

ज्योति नारायण पर्ल मीडिया की तीनों कंपनियों में बतौर निदेशक शामिल हैं. ज्ञात हो कि ज्योति नारायण के नेतृत्व में पर्ल मीडिया का काम शुरू हुआ और देखते ही देखते मैग्जीन व चैनल स्थापित होते चले गए. पर्ल मीडिया के अलावा पर्ल ग्रुप की कई अन्य कंपनियों के काम देख रहे ज्योति नारायण अब इनफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी पर्ल की कंपनी का भी काम देखेंगे.

भड़ास4मीडिया ने इस बारे में जब ज्योति नारायण से बात की तो उन्होंने पर्ल इनफ्रास्ट्रक्चर की जिम्मेदारी मिलने की बात कुबूल की. साथ ही यह भी कहा कि उनके लिए पर्ल ग्रुप की प्रत्येक कंपनी उतनी ही महत्वपूर्ण है जितनी मीडिया कंपनी. वे पर्ल मीडिया का काम देखने से पहले भी पर्ल ग्रुप के लिए पूरी ऊर्जा से काम करते रहे हैं और आगे भी करते रहेंगे. उनके लिए प्रत्येक कंपनी का काम उतना ही महत्वपूर्ण है जितना किसी एक कंपनी का हो सकता है. हां, ये हो सकता है कि किसी खास समय के लिए किसी खास कंपनी पर ध्यान ज्यादा हो. कंपनी की जरूरत के हिसाब से प्राथमिकताओं में बदलाव संभव है.

ज्योति के मुताबिक पर्ल ग्रुप की कई कंपनियों का काम हो जाने से प्रत्येक कंपनी के रुटीन के काम में हस्तक्षेप करना संभव नहीं होता है. इस कारण कई बार लोग मनगढंत बातें बनाने लगते हैं. लेकिन काम करने वालों पर नकारात्मक या सकारात्मक, किसी भी प्रकार के प्रचार का असर नहीं पड़ता है, और न पड़ना चाहिए.

पर्ल ग्रुप के मीडियाकर्मियों को इनक्रीमेंट का तोहफा

: लेकिन कम पैसे बढ़ने से नाराज हैं कई लोग : पर्ल ग्रुप से सूचना है कि पी7न्यूज चैनल, शुक्रवार मैग्जीन, मनी मंत्रा मैग्जीन समेत मीडिया के समस्त कर्मियों की सेलरी में इंक्रीमेंट किया गया है. यह इंक्रीमेंट पांच से 20 फीसदी के बीच है. बताया जा रहा है कि पांच महीने की देरी के बाद हुए इनक्रीमेंट को लेकर कई लोगों में रोष है.

जिनके कम पैसे बढ़े हैं, वे प्रबंधन को दोषी बता रहे हैं. उनका कहना है कि सिर्फ उन लोगों को 20 प्रतिशत इनक्रीमेंट मिला है जिन्होंने बासेज की बटरिंग की और काम पर कम ध्यान दिया, उन्हें अच्छा लाभ मिला है. जिन्होंने दिन रात काम किया, उन्हें ठेंगा दिखा दिया गया. बताया जा रह पी7न्यूज में 9 घंटे की शिफ्ट कर दी गई है. बाहर चाय पीने जाने वालों को तनख्वाह काटने की धमकी दी जाती है. सूत्रों के मुताबिक पी7न्यूज में आजकल एचआर ने उत्पीड़न बढ़ा दिया है.


बहुत जल्द, एक मजेदार स्टोरी, इंतजार करें- ”भड़ास4मीडिया से क्यों खफा है सहारा समूह”

 

स्टेटमेंट की जगह लीगल नोटिस

कहते हैं कि अगर कहीं अंदर ही अंदर कुछ हो रहा होता है तभी उसका बाहर जोरदार खंडन किया जाता है. पर्ल ग्रुप के न्यूज चैनल पी7न्यूज में सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है. पर प्रबंधन बाहर यह जताने-दिखाने की कोशिश कर रहा है कि सब ठीक है. इसी क्रम में पर्ल ग्रुप व पी7न्यूज के लिए काम करने वाली एक लीगल फर्म ने अपने ‘क्लाइंट्स’ की तरफ से एक नोटिस जारी किया है.

नोटिस में पी7न्यूज को लेकर अफवाह उड़ाने वालों को चेतावनी दी गई है. पहले कहा जा रहा था कि पी7न्यूज के संचालन को लेकर शीर्ष स्तर पर जो आंतरिक फेरबदल हुए हैं, या जिम्मेदारियों में जो बदलाव किए गए हैं, उसके बारे में अधिकृत स्टेटमेंट जारी किया जाएगा ताकि बाहर फैले भ्रम को दूर किया जा सके. लेकिन अभी जो स्टेटमेंट की जगह लीगल नोटिस जारी हुआ है, वह यह कहीं नहीं बताता कि पी7न्यूज में निदेशक त्रयी सहजपाल, सुब्रत, केसर का दखल बढ़ गया है, अन्य निदेशकों के सक्रिय कर दिए जाने से अभी तक इकलौते निदेशक की तरह और आल इन वन के रूप में काम देख रहे ज्योति के अधिकार पहले से कम हुए हैं.

दूसरे निदेशक भले ही पी7न्यूज को लेकर अब तक निष्क्रिय या साइलेंट रहे हों, पर उनकी सक्रियता अब बढ़ गई है. पी7न्यूज से जुड़े फैसले लेने के मामले में दूसरे निदेशकों की भी चल रही है. ज्योति नारायण के करीबियों पर गाज गिराई जा रही है. प्रकाश सिंह का वीओआई से जाना इसी का संकेत माना जा रहा है. पिछले दिनों कई जर्नलिस्टों ने एक साथ पी7न्यूज से इस्तीफा दिया था पर उन सबको वापस बुलाया गया. अंदरखाने इसे दूसरे निदेशकों के दखल से जर्नलिस्टों की वापसी करार दिया गया. हाल-फिलहाल ज्योति नारायण के पीए का तबादला कर दिया गया है और श्रीकांत त्रिपाठी के शुक्रवार के दिनों में पीए रहे शख्स को कार्यमुक्त कर दिया गया है. इसको भी लेकर कई तरह की चर्चाएं हैं.

सूत्र बताते हैं कि पर्ल ग्रुप के चेयरमैन भंगू के यहां मीडिया प्रोजेक्ट व पी7न्यूज को लेकर पर्ल ग्रुप के कई निदेशकों व वरिष्ठ पदों पर आसीन अधिकारियों ने ज्योति नारायण की कार्यशैली की शिकायत की थी. भंगू ने कई स्तरों पर आ रही शिकायतों को देखते हुए मीडिया प्रोजेक्ट में दूसरे निदेशकों व कुछ वरिष्ठों को भी इनवाल्व कर दिया ताकि पारदर्शिता बनी रहे और कोई एक व्यक्ति सर्वेसर्वा न बन सके. सूत्रों के मुताबिक इसी कारण पर्ल ग्रुप के निकलने वाले अखबार की जिम्मेदारी ज्योति नारायण को देने की जगह ‘शुक्रवार’ मैग्जीन से विदा किए गए श्रीकांत त्रिपाठी को सौंपी गई.

हालांकि यह अखबार अभी तक निकल नहीं सका है और इसके निकलने की फिलहाल कोई संभावना भी दिख नहीं रही है लेकिन श्रीकांत त्रिपाठी ‘शुक्रवार’ मैग्जीन से विदा होकर भी पर्ल ग्रुप के हिस्से बने हुए हैं और वे वह सारी सुविधाएं पा रहे हैं जो ‘शुक्रवार’ के संपादक रहते हुए हासिल कर रहे थे. ऐसा इसलिए क्योंकि ज्योति नारायण से खफा चल रहे श्रीकांत त्रिपाठी पर चेयरमैन भंगू ने अपना हाथ रख दिया. सूत्र यह भी बताते हैं कि चेयरमैन भंगू कंपनी में आंतरिक लोकतंत्र कायम रखने के लिए शीर्ष स्तर के हल्के-पुल्के विवादों को हवा देते रहते हैं ताकि सच्चाई कहीं न कहीं से उन तक पहुंच जाए. इस कारण कोई जानकारी दबी छिपी रह नहीं पाती और हर एक नकारात्मक-सकारात्मक घटनाक्रम उन तक पहुंचता रहता है.

इनटरनल डेमोक्रेसी के समर्थक भंगू ने पर्ल के मीडिया प्रोजेक्ट को लेकर कई शिकायतों के बाद अब ढेर सारे लोगों को इस प्रोजेक्ट का पार्ट बना दिया है. जाहिर है कि अन्य निदेशकों की सक्रियता के कारण पी7न्यूज को अब तक अकेले हैंडल कर रहे ज्योति नारायण का रुतबा कम होगा. प्रबंधन आंतरिक मतभेद बाहर न आने देने के लिए इस बदलाव को अधिकृत तौर पर स्वीकार नहीं कर रहा पर पिछले महीने भर के घटनाक्रमों पर नजर डालें तो समझ में आ जाता है कि धुआं है तभी आग की चर्चाएं हो रही हैं. फिलहाल, हम यहां पर्ल ग्रुप के लिए काम करने वाली एक लीगल फर्म की ओर से जारी नोटिस के कुछ अंश को यहां दे रहे हैं-


Excerpts of the legal notice

We are concerned, for our client i.e. Pearls Broadcasting Corporation Limited, having its office at C-55, Sector-57, Noida – 201 301.

1. Our client is a Company incorporated and registered under the Companies Act, 1956 and is engaged in the business activities relating to entertainment and other allied activities.

2. In November 2008, our client has launched electronic channel “P 7 News” with its vision to encompass all the aspects of good electronic media.  Our client is running the news channel “P 7 News” with perfection, performance and passion, under the supervision and control of experienced persons in the Board of Directors of our client, which consists inter-alia Mr. Jyoti Narayan, Mr. M.L. Sehjpal and Mr. Kesar Singh.

3. Our client, since the launch of “P 7 News” has been successful to cover all the areas from fashion to philosophy, entertainment and music, science and technology and almost all aspects of human life and is growing manifold successfully by achieving difficult task in most simple, sincere and real way.

4. It has recently come to the notice and knowledge of our client that certain rumors and misleading statements and facts have been published in a section of the media regarding the management and other officials of our client.

5. There is no dispute or misunderstanding whatsoever between the management of our client or any of its officials. All the allegations and concocted stories put forth by a section of the media are nothing but an abuse of power of press and media and are nothing but a classic example of defamatory practice.

6. In the aforesaid circumstances, under the instructions of, for and on behalf of our client, we hereby call upon media persons to immediately restrain and desist themselves from publishing any kind of defamatory statement or representation concerning our client.

Yours sincerely,

ZEUS Law Associates

For Pearls Broadcasting Corporation Ltd

पी7न्यूज : सस्पेंस कल खत्म होगा!

पी7न्यूज के संचालन को लेकर निदेशकों के अधिकारों-दायित्वों में फेरबदल पर कायम सस्पेंस, विवाद और अफवाहों पर कल विराम लगने की उम्मीद है. सूत्रों का कहना है कि पर्ल ग्रुप की तरफ से एक आफिसियल स्टेटमेंट तैयार कराया जा रहा है. बताया जा रहा है कि स्टेटमेंट में पी7न्यूज के संचालन करने वाले निदेशकों और इनके कार्यदायित्व का उल्लेख किया जाएगा. पी7न्यूज को अभी तक सिर्फ एक निदेशक, ज्योति नारायण, देख रहे थे.

पर कंपनी ने अचानक अपने कई अन्य निदेशकों की इंट्री पी7न्यूज में करा दी है. इसके बाद से ही ज्योति नारायण को लेकर कयासबाजी का दौर शुरू हो गया. सूत्रों की मानें तो ज्योति नारायण के खिलाफ उन्हीं की कंपनी में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत कुछ अधिकारी तरह-तरह की अफवाहों को संगठित तरीके से फैलाने का काम कर-करा रहे हैं. और इन अफवाहों को पंख लगाया वेब-ब्लागों ने. जगह-जगह तरह-तरह की खबरें छपने लगी.

ज्योति नारायण के बार-बार सफाई देने के बावजूद अंदरखाने से आ रही खबरों ने स्पष्ट किया कि पर्ल ग्रुप के मीडिया प्रोजेक्ट को अब कई निदेशक मिलकर चलाएंगे. निदेशक सहजपाल सिंह, निदेशक केसर सिंह, निदेशक सुब्रतो भट्टाचार्य के लिए भी पी7न्यूज में केबिन बनने लगे. ये लोग आपस में बैठकर मीटिंग करने लगे. स्वास्थ्य कारणों से ज्योति नारायण जब एक दो दिन आफिस नहीं पहुंचे तो चर्चा शुरू हो गई कि पी7न्यूज में शीर्ष स्तर पर तख्ता पलट हो गया.

इन सारी चर्चाओं-अफवाहों पर ज्योति नारायण कहते हैं कि उन्हें समझ में नहीं आ रहा है कि कौन लोग हैं जो बेसिर-पैर की बातें फैला रहे हैं. उधर, सूत्र कहते हैं कि बिना आग के धुआं नहीं निकलता. जिस चैनल को अभी तक सिर्फ एक निदेशक चलाता था, अब कई निदेशक बैठ कर चलाने लगे तो जाहिर है, बात तो कुछ है. निदेशक मंडल की बैठक में पी7न्यूज के नीतिगत फैसले सामूहिक तौर पर करने का निर्णय लिया जाना बताता है कि अंदरखाने कुछ चल रहा है जिसे कोई भी निदेशक सार्वजनिक तौर पर स्वीकार नहीं कर रहा है. सबकी कोशिश यही है, बाहर मैसेज जाए कि अंदर सब कुछ स्मूथ चल रहा है.

कंपनी का एक खास बंदा आजकल पी7न्यूज में आडिटिंग के काम में लगा हुआ है. आफिसियली कहा जा रहा है कि आडिटिंग रुटीन का काम है. आफ द रिकार्ड लोग कहते हैं कि पुराने सारे कागज-पत्तर देखे-पलटे जा रहे हैं. अन्य निदेशकों को सक्रिय किए जाने को लेकर आफिसियली कहा जा रहा है कि मीडिया प्रोजेक्ट बड़ा हो चुका है और कई लोग मिलकर इसे देखेंगे ताकि पारदर्शिता कायम रह सके. आफ द रिकार्ड कहा जा रहा है कि ज्योति नारायण की पर्ल ग्रुप से छुट्टी किए जाने की तैयारी है, इसी के तहत दूसरे डायरेक्टरों ने काम संभालना-सीखना शुरू कर दिया है. तो, ऐसी ढेर सारी बातों पर पर्ल ग्रुप अब आफिसियल स्टेटमेंट रिलीज करने की तैयारी कर रहा है ताकि बाहर फैले भ्रम, संदेह के बादलों को दूर किया जा सके. अब देखना है कि सोमवार के दिन पर्ल ग्रुप की तरफ से जारी होने वाली रिलीज में क्या कुछ लिखा होता है.

पर एक बात तो तय है कि अभी तक बेसिर-पैर की चर्चाओं से दूर रहकर तरक्की कर रहा पी7न्यूज अब अपने निदेशकों के कारण चर्चा में है. नए न्यूज चैनलों में सिर्फ पी7न्यूज ही अभी तक ऐसा चैनल था जो कम समय में बेहतर प्रदर्शन के चलते मीडिया इंडस्ट्री में सकारात्मक चर्चा में रहा पर अब यह न्यूज चैनल भी काम के कारण कम, आंतरिक मतभेदों के कारण ज्यादा चर्चा में है. पी7न्यूज को शून्य से शुरू कर आज इस उंचाई तक पहुंचाने वाले ज्योति नारायण फिलहाल अकेले और अलग-थलग दिख रहे हैं.

कारण जो भी हो, पर चैनल से ज्योति नारायण का यह अलगाव चैनल में काम कर रहे लोग भी महसूस करने लगे हैं. अचानक गुट बनने लगे हैं. कुछ लोग ज्यादा सक्रिय हो गए हैं तो कुछ लोग खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे हैं. ये सारी स्थितियां, जाहिर है, चैनल के भाग्य के लिए ठीक नहीं है पर अगर पर्ल ग्रुप के शीर्ष प्रबंधन ने कोई बड़ा फैसला अपने मीडिया प्रोजेक्ट और ज्योति नारायण को लेकर किया है तो उसका असर धीरे-धीरे देखने को मिलेगा. निर्णयों के इंप्लीमेंट करने के समय में, ट्रांजिशन के दौर में, ढेर सारी अफवाहों, कुचर्चाओं को जन्म मिलेगा. ये कुचर्चाएं नए-नए पर-पंख लगाकर इस कंधे से उस कंधे तक उड़ा करेंगी और यहां-वहां सनसनी क्रिएट करती-कराती दिखा करेंगी, जैसा कि आजकल होता दिख रहा है.

बेसिर-पैर की अफवाह : ज्योति नारायण

मीडिया इंडस्ट्री में एक अफवाह तेजी से फैल रही है. वो यह कि ज्योति नारायण, जो पी7न्यूज चैनल के डायरेक्टर हैं, चैनल छोड़कर जा रहे हैं. कुछ लोगों ने सूचना दी कि ज्योति नारायण के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए गए हैं, कुछ लोगों का कहना है कि ज्योति नारायण का कद घटा दिया गया है. इन सब अफवाहों के बारे में भड़ास4मीडिया ने जब पी7न्यूज के निदेशक ज्योति नारायण से संपर्क किया तो उन्होंने आश्चर्य जताया.

उन्होंने कहा कि संभव है कुछ लोग, जो पी7न्यूज को तेज गति से बढ़ते हुए नहीं देखना चाहते हों, इस प्रकार की अफवाहों को फैला रहे हों ताकि चैनल की गति पर ब्रेक लगा सकें. ज्योति के मुताबिक पी7न्यूज उनका बच्चा है और हमेशा रहेगा. वे आज भी पी7न्यूज में उसी तरह से निदेशक हैं, जैसे पहले थे. पी7न्यूज के साथ उनका रिश्ता पहले जैसा ही है. वे सिर्फ पी7न्यूज में ही नहीं बल्कि ग्रुप की पांच कंपनियों में डायरेक्टर हैं.

ज्योति नारायण ने जानकारी दी कि वे इस वक्त मुंबई में चैनल से संबंधित एक शीर्ष स्तरीय मीटिंग में शिरकत करने आए हुए हैं. उधर, सूत्रों का कहना है कि पी7न्यूज के संबंध में लिए जाने वाले नीतिगत फैसलों, पालिसी मैटर्स को बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के समक्ष लाया जाएगा, ऐसा एक सरकुलर कल पी7न्यूज के कुछ एचओडीज के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया. इसी सूचना को दूसरे रूप में पी7न्यूज के बाहर प्रसारित करा दिया गया.

सूत्रों के मुताबिक पी7न्यूज का काम ज्यादा बढ़ जाने और नए प्रोजेक्ट्स में ज्योति नारायण की व्यस्तता को देखते हुए पी7न्यूज के बड़े फैसलों को बोर्ड आफ डायरेक्टर्स के संज्ञान में लाना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि निदेशकों की व्यस्तता का किसी लेवल पर कोई अन्य व्यक्ति दुरुपयोग न कर सके. अफवाहों पर आश्चर्य जताते हुए ज्योति नारायण ने बताया कि मीडिया के पढ़े-लिखे लोगों के बीच इस तरह की बिना आधार की बातें इरादन फैलाई जाती है, और लोग बिना छानबीन किए उस पर यकीन करने लगते हैं, यह जान-सुनकर दुख हुआ.

उन्होंने कहा निश्चित रूप से इन अफवाहों के पीछे वे लोग हैं जो अपनी मनमानी नहीं कर पाए या फिर वे इस इंतजार में हैं कि कब उन्हें मनमानी करने का मौका मिल जाए. ज्योति नारायण ने कहा कि अफवाह किसने फैलाई और कहां से इसकी शुरुआत हुई, इसके बारे में पता लगाने के निर्देश दे दिए गए हैं.