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पीपली लाइव के मास्साब याद हैं ना आपको...? अरे वही, जिन्होंने मंहगाई डायन वाला गाना लिखा था और भड़ास में भी जिनके बारे में...
पता नहीं, हम जो हैं, उसे स्वीकारते क्यों नहीं हैं? जैसे, मान लीजिए मैं एक चोर हूं, लेकिर मैं यह कभी स्वीकार नहीं करूंगा...
: बाढ़ पीडि़तों की मदद के लिए बुकी से पैसा लिए पाकिस्तानी खिलाड़ी! : हाल ही में घटित हुए दो किस्से ‘शायद इस बात...
: इसको सफल बनाने के लिए निशानेबाजों को आगे आना होगा : सरकार की कुनीतियों के विरुद्ध विरोध प्रदर्शित करने का हक प्रजातांत्रिक राज्य...
03 मई 2010, सोमवार, वैशाख कृष्ण पंचमी, 2067, प्रिय सुश्री गायत्री शर्मा, प्रसन्न रहो, हम परस्पर अपरिचित हैं। तुम जलजजी को नहीं जानती होगी।...
मैं भेड़िया, गीदड़, कुत्ता जो भी कह लो, हूं. मुझे नोचना अच्छा लगता है. खसोटना अच्छा लगता है. मुझसे तुम्हारा मांसल शरीर बर्दाश्त नहीं...
मीडिया में बंद हो 'नौकर' व 'नौकरानी' शब्दों का इस्तेमाल : अखबार पढते या टेलीविजन पर समाचार सुनते एक शब्द बरबस ही खटक जाता...