दीवाली के वक्त न्यूज चैनलों में बड़े उठापटक का दौर

एक दूसरे को टीआरपी में पटखनी देने के चक्कर में जुटे न्यूज चैनलों के बीच बेहतर स्टाफ रखने को लेकर उथल-पुथल मची हुई है. कई लोग इधर-उधर आ जा रहे हैं और कई लोगों से बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है. सहारा समय में लंबे समय तक कार्यरत संजय ब्राग्टा को इंडिया टीवी ने अपने यहां ज्वाइन कराया तो आईबीएन7 में कार्यरत प्रबल प्रताप सिंह आजतक न्यूज चैनल में जाने की तैयारी कर चुके हैं.

खबरें इसके आगे भी हैं. चर्चा है कि आजतक मैनेजमेंट अपनी टीम को बेहतर करने की प्रक्रिया में कुछ ऐसे लोगों को अपने यहां लाने के प्रयास में है जो कभी उनके यहां चर्चित चेहरे हुआ करते थे और आज भी जहां हैं अपने काम के बल पर अपना स्थान बनाए हुए हैं. भरोसेमंद सूत्रों का कहना है कि स्टार न्यूज में वरिष्ठ पद पर कार्यरत दीपक चौरसिया पर आजतक प्रबंधन डोरे डाल रहा है. कुछ लोगों का यह भी कहना है कि दीपक से बातचीत करीब करीब फाइनल है पर इस बात की पुष्टि दीपक और स्टार न्यूज के करीबी सूत्र नहीं कर रहे हैं.

पर मीडिया जगत में ताजी बड़ी चर्चा दीपक को लेकर ही है. सूत्रों के मुताबिक सुप्रिय प्रसाद की आजतक में वापसी के बाद आजतक मैनेजमेंट सुप्रिय की सलाह पर कई लोगों से संपर्क कर रहा है. प्रबल प्रताप के नाम पर मुहर के बाद अब बारी दीपक चौरसिया की है. देखना है कि दीपक आने वाले दिनों में आजतक के साथ जुड़ जाते हैं या फिर स्टार न्यूज के साथ ही बने रहते हैं.

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि स्टार न्यूज के एक अन्य पत्रकार से आजतक मैनेजमेंट की बातचीत चल रही है. इस पत्रकार का अतीत कुछ चीजों को लेकर विवादास्पद रहा है पर उनके बेहतरीन काम को देखते हुए आजतक प्रबंधन उन्हें फिर से वापस बुलाने पर विचार कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक दीवाली तक पिक्चर क्लीयर हो जाएगी कि कौन कौन कहां से इस्तीफा देकर दूसरे संस्थानों को ज्वाइन कर रहे हैं.

इंडिया टीवी ने तो चप्‍पल कांग्रेस की ही बता दी

विगत दिनों राजस्थान विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा में सत्ता पक्ष के केकड़ी विधायक रघु शर्मा पर चप्पल उछाल दी गई। चप्पल उछलते ही कोहराम मच गया और यह घटना राजस्थान विधानसभा के इतिहास की सबसे शर्मनाक घटना घोषित हो गई। घटना के बाद विधानसभा का वीडियो फुटेज देखा गया और भाजपा के विधायक भवानी सिंह राजावत को दोषी मानते हुए उन पर कार्रवाई की गई। Continue reading

इंडिया टीवी में प्रमोशन, शोषण के लिए नया पद सृजित

इंडिया टीवी से खबर है कि इंक्रीमेंट मिलने के साल भर बाद अब लोगों को प्रमोशन दिया गया है. हालांकि प्रमोशन में भी जमकर भेदभाव किए जाने का आरोप है. शोषण करने के लिए डिप्टी प्रोड्यूसर जैसा एक नया पद सृजित कर दिया गया है. यह पद एसोसिएट प्रोड्यूसर और प्रोड्यूसर के बीच का है. अभी तक आमतौर पर एसोसिएट प्रोड्यूसर को प्रमोशन देकर प्रोड्यूसर बना दिया जाता है पर इंडिया टीवी ने अपने युवा पत्रकारों का शोषम व प्रमोशन लंबा खींचने के लिए डिप्टी प्रोड्यूसर जैसा पद निकाल दिया है.

अब एसोसिएट प्रोड्यूसर को प्रोड्यूसर बनने के लिए कुछ बरस डिप्टी प्रोड्यूसर की एक फर्जी कुर्सी पर बैठकर बिताने होंगे. सूत्रों का कहना है कि जिन लोगों की नौकरी सात-आठ साल की है, उनमें से कई को सीनियर एडिटर बना दिया गया है और जिन लोगों को ग्यारह साल का एक्सपीरियेंस मीडिया में है, उन्हें डिप्टी प्रोड्यूसर के पद से नवाजा गया है. सेलरी और पद में भारी विषमता है.

सीनियर एडिटर को मार्केट में दूसरे चैनलों में जितना मिल रहा है, उससे आधी रकम इंडिया टीवी के कुछ सीनियर एडिटर्स को थमाया जा रहा है. कहने का आशय ये कि इंडिया टीवी सिर्फ खबरों की ऐसी-तैसी करने के लिए ही नहीं कुख्यात है बल्कि अब अपने इंप्लाइज के शोषण के लिए भी कुख्यात हो रहा है. कहने वाले कहते हैं कि आखिर रजत शर्मा कितना माल बांधकर अपने साथ परलोक ले जाएंगे. कम से कम अपने साथ काम कर रहे लोगों को बेहतर पद पैसा इज्जत मान सम्मान देकर वह सेल्फ सैटिसफेक्शन पा सकते हैं और गर्व से कह सकते हैं कि वे एक पत्रकार होने के कारण अपने यहां के पत्रकारों को सबसे अच्छी स्थिति में रखते हैं.

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित. अगर उपरोक्त सूचना में निहित तथ्यों में कोई कमी बेसी नजर आए तो शुद्धिकरण नीचे दिए कमेंट बाक्स या फिर bhadas4media@gmail.com पर मेल भेजकर कर-करा सकते हैं.

संजय ब्राग्‍टा बने इंडिया टीवी में एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर

सहारा से संजीव श्रीवास्‍तव की विदाई के बाद इस्‍तीफा देने वाले वरिष्‍ठ पत्रकार संजय ब्राग्‍टा इ‍ंडिया टीवी से जुड़ गए हैं. उन्‍हें एक्‍जीक्‍यूटिव एडिटर बनाया गया है. बीस सालों से मीडिया सक्रिय संजय ब्राग्‍टा फिलहाल सीवीबी न्‍यज के साथ बतौर एक्‍सपर्ट जुड़े हुए थे. संजय ब्राग्‍टा आजतक से इस्‍तीफा देकर सहारा से जुड़े थे. उन्‍हें पुण्य प्रसून वाजपेयी अपने साथ लेकर आए थे. कुछ विवादों के बाद पुण्य प्रसून वाजपेयी की टीम तो सहारा से निकल गई परन्‍तु संजय जमे रहे. सहारा के चैनल हेड भी बने. परन्‍तु उपेंद्र राय के आने के बाद इनकी स्थिति कमजोर हो गई थी. और संजीव श्रीवास्‍तव के सहारा से जाने के बाद इन्‍होंने इस्‍तीफा दे दिया था.

बिन अन्ना आजतक हुआ सून, इंडिया टीवी फिर किंग

अन्ना के आंदोलन के दौरान आजतक पूरे फार्म में था. दर्शकों ने सबसे ज्यादा भरोसा इसी चैनल पर किया और सबसे ज्यादा इसी को देखा. इस कारण टीआरपी में यह चैनल अपनी नंबर वन की कुर्सी पर आसीन हो गया. लेकिन अन्ना आंदोलन के शांत होने के बाद अब जो टीआरपी आई है, उससे पता चलता है कि इंडिया टीवी ने फिर से नंबर एक कुर्सी पर कब्जा जमा लिया है. इंडिया टीवी थोड़े ही मार्जिन से नंबर वन बना है लेकिन कहा तो यही जाएगा कि आजतक नंबर दो पर चला गया है.

नंबर तीन पर स्टार न्यूज है. आजतक और स्टार न्यूज के बीच बेहद बारीक फासला है. कह सकते हैं कि हालात यही रहे तो स्टार न्यूज कहीं नंबर दो न बन जाए और आजतक को तीसरे पायदान पर आना पड़े. हालांकि आजतक में सुप्रिय प्रसाद की एक्जीक्यूटिव एडिटर के पद पर ताजपोशी के बाद माना जा रहा है कि यह न्यूज चैनल फिर से अपनी पुरानी स्थिति में वापस लौट आएगा लेकिन सुप्रिय के आजतक छोड़ने और वापस आने के बीच यमुना में काफी मैला पानी बह चुका है. विनोद कापड़ी के नेतृत्व में इंडिया टीवी ने बीती रात प्राइम टाइम पर अन्ना के गांव में मीडिया की स्थिति की तुलना पीपली लाइव फिल्म से करके शानदार प्रोग्राम पेश किया. पीपली लाइव फिल्म के एक-एक दृश्य दिखाकर उसी के अनुरूप बने अन्ना के गांव के मीडियामयी माहौल को पेश किया गया. यह कार्यक्रम बेहद रोचक और दर्शनीय बन पड़ा था.

कह सकते हैं कि विनोद कापड़ी नए नए तरीके आजमाकर दर्शकों को बांधने की कोशिश कर रहे हैं जबकि आजतक घिसे पिटे और आजमाए नुस्खों के जरिए दर्शकों को लुभाने की कोशिश कर रहा है. आजतक ने एक दिन पहले बिना कागजात मोबाइल सिम हासिल किए जाने की खबर को प्रमुखता से पेश किया. पर जानकारों का कहना है कि ऐसी खबरें कई बार कई अखबार और चैनल चला दिखा चुके हैं. ऐसे में अब जरूरी है कि आजतक की टीम क्रिएशन के नए फार्मेट इजाद करे अन्यथा उसे अपनी गद्दी यूं ही गंवाने को मजबूर होता रहना पड़ेगा. इस हफ्ते की टीआरपी के मुताबिक इंडिया टीवी 16.2, आजतक 15.4, स्टार न्यूज़ 15.2, आईबीएन7 10.3, जी न्यूज़ 9.5, एनडीटीवी इंडिया 7.5, लाइव इंडिया 6.3, तेज 4.5, समय 4.3, और डीडी 1.8 है.

इंडिया टीवी से ग्रुप बिजनेस हेड अमित कुमार का इस्‍तीफा

: विजय गोयल की नई पारी : इंडिया टीवी के ग्रुप बिजनेस हेड अमित कुमार ने इस्‍तीफा दे दिया है. सूत्रों ने बताया कि वे अपनी नई पारी बैग के साथ शुरू करने जा रहे हैं. अमित कुमार पिछले चार सालों से इंडिया टीवी से जुड़े हुए थे. इसी साल अप्रैल में उन्‍हें प्रमोट करके ग्रुप बिजनेस हेड बनाया गया था. इसके पहले वे इंडिया टीवी के नेशनल सेल्‍स टीम को हेड कर रहे थे.

ग्रुप बिजनेस हेड के रूप में अमित कुमार के पास इंडिया टीवी के रिवेन्‍यू से लेकर डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और इंटरनेशनल स्‍तर पर डीटीएच टाइअप की जिम्‍मेदारी थी. बैग में उन्‍हें क्‍या जिम्‍मेदारी दी जाएगी, इसका खुलासा नहीं हो पाया है. समझा जा रहा है कि उन्‍हें यहां भी वरिष्‍ठ पद पर लाया गया है.

विजय गोयल ने बरेली से प्रकाशित होने जा रहे मिड डे अखबार अनन्‍त घोष के साथ अपनी नई पारी शुरू की है. उन्‍हें यूपी का ब्‍यूरोचीफ बनाया गया है. इसके पहले भी वे कई अखबारों को अपनी सेवाएं दे चुके हैं.

अन्ना के आंदोलन से इंडिया टीवी का बैंड बजा, रिपोर्टरों को नोटिस

: चिटफंडियों, बिल्डरों, दलालों, सरकार समर्थकों, नान-न्यूज वालों के न्यूज चैनल धड़ाम हुए : खिसियाये इंडिया टीवी प्रबंधन ने अपने रिपोर्टरों पर निकाली भड़ास : अन्ना हजारे के समर्थन में जिस तरह पूरा देश उठ खड़ा हुआ है, उससे न्यूज चैनलों पर दबाव बहुत बढ़ गया है. कामेडी, भूत प्रेत, अंधविश्वास, अपराध, चिरकुटई आदि दिखाने का वक्त नहीं है. शुद्ध हार्ड न्यूज पर खेलने का दौर है.

आईबीएन7 के मैनेजिंग एडिटर आशुतोष जैसे लोग अन्ना के आंदोलन में रामलीला ग्राउंड से लाइव कर रहे हैं. आजतक न्यूज चैनल अपने पुराने फार्म में दिख रहा है. सारे न्यूज चैनल खबरों पर खेल रहे हैं. और, अगर खबरों का मामला हो तो देश की जनता आजतक को प्राथमिकता देती है. उसके बाद उसे जो बेहतर कर दिखा रहा हो. टैम वाले टामियों ने भी जनता के रुख को भांपकर अपनी टीआरपी रेटिंग को लगता है ठीक कर लिया है. इसी कारण इस हफ्ते की टीआरपी में इंडिया टीवी धड़ाम से नंबर चार पर आ गया है. और, नंबर चार पर आ बैठा न्यूज24 सरककर सीधे आठवें, अपनी पुरानी जगह पहुंच गया है.

सबसे बड़ा झटका इंडिया टीवी को लगा है. नंबर वन की कुर्सी पर बैठ चुका इंडिया टीवी मीडिया के माहौल को पूरी तरह गंधा रहा था. नान-न्यूज की जय जय की बातें की जा रही थी. सबसे प्रयोगधर्मी मालिक के रूप में रजत शर्मा का नाम और सबसे महान टीआरपीबाज संपादक के रूप में विनोद कापड़ी का नाम बाजारू इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज होने के लिए व्यग्र था. लेकिन अचानक अन्ना ने इस देश को जैसे जगा दिया. और जब देश जग गया तो मंडी में रंडी की तरह व्यवहार कर रहे मीडिया को भी जगना ही था. जिसकी जितनी औकात, वो उसी जगह पहुंच गया. नान न्यूज पर खेलने की अपनी आदत के चलते इंडिया टीवी को दर्शकों का टोटा पड़ गया है.

खिसियाये इंडिया टीवी प्रबंधन ने अपने रिपोर्टरों को नोटिस जारी कर दिया है, कि ठीक से काम नहीं कर रहे हो तुम लोग, सुधर जाओ वरना नौकरी ले ली जाएगी. इस नोटिस से इंडिया टीवी के रिपोर्टर डरे हुए हैं. इन्हें लगता है कि जब वे न्यूज की बातें करते थे तब तो उन्हें विनोद कापड़ी जैसे संपादक चिरकुट चूतिया बताते थे और कुछ नया करने को, ले आने को कहते थे, लेकिन अब जब सच में न्यूज का दौर आ गया तो दर्शक उन चैनलों पर जा रहा है जहां न्यूज दिखाने का ट्रेंड रहा है, अतीत रहा है.

जी न्यूज को सबसे ज्यादा बढ़त मिली है. दर्शकों ने इस न्यूज चैनल को खबरों के मामले में खूब भरोसेमंद पाया है. इस न्यूज चैनल पर पुण्य प्रसून बाजपेयी जैसे चर्चित पत्रकार लगातार दर्शकों को ताजीस्थिति और खबरों के पीछे की खबर से अवगत करा रहे हैं. एनडीटीवी को दर्शक पसंद नहीं कर रहे क्योंकि यह चैनल अपने एप्रोच में कनफ्यूज है. इसी कारण इस ठंडे न्यूज चैनल को दर्शकों के ठंडे रुख का सामना करना पड़ रहा है. पी7न्यूज, सीएनईबी आदि टाइप के न्यूज चैनलों को तो टाप टेन में जगह ही नहीं मिली है क्योंकि इन चैनलों का अभी तक अपना कोई दर्शक वर्ग नहीं है और न ही इन चैनलों ने खुद को भरोसा करने लायक साबित किया है.

राजीव शुक्ला के केंद्र में मंत्री बनने के बाद और अजीत अंजुम को वापस न्यूज24 की कमान मिलने के बाद न्यूज24 के मानों दिन बहुर गए थे. यह आखिरी पायदान का चैनल अचानक नंबर चार पर आ गया और यहां काम करने वाले लोग खुद को सबसे बड़ा पंडित मानने लगे. पर यह खुशी कुछ हफ्तों तक टिकने के बाद अब पूरी तरह काफूर हो चुकी है. कांग्रेसी मंत्री का यह न्यूज चैनल दर्शकों के भरोसे को जीत पाने में नाकाम रहा है और यह सोचने को मजबूर किया है कि क्या वाकई केंद्रीय मंत्री बनते ही राजीव शुक्ला ने टैम के टामियों को हड़का कर पुचकार लिया था और टामी लोग कांय कांय करते हुए उनके चरणों में लोट गए. फिर अगली सुबह शुक्लाजी के न्यूज चैनल को टीआरपी चार्ट में नंबर चार पर चढ़ा दिया.

जो भी हो, पर यह सच है कि अन्ना के आंदोलन ने मीडिया के अंदर भी सफाई शुरू कर दी है. नान-न्यूज वालों, चिटफंडियों, दलालों के न्यूज चैनलों को इस आंदोलन ने किनारे कर दिया है. दर्शक उन्हीं चैनलों को पसंद कर रहे हैं जिनमें थोड़ा बहुत तेवर, तेज और सच कहने का दमखम बाकी है.

टामियों ने जो ताजी टीआरपी रेटिंग जारी की है, वो इस प्रकार है-

आजतक- 18.1 (2.9 उपर चढ़ा), स्टार न्यूज- 14.9 (1.1 बढ़त), जी न्यूज- 13.5 (3.9 बढ़त), इंडिया टीवी- 12.0 (3.0 गिरावट), आईबीएन7- 9.8 (1.3 बढ़त), एनडीटीवी इंडिया- 8.2 (0.1 गिरावट), लाइव इंडिया- 7.4 (1.1 गिरावट), न्यूज24- 6.4 (3.7 गिरावट), समय- 4.5 (0.7 बढ़त), तेज- 3.0 (1.5 बढ़त), डीडी- 1.5 (0.7 गिरावट), इंडिया न्यूज- 0.6 (0.2 बढ़त)

सप्ताह- 34वां, वर्ष-2011, टीजी- सीएस 15+

नोट- भड़ास4मीडिया का हमेशा मानना रहा है कि न्यूज चैनलों की लोकप्रियता को मापने वाली संस्था टैम का कामधाम पूरी तरह संदिग्ध है. यह बाजारू संस्था कई तरह के दबावों, दलालों, लाइजनरों के बीच और के द्वारा काम करती है और इनके टीआरपी मीटर उस अदृश्य भूत की तरह होते हैं जो कभी भी कहीं भी नहीं दिख पाते लेकिन उनके आतंक से हर टीवी पत्रकार व संपादक थर्राया रहता है. पर दुर्भाग्य से यही संस्था टैम इन दिनों न्यूज चैनलों के भविष्य को तय करती है और इसके बेहद भ्रामक आंकड़ों को बाजारू लोगों के बीच बेहद प्रामाणिक माना जाता है. भड़ास4मीडिया हमेशा से टैम के घृणित कारनामों का खुलासा करता रहा है और इस संस्था द्वारा जारी किए जाने वाले आंकड़ों, टीआरपी आदि के प्रकाशन से बचता रहा है. लेकिन, कभी कभार भड़ास4मीडिया पर इस भूत के वर्तमान-भविष्य के बारे में और इसके दावे-प्रतिदावों के बारे में चर्चा कर ली जाती है ताकि इस सार्वभौमिक बुराई की तरफ सभी का ध्यान बनाए रखा जाए. करप्शन के खिलाफ शुरू हुए आंदोलन के इस दौर में मीडिया के करप्शन के खिलाफ भी गोलबंदी होने लगी है, लोग आवाज उठाने लगे हैं.. कृपया आप भी मीडिया के भ्रष्टाचार के खिलाफ, टैम के दुराचार के खिलाफ आवाज उठाएं और न्यूज चैनलों को पटरी पर लाने में मदद करें और इनके भूखे-नंगे मालिकों को आइना दिखाकर इनकी औकात दिखाएं.

थाने के बाहर से इंडिया टीवी के रिपोर्टर की कार का शीशा तोड़कर लैपटॉप-कैमरा चोरी

दिल्‍ली में चोर लुटेरे बेखौफ हो गए हैं. या तो इनकी पुलिस से यारी है या फिर पुलिस की कोई लाचारी है, तभी ये जहां तहां लूट और चोरी करते चल रहे हैं. मंडोली में एक पत्रकार के साथ चाकू के बल पर लूट हुई तो नरेला में पुलिस स्‍टेशन के बाहर खड़ी इंडिया टीवी के एक पत्रकार की वैगन आर कार का शीशा तोड़कर चोरों ने लैपटॉप, कैमरा और अन्‍य कीमती समान उड़ा दिया.

इंडिया टीवी के रिपोर्टर राजेश खत्री नरेला इलाके में किसी काम से गए हुए थे. वे अपनी वैगन आर कार नरेला पुलिस स्‍टेशन के बाहर खड़ी करके पास में स्थित एक एटीएम से पैसे निकालने गए. इतने में ही चोरों ने उनके वैगन आर कार का शीशा तोड़कर उसमें रखा लैपटॉप, कैमरा, माइक आईडी, लाइट, कुछ अन्‍य सामान और कागजातों पर हाथ साफ कर दिया.

जब पन्‍द्रह मिनट बाद राजेश वापस लौटे तो कार की हालत देखकर सन्‍न रह गए. कार खोलकर देखा तो सारे सामान गायब मिले. उन्‍होंने तत्‍काइ इसकी सूचना पुलिस को दी. पुलिस ने कार की स्थिति देखने के बाद चोरी का मामला दर्ज कर लिया है. बताया जा रहा है कि चोरी गए सामान की कीमत लगभग एक लाख रुपये के आसपास है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि चोर हिम्‍मती हैं या फिर उन्‍हें पुलिस की शह मिली हुई है, जो इत्‍मीनान से चोरी करके निकल गए.

विनोद कापड़ी से झड़प के बाद रोहित ने इंडिया टीवी छोड़ा

इंडिया टीवी से सीनियर प्रोड्यूसर रोहित विश्‍वकर्मा के जाने की खबर है. हालांकि उन्‍होंने अभी अपना इस्‍तीफा नहीं दिया है, परन्‍तु वो दो दिनों से आफिस नहीं जा रहे हैं. रोहित ने फेसबुक पर भी इंडिया टीवी छोड़ने का एलान कर दिया है. उन्‍होंने यह फैसला तीन दिन पहले विनोद कापड़ी के साथ हुई तीखी झड़प के बाद लिया है. रोहित स्‍पोर्टस डेस्‍क को देखते थे.

सूत्रों के अनुसार तीन दिन पहले किसी बात को लेकर रोहित की विनोद कापड़ी के साथ काफी तीखी नोंकझोक हुई. विनोद कापड़ी के रवैये से रोहित काफी दिनों से परेशान चल रहे थे. अंतत: जब पानी सिर के ऊपर हो गया तो उन्‍होंने विनोद कापड़ी को खरी खोटी सुनाते हुए इंडिया टीवी से विदाई लेने का निर्णय ले लिया. रोहित इंडिया टीवी में स्‍पोर्टस डेस्‍क के हेड थे.

रोहित

रोहित

रोहित

इनाम के नाम पर ठगी करता है इंडिया टीवी

मैं कानपुर से सौरभ ओमर हूं और मैं खबरिया टीवी चैनलों में सबसे अधिक इंडिया टीवी देखता था, लेकिन आज कल इंडिया टीवी का दर्शक नहीं हूं क्योंकि इंडिया टीवी वाले अपने ही दर्शकों को ठगने का काम करते हैं, जिसकी जालसाजी का मैं शिकार हूं.

हुआ यूं कि इंडिया टीवी ने अपने चैनल में एक प्रोग्राम चलाया था,  जिसका नाम था अलर्ट व्‍यूवर्स जिस में ऐसे लोग जो चैनल के दर्शक हों या फिर उनके पास कोई ऐसा वीडियो हो जो समय से पहले हो या फिर सिर्फ उन्हीं के पास हो यानी कि चैनल कि भाषा में एक्सक्लूसिव हो उसे इंडिया टीवी चैनल पर चल रहे प्रोग्राम अलर्ट व्‍यूवर्स के दिए फ़ोन नंबर पर बात करके बताये गए पते पर भेज दें,  अगर मोबाइल पर हो तो उसे ईमेल के जरिये सेंड कर दें, जिसके बाद आपकी खबर को आपके नाम से चलाया जायेगा और उसके बदले वीडियो भेजने वाले को इनाम दिया जायेगा.

जिस में कलर टीवी समेत कई इनाम थे तो मैंने भी प्रोग्राम देख कर ऐसे वीडियो कि तलाश में लग गया,  जो सिर्फ मेरे पास हो फिर एक दिन अपने नगर (कानपुर) के सरकारी स्कूल यानी कि प्राथमिक विद्यालय के पास खड़ा था,  उस समय मेरे पास न तो कैमरे वाला कैमरे वाला मोबाइल था और न ही कैमरा था.  मैंने उस दिन वहां देखा कि विद्यालय में मिड डे मिल योजना के नाम पर किस तरह धज्जियां उड़ाई जा रही है. बस क्या था.  मैंने अपने मन में तय कर लिया कि अगर आज विद्यालय में ऐसा हो रहा है तो हर दिन ऐसा होता होगा और मैंने तीसरे दिन अपने मित्र से एक वीडियो कैमरा लिया और उसे साथ लेकर विद्यालय चला गया, जहां थोड़ी देर इन्तजार किया और वैसा ही नजारा देखने को मिला जैसा दो दिन पहले था.

मैंने अपने आपको मीडिया का स्टूडेंट बता कर पूरा कालेज को शूट करना शुरू कर दिया, लेकिन मेरा ध्यान सिर्फ मिड डे मिल पर था और मेरा टारगेट पूरा हो गया.  मैंने घर आकर वीडियो देखा और इंडिया टीवी के पते पर भेज दिया,  जिसे 24 अगस्त को प्रसारित किया गया. जिस में मेरा नाम भी दिया गया जिसके बाद इंडिया टीवी से फ़ोन आया कि मैं इंडिया टीवी से शीतल बोल रही हूं,  आपने जो वीडियो भेजा था उस पर आपको चैनल की और से एक कलर टीवी दिया जाता है,  जिसको लेने के लिए आपको 2314 रुपये का टीडीएस जमा करना होगा.

जिस पर मैंने टीडीएस जमा करने से मना कर दिया और कहा कि आपने तो इनाम देने के बदले उल्टा पैसा ही मांग लिया. ये आपने अपने प्रोग्राम में तो प्रसारित नहीं किया था, जिसके बाद आज तक न तो कोई फोन आया है और ना ही मैंने किया. मैंने इसलिए अपनी भड़ास लिखी है कि अगर इंडिया टीवी वाले इनाम के नाम पर अपने दर्शक बढ़ाते हैं,  पर उनका इनाम भी उन तक नहीं पहुंचाते हैं.  मैं भड़ास4मीडिया से ये निवेदन करता हूं कि अपने भड़ास में ये प्रकाशित कर अन्य दर्शकों को इससे सावधान करने का काम करे।

सौरभ ओमर

saurabhsitinews@gmail.com

बाबा रामदेव पर इंडिया टीवी वाले रजत शर्मा की टिप्पणी

Deshpremi Bharatvanshi नामक किन्हीं सज्जन ने deshpremi.bharat@gmail.com मेल आईडी से ग्रुप में मीडिया के सैकड़ों लोगों को एक मेल किया है, जिसमें एक लेख है और लेखक के बतौर इंडिया टीवी के मालिक रजत शर्मा का नाम है. चूंकि ये मेल रजत शर्मा की मेल आईडी या इंडिया टीवी की मेल आईडी से आफिसियली नहीं आया है, इसलिए ये कनफ्यूजन है कि वाकई ये लेख रजत शर्मा का है या नहीं.

लेकिन भेजने वाले ने जब भेज ही दिया है तो इसे हम भी छाप देते हैं, और, उम्मीद करते हैं कि इंडिया टीवी की तरफ से कमेंट आएगा कि यह लेख रजत शर्मा का है या नहीं. लेख में रजत शर्मा का बाबा के प्रति अदभुत प्रेम दिख रहा है, जो कि इन दिनों का ट्रेंड भी है. बाजारू मानक के हिसाब से नंबर वन बने चैनल के मालिक रजत शर्मा बाबा रामदेव के बारे में क्या सोचते हैं और क्या कुछ बोलते हैं, यह इसे पढ़कर जाना जा सकता है, बशर्ते यह लेख रजत शर्मा का ही हो.

एडिटर

भड़ास4मीडिया

 


 

मैंने बाबा से कहा था- कोई सरकार इतनी बड़ी गलती नहीं करेगी

रजत शर्मा

इंडिया टीवी

5 जून को स्वामी रामदेव ने मुझसे पूछा था कि क्या ऐसा हो सकता है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने की कोशिश करे ? मैंने उनसे कहा कि कोई भी सरकार इतनी ब़ड़ी  गलती नही करेगी “ आप शांति से अनशन कर रहे हैं ,आपके हज़ारो समर्थक मौजूद हैं, चालीस TV Channels की OB Vans वहां खड़ी हैं.” .. मैंने उनसे कहा था ‘सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ऐसा कभी नहीं होने देंगे’…मेरा विश्वास था कि कांग्रेस ने Emergency के अनुभव से सबक सीखा है…पिछले 7 साल के शासन में सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे ये लगा हो कि वो  पुलिस और लाठी के बल पर अपनी सत्ता की ताकत दिखाने का कोशिश करेंगे

लेकिन कुछ ही घंटे बाद सरकार ने मुझे गलत साबित कर दिया..मैंने स्वामी रामदेव से कहा था कि आप निश्चिंत होकर सोइये… देर रात मुझे इंडिया टीवी के Newsroom से फोन आया : “सर, रामलीला मैदान में पुलिस ने धावा बोल दिया है”…फिर उस रात टी वी पर  जो कुछ   देखा ,आंखों पर विश्वास नहीं हुआ कोई ऐसा कैसे कर सकता है …कैमरों और रिपोर्ट्स की आंखों के सामने पुलिस ने लाठियां चलाईं, आंसू गैस के गोले छोड़े, बूढ़े और बच्चों को पीटा, महिलाओं के कपड़े फाड़ दिए…मैंने स्वामी रामदेव को अपने सहयोगी के कंधे पर बैठकर बार-बार पुलिस से ये कहते सुना- “यहां लोगों को मत मारो, मैं गिरफ्तारी देने को तैयार हूं”…लेकिन जब सरकार पांच हजा़र  की पुलिस फोर्स को  कहीं  भेजती है तो वो फोर्स ऐसी बातें सुनने के लिए तैयार नहीं होती…पुलिस वालों की Training डंडा चलाने के लिए होती है, आंसू गैस छोड़ने और गोली चलाने के लिए होती है पुलिस ये नही समझती कि जो लोग वहां सो रहे हैं वो दिनभर के भूखे  हैं , अगर वहां मौजूद भीड़ उग्र हो जाती है तो पुलिस गोली भी चला देती…वो भगवान का शुक्र है कि स्वामी रामदेव के Followers में ज्यादातर बूढ़े, महिलाएं और बच्चे थे या फिर उनके चुने साधक थे जिनकी Training उग्र होने की नहीं है

जब दिन में स्वामी रामदेव ने मुझे फोन किया था तो उन्होंने कहा था – कि किसी ने उन्हें पक्की खबर दी है कि ”आधी रात को हजारों पुलिसवाले शिविर को खाली कराने की कोशिश करेंगे” और ये भी कहा कि ”पुलिस गोली चलाकर या आग लगाकर उन्हें मार भी सकती है”…मैंने स्वामी रामदेव से कहा था कि ”ऐसा नहीं हो सकता-हजारों पुलिस शिविर में घुसे ये कभी नहीं होगा और आप को मारने की तो बात कोई सपने में सोच भी नहीं सकता”…रात एक बजे से सुबह पांच बजे तक टी वी पर पुलिस का तांडव देखते हुए मैं  यही सोचता रहा कि रामदेव कितने सही थे और मैं कितना गलत…ये मुझे बाद में समझ आया कि स्वामी रामदेव ने महिला के कपड़े पहनकर भागने की कोशिश क्यों की…उन्होंने सोचा जब पुलिस घुसने की बात सही है

लाठियां चलाने की बात सही है  तो Encounter की बात भी सही होगी …मैं कांग्रेस को अनुभवी नेताओं की पार्टी मानता हूं…मेरी हमेशा मान्यता रही है कि कांग्रेस को शासन करना आता है…लेकिन 5 जून की रात की बर्बरता ने मुझे हैरान कर दिया…समझ में नहीं आ रहा कि आखिर सरकार ने ये किया क्यों ?…उससे भी बड़ा सवाल  ये उठा कि कांग्रेस को या सरकार को इससे मिला क्या?

सरकार को मिला सुप्रीम कोर्ट का नोटिस जिसमें ये बताना पड़ेगा कि रात के अंधेरे में पुलिस की बर्बरता का औचित्य (justification) क्या था…सरकार ये कैसे कहेगी कि हमने ये इसलिए किया कि ये बताना था   कि सरकार की ताकत क्या होती है…हम जब चाहें किसी की भी जुबान पर लगाम लगा सकते हैं…कपिल सिब्बल ने उस दिन शाम को कहा था ( if we know to accommodate, we also know how to rein in)”हम अगर किसी के लिए  रास्ता बनाना  जानते है तो लगाम  लगाना भी जानते है”

कांग्रेस को क्या मिला..जो स्वामी रामदेव बीजेपी से नाता तोड़कर कांग्रेस की तरफ दोस्ती का हाथ बड़ा रहे  थे, उन्हें अपना दुश्मन बना लिया…जो स्वामी रामदेव RSS के लोगों से दूरी बना रहे थे, अपने साथ मुस्लिम नेताओं को खड़ा कर रहे थे ताकि उनकी ऐसी छवि बने जो सबको स्वीकार्य  हो  – उन्हें कांग्रेस ने धक्का देकर RSS के पाले में फेंक दिया…कांग्रेस ने रात को पुलिस से स्वामी रामदेव के समर्थकों की पिटाई करवा कर, मायावती और मुलायम सिंह दोनों को रामदेव के साथ खड़ा कर दिया…जो वृंदा करात स्वामी रामदेव की खुलेआम आलोचना करती थीं, वो रात को TV Channels पर रामदेव के समर्थन  में पुलिस के अत्याचार को सबसे सख्त शब्दों में निंदा करती नज़र आईं

कांग्रेस और सरकार दोनों अन्ना हजारे से परेशान थी…वो रामदेव को अन्ना हजारे के जवाब के रूप में देख रही थी …लेकिन रात को पुलिस की लाठियों और आंसूगैस ने   इसे उल्टा  कर दिया…जो अन्ना और रामदेव एक दूसरे से उखड़े हुए थे अब साथ-साथ हैं…अन्ना हजारे रामलीला मैदान की पुलिस बर्बरता के खिलाफ अनशन करेंगे…अब सरकार इन दोनों से एक साथ  निबटना होगा

कांग्रेस को क्या मिला? मिला तो बीजेपी को…जो पार्टी बार-बार उठने की कोशिश कर रही थी लेकिन उसके पास सरकार के खिलाफ कोई बड़ा मुद्दा नही  था…अब पूरी ताकत के साथ मैदान में है .कांग्रेस ने उसके हाथ में एक मुद्दा  दे दिया, रामदेव जैसा लीडर  दे दिया और करोड़ों लोगों का जनाधार ,लोगों को  लाठियां मार-मारकर बीजेपी को उपहार में दे दिया…अब कांग्रेस को बीजेपी से, रामदेव से, अन्ना हजारे की Civil Society से, मायावती से, मुलायम सिंह से, एक साथ लड़ना है…इसके बदले मिला क्या- लालू यादव का समर्थन  जिनके लोकसभा में सिर्फ चार  MP हैं और बिहार में सिर्फ बाईस  MLA हैं

पुलिस की लाठियां चलाने और लोगों का खून बहाने की टाइमिंग भी कमाल की थी कपिल सिब्बल ने रामदेव से हुई डील की चिट्ठी दिखाकर भ्रम पैदा कर दिया था..रामदेव defensive पर थे…वो बार-बार सफाई दे रहे थे कि चिट्ठी में सिर्फ इतना लिखा है कि हमारी सारी मांगें पूरी हो जाएंगी तो दो दिन के बाद अनशन खत्म हो जाएगा…लेकिन रात में 5000 की पुलिस फोर्स  भेजकर सरकार ने रामदेव को Offensive कर दिया…अब वो लगाताक उन सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह पर हमला कर रहे हैं जिनका नाम लेकर उन्होंन पिछले पांच साल में एक शब्द नहीं कहा था.

दिग्विजय सिंह ने स्वामी रामदेव को ठग कहा, उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण को चोर कहा…सरकार से उनकी जांच कराने की मांग की…फिर हिंदुस्तान टाइम्स में खबर छपी कि CBI और ED स्वामी रामदेव के ट्रस्ट और कंपनियों की जांच करेगी…अगर स्वामी रामदेव ठग हैं तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनसे अनशन वापस लेने की अपील क्यों की ?…प्रधानमंत्री ने एक ठग को चिट्ठी लिखकर ये क्यों कहा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आपकी मुहिम सही है…अगर स्वामी रामदेव के ट्रस्ट और कंपनियों की जांच होनी है तो देश के Finance Minister प्रणब मुखर्जी तीन और मंत्रियों के साथ उन्हें एयरपोर्ट पर लेने क्यों गए?…अगर कपिल सिब्बल ये जानते थे कि स्वामी रामदेव भरोसे के आदमी नहीं हैं तो फिर सरकार ने भ्रष्टाचार और कालेधन के सवाल पर उनकी ज्यादातर मांगें क्यों मान ली हैं कपिल सिब्बल ने प्रेस कांफ्रेस बुलाकर ये क्यों कहा कि हमने स्वामी रामदेव की सभी मांगे मान ली हैं ?…क्या ये सरकार ऐसे व्यक्ति के साथ डील कर रही थी जिसकी जांच CBI और ED को करनी है

कौन विश्वास करेगा स्वामी रामदेव पर ठगी और बेईमानी जैसे आरोपों का ? दिग्विजय सिंह की बात समझ में आती है, उनका अपना एजेंडा है…लेकिन सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह ने तो कभी ऐसे एजेंडे को नहीं अपनाया…क्या अब CBI और ED के दम पर फिर से साबित किया जाना है कि सरकार की ताकत क्या होती है?…स्वामी रामदेव को ये बताना है कि हमसे लड़ोगे तो तुम्हारा दिमाग ठिकाने लगा देंगे

अगर सरकार ने ये करके अपना इकबाल जतला भी दिया तो क्या मिलेगा ? …लोकतंत्र में कोई भी जनता का विश्वास राजनैतिक दलों के लिए ऑक्सीजन का  काम करता है…सत्ता का अहंकार- किसी भी पार्टी के लिए तेजाब का काम करता है…इतिहास गवाह है कि लोकतंत्र में डंडे के बल पर शासन नहीं चलता…जो सरकारें विरोध के स्वर का सम्मान करती हैं, शांतिपूर्ण ढंग से आलोचना करने वालों की बात सुनती हैं, वही सरकारें ज्यादा दिन चलती हैं…ये फैसला कांग्रेस को करना है  कि उसे आक्सीज़न  चाहिए या तेज़ाब.

इंडिया टीवी ने चोरी की नवभारत की खबर, बताया एक्‍सक्‍लूसिव!

मुंबई :  न्यूज चैनल की आधी खबरें अखबारों से ही आती हैं पर ज्‍यादातर चैनल किसी अखबार में छपी एक्सक्लूसिव खबरों के लिए अखबार को क्रेडिट देने में संकोच नहीं करते, पर इंडिया टीवी ने मुंबई से प्रकाशित हिंदी दैनिक ‘नवभारत’ में छपी खबर को अपनी एक्सक्लूसिव न्यूज बता कर आधे घंटे से अधिक समय तक चलाया और इस खबर में कहीं भी अखबार में छपी खबर का उल्लेख नहीं किया.

गुरुवार (2 जून, 2011) को नवभारत (मुंबई) ने अपने क्राईम रिपोर्टर विजय कुमार यादव की एक्सक्लूसिव खबर ‘कप्तान बनते ही रैना के इर्दगिर्द घुमने लगे बुकी’ छापी है. सुबह अखबार में यह खबर देखने के बाद इंडिया टीवी को इस खबर पर खेलने का आइडिया आया. चैनल ने गुरुवार की शाम 7 बजे यह खबर इंडिया टीवी एक्सक्लूसिव के टैग के साथ दिखानी शुरु की. खबर में जो फोटो दिखाया गया, वह नवभारत में छपी फोटो है. जिसमें शिर्डी में साईं बाबा के दर्शन के दौरान भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सुरेश रैना के साथ सट्टेबाज टीपू शिर्डी दिखाई दे रहा है. बता दें कि रैना मंगलवार की सुबह शिर्डी स्थित साईं बाबा के मंदिर गए थे. जहां यह बुकी भी उनके साथ था.

नवभारत में छपी खबर –  ‘इर्द-गिर्द मंडराने लगे बुकी

मुंबई से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए मेल पर आधारित.

इंडिया टीवी से तीन और ईटीवी से दो का इस्तीफा

कुल पांच लोगों के इस्तीफे की सूचना है. इंडिया टीवी के नोएडा आफिस से तीन लोगों ने संस्थान को गुडबाय बोल दिया है. इनके नाम हैं दीप सिंह परिहार, नेहा त्रिपाठी और मोहम्मद अफसर. दीप करीब छह वर्षों से इंडिया टीवी थे. बतौर प्रोड्यूसर काम देख रहे थे. नेहा पहले रिपोर्टिंग में थीं लेकिन बाद में न्यूज रूम में समय-समय पर अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गईं. इन दिनों मानीटरिंग का काम देख रहीं थीं. मोहम्मद अफसर कई वर्षों से रिपोर्टिंग में थे. कुछ लोगों का कहना है कि इन तीन में से दो ने इस्तीफा दिया है और किसी एक को संस्थान ने अपनी तरफ से कार्यमुक्त किया है.

उधर, हैदराबाद से सूचना है कि ईटीवी को दो लोगों ने इस्तीफे का नोटिस थमा दिया है. इनके नाम हैं पंकज कुमार सिंह और समीर रंजन. पंकज तीन वर्षों से ईटीवी में थे. 15 मई को उनका नोटिस पीरियड पूरा होगा. ये पता नहीं चल पाया है कि वे कहां ज्वाइन करने वाले हैं. पंकज पत्रकारिता में आने से पहले राजनीति में सक्रिय थे. वे रामविलास पासवाना वाली पार्टी लोजपा की छात्र विंग के पहले प्रदेश अध्यक्ष थे. वे बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता भी रहे हैं. पंकज ने महात्मागांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा से पत्रकारिता की डिग्री ली. समीर रंजन के बारे में सूचना है कि वे भी नोटिस पीरियड पर चल रहे हैं और बाद में इंडिया न्यूज, दिल्ली ज्वाइन करेंगे.

अगर उपरोक्त सूचनाओं में कोई कमी-बेसी नजर आए तो नीचे दिए गए कमेंट बाक्स के जरिए हमें अपडेट-अपग्रेड कर सकते हैं.

अमित कुमार बने इंडिया टीवी के ग्रुप बिजनेस हेड

: गौतम शर्मा और वाजिद खान का भी प्रमोशन : इंडिया टीवी ने अमित कुमार को प्रमोशन देकर ग्रुप बिजनेस हेड बना दिया है. वे पिछले तीन सालों से इंडिया टीवी के नेशनल सेल्‍स टीम को हेड कर रहे थे. उनके जिम्‍मे इंडिया टीवी के विस्‍तार और नए वेंचर्स की जिम्‍मेदारी होगी. अब वे चैनल के रिवेन्‍यू, डिस्‍ट्रीब्‍यूशन और अंतराष्‍ट्रीय स्‍तर पर डीटीएच टाईअप को देखेंगे. इंडिया टीवी शीघ्र ही दो चैनल लांच करने की योजना बना रहा है. जिसकी घोषणा कंपनी ने अपने गोवा कांफ्रेंस में की.

इसी क्रम में उनके पद पर गौतम शर्मा को नेशनल सेल्‍स टीम का हेड बना दिया गया है. गौतम चार महीने पहले ही स्‍टार न्‍यूज से इंडिया टीवी पहुंचे हैं. पश्चिमी क्षेत्र के सेल्‍स एवं मार्केटिंग को देख रहे वाजिद खान को दक्षिण का अतिरिक्‍त प्रभार सौंप दिया गया है. वे पश्चिम के साथ दक्षिण से भी रिवेन्‍यू जनरेट करने की जिम्‍मेदारी संभालेंगे.

”स्ट्रिंगर बनवाने के लिए वसूले दो लाख”

: सहारा के पूर्व स्ट्रिंगर जरीन सिद्दीकी का आरोप :  टीवी चैनलों में जिलों के लिए स्ट्रिंगर, रिपोर्टर और ब्‍यूरोचीफ बनाने के नाम पर तरह-तरह के खेल होने, पैसा लेने-देने की बात उठती रहती है. ऐसा ही एक मामला सामने आया है रायपुर से. रायपुर में सहारा न्‍यूज के लिए काम करने वाले जरीन सिद्दीकी ने आरोप लगाया है कि इंडिया न्‍यूज में उनके एक परिचित को स्ट्रिंगर बनवाने के लिए मुकुंद शाही और फारुख नवाजे ने दो लाख रुपये वसूले और काम भी नहीं कराया. अब पैसा भी वापस नहीं कर रहे हैं.

जरीन सिद्दीकी ने बताया कि वो सन 2008 में  सहारा समय के लिए रायपुर में काम करते थे. इलेक्‍ट्रानिक मीडिया में होने के चलते तमाम पत्रकारों से परिचय था. इलेक्‍ट्रानिक मीडिया के लोग खबरों के आदान-प्रदान के चलते एक दूसरे पर विश्‍वास भी करते थे. ऐसे में इंडिया टीवी के लिए काम करने वाले फारुख नवाजे ने मुझसे एक दिन कहा कि इंडिया न्‍यूज में रायपुर ब्‍यूरो खाली है, अगर कोई परिचित हो तो बोलो लगवा दूंगा. इसके लिए दो लाख रुपये खर्च करने पड़ेंगे.

जरीन ने बताया कि मैंने अपने एक परिचित चिंतामणि को यह बात बताई तो वह इसके लिए तैयार हो गया. इसके बाद फारुख के सहयोग से हमलोग इंडिया न्‍यूज के दिल्‍ली ऑफिस में मुकुंद शाही से मिले. बातचीत के बाद उन्‍होंने आश्‍वासन दिया कि वो चिंतामणि को रायपुर का ब्‍यूरो दिलवा देंगे. इंडिया न्‍यूज के ऑफिस के भीतर बात होने पर हमलोगों को भी विश्‍वास हो गया कि काम हो जाएगा.

जरीन ने बताया कि इसके बाद मैंने चिंतामणि से दो लाख रुपये फारुख नवाजे को दिलवा दिया. इसके बाद काफी दिनों तक चिंतामणि का कोई काम नहीं हुआ. बार-बार हमलोगों को टाला जाने लगा. इस दौरान हम कई बार दिल्‍ली आए, उसमें भी काफी पैसा खर्च हो गया. फिर भी चिंतामणि को रायपु ब्‍यूरो की जिम्‍मेदारी नहीं मिल पाई. जिसके बाद चिंतामणि मेरे ऊपर पैसा वापस कराने का दबाव बनाने लगा. मैं दोनों तरफ से चक्‍कर में फंस गया.

जरीन ने बताया कि किसी तरह यहां वहां से कर्ज लेकर मैंने चिंतामणि के पैसे वापस किए. पर बीच में पड़ने के चलते मेरा पैसा फंस गया. इसमें मेरा कोई फायदा नहीं था परन्‍तु पैसा दिलाने के लिए बीच में पड़कर मैंने बड़ा गुनाह कर दिया. बैठे-बैठाए लाखों का चपत लग गया. अब मैं मुकुंद शाही और फारुख नवाजे से पैसा वापस पाने के लिए चक्‍कर लगाने लगा. इस बीच मेरे ऊपर ही पैसे लेने का आरोप लगाकर इसकी शिकायत सहारा प्रबंधन से कर दी गई.‍‍ जिसके बाद चैनल ने मुझे निकाल दिया. मेरे सामने पैसों की दिक्‍कत हो गई. बार बार मैं पैसे वापस करने के लिए गिड़गिड़ाता लेकिन दोनों कोई ना कोई बहाना बनाकर टाल देते.

जरीन ने बताया कि लगातार दबाव बनाने के बाद फारुख नवाजे ने मुझे 44 हजार रुपये वापस कर दिए. इसके बाद बोल दिया कि बाकी पैसा मुकुंद शाही के पास है. मैं मुकुंद शाही के पास पैसे के लिए दौड़ने लगा. इस बीच मुकुंद शाही ने मुझे बीस हजार रुपये वापस किया. फोन पर जब भी बात करता तो फोन नहीं उठाते या मीटिंग का बहाना कर देते थे. एक बार मैं अपने बीबी बच्‍चों के साथ दिल्‍ली गया. मेरे पास पैसे नहीं थे. मैं जब रोया-गिड़गिड़ाया तो मुझे चार हजार रुपए दिए.

जरीन ने बताया कि चार हजार देने के बाद मुकुंद ने मुझे तमाम तरह से हड़काया और कहा कि मैं क्राइम रिपोर्टर हूं अगर आगे से परेशान किया तो एक बार में बोरिया-बिस्‍तर बंधवा दूंगा. आगे से कभी आना होगा तो बता के आना नहीं तो ठीक नहीं होगा. मैं पारिवारिक दिक्‍कतों के चलते पहले ही परेशान हूं तुम और परेशान कर रहे हो. इस बीच उन्‍होंने अपना संस्‍थान बदलकर पी7 में चले गए. अब मेरी मुश्किलें और बढ़ गई हैं. परेशान होकर मैंने मुख्‍यमंत्री को भी पत्र लिखा था.

इस संदर्भ में जब इंडिया टीवी के फारुख नवाजे से बात की गई तो उन्‍होंने कहा कि इस मामले से मेरा कोई लेना देना नहीं है. इसमें सारी गड़बड़ी जरीन की ही है. ना तो मैंने किसी को पैसा दिलवाया है और ना ही इसमें मेरा कोई रोल है. किसी के कह देने से मैं दोषी थोड़ी ही हो जाऊंगा. आरोप तो कोई किसी पर लगा सकता है, मैं आप पर भी आरोप लगा सकता हूं. जरीन सरासर झूठ बोल रहा है. पैसे का गोलमाल खुद उसने ही किया है.

जब इस संदर्भ में मुकुंद शाही का पक्ष जानने के लिए बात की गई तो उन्‍होंने कहा ऐसी कोई बात नहीं है. अगर कोई मुझे पैसा दिया है तो उसके पास प्रूफ तो होना चाहिए ना. कोई साबित करके देखे. कह देने से थोड़े ही मैंने किसी का पैसा ले लिया है. कोई ऐसे पैसा नहीं देता है, अगर वो प्रूफ लाकर दे दे तो मैं मानने के लिए तैयार हूं. आरोप तो कोई किसी पर लगा सकता है, लेकिन सच्‍चाई के लिए सबूत की आवश्‍यकता होती है.

हजारीबाग में तीन मीडियाकर्मियों से मारपीट, कैमरे छीने गए

: घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दी गई : हजारीबाग में न्‍यूज कवर करने गए दो पत्रकार एवं एक फोटोग्राफर के साथ ग्रामीणों ने मारपीट की. इनलोगों के कैमरे, मोबाइल और पैसे भी छीन लिए गए. तीनों को चोटें भी आई हैं. मीडियाकर्मियों ने घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दे दी है. पुलिस ने अभी मुकदमा दर्ज नहीं किया है.

हजारीबाग के सदर थाना क्षेत्र के सिंदूर गांव के पास एनएच33 पर एक सड़क हादसा हो गया. हादसे में एक उन्‍नीस साल की लड़की की मौत हो गई. मौत से गुस्‍साए ग्रामीणों ने दुर्घटना करने वाले ट्रक को फूंक दिया तथा सड़क पर जाम लगा दिया. इसकी सूचना मिलते ही दैनिक आज के वरिष्‍ठ रिपोर्टर कृष्‍ण गुप्‍ता, इंडिया टीवी राजीव रंजन तथा दैनिक भास्‍कर के फोटो जर्नलिस्‍ट रवींद्र मौके पर पहुंचे. पत्रकार घटना स्‍थल पर विजुअल बनाने और फोटो लेने में लगे ही थे कि कुछ ग्रामीण उग्र हो गए तथा समाचार कवर करने से रोकने लगे.

इन लोगों ने समझाने का प्रयास किया तो तीनों से मारपीट की गई. राजीव का वीडियो कैमरा, रवींद्र का कैमरा, एटीएम कार्ड तथा उनके पर्स में रखे पैसे छीन लिए गए. कृष्‍ण गुप्‍ता का सैमसंग का मोबाइल लूट लिया गया. कुछ लोगों ने बीच बचाव करके इन लोगों को छुड़ाया. वहां से आने के बाद तीनों लोगों ने सदर कोतवाली में घटना की लिखित तहरीर दी. पुलिस ने अभी मामला दर्ज नहीं किया है.

बताया जा रहा है कि पुलिस ने आश्‍वासन दिया है कि दोनों लोगों के कैमरे तथा अन्‍य सामान पुलिस वापस करा देगी. ऐसा न होने की स्थिति में मुकदमा दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा. खबर देने तक तीनों मीडियाकर्मियों के सामान वापस नहीं मिल पाए थे.

विनोद कापड़ी, साक्षी और उमेश जोशी पर केस

: टोटल टीवी के आउटपुट हेड ऋषि दीक्षित ने कराया दर्ज : मामला विनोद-साक्षी के अंतरंग फोटो का : विनोद कापड़ी-साक्षी जोशी की अंतरंग फोटो को लेकर पिछले दिनों हुए घटनाक्रम में नया मोड़ आ गया है. टोटल टीवी के आउटपुट हेड ऋषि दीक्षित ने इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी, आईबीएन7 की एंकर साक्षी जोशी तथा साक्षी के पिता उमेश जोशी पर पटियाला हाउस कोर्ट में केस दर्ज कराया है. उन्‍होंने यह मुकदमा उनके विरुद्ध षणयंत्र रचने तथा छवि को नुकसान पहुंचाने के लिए दर्ज कराया है.

कुछ महीने पूर्व इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी एवं टेलीविजन/एंकर साक्षी जोशी के अंतरंग फोटो पिछले साल मार्च महीने में कुछ स्‍थानों पर प्रकाशित हुए थे. उस दौरान दो तस्‍वीरों ने मीडिया इंडस्‍ट्री में हंगामा मचा खड़ा कर दिया था. बवाल इसलिए मचा कि मामला मैनेजिंग एडिटर एवं एक महिला रिपोर्टर के बीच का था. इसे लेकर तमाम तरह की चर्चाएं और बहस हुईं. नैतिकता को लेकर भी सवाल खड़े किए गए.

कई वेबसाइटों पर प्रकाशित फोटो के मामले में साक्षी ने यूपी के सहारनपुर एसएसपी को तीन पन्‍नों का पन्‍नों का कम्‍पलेन भेजा था, जिसमें अविनाश दास, ऋषि पांडेय, संदीप चावला, रामानुज सिंह, तरुणा सिंह और मोहम्मद हसन सिद्दीकी को उनकी मेल आईडी हैक करने तथा उनके पर्सनल फोटो

विनोद साक्षी
साक्षी जोशी एवं विनोद कापड़ी
साइटों पर पब्लिश कराने का आरोप लगाया. इस मामले में ऋषि ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से गिरफ्तारी के खिलाफ स्‍टे ले लिया था, जिससे उनको पूछताछ के दौरान गिरफ्तार नहीं किया जा सकता था. हालांकि इस मामले में गिरफ्तार करना तो दूर सहारनपुर पुलिस ने किसी से पूछताछ भी नहीं की.

इस वाकये के बाद बाद साक्षी इंडिया टीवी से बीबीसी चली गईं. इसके कुछ समय बाद पिछले साल नवम्‍बर महीने में विनोद कापड़ी और साक्षी परिणय सूत्र में बंध गए. जिसके बाद पीछे घटे सारे मामलों का पटाक्षेप हो गया. इस फोटो एवं इससे जुड़े मामलों पर भी विराम लग गया.  इस दौरान साक्षी ने भी बीबीसी छोड़कर आईबीएन7 चली गईं. परन्‍तु ऋषि दीक्षित के केस दर्ज कराने के बाद फोटो वाला यह जिन्‍न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल आया है.

दरअसल पूरा मामला यह है कि इंडिया टीवी के मैनेजिंग एडिटर विनोद कापड़ी और साक्षी जोशी की अंतरंग क्षणों की तस्वीरें जब नेट पर जारी हुई, उस समय ऋषि पाण्डेय इंडिया टीवी में रिपोर्टर के रूप में कार्यरत थे. ऋषि और साक्षी दोनों टोटल टीवी से इंडिया टीवी में आए थे, इसलिए एक दूसरे को पहले से जानते थे. दोनों के बीच दोस्‍ताना संबंध भी था. लेकिन इस चैनल में आने के बाद से दोनों के रिश्‍तों के समीकरण बदल गए. साक्षी विनोद कापड़ी के नजदीक हो गईं.  बाद में ऋषि भी आउटपुट हेड बनकर वापस टोटल टीवी आ गए.

ऋषि ने पटियाला हाउस कोर्ट में 29 जनवरी को केस दाखिल किया है. उनके अधिवक्‍ता के मुताबिक उनके मुवक्किल के खिलाफ बिना किसी ठोस आधार के आरोप लगाए गए उनके खिलाफ षणयंत्र रचा गया, ताकि उन्‍हें व्‍यसायिक, सामाजिक और मानसिक स्‍तर पर नुकसान पहुंचाया जा सके. इस संबंध में जिन तीन लोगों के नाम दिए गए हैं उनमें पहला नाम न्‍यूज एंकर आईबीएन7 साक्षी जोशी, मैनेजिंग एडिटर इंडिया टीवी विनोद कापड़ी और तीसरा नाम उमेश जोशी का है, जो साक्षी जोशी के पिता हैं. इन तीनों लोगों पर ऋषि की छवि को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया गया है. इसके लिए उनके अधिवक्‍ता ने आईपीसी की धारा 120बी, 34, 499, 500 के तहत कोर्ट में केस दायर किया है.

बहरहाल इस पूरे मामले में ऋषि का नाम भी काफी उछला. ऋषि का मानना है कि इससे उनकी छवि पर नकारात्‍मक प्रभाव पड़ा. हालांकि इस मामले में मान‍हानि का दावा तो किया गया है लेकिन हर्जाना जैसा कुछ भी नहीं मांगा गया है. ऋषि का कहना है कि उनका नाम प्रोफशनल राइवलरी के चलते इस मामले में घसीटा गया. जिसके बाद उन्‍होंने कानून का सहारा लिया है.

शुभम ने इंडिया टीवी और निशांत ने देश लाइव ज्‍वाइन किया

आजतक से शुभम पांडेय ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे आजतक से पिछले तीन वर्षों से जुड़े हुए थे. वे यहां पर असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर थे तथा खेल से जुड़े कार्यक्रम ‘विशेष’ के हिस्‍से थे. शुभम ने अपनी नई पारी इंडिया टीवी से शुरू की है. उन्‍हें एसोसिएट प्रोड्यूसर बनाया गया है. वे खेल डेस्‍क पर काम देखेंगे. शुभम ने अपने करियर की शुरुआत मध्‍य प्रदेश में एक लोकल अखबार कीर्तिक्रांति के साथ की थी. इन्‍होंने एमएचवन तथा न्‍यूज 24 को भी अपनी सेवाएं दीं.

रेडियो इंडस्ट्री में काम करने के बाद अब कुमार निशांत ने टेलीविज़न इंडस्‍ट्री से जुड़ गए हैं. उन्‍होंने अपने टीवी करियर की शुरुआत देश लाइव, रांची के साथ कुछ समय पहले शुरू की. उन्‍हें प्रोड्यूसर कम सीनियर एंकर बनाया गया है. निशांत ने अपने करियर की शुरुआत बीएजी फिल्‍म्‍स के रेडियो धमाल से की थी. दैनिक भास्‍कर के माय एफएम, प्रभात खबर के रेडियो धूम में प्रोग्रामिंग हेड और रेडियो जॉकी के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. निशांत पांच शहरों के रेडियो जॉकी ऑफ द सिटी भी रह चुके हैं. इन्‍होंने कई चैनलों के लिए डाक्‍यूमेंट्री भी बनाई है.

नितिन ने इंडिया टीवी, शाकिर ने जनवाणी ज्‍वाइन किया

साधना न्‍यूज, नोएडा से नितिन शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी इंडिया टीवी के साथ नोएडा में ही शुरू की है. उन्‍हें एसोसिएट प्रोड्यूसर बनाया गया है. नितिन डेस्‍क पर अपनी जिम्‍मेदारी निभाएंगे. इन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत आजाद न्‍यूज के साथ की थी. इसके बाद साधना से जुड़ गए थे.

अमर उजाला, बिजनौर से शाकिर अंसारी ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे बिजनौर के धामपुर कार्यालय में सब इंचार्ज थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी मेरठ से प्रकाशित होने वाले दैनिक जनवाणी के साथ शुरू की है. शाकिर ने अपने करियर की शुरुआत पांच साल पहले अमर उजाला के साथ ही की थी.

पंजाब केसरी, चंडीगढ़ से पांच का इस्‍तीफा

: सुनील ने जी यूपी ज्‍वाइन किया : पंजाब केसरी, चंडीगढ़ कार्यालय से पांच पत्रकारों ने एक साथ इस्‍तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि कम वेतन और काम के ज्‍यादा दबाव के चलते पत्रकारों ने एक साथ इस्‍तीफा दिया है. अखबार प्रबंधन ने इस समस्‍या से निपटने तथा तत्‍काल नए रिक्रूटमेंट करने की जिम्‍मेदारी हिमाचल प्रदेश के प्रभारी विनय को सौंपा है. उन्‍हें चंडीगढ़ भेजा गया है.

इंडिया टीवी, नोएडा से सुनील कुमार मिश्रा ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहां पर असिस्‍टेंट प्रोड्यूसर के पद पर थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी की शुरुआत जी यूपी से की है. उन्‍हें एसोसिएट प्रोड्यूसर बनाया गया है. सुनील पिछले पांच सालों से इंडिया टीवी से जुड़े हुए थे. उन्‍होंने अपना करियर इंडिया टीवी से ही 2005 में शुरू किया था.

इंडिया टीवी से सीओओ आरके अरोड़ा गए, संदीप खोसला आए

इंडिया टीवी से सीओओ और सीएफओ आरके अरोड़ा अलग हो गए हैं. उन्‍होंने इंडिया टीवी से इस्‍तीफा दे दिया है. आरके इंडिया टीवी के शुरुआत से जुड़े हुए थे. कहा जा रहा है कि अब वे अपने किसी प्रोजेक्‍ट पर लगने वाले हैं. जिसकी घोषणा वे अगले कुछ दिनों में कर सकते हैं. अरोड़ा इंडिया टीवी का फानेन्सियल प्‍लानिंग और मैनेजमेंट देखते थे. वे इंडिया टीवी को संचालित करने वाली आईएनएस में शेयर होल्‍डर भी हैं.

इंडिया टीवी में उनकी स्‍थान पर संदीप खोसला को लाया गया है. संदीप स्‍टार में बतौर सीएफओ काम कर रहे थे. वे स्‍टार से पिछले कई साल से जुड़े हुए थे. यहां उन्‍हें अरोड़ा के पोस्‍ट पर ज्‍वाइन कराया गया है. वे इंडिया टीवी में सीएफओ होने के साथ सीओओ भी होंगे.

ग्रुप बिजनेस हेड मनोज शर्मा का इंडिया टीवी से इस्‍तीफा

इंडिया टीवी के ग्रुप बिजनेस हेड मनोज शर्मा ने इस्‍तीफा दे दिया है. मनोज कहां ज्‍वाइन करने वाले हैं तथा इस्‍तीफा देने के कारणों का पता नहीं चल पाया है. मनोज इंडिया टीवी ग्रुप की सभी कंपनियों के व्‍यवसाय की जिम्‍मेदारी थी. मनोज दस महीने पहले इंडिया टीवी के साथ जुड़े थे.

उन्‍होंने अपने करियर की शुरुआत बीस वर्ष पहले इंडिया टुडे ग्रुप के साथ की थी. अठारह वर्षों तक वे टुडे ग्रुप के साथ जुड़े रहे तथा विभिन्‍न पदों पर काम किया. इसके बाद वे सीएनबीसी-टीवी18 ग्रुप से जुड़ गए. इसके बाद वे इंडिया टीवी के ग्रुप बिजनेस हेड की जिम्‍मेदारी संभाली थी.

चेतावनी, फिर भी इंडिया टीवी, आईबीएन7, न्‍यूज24 और स्‍टार न्‍यूज पर असर नहीं

नई दिल्ली. केंद्र सरकार ने माना है कि 14 टीवी चैनल ऐसे हैं जो नियमों का लगातार उल्लंघन कर रहे हैं। इन सभी चैनलों को एक बार से ज्यादा चेतावनी दी गई हैं। कलर्स और एमटीवी को तो चार-चार बार चेतावनी दी जा चुकी है। मनोरंजन के छोटे पर्दे पर टीआरपी की होड़ में कई चैनल केंद्रीय प्रसारण मंत्रालय द्वारा तय मापदंड भूल जाते हैं। पिछले कुछ समय में सूचना और प्रसारण मंत्रालय में अश्लीलता और भद्दी टिप्पणियों की कई शिकायतें दर्ज कराई गई हैं।

सरकार ने लोकसभा में बताया कि जिन 14 चैनलों को एक बार से अधिक चेतावनी दी गई हैं उनमें बिंदास, चैनल वी, कलर्स, आईबीएन-7, इंडिया टीवी, एमटीवी, इमेजिन, न्यूज 24, सोनी, स्टार आनंदो, स्टार न्यूज, स्टार प्लस, टीवी 5 और वीएच-1 शामिल हैं।

मंत्रालय के नोटिस देने के बाद कलर्स ने चार अवसरों पर स्क्रोल में तीन दिन तक लगातार माफीनामा चलाया है। मंत्रालय को विभिन्न सीरियल, रिएलिटी शो, विज्ञापन आदि के संबंध में दर्शकों की शिकायतें मिलीं, जिनके बाद यह कार्रवाई की गई।

जिन मनोरंजन के कार्यक्रमों के लिए नोटिस, चेतावनी या निर्देश दिए गए, उनमें दादागिरी, सन यार चिल मार, गेट जार्जियस 5, लॉंच पैड, बिग बॉस के दूसरे और तीसरे सीजन, आने को है, एमटीवी रोडीज, स्पलिट्सविला 2 और 3, बंदिनी, पति. पत्नी और वो, इस जंगल से मुझे बचाओ, एंटरटेनमेंट के लिए कुछ भी करेगा, सपना बाबुल का, सच का सामना और सेटरडे नाईट लाइव शामिल हैं।

वीएच-1 द्वारा प्रसारित कार्यक्रम साउथ पार्क को तो विभाग ने तत्काल हटाने के निर्देश दिए। सच का सामना प्रसारित करने वाले स्टार प्लस को चेतावनी दी गई कि विदेशी थीम पर आधारित कार्यक्रमों को भारतीय सभ्यता के हिसाब से तैयार किया जाए।

न्यूज चैनलों को आपत्तिजनक या हिंसा को प्रेरित करने वाले विजुअल्स, बिना वैज्ञानिक आधार के प्रसारित भ्रामक खबरें, आम जनता की भावनाएं भड़काने और मुंबई हमले के दौरान किए कवरेज में प्रसारित फुटेज के लिए नोटिस दिए गए। बिग बॉस और न्यू एक्स डिओडरेंट के विज्ञापन के कंटेट भी आपत्तिनजक मानते हुए जुर्माना किया गया।   साभार : दैनिक भास्‍कर

स्ट्रिंगरों से धोखा कर रहा है इंडिया टीवी

मैंने आपकी खबर पढ़ी, जिसमें लिखा था कि इंडिया टीवी वाले अपने स्टाफ का तनख्‍वाह बढ़ा देंगे तथा बोनस देंगे. पर क्या वाकई में मात्र कार्यालय के स्टाफ से न्यूज़ चैनल चलाया जा सकता है, अगर फील्‍ड के रिपोर्टर खबर न भेजे तो. क्या इंडिया टीवी नंबर वन हो सकता है. दरअसल, इंडिया टीवी ने स्ट्रिंगर के पैसे आज तक कभी नहीं बढ़ाया.

एक साल पहले स्ट्रिंगरों से कहा गया था कि प्रत्‍येक स्पेशल स्टोरी पर 2500 रुपए मिलेंगे. स्ट्रिंगरों ने कई स्‍पेशल स्‍टोरियां दीं, लेकिन एक रुपये बढ़ा कर नहीं दिया गया. अब भी इंडिया टीवी प्रत्‍येक स्‍टोरी पर पहले का रखा हुआ रेट 1000  रूपये ही देता आ रहा है. मैं तो कहता हूं कि पूरे भारत में इंडिया टीवी के 500 रिपोर्टर होंगे, अगर इसमें से उनको भी कुछ दे दिया जाय तो क्या घट जायेगा, जिनकी मेहनत का नतीजा है की चैनल नंबर वन है.

श्रीमान जी अगर देखा जय तो सबसे अच्‍छा पैसा आज तक देता है. प्रत्‍येक स्‍टोरी का 2500 रुपये, स्टार न्यूज़ एक स्टोरी का 2000 रुपये और इंडिया टीवी एक स्‍टोरी का मात्र 1000 रुपये. यह कहां का इन्साफ है? इंडिया टीवी वाले अपने धन के समुंदर में से थोडा स्ट्रिंगरों को भी दे दें तो उनका क्‍या घट जायेगा?

एक स्ट्रिंगर द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

इंडिया टीवी में इनक्रीमेंट, बढ़ी सेलरी जून से मिलेगी

इंडिया टीवी के नए आफिस में शिफ्ट होने से प्रबंधन के साथ-साथ कर्मचारी भी प्रसन्न हो गए हैं. इंडिया टीवी प्रबंधन ने अपने कर्मियों को सेलरी इनक्रीमेंट, एरियर व बोनस का तोहफा दिया है. बढ़ी हुई सेलरी दिसंबर से मिलेगी. इनक्रीमेंट जून से किया गया है और इसके एरियर का एक हिस्सा दिवाली पर बोनस के रूप में वितरित किया गया. दिवाली के मौके पर इंडिया टीवी आफिस में आतिशबाजी हुई जिसमें कर्मियों ने बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया.

उल्लेखनीय है कि कुछ हफ्तों पहले इंडिया टीवी का आफिस फिल्म सिटी 16-A से हटाकर बी-38, सेक्टर 85, नोएडा शिफ्ट किया गया. फिल्म सिटी वाला आफिस किराए का था जबकि नोएडा में इंडिया टीवी मैनेजमेंट ने खुद का भव्य आफिस बनवाया है. नए आफिस में शिफ्ट होने के बाद बढ़ी हुई टीआरपी व नंबर वन की पोजीशन से प्रबंधन गदगद था तो अब इनक्रीमेंट व एरियर से इंडिया टीवी के मीडियाकर्मी प्रसन्न हैं.

मनोहर नायक बने आज समाज के संपादक

: योगेश ने इंडिया टीवी, अफरोज ने यूएनआई टीवी ज्‍वाइन किया : आज समाज, दिल्‍ली के संपादक राजीव पांडेय की विदाई हो गई है. राजीव के जाने के बाद संपादकीय प्रभारी की जिम्‍मेदारी वरिष्‍ठ सहायक संपादक मनोहर नायक को सौंपी गई है. मनोहर नायक का नाम अखबार के प्रिंट लाइन में जा रहा है.

मनोहर नायक को अभी संपादक का केबिन नहीं मिल पाया है. राजीव के जाने के बाद भी उनका केबिन बंद पड़ा हुआ है. उनके जाने के लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं. वैसे किस नए संपादक के लाये जाने की भी चर्चा है.

योगेश गुलाटी ने इंडिया टीवी ज्‍वाइन किया है. वे सीनियर प्रोड्यूसर बनाए गए हैं. योगेश इसके पूर्व कॉमनवेल्‍थ गेम्‍स की मीडिया सेल में बतौर मीडिया मैनजर काम कर रहे थे. योगेश ने अपने करियर की शुरुआत दैनिक भास्‍कर के साथ की थी. इसके बाद वे ईटीवी और एमएच1 और फोकस टीवी को अपनी सेवाएं दे चुके हैं. वे फोकस टीवी की लांचिंग टीम के सदस्‍य थे.

अफरोज आलम साहिल ने यूएनआई टीवी के साथ नई पारी शुरू की है. वे सीनियर करेसपाडेंट बनाए गए हैं. आरटीआई एक्टिविस्‍ट के रूप में चर्चित अफरोज यूएनआई टीवी में आरटीआई डेस्‍ट की जिम्‍मेदारी संभालेंगे. अफरोज इसके पहले टीवी9 में सीनियर करेस्‍पाडेंट थे. अफरोज फ्रीलांस जर्नलिस्‍ट के तौर पर कई अखबार और पत्रिकाओं में लेखन करते रहे हैं.

इंडिया टीवी : आफिस बदला, टीआरपी बढ़ी

इंडिया टीवी वाले के अच्छे दिन चल रहे हैं. इंडिया टीवी का आफिस बदल गया है. यह अभी तक फिल्म सिटी 16-A में था. अब इसका नया पता है बी-38, सेक्टर 85, नोएडा. फिल्म सिटी में जिस आफिस में किराए पर इंडिया टीवी संचालित होता था, उसके मालिक टीवी वाले हैं. रजत शर्मा और पीके तिवारी के बीच इस बिल्डिंग को लेकर कोर्ट व कोर्ट के बाहर लंबा विवाद चला. बाद में दोनों चैनलों के मालिकों में इस आफिस के विवाद पर समझौता हो गया.

इंडिया टीवी वालों ने नए आफिस का निर्माण काफी पहले शुरू करा दिया था जो कुछ महीने पहले बनकर तैयार हुआ और फिल्मसिटी से सब लोग चलकर नए आफिस पहुंच चुके हैं. आफिस नई जगह शिफ्ट होने से इंडिया टीवी के कई कर्मियों को आने-जाने की समस्या हो गई है. इसे देखते हुए प्रबंधन ने कैब की व्यवस्था कर दी है. उधर, इंडिया टीवी से जुड़े ढेर सारे लोग यह मान चुके हैं कि नए आफिस में चैनल का दफ्तर शिफ्ट होने के बाद प्रबंधन जल्द ही सबकी सेलरी में भारी-भरकम इनक्रीमेंट करेगा, जैसा कि वादा किया गया था. नए आफिस में शिफ्ट होने का बाद ताजी सूचना ये है कि टीआरपी के मामले में इंडिया टीवी तीन हफ्ते बाद फिर नंबर एक पर पहुंच गया. कई हफ्तों तक नंबर वन रहा इंडिया टीवी अयोध्या कांड के दौरान आजतक के हाथों पिछड़ गया था. अब फिर इंडिया टीवी नंबर एक पर पहुंचकर आजतक को पछाड़ने में कामयाब हुआ है. कह सकते हैं कि आजकल इंडिया टीवी की हर लिहाज से किस्मत अच्छी चल रही है.

बाराबंकी में दो चैनलों के पत्रकार-कैमरामैन भिड़े

: कल्‍याण सिंह की बाइट के लिए हुई तकरार :  बाराबंकी में दो चैनलों के पत्रकार और कैमरामैन आपस में एक दूसरे से भिड़ गए. दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई. उनके कपड़े भी फट गए. यह पूरा मामला उस समय घटित हुआ, जब पूर्व मुख्‍यमंत्री कल्‍याण सिंह अपने लाव-लश्‍कर के साथ अयोध्‍या जा रहे थे. कल्‍याण सिंह का काफिला जब बाराबंकी पहुंचा तो टीवी पत्रकारों में उनकी बाइट लेने की होड़ मच गई.

सूत्रों का कहना है कि कल्‍याण सिंह की बाइट लेने के दौरान इंडिया टीवी के रिपोर्टर मोहसिन हैदर व सीनियर कैमरामैन नागेन्‍द्र मिश्र ने ईटीवी के पत्रकार पंकज मिश्रा को धक्‍का दे दिया. इसके बाद ईटीवी का आईडी भी नीचे कर दिया. इसे लेकर इंडिया टीवी और ईटीवी के पत्रकार के बीच कहासुनी होने लगी. मामला बढ़ने पर इंडिया टीवी के मोहसिन हैदर व कैमरामैन नागेन्‍द्र ईटीवी के पंकज और उनके सहयोगी जीतेन्‍द्र मौर्या से भिड़ गए. मामला गाली-ग्‍लौज से मारपीट तक जा पहुंचा. इसके बाद कुछ लोगों ने बीच बचाव करके मामले को सुलझाया. घटना से नाराज ईटीवी के पंकज एफआईआर दर्ज कराने पहुंच गए. फिर किसी तरह मामले को सुलझाया गया.

कुछ लोगों का यह भी कहना है कि कल्‍याण सिंह का बाइट इंडिया टीवी को छोड़कर सभी लोग ले चुके थे. बाइट खतम होने वाली थी तो इंडिया टीवी के रिपोर्टन मोहसिन हैदर और कैमरामैन नागेन्‍द्र भी वहां पहुंच गए. इन लोगों ने भी बाइट लेने की कोशिश की. इसी बीच किसी बात को लेकर नागेन्‍द्र मिश्र ने स्ट्रिंगरों को अपशब्‍द बोलना शुरू कर दिया. उन्‍होंने कहा कि तुम स्ट्रिंगर साले भीड़ क्‍यों लगाए हो, जब लखनऊ से लोग आए ही हैं! इसी को लेकर बहस होने लगी. मामला काफी बिगड़ गया. नागेन्‍द्र के व्‍यवहार से गुस्‍साए बाराबंकी के स्ट्रिंगरों ने नागेन्‍द्र और उनके रिपोर्टर मोहसिन हैदर की जमकर धुनाई कर दी. जिसमें इन लोगों का शर्ट भी फट गया. दोनों लोगों को चोटें भी आईं.

इस घटना का कुछ पत्रकारों ने मजा भी लिया. कुछ ने इसे निंदनीय बताया. खैर, मामला चाहे जो हो परन्‍तु ये घटना पत्रकारिता को शर्मसार करने वाली है. पत्रकारिता जैसे संवेदनशील पेशे में इस तरह के व्‍यवहार की अपेक्षा किसी ने नहीं की जा सकती.

‘जहरीली बहना’ या ‘जहरीला इंडिया टीवी’?

: आइए, ऐसे चैनल के संपादक की बुद्धि पर तरस खाएं :  ‘रक्षाबंधन पर जहरीली बहना से बच के रहना, हो सकता है कि वह जो मिठाई आपको खिलाए उसमें जहर हो, जी हां पेश है एक खास रिपोर्ट…’ 22 अगस्त की सुबह 9.30 बजे से प्रसारित एक रिपोर्ट में यही दिखाया जा रहा था. किसी बहन ने अपने भाई की हत्या नहीं की थी, न ही किसी बहन ने भाई को जहर देकर मारा था.

मामला बाजार में बिकने वाली जहरीली मिठाई का था और उसे पेश किया जा रहा था इस तरह, जैसे राखी बांधने वाली हर बहन कहीं अपने भाई को जहर खिलाने जा रही हो? इंडिया टीवी के पास इस बात का क्या जवाब होगा कि बाजार में बिक रही जहरीली मिठाई खरीदने वाली हर बहन को यह मालूम है कि जो मिठाई वह खरीद रही, उसमें जहर है? क्या वह जानबूझकर अपने भाई को जहरीली मिठाई खिलाने जा रही है? खबर देखने के बाद जेहन में कड़वाहट भर आई, मैं खुद को रोक नहीं पाया और तुरंत ही इस पर लिखने को मजबूर हो गया.

देश के जाने-माने पत्रकार रजत शर्मा के स्वामित्व वाला इंडिया टीवी चैनल अफवाहें फैलाने और लोगों को डराने के लिए जैसे कमर कस चुका हो. इंडिया टीवी पर आपकी अदालत कार्यक्रम देखकर वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा की तारीफ करने से लोग खुद को नहीं रोक पाते, मैं खुद भी इस कार्यक्रम का प्रशंसक हूं. पर इसी चैनल में बाकी समय पेश की जा रही अधिकतर खबरों में सनसनी फैलानी की पूरी कोशिश की जाती है. देश में इस चैनल को देखने वाले दर्शक भी इतने ज्यादा सुस्त हैं कि समाज में अफवाहों से फैल रहे नुकसान पर आंखें मूंदे बैठे हैं. उससे भी ज्यादा इस बात के लिए जिम्मेदार सूचना और प्रसारण मंत्रालय है, जिनके अधिकारियों को खबरों और अफवाहों में अंतर नजर नहीं आता और अफवाहों के प्रसारण पर रोक लगाने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए जाते.

इंडिया टीवी पर प्रसारित खबरों की कुछ झलकियां पहले भी मैंने देखी है. उदाहरण के तौर पर… एक पार्टी में एक मासूम बच्चे के हाथ में पिस्तौल आ गई और उसका घोड़ा दबने से गोली लगने के बाद बच्चे के पिता की मौत हो गई थी, जिस पर इंडिया टीवी ने खबर दिखाई कि सावधान, आपका बच्चा आपकी हत्या कर सकता है, ऐसे बच्चों से बचकर रहें. दूसरी खबर – आज रात आप सो नहीं पाएंगे, क्योंकि हम दिखाने जा रहे हैं ऐसी खबर जो आपका चैन छीन लेगी. यह खबर देखते वक्त मेरी 6 वर्ष की बेटी शानू ने पूछा कि पापा, इसमें क्या दिखाएगा, जो नींद नहीं आएगी, मुझे तो इसको देखकर बहुत नींद आ रही है. खबर से ज्यादा तो इसमें डरावने शब्द कहकर लोगों को भ्रमित किया जाता है. इलेक्ट्रानिक मीडिया में सनसनी फैलाने के लिए तमाम तरह के अलफाज गढ़े जाते हैं. दर्शकों के बीच टीआरपी की जंग में जुटे कुछ चैनल खुद को बेहतर साबित करने के लिए उटपटांग खबरें दिखाते हैं.

खबर किस तरह पेश की जानी चाहिए, इसका अधिकार चैनल के संपादक को ही होता है, पर ऐसी खबरें पेश करने के लिए सहमति देने वाले संपादक की बुद्धि पर तरस आता है. कुछ बुद्धिजीवी इसे पढ़ने के बाद कह सकते हैं कि ऐसा चैनल देखने के लिए कोई बाध्यता तो है नहीं, आप उस चैनल को ही मत देखिए, लेकिन यह भी अहम सवाल है कि क्या किसी भी चैनल को इस तरह की अफवाहें फैलाने का अधिकार है? इस खबर को देखने के बाद तो मन में यही आया कि बाजार में बिक रही जहरीली मिठाई से भी ज्यादा जहरीला यह चैनल है जो भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के त्यौहार रक्षाबंधन में कड़वाहट घोलने से बाज नहीं आ रहा है. मैं इस लेख के माध्यम से इंडिया टीवी की इस खबर का विरोध करता हूं. जिन बहनों ने भी इस चैनल की इस रिपोर्ट को देखा हो, और उन्हें महसूस हो कि चैनल ने अपनी हद पार कर ऐसी खबर दिखाई है. उन्हें भी ऐसी खबर का जमकर विरोध करना चाहिए.

रतन जयसवानी

जंजगीर-चांपा

छत्तीसगढ़

रजत-रितु पर न्यूज-एक्स का इमोशनल अत्याचार

‘इंडिपेंडेंट’ शब्द ने काफी आगे बढ़ाया : इस शब्द को हड़पने पर न्यूज-एक्स को नोटिस थमाया : नाम से क्या लेना, मेरा काम देखो यारों…!!! लेकिन कई बार नाम से बहुत कुछ लेना-देना होता है. नाम के चक्कर में कइयों का राम नाम सत्य हो जाता है तो कई एक दूसरे का सिर फोड़ देते हैं. नाम के चक्कर में ही इन दिनों इंडिया टीवी और न्यूज एक्स वाले भिड़े हैं. हुआ ये है कि न्यूज एक्स वालों ने हाल-फिलहाल अपना नाम बदलकर कर लिया है इंडिपेंडेंट मीडिया नेटवर्क. यही नाम है इंडिया टीवी को चलाने वाली कंपनी का, इंडिपेंडेंट मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और इंडिपेंडेंट न्यूज सर्विस प्राइवेट लिमिटेड. ये दोनों कंपनियां रजत शर्मा की हैं. रजत शर्मा का इंडिपेंडेंट नाम से बहुत मोह इसलिए भी है क्योंकि यह नाम उन्हें काफी फला है.

रजत शर्मा और रितु धवन के इंडिपेंडेंट मीडिया की शुरुआत वर्ष 1996 में हुई थी. इसी की देन है ‘जनता की अदालत’. यह आजकल इंडिया टीवी पर ‘आपकी अदालत’ के नाम से चल रहा है. इंडिपेंडेंट मीडिया तो नामों का ये घनचक्कर देख इंडिया टीवी मैनेजमेंट ने आईएनएक्स न्यूज वालों को कोर्ट में घसीट लिया है. फिलहाल इंडिया टीवी की तरफ से लीगल नोटिस भिजवाया गया है. इंडिया टीवी की मैनेजिंग डायरेक्टर रितु धवन हैं. रजत और रितु को लगता है कि इंडिपेंडेंट शब्द से उनका इमोशनल नाता है इसलिए इस शब्द के जरिए किसी को उन पर इमोशनल अत्याचार करने का अधिकार नहीं है. इसी कारण इंडिया टीवी प्रबंधन ने न्यूज एक्स को नोटिस भेजकर नाम बदलने का अनुरोध किया है या फिर कोर्ट में मुकदमा झेलने को तैयार रहने को कहा है.