विकीलिक्स और विकीपीडिया का मॉडल बनाम भड़ास4मीडिया की चिंता

लखनऊ में एक पत्रकार हैं संजय शर्मा. पहले कुछ मीडिया हाउसों के साथ जुड़कर पत्रकारिता करते थे. बाद में लखनऊ में अपना अखबार शुरू किया, वीकेंड टाइम्स नाम से, समान विचार वाले कुछ लोगों के साथ मिलकर पार्टनरशिप में. पिछले कुछ महीनों के दौरान दो बार लखनऊ जाना हुआ दोनों ही बार उनसे मिला. पहली बार बड़े आग्रह और स्नेह के साथ अपने घर ले गए, खाना खिलाया. अपना आफिस दिखाया. खूब सारी बातें कीं. दूसरी बार वे छोड़ने स्टेशन आए, स्टेशन पर ही हम दोनों ने खाना खाया. आज उनका मोबाइल पर एक संदेश आया. आपके एकाउंट में दस हजार रुपये जमा करा दिए हैं.

मैंने उन्हें एसएमएस से ही पूछा कि किस बात के? तो उनका जवाब आया कि भड़ास4मीडिया को सपोर्ट करने के लिए. मैंने उन्हें शुक्रिया का जवाब भेजा और उनसे अनुरोध किया कि वे अपने अखबार का एक विज्ञापन या लोगो मेरे पास भिजवा दें, ताकि उसे प्रकाशित करा सकूं. अंतरमन में यह था कि जो पैसा भड़ास4मीडिया को सपोर्ट करने के लिए संजय ने स्वेच्छा से भेजा है, उसके बदले उनके अखबार का विज्ञापन लगाकर हिसाब बराबर कर सकूं.

पर जिंदगी गणित नहीं है और भावनाएं हिसाब-किताब से नहीं संचालित होतीं. पिछले दिनों मैंने विकीपीडिया और विकीलिक्स वेबसाइटों को देखा. दोनों पर कोई विज्ञापन नहीं. सिर्फ उनके संस्थापकों की अपील वाला विज्ञापन है. क्लिक करेंगे तो एक नया लिंक खुलेगा जिसमें जो कुछ लिखा है उसका लब्बोलुवाब ये कि हे भाई लोगों, डोनेट करो, और इस अभियान के मददगार बनो. विकीपीडिया और विकीलिक्स, दोनों वाकई बहुत शानदार काम करने वाली वेबसाइटें हैं और इनके संस्थापक अब किसी परिचय के मोहताज नहीं है.

ये लोग अगर दुनिया के बड़े से बड़े धनपशु से बोल दें कि निवेश करो तो अरबों रुपये का निवेश उन्हें मिल सकता है. वे अगर मुनाफा कमाना चाहें तो ढेर सारे महंगे महंगे विज्ञापन लाने के लिए मार्केटिंग टीम का गठन कर आनलाइन मार्केटियरों की फौज की मदद से अच्छा पैसा कमा सकते हैं. लेकिन उन्होंने ऐसा कोई रास्ता नहीं चुना. उन लोगों ने रास्ता चुना जनता के बीच जाने का. इन लोगों ने पत्रकारिता के मानक बदले हैं. मिशनरी पत्रकारिता को नई ऊंचाई दी है. ऐसे में वे समझौते वाला, पूंजी वाला, मुनाफे वाला, बाजार वाला रास्ता चुनना नहीं चाहते थे. और, सच में इन लोगों को दुनिया भर में फैले उनकी वेबसाइटों के प्रशंसकों ने अच्छा खासा योगदान दिया होगा, तभी ये वेबसाइटें बड़ी से बड़ी चुनौतियों के सामने टिक कर काम कर ही हैं.

विकीलिक्स ने तो रिकार्ड कायम किया है. अमेरिका में सेवाएं समाप्त हुईं तो स्विटजरलैंड से प्रकट हो गई यह वेबसाइट. कभी कभी मैं सोचता हूं कि भारत में कभी कोई जब बेहद क्रांतिकारी वेबसाइट पैदा होगी तो उसका संचालन इस देश में रहकर कर पाना संभव न होगा क्योंकि न जाने कब सत्ता शीर्ष के इशारे पर उसके संस्थापक  या संपादक को पुलिस आकर उठा ले जाए और थाने में उल्टा लटकाकर रात भर ये कहकर पीटते रहें कि बोल, बोल साले, तू और साइट चलाएगा… 🙂 और, उस पत्रकार को बचाने शायद ही कोई पत्रकार या नौकरशाह बंधु आए क्योंकि उस बागी व क्रांतिकारी पत्रकार से संबंध रखने वाले पत्रकार या नौकरशाह भी बागी व क्रांतिकारी मान लिए जाएंगे और इस चक्कर में उनकी नौकरी फिर गृहस्थी न तबाह हो जाए, सो इस गुणा भाग के कारण कोई उसे बचाने भी न आए. पर जब आप विदेश से वेबसाइट का संचालन करते हैं तो देश की सरकार भले उस वेबसाइट को बैन कर दे लेकिन उसके संचालकों को पकड़ नहीं सकती. और, वेबसाइट पर बैन करने से कुछ नहीं होता, विकीलिक्स ने बता दिया है कि कुछ घंटों में नए डोमेन नेम से पूरे कंटेंट को लेकर प्रकट हुआ जा सकता है.

भड़ास4मीडिया के सामने भी चुनौतियां हैं, खतरे हैं, दबाव हैं, खर्चे हैं और सबसे जूझते हुए मैं सोचता रहता हूं कि इसका मॉडल क्या रखा जाए. विकीलिक्स और विकीपिडिया वाला डोनेशन का मॉडल, या बाजार का मॉडल. पर बाजार के मॉडल के खतरों को हम लोग बड़ी शिद्दत से देख सुन रहे हैं, नीरा राडिया टेप कांड के जरिए. ऐसे में जनता के सामने जाना ही सबसे उचित फैसला है. अभी तक, करीब तीन साल होने को हैं, इस वेबसाइट के संचालन में डोनेशन का पैसा न के बराबर लगा क्योंकि वो न के बराबर ही आया, विज्ञापन व कंटेंट सपोर्ट के वादे के जरिए आया पैसा ही काम करता रहा, काम चलाता रहा. लेकिन विज्ञापन व कंटेंट सपोर्ट के वादे के जरिए आया पैसा कई पेंच भी ले आया. इस कारण कई बार तल्ख घटनाक्रमों को नरम तेवर के साथ प्रकाशित करना पड़ा, कुछ खबरों को ब्लैकआउट करना पड़ा. ये सच है. और, चूंकि मैं जन्मना कोई उद्यमी या महान पत्रकार नहीं हूं, सो, प्रयोगों के जरिए सीखता समझता और उसके अच्छे बुरे को विवेचित कर आगे बढ़ता रहता हूं.

जब आप बेहद मुश्किल में होते हैं, जीवन-मरण के सवाल से जूझ रहे होते हैं तो सरवाइव करने को मिल रहे खाने, मिल रहे पैसे पर सवाल नहीं उठाते, कम से कम मेरे में इतना नैतिक साहस नहीं है, लेकिन जब ऐसी स्थिति हो कि आप दो चार महीने तक कहीं से कुछ न मिलने पर भी जी खा सकते हैं तो सामने आने वाले पैसे की नीयत पर सवाल खड़ा कर उसे स्वीकारने या न स्वीकारने के बारे में सोच सकते हैं और फैसला ले सकते हैं. आर्थिक स्थिति भड़ास4मीडिया की अच्छी नहीं है क्योंकि कभी मैं इस वेबसाइट के जरिए महीने में बीस से पचीस हजार रुपये पैदा करने की सोचता था ताकि घर का खर्च चल सके लेकिन आज इस वेबसाइट पर ही महीने का करीब एक लाख रुपये इनवेस्ट हो रहा है, सेलरी, सर्वर, स्टाफ, आफिस आदि के उपर, बेहद सीमित व न्यूनतम खर्च करने के बावजूद.

इसी कारण आप देख सकते हैं कि भड़ास4मीडिया पर खबरों का जोरदार फ्लो बना रहता है. रोजाना दस से लेकर 40 तक खबरें अपडेट हो जाया करती हैं. अपने सर्वर पर हम लोग आडियो और वीडियो दिखा सकने में सक्षम हो पा रहे हैं. कह सकते हैं कि भड़ास4मीडिया को अब ऐसा मुकाम पर पहुंचा दिया गया है जहां यह वेबसाइट देश में समानांतर पत्रकारिता के एक प्रतीक के रूप में स्थापित होने लगी है. अब बारी जनता की है. आप लोगों की है. हम नहीं चाहते कि इस आशावान व क्रांतिकारी प्रयोग का हश्र वही हो जो अन्य क्रांतिकारी साथियों व मीडिया हाउसों का हुआ है. सो, मैं अपनी तमाम बुराइयों व अच्छाइयों के साथ आपसे अपील करता हूं कि भड़ास4मीडिया अगर आपको किसी रूप से पसंद आता है और आप आर्थिक रूप से इतने सक्षम हैं कि महीने में या साल में कुछ रकम इस पर खर्च कर सकें, अपनी निजी जरूरतों से समझौता किए बगैर तो जरूर सोचिए, मन बनाइए.


Bhadas4Media

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आनलाइन मनी ट्रांसफर के लिए कोड : barb0vasund


देश के बाहर के लोग मदद के लिए इस लिंक का सहारा ले सकते हैं…

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मैं अब किसी अखबार मालिक या टीवी चैनल के मालिक या नौकरशाह या सरकार या मंत्री नेता परेता से भड़ास4मीडिया चलाने के लिए विज्ञापन मांगने जाने का इच्छुक नहीं हूं. जो अपने से विज्ञापन आते रहेंगे, वे दिखते रहेंगे लेकिन विज्ञापन लाने के लिए कोई मार्केटिंग टीम हम लोग नहीं रखेंगे.  मार्केटिंग टाइप के विभाग की स्थापना के बारे में सोचा लेकिन आज तक किसी मार्केटियर की नियुक्ति नहीं करने का साहस नहीं जुटा पाया. कई लोग पूछते हैं कि भड़ास4मीडिया पर विज्ञापन का रेट क्या है, तो उनको मैं यही जवाब देता हूं कि जो आपको दे सकते हों, दे दीजिएगा. मतलब, बारगेनिंग के खेल में पड़ने की कोई इच्छा नहीं रहती. हम लोगों ने भड़ास4मीडिया पर विज्ञापन के लिए अब एक फ्लैट रेट तय किया हुआ है, न्यूनतम, 5 हजार रुपये प्रति हफ्ते या 20 हजार रुपये प्रति माह या एक लाख रुपये छमाही या दो लाख रुपये सालाना.

आगे से कोई भी साथी विज्ञापन के रेट न पूछे तो ज्यादा अच्छा है क्योंकि रेट बताते हुए झुंझलाहट होती है क्योंकि उसके साथ फिर शुरू होता है बारगेनिंग का दौर जिसमें पड़ने की मेरी कतई इच्छा नहीं होती इसलिए बारगेनिंग करने वाले से यही कहकर मुक्ति पाता हूं कि आपकी जो औकात हो दे दीजिएगा. मैं आपको बता दूं कि भड़ास4मीडिया के लिए तरह तरह के प्रस्ताव आते रहते हैं. कोई निवेश कर इसका मेजारिटी स्टेक खरीदना चाहता है तो कोई बल्क में पैसे देकर किसी बड़े नेता के लिए लगातार खबरें छपवाना चाहता है. पर इस तरह के प्रस्तावों को उदासीन उत्साह के साथ सुन लिया करता हूं और हां-ना में कोई जवाब दिए बगैर बीच में लटका कर छोड़ दिया करता हूं. लेकिन सच तो यही है कि ऐसे प्रस्तावों को स्वीकारने का मतलब यही है कि मैं निजी तौर पर आर्थिक रूप से थोड़ा संपन्न जरूर हो जाउगा लेकिन जनता के भरोसे पर खड़ा हुआ इतना बड़ा ब्रांड चुपचाप छोटा व घटिया हो जाएगा. पर मरता क्या न करता वाली हालत में इन प्रस्तावों पर भी विचार करना पड़ ही जाता है लेकिन अभी मरता वाली स्थिति नहीं है, इसलिए क्या न करता जैसा तर्क रख कुछ अनाप-शनाप समझौता नहीं करने जा रहा.

उससे पहले मैं चाहता हूं कि जनता के बीच जाने के प्रयोग को आजमाया जाए. पहले भी मैंने भड़ास4मीडिया के आर्थिक संकट के बारे में लिखा है और कई लोगों ने सपोर्ट करने के बारे में कहा था लेकिन किसी को एकाउंट नंबर नहीं भेजा था क्योंकि कहीं न कहीं मेरा सामंती मन यह स्वीकारता नहीं कि मैं चंदे, भीख के जरिए पोर्टल चलाऊं. जो लोग विज्ञापन छपवाने को राजी होते हैं, उन्हें एकाउंट नंबर मैं तपाक से भेज दिया करता हूं. विकीलिक्स और विकीपिडिया जैसी वेबसाइटों ने अच्छे काम के लिए अपने पाठकों के बीच जाने का जो रास्ता अपनाया है, वह काफी प्रेरणादाई है. उसी से प्रेरित होकर और आज सुबह संजय शर्मा द्वारा अचानक दस हजार रुपये भेज देने के कारण अब जनता के बीच जाने का फैसला कर रहा हूं. देखता हूं, अपनी हिंदी जनता कितना योगदान करती है.

अंग्रेजी वेबसाइटों का पाठक वर्ग ग्लोबल होता है और उनके योगदानकर्ता भी ग्लोबल होते हैं. अंग्रेजी वाले हिंदी वालों की तुलना में ज्यादा समृद्ध होते हैं. ऐसे में मैं यह उम्मीद तो कतई नहीं कर रहा कि भड़ास4मीडिया को योगदान करने वाले करोड़ों अरबों रुपये दे डालेंगे, लेकिन इतना संभव है कि भड़ास4मीडिया के सर्वर, कंटेंट व टेक्निकल टीम का खर्च निकल आएगा. जो भी है, देखते हैं. बस एक अनुरोध है कि जो भी लोग जितना भी योगदान दें, उसे मुझे निजी तौर पर सूचित जरूर कर दें, फोन से नहीं, मेल से, मेरी निजी मेल आईडी [email protected] है.

ये सब एक प्रयोग के तहत कर रहा हूं ताकि कल को मुझे पछतावा न हो कि मैंने जनता के बीच जाने के आप्शन को नहीं चुना. मुझे फौरी तौर पर चिंता जनवरी महीने में तीन महीने के लिए सर्वर का चालीस हजार रुपये का चेक सर्वर प्रोवाइडर कंपनी को देने का है. भड़ास4मीडिया का एकाउंट नंबर दे रहा हूं. इस एकाउंट में फिलवक्त करीब 57 हजार रुपये हैं जो महीने भर के खर्च, यानि जनवरी 4 तक के लिए काफी हैं. दो-चार जगहों से पांच हजार से लेकर 30 हजार तक के पैसे आने बाकी हैं, विज्ञापन के लेकिन ये कब आएंगे, कुछ कह नहीं सकता क्योंकि कई विज्ञापनदाता विज्ञापन चलवाने के बाद पैसे देने के नाम पर ‘बीमार’ पड़ जाते हैं.

मदद के इस मुद्दे पर आप मुझसे मेल के जरिए बात कर सकते हैं. लेकिन प्लीज,  फोन न करें क्योंकि शायद मैं आपको अगर इतना कुछ कह के, कर के, लिख के नहीं समझा सका तो फोन पर भी नहीं समझा सकूंगा. आमीन.

यशवंत
संस्थापक और संपादक
भड़ास4मीडिया
दिल्ली

फोन: 09999330099 मेल: [email protected]


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Comments on “विकीलिक्स और विकीपीडिया का मॉडल बनाम भड़ास4मीडिया की चिंता

  • aajaad hindustani says:

    [b]namskar, yashwant ji , [/b]abhi aap haal hi me ak national seminaar atend karke loute hai,jo ki seminaar r.t.i.2005 k upar tha. kya aap batayenge k jo seminaar aam public k heet k liye ,uske adhikaar k liye,orgenized kiya gaya kya wo apne mul uddeshya ko prapt kar sakega……………..

    humare rashtra pita mahatama gandhi ji kahte hai k garib aour aam k liye jo bhi baate ya kaam hoti hai unhe un sab logo k bheech jakar ye kaam karna chahiye tabhi unsab yojnaao ka laabh garib aour aam ko mill sakta hai,,,,,,,

    aap jis national seminaar ko adress karke aaye ho kya wo garib logo k beech aayojit huaa tha,, jaha pe seminaar huaa tha wahaa par thaa to kewal ,,,,,,,,,,,,
    [b]bislery aour cofy k sath sath dawat ka pura intejaam [/b] ab aap batao k kya
    mahatma gandhi ji k sapno ka majak nahi udaya gayaa,aour wo bhi mahatma gandhi ji k naam aour kaam se sushobhit mahatma gandhi kaashi vedya peeth k prangad me ,,,, hume aap se ye ummid nahi hai… jis garib k adhikaar k liye ye aayojan r.t.i.2005 k naam se itne bade hi fi byavastha k sath aayojan huaa wo money khrch karke agar garib k beech me ayojit hota tatha is r.t.i. ko istemaal karne k tour tariko k baare me bhi bataya jata to ye jarur apne uddeshya ko prapt kar pata,,, hum sab media se jude hai to humara ye krtavya banata hai k hum apne maanav dharma ka palan mahatama gandhi ji k dekhaye rasto pe chalte huya kare,,,tabhi hum manav jagat k kalyaan ki kamna kar sakte hai,,, anyatha aise dekhwe k aayojano se kuch bhi bhalaa nahi hone wala hai chahe aap lakh jatan kar lo,,, last me ak baat aour kahna chahta hu k agar aap lobh tatha lalach ko chodkar sachchhi aatm santushty pana chahte hai to please aap akele bhi agar imaandari se chalenge to ye guaranty hai k kaarvaa ban jayega,,, hum sabko mahatma gandhi ji k life style ko apne andar utarna hoga tabhi hum apne aapko aam aadmi aour garibo ka sachchha sipahi kah sakte hai,,,,,,,,,,,,,,, achchha shubh din shubh namaskaar………………..

    Reply
  • arun banhhor says:

    Yasawant ji bhadas4meddia.com dekha kaphi kuchh jaanane ko mila .aapka prayas sarahaneeya hai.
    Arun Banchhor news editor dainik express news bhopal

    Reply
  • yaswant jee mai hamesha bhadas 4 media padhti hu.Maine ek magzine mein bhi kam kiya tha.jab hamne patrakarita ki padhai ki to mujhe laga ki ye sirf job hi nahi balki socity ke liye indirectly kuchh karne ka waqt hai but ,media ke under ki sachchai kuchh or bayna karti hai.hamne kai logo ko dekha hai wo media me job kar rahe hain lekin unhe patrakarita ke maine pata nahi.pad jo log kuch karna chahte hai unhe platefoprm nahi diya jata.aise me siva nirasha ke kuch or nahi bachta. aap aaj ke bhrasta samaj me media ko nai disa dene ka kaam kar rahe ain.

    Reply
  • shailendra parashar says:

    yaswant ji
    main apke sath aage aana chahta huw or bad chadkar to nahi qki main media ka abhi student huw lekian apni poket mony se 200/month jarur nikal sakta huw jav tk student huw phir aage kamyab bankar aage ki sochenge.
    shailendra parashar
    makhanlal chaturvedi M.A.(APR) BHOPAL

    Reply
  • Ankit Khandelwal says:

    Dear Yashwant Ji,
    Mere grandfather ne bahut varsho pehle ek baat kahi thi, ‘sab kuch karna per samaj seva mat karna’, ab vo to is duniya main nahi hain but main unka vakaya aaj bhi yaad rakhta hoon.
    Vigyapan lekarke unhe parkashit karne main koi burai nahi hain. Har aandonlan ko chalane ke liye dhan ki jarurat hoti hain, or har koi madad karta hain. Parantu Bhadas4media ko sustainable banaye rakhna jaroori hain.. or agar iske liye vigyapan lene pade to kya burai hain?? aap koi gunah to nahi kar rahe hain??

    Even, UNO(sanyukt rashtra sangh) jaise bade sanghthan ko bhi funding ki jarurat padti hain, apne karya sucharu rup se chalane ke liye..
    Aap market main jaayenege to aapko kayi dunakne mil jaayegi saaman kharidane ke liye.. per aap ussi par jaayenge jeha aapko bharosa hoga, vishwas hoga.. per iska matlab yeah nahi hain ki dunkandar aapko sab cheeze muft main dega??..

    Bhadas4media ek acha aandonlan hain.. wikipedia or wikileaks ke business models or karya shetra alag hain…
    to meri aapse yahi gujarish hain ki.. agar aapko koi bhi kisi tarah se support karta hain.. or badle main vigyapan jaisa kuch expect karta hain to.. koi burai nahi hain…

    Reply
  • अतुल दुबे says:

    आपका प्रयास सफल होगा। ऐसा मेरा विश्वास है। चंदा जोड़कर ही पं मदन मोहन मालवीय ने हिंदु विश्वविद्यालय बनवा लिया था। आपने जो तरीका अपनाया है वह सही है हम सब आपके साथ हैं आपके एकाउंट में पैसा पहुंचता रहेगा।

    Reply
  • yashwant ji.
    bahot badai aapko aake sath ham bhi hai aap yaha likhiye jo log abhi isako nahi pad pa rahe hai unako ham ye dikha rahe hai hame aapke sath kam karna hai aap arur bataiye………
    manoj jain
    age 34
    nagpur ..maharashtra

    Reply
  • sikanderhayat says:

    yahvant or alok tomar 2 bahut bade sharabhi ha or dono ki hi kalam ma jadu ha pata nahi ha ki sharab sa inke kalam, ko fayda hua ya nuksan masla ya ha ki dukh bure dino or tanaav ko jhele bina acha lekhak nahi bana ja sakta magar saval ye bi ha ki dukho mosibato asuvidhav ko jhelthe hua kalam kase chalaye jaye bhala yahi sabse bade pareshani ha hindi ma tho vahi log duadhaar likh rahe jo surakshit jevan g rahe ha nateza ya ha ki badia lekhan durlab hota ja raha ha

    Reply
  • ashish goswami says:

    Yaswantji,

    bhadas4media ke dwara aapne har ek ko apne vicharo ko prkat krne ke liye jo platform uplabdh kraya….use bhatkne nahi dena…..isi subhkanao ke sath…..mai na hi koi repoter ho, na hi bda patrkar…..pr aapki site daily serch krta ho…..sath hi mere jaise lakho log bhi…krte hai…

    Reply
  • साध्वी चिदर्पिता says:

    हरिः ओम्
    पूरी दुनिया आपको सही कहती है या गलत इससे अधिक अंतर नहीं पड़ता. मायने यह रखता है कि आप स्वयं को किस दृष्टि से देखते हैं. यदि आप सही हैं तो आपका आत्मविश्वास ईश्वर कृपा बन जायेगा. यदि आप गलत हैं तो आपका डर आपको जीने नहीं देगा. ईश्वर से प्रार्थना है कि वह आपको यह अंतर्दृष्टि दें जिससे आप अपने मिशन की दिशा तय कर सकें. शुभकामना.

    Reply
  • sudhanshu chouhan says:

    प्रिय यशवंत जी,
    सद्कार्यों के लिए किया गया हर कार्य सफल और सिद्ध होता है…..भड़ास 4 मीडिया की तरह आपका यह प्रयोग और प्रयास भी सफल होगा….
    आमीन……

    Reply
  • मुकेश कुमार ,रांची says:

    यशवंत जी, विज्ञापन हो या चन्दा .बात तो एक ही है.इस देश में समस्या दो वक्त की रोटी के जुगाड में जुड़े लोगों से ही है.पूंजीपतियों के पैसे प्रभाबित नहीं करेगी.यह सोचना तक बेईमानी है.

    Reply
  • भाई साब मै दूसरी बार ऐसी गलती करने के पहले आपसे यह जरूर पूछूंगा की फ़िर से कोई मुझे गाली तो नही देगा। आपको शायद याद हो की आपने अपने शुरुआती दौर मेब्लाग के जरिए किसी की मदद की अपील की थी और मै श्रद्धा वस उन सज्जन के लिये कुछ भेटं की इच्छा कर लिया था।इस का परिणाम यह था की आपके सहयोगी ने गाली जैसे दिए थे।बाद मे डा. साब के उस गलती पर खेद जताया था। बाद मे मै अपने समर्थ अनुसार कुछ भेट ्दिया था लेकिन मन बहुत दिनो तक खिन्न रहा।

    उमेश कुमार सोनी बिलासपुर छ.ग.

    Reply
  • दुनिया आपको सही कहती है या गलत इससे अधिक अंतर नहीं पड़ता. मायने यह रखता है कि आप स्वयं को किस दृष्टि से देखते हैं. यदि आप सही हैं तो आपका आत्मविश्वास ईश्वर कृपा बन जायेगा. यदि आप गलत हैं तो आपका डर आपको जीने नहीं देगा. ईश्वर से प्रार्थना है कि वह आपको यह अंतर्दृष्टि दें जिससे आप अपने मिशन की दिशा तय कर सकें. शुभकामना

    Reply
  • sanat singh,chief photojournalist,peoples samachar,jabalpur (M.P.) says:

    Aap chintit naa hon jo kuch bhi madad ho sakegi jaroor kee jaayegi.

    Reply
  • Dharmesh shukla says:

    लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है.मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है.आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है.मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में.मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती.असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो.जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,संघर्श का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम.कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती…

    Reply
  • praveen khariwal,president indore press club says:

    unchi-unchi baato sai kisi ka pet bharta nahi… koi na koi rasta jaroor nikalna hoga…jo bhi ho ham INDORIYAN aap k saath hai.

    Reply
  • Dr.H.R.Tripathi says:

    Dear Yashwantji, I saw your appeal and could read it today only.I have depositted a small amount of Rs.Two Thousand in your A/C No.-31790200000050 at Indira Nagar branch of Bank of Baroda.
    Your appeal is just and thought provoking.I appreciate the path chosen by you.I am sure about your success.=H.R.Tripathi,Mob.-09415020402

    Reply
  • manjeet malik says:

    Bravo ! Congratulations & thanks YASHWANT G. ………you are not and you will be not alone in this mission.we the people of bharat maata are with your appeal.very soon you will see that the nation,real journalism and humanity lovers all are with you NOT ONLY WITH DHANN,ALSO WITH THEIR TANN AND MANN. …..one more thing i want to disclose in front of the nation that you are a one of the best friend of the fighter for genuin journalism as i myself wittness that at G.T.ROAD. BADALPUR when no big banners of journalism co-opperated MR.SANJAY BHATI (editor-supreme news-G.B.Nagar) last year,you were with him.At that time you were the only person among all the media houses….”realllly salutale” to your current mission. ———-urs,manjeet malik.jahangirpur,greater noida.#9720401333.9808379966.9410492001.

    Reply
  • Sukhdev singh kotalvi says:

    Yashwant ji :::::Umbrella cant stop d rain….
    but make us to stand in rain…..
    confidence may not bring sucess….
    but it gives a power to face any challange………
    From : sukhdev singh kotalvi
    tv news Repoter Mh1 news
    Roopnagar PUNJAB

    Reply
  • surendra kumar shuklabhramar5 says:

    आदरणीय यशवंत जी -आप के ब्लॉग -पोस्ट -मंच पर आकर बहुत ख़ुशी हुयी सराहनीय योगदान आप का सब को एक साथ एक मंच पर लाने का -बहुत सुन्दर लेख व् रहनाएं संग्रहित दिखीं -हम भी कदम बढ़ाये हैं कुछ दूर चलने को आप सब के साथ –समर्थन और सुझाव देते रहें -धन्यवाद
    ढेर सारी शुभ कामनाएं आप को —

    Reply
  • surendra kumar shuklabhramar5 says:

    आदरणीय यशवंत जी -आप के ब्लॉग -पोस्ट -मंच पर आकर बहुत ख़ुशी हुयी सराहनीय योगदान आप का सब को एक साथ एक मंच पर लाने का -बहुत सुन्दर लेख व् रहनाएं संग्रहित दिखीं -हम भी कदम बढ़ाये हैं कुछ दूर चलने को आप सब के साथ –समर्थन और सुझाव देते रहें -धन्यवाद
    ढेर सारी शुभ कामनाएं आप को —

    Reply
  • एक साथ एक मंच पर लाने कासराहनीय योगदान आदरणीय यशवंत जी -आप के ब्लॉग -पोस्ट -मंच पर आकर बहुत ख़ुशी हुयी

    Reply

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