बरखा गैंग अब आईआईएमसी के हाथों योगेश शीतल को निपटाने में जुटा

: आनंद प्रधान को एनडीटीवी की महिला पत्रकार ने निजी पत्र लिखा तो आनंद प्रधान ने शीतल को संस्थान की तरफ से सो-काज नोटिस थमा दिया : अन्ना हजारे के आंदोलन को सपोर्ट करने और भ्रष्टाचारियों को खेदड़ने का साहस रखने वाले इंडियन इंस्टीट्यूट आफ मास कम्युनिकेशन (आईआईएमसी) के छात्र योगेश कुमार शीतल की मुश्किलें दिन ब दिन बढ़ती जा रही हैं.

एनडीटीवी वाले पुलिस के जरिए शीतल के खिलाफ कार्रवाई कराने में असफल रहे तो अब आईआईएमसी के जरिए योगेश कुमार शीतल की वॉट लगाना चाहते हैं. और आईआईएमसी के सुयोग्य शिक्षक एनडीटीवी के इस खेल में भरपूर साथ निभाते दिख रहे हैं. बरखा दत्त को इंडिया गेट से भागने के लिए मजबूर करने वाले योगेश शीतल के खिलाफ बरखा दत्त की तरफ से एनडीटीवी की महिला मीडियाकर्मी रूबी धींगरा इन दिनों फर्जी लड़ाई लड़ रही हैं.

फर्जी लड़ाई इसलिए लड़ रही हैं क्योंकि अगर लड़ाई असली होती तो उसी दिन ये रूबी अपने योगेश को थाने में बिठवा देती. लेकिन झूठी बात में त्वरा कहां. सो, योगेश मुक्त और उन्मुक्त आज भी है आगे भी रहेगा. रूबी ने उस दिन (बरखा को भागने के लिए योगेश शीतल द्वारा मजबूर करने वाले दिन) पुलिस से बहुत अंत में कहा था , जब बरखा का आयोजन उखड़ चुका था, कि उन्हें योगेश ने थप्पड़ मारा है. लेकिन उस दिन, इंडिया गेट पर बरखा के भागने के बाद, एनडीटीवी की ओर से दर्जन भर बंदों की मौजूदगी से लैस रूबी की ,कथित थप्पड़ मार शिकायत के बावजूद, अपना योगेश पुलिस वालों को यह बताने-समझाने में कामयाब रहे कि रूबी की शिकायत फर्जी और राजनीति प्रेरित है, सो, योगेश को पुलिस वालों ने मैडम रूबी को यह समझाते हुए जाने दिया कि भ्रष्टाचार के खिलाफ ये पब्लिक आक्रोश है मैडम, किस-किस को पकड़ें, सो मैडम, इस लड़के को भी जाने देते हैं, जो करना है वो लिखित में बाद में करिएगा. और, इस प्रकार एनडीटीवी वालों की प्रचंड घेरेबंदी और महिला मीडियाकर्मी द्वारा झूठा व घटिया आरोप लगाने के बावजूद योगेश शीतल सकुशल बाहर आ गए.

पर एनडीटीवी अंग्रेजी का बरखा गैंग अब योगेश शीतल को दूसरे तरह से फंसाने और मिटाने में जुटा है. यह गैंग शीतल को उससे संस्थान आईआईएमसी से निकलवाना चाहता है. इसके लिए लगता है कि आईआईएमसी के प्रोफेसर आनंद प्रधान के साथ अंदरखाने कोई डील हुई है. तभी तो एनडीटीवी की तरफ से रूबी धींगरा ने मिस्टर प्रधान के नाम एक व्यक्तिगत पत्र लिखा तो मिस्टर प्रधान ने व्यक्तिगत पत्र को तुरंत सांस्थानिक बनाते हुए आईआईएमसी की ओर से सो-काज नोटिस जारी करते हुए पूछ डाला.. कि- मिस्टर शीतल, ये क्या आरोप हैं और इसका जवाब दो.

ऐसा नहीं कि आनंद प्रधान को पता न हो कि मामला क्या है. वे नेट फ्रेंडली हैं. माडर्न हैं. सरोकार वाले आंदोलनों और सभाओं में शामिल होते रहते हैं और इसके बारे में लिखते भी रहते हैं. कुछ एक बार तो उन्होंने खुद मोमबत्ती ब्रिगेड को आर्गेनाइज और लीड किया है. ऐसे आनंद प्रधान, जो कभी ब्यूरोक्रेसी और लालफीताशाही के खिलाफ छात्रों को भड़काने-उकसाने का काम करते रहे हैं, आज वही कामरेड आनंद प्रधान किसी एनडीटीवी टाइप संस्थान के प्रभाव में आकर, किसी निजी पत्र के फर्जी इमोशन के बहकावे में आकर, एक शातिर हिप्पोक्रेट-ब्यूरोक्रेट बनते दिख रहे हैं और घटिया व्यवहार अपने छात्रों से कर रहे हैं तो उसे आप क्या कहेंगे. पर नौकरी तो हर किसी को प्यारी होती है, आनंद प्रधान को भी होगी.

((आनंद प्रधान के व्यक्तित्व और चरित्र के बारे में विस्तार से बताएंगे आईआईएमसी के कई छात्र, कुछ दिनों-महीनों बाद में, अगर शीतल को आईआईएमसी से न्याय नहीं मिला तो.))

फिलहाल इतना जान लीजै कि योगेश शीतल सुरक्षित और संरक्षित नहीं है. उनको लपेटने, निपटाने, फंसाने और बर्बाद कर देने की साजिशों में बहुत सारे संस्थान और बहुत सारे लोग शामिल हो रहे हैं, लेकिन उसके उलट ये भी सच है कि आज योगेश कुमार शीतल भारत समेत दुनिया के करोड़ों अरबों दिलों में राज कर रहा है और इसका प्रमाण ट्विटर पर दिख रहा है जहां योगेश के किसी भी केस को लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट से लेकर हाईकोर्ट के कई बड़े वकीलों ने निःशुल्क सेवा देने का प्रस्ताव किया है और कई लोगों ने शीतल के लिए आगे की सारी पढ़ाई के सारे खर्चे उठाने का वादा किया है.

देखना है कि आनंद प्रधान एनडीटीवी वालों से मिल कर योगेश कुमार शीतल को निपटा देते हैं संस्थान से या फिर अपने कामरेडी और डेमोक्रेटिक प्रवृत्ति व चरित्र का हमेशा की तरह सदाबहार परिचय देते हुए मिस्टर प्रधान अपने इस होनहार और क्रांतिकारी छात्र के करियर को आगे बढ़ाने और इसके सरोकारी तेवर को प्रणाम करने के महाभियान में योगदान देते हैं. फिलहाल ये दोनों पत्र देखिए…. और तय करिए कि आपको क्या कहना है…. योगेश शीतल जिंदाबाद या मिस रूबी और मिस्टर प्रधान मुर्दाबाद

मिस्टर प्रधान को मिस रूबी द्वारा लिखित निजी पत्र
मिस्टर प्रधान को मिस रूबी द्वारा लिखित निजी पत्र

मिस्टर प्रधान को मिस रूबी की तरफ से लिखा गया पत्र

और, मिस्टर प्रधान द्वारा निजी पत्र को सांस्थानिक बनाते हुए योगेश शीतल को जारी किया गया सो-काज नोटिस

 

Comments on “बरखा गैंग अब आईआईएमसी के हाथों योगेश शीतल को निपटाने में जुटा

  • A S Raghunath says:

    How come IIMC can seek an explanation from its student on an incident that has not happened in its campus? The ndtv letter gives the link to your site where the protest video is loaded. Has Mr. Pradhan seen these footages before seekig expanation from his student? What kind of journalism does Mr. Pradhan teach if he can’t have sense of balance?

    The video referred to here has scenes where Yogesh has only exercised his right to peaceful protest. Where is the voilence in it. And it was not just Yogesh but a lot many others were there too. Just because Yogesh has chosen to share this information, is he being singled out alone?

    I seek to know from ndtv the following explanation:

    1. Have you taken permission from authorities to conduct this talk show, we the people, which requires lighting, erecting dias, putting chairs, and a whole lot of things. Did you seek security? Or make your own arrangement of security at India Gate. India Gate where large crowd had assembled in their protesting against corruption. Most of ire was also directed at corrupt media which have yet not explained their conduct to people. Anticipatig this, have you taken permission?

    2. India Gate is a place where a police picket is always handy. Only at a walking distance a mobile van is always stationery. Why have not sought their help or lodged a complaint. Why now threaten with it?

    3. You had your cameras on the location. A crew that stings for evidences, should have recorded the alleged violence too. Where is that video?

    4. Why your channel has not shown this bit of incidence even as a small news item when a newspaper has written about it yesterday. Why you or your editor chose to be silent on this in We the peope show? By remaining blank for full 20 minutes of the show, has she not fooled a whole audience in India?

    Now that the news portals are seeking searching question it is is easy for you to report it to the institution so that the future of that young man is blunted. Is this what your lofty journo stands for – going after a young man with vengence?

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  • Yah to sarasar chhatra hit me aur sansthan ke adhikar kshetra me dakhalandazi hai. iske khilaf agar khade nahi huye to jidaar patrakarita ka pamaan hoga.
    Barkha Dutt Murdabad :((
    Ruby Dhingra Murdabad :((

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  • यहाँ जो कुछ भी लिखा है सब लगता है कि हेमंत जोशी की देंन है

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  • बरखा अपनी रही सही इज्जत भी बर्बाद करने में जुटी है…….पूरी दुनिया जानती है बरखा का सच।बड़ी चतुराई से बरखा रुबी को ढाल बनाकर योगेश पर वार कर रही है।
    एथिक्स का पाठ पढाने वाले आनन्द प्रधान ने अगर योगेश का साथ नहीं दिया तो ………..मुझे लगेगा कि आनन्द प्रधान के द्वारा क्लास में दिये गये लेक्चर खोखले बोल के सिवा कूछ भी नहीं थे

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  • This is nothing but sheer stupidity of a media organization called NDTV. Some of the things mentioned in the letter seems to be fabricating only. Any action against the student will fetch more shame for Barkha Dutt and Anand Pradhan.

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  • anon_lawyer says:

    Hi, a couple of comments, on why i think the strategy and the contents of the letter are egregious

    1) The intention of NDTV seems to be to intimidate rather than to actually proceed with legal action. What gives away their bluff is:
    a. they have not filed a any police complaint till date.
    b. records may show that there was not even a 100 call at the time of the alleged incident
    c. even if a complaint is subsequently filed, there is considerable delay which puts into question the alleged physical violence in the first place
    d. usually when such incidents are reported, the police takes the victim to a nearby hospital to draw-up a MLC (Medico-Legal Certificate) where a doctor can attest to the bruise or the injury. That is seriously doubtful now, alognwith the entire incident.

    2) Why I say their intention is to intimidate is due to:
    a. the complaint being in the form of a letter rather than a legal notice. It is not written by a lawyer and merely narrates some alleged facts. The letter is not even written on a NDTV letterhead. This simply shows they are not quite serious about taking it up through the police.
    b. one can notice that the letter has been written not to the accused assailant but to a Head of Department/Lecturer at a university where the accused assailant is taking a course in journalism. The intention is quite clearly to build pressure through an academic enquiry on the alleged assailant. This also shows that NDTV is not confident of its case through filing a police report, and is resorting to an academic-displinary enquiry/forum where the standards of evidence are weaker and where its influence as a media entity may determine the result. The act of writing the letter to the institute is in this respect similar to the targeting of IMB by IIPM students threatening to burn their IBM laptops when an article was written by an IBM employee about certain irregularities at IIPM. IIPM in this case knew it did not have the law on its side and so it chose to go with a system of private adjudication, in such cases, the pressure which can be built on your adversary is higher and the results are more direct and immediate.
    c. the entire issue of “maligning me and my organization unnecessarily” is entirely bogus. There are facts in the public domain which entitle a valid, even if a minority opinion on the nature of protest by the alleged assailant. Also one may notice, even if there is any “maligning” it is the subject of a different and distinct offence of “defamation”, and cannot be clubbed together with the alleged assault. By writing that they were not contemplating a legal action on the alleged assualt but are now considering it due to this “maligning”, seriously throws into doubt any assault itself.

    All in all, this is an attempt at censorship of speech and should be strongly suggested. Though this is not a legal opinion it appears there is no wrongdoing as per law.

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  • ्मदन कुमार तिवारी says:

    योगेश अगर जरुरत महसुस हुई तो मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे आई आई एम सी के गेट पर धरना दुंगा । कानून की लडाई भी लडी जायेगी । so far the notice that has been served upon you is concerned, itself is a threat. unless the fact is not enquired, asking for show cause is contemptuous and defamatory. It is mentioned in the letter that you were not invited to be part of discussion but whether any official permission was sought by NDTV to telecast a live discussion of a public place ? without permission no one can use a public place, whatever the purpose may be.

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  • FAIZ AHMAD gORAKHPURI says:

    Barkha Dutt ki Jo Sacchai hai vo Dunya janti hai
    Brother Ugeash Mai Aur Sara Jamia , MCRC & Mass Media hindi tumhare Sath hai aur Zarurat Padi to Dharne per Baithange IIMC Gate per

    Barkha Sali Choor Hai Mai to Bas 1 Waqt Ka intezar kar raha hon tb Bataunga ki Barkha ka Asli Cahra kya hai .

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  • shambhunath says:

    अब आंदोलन होगा। ndtv तो अब हर जगह इसी तरह बेइज्जत होता रहेगा। जब तक कथित पत्रकार बरखा दत्त को निकाल नहीं देता। जैसे आजतक ने प्रभु चावला को निकाला है।

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  • Rohit Vats says:

    @abhinav jee- bhai isme kripya Hemant Joshi sir ka naam na ghasitein..aur bhai aap hi batayein ki kya NDTV aur Barkha Dutt wagairah logo ko sharm kabhi aayegi bhi ki nahi ki itne log virodh me khade hain aur wo ek student se ulajhne me lage hain..dekhiyega iske baad NDTV IIMC ke students ke liye bhi dohre mandand istemaal karne lagega..Kahan toh sharm aani chahiye toh kahan apni aur beizzati karwane pe utaru hain…

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  • pranay roy says:

    गली गली में शोर है बरखा दत्त चोर है
    जनता के हाथो में उसकी बेज्जती की डोर है।

    योगेश है भाग्यशाली और पूरे प्रकरण में सिर्फ बरखा को मिल रही है गाली।्
    रुबी में कोइ भी नहीं है खूबी फिर योगेश के खिलाफ खूब झूठ बोली।

    बरखा की असली जात क्या है——- दत्त या धत ।धत बरखा

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  • iimc hj student says:

    आनंद प्रधान फिर मत कहना कि आई आई एम सी से अच्छे व निर्भीक छात्र नहीं निकलते। अब पता चल जायेगा तुम्हारे अन्दर कितना एथिक्स है।
    NDTV के दामाद आनंद प्रधान मोह छोडो सच्चाई से नाता जोडो।

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  • यशपाल says:

    ये बरखा दत्त और रूबी जैसोंकी हकीकत कब जानेगे बाकी लोग, हमें इन दलालों के बॉयकॉट करने के लिए आंदोलन करना चाहिए। जल्दी ही फेसबुक पर इन दल्लों और इनकी शरणगाह एनडीटीवी के विरोध में एक पेज बनाया जाएगा। प्रणव राय की मजबूरी होगी कि इन एजेंटों को रखे लेकिन हमारी कोई मजबूरी नहीं है। विभूतिनारायण राय के सगे भाई आनंद प्रधान की हकीकत तो लोग सब जानते हैं कि यह शेर की खाल में भेड़िया है। आईआईएमसी में भी यह जानबूझकर भूपेन, मानुषी जैसे चंपूओं को रखता है ताकि कोई इसकी सत्ता को चुनौती न दे सके। हेमंत जोशी और अनिल चमड़िया को प्रधान ने कैसे निपटाया कौन नहीं जानता। आईआईएमसी चमचा प्रशिक्षण केंद्र है जहां से दलाला और लड़कीबाज (निरूपमा मामला) तो निकल सकते हैं लेकिन पत्रकार नहीं। योगेश जैसे एकाध आते हैं तो उन्हें निपटाने में लग जाते हैं। आईआईएमसी का नाम बदलकर अब भारतीय चमचा व लड़कीबाज प्रशिक्षण संस्थान कर देना चाहिए। इन दलालों को अय्याशी के अड्डे के साथ भारतीय नाम जोड़ने का कोई हक नहीं है। अगर मीीडिया को बचाना है तो बरखा दत्त और आनंद प्रधान जैसे दलालों का विरोध, एनडीवी की रूबी जैसे कागजी एजेंटरूपी मोहरों का नकाब उतारना होगा
    बात निकली है तो दूर तलक जानी चाहिएस योगेस का समर्थन व फेसबुक पर जल्द आने वाले दलाल विरोधी पेज के प्रशंसक बनें

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  • मैंने इससे सम्बंधित पोस्ट ” वो विडियो भी जिसमे योगेश जी और बहदुर साथियों ने दल्ली को भगा दिया था” ऑरकुट पर पोस्ट कर दी है, आशा है आपको कोई आपत्ति नहीं होगी.

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  • Ravi Shankar Maurya says:

    sansthan ke bahar student kuch bhi kar sakta hai…..GALAT SAHI KOE AACHARAN………………….YOGESH KA YE sansthan ke andar ka kiya gaya aacharan nahi HAI ….anand pardhan same same ….IIMC SAME SAME…….

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  • Makhanlal Chaturvedi Rashtriya Patraksrita Avam Sanchaar Vishwavidyalaya mein bhi in dino aisa hi maahol chal rahaa hai….AAJ TAK se Prabhu Chawla k nishkaasan k baad uska ek chharra yaha 70750 rupaye prati maah par Kalankit kulpati dwara bulwa liya gaya hai….Ek nahi is vishwavidyalaya mein anek anek Anand Pradhan hai,jinka khulasaa sighra hi hoga….Sheetal bhai tum akele nahi ho,hum sab tumahare saath hai.

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