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मोदी-शाह का ‘आतंक’ खत्म करने के लिए याद किए जाएंगे ‘कॉकरोच’!

यशवंत सिंह

नई दिल्ली/मुंबई. भारतीय राजनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी को चुनौती देने वाले बहुत कम हुए हैं। सड़क पर उतरकर, कैमरे के सामने और खुले मंच से इस गुजराती जोड़ी पर सीधे-सीधे हमले करने वाला एक नया चेहरा पिछले कुछ महीनों में खासा चर्चा में आया है- अभिजीत दीपके।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP के संस्थापक दीपके ने जुलाई से अक्टूबर 2026 के बीच मोदी और शाह पर जिस तरह के सीधे, तीखे और कई बार बेहद व्यक्तिगत हमले किए, वे सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक हलकों तक चर्चा का विषय बने।

दिलचस्प यह है कि दीपके का हमला किसी एक मुद्दे तक सीमित नहीं रहा। शुरुआत NEET पेपर लीक और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई से हुई, लेकिन धीरे-धीरे निशाना सीधे प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक पहुंच गया। जुलाई में दीपके ने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की, मोदी को प्रधानमंत्री की कुर्सी छोड़कर ‘इन्फ्लुएंसर’ बनने की सलाह दी और अक्टूबर में मुंबई के शिवाजी पार्क से शाह को चेतावनी दे डाली, ‘लाठी चलाने का आदेश दोबारा दिया तो इस बार इस्तीफा आपका होगा।’

30 जुलाई: ‘शाह के आदेश के बिना ऐसा नहीं हो सकता था’

जंतर-मंतर पर करीब चार सप्ताह तक आंदोलन करने के बाद छत्रपति संभाजीनगर लौटे दीपके ने 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अमित शाह पर सीधे निशाना साधा।

BBC हिंदी से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया, ”जिस तरह छात्रों पर हमला किया गया और विरोध प्रदर्शन के दौरान उनका खून बहा, वह शाह के आदेश के बिना नहीं हो सकता था। दिल्ली पुलिस उन्हीं को रिपोर्ट करती है। यदि अमित शाह जी को पता नहीं है, तो यह गृह मंत्रालय की विफलता है।”

राहुल गांधी द्वारा अमित शाह के इस्तीफे की मांग से सहमति जताते हुए दीपके ने कहा, ”मैं भी मानता हूं कि उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।” यानी दीपके के निशाने पर सिर्फ पुलिस नहीं थी। उन्होंने सीधे गृह मंत्री की जवाबदेही तय करने की मांग की।

विदेशी फंडिंग पर भी शाह को घेरा

CJP पर विदेशी फंडिंग के आरोपों को लेकर भी दीपके ने अमित शाह पर ही सवाल दाग दिया। पत्रिका में प्रकाशित बातचीत के मुताबिक उनका कहना था, ”अगर CJP को विदेश से फंडिंग मिल रही है, तो अमित शाह गृह मंत्री रहते हुए यह कैसे संभव हो गया? अगर ऐसा है तो यह गृह मंत्रालय की विफलता है। फिर आप चाणक्य कैसे हुए?”

और इसके बाद उन्होंने शाह के इस्तीफे की मांग दोहरा दी। यानी जिस ‘चाणक्य’ की छवि अमित शाह की राजनीति में बनाई जाती रही है, दीपके उसी उपाधि को हथियार बनाकर गृह मंत्री से सवाल पूछ रहे थे।

‘भाजपा में आ जाओ, तुम्हारे और परिवार के लिए अच्छा रहेगा’

दीपके ने इसी दौर में खुद को मिली कथित धमकियों का भी जिक्र किया। लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक उन्होंने कहा, ”मुझे धमकियां बहुत मिली हैं। मुझसे कहा गया कि भाजपा में आ जाओ, अच्छा रहेगा, तुम्हारे लिए और तुम्हारे परिवार के लिए।”

इसके बाद उन्होंने मोदी और शाह दोनों पर तीखा हमला किया, ”मुझे तो बहुत शर्म आती है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह इतने बड़े हैं कि मैं उनके पोते की उम्र का हूं। उनके पोते की उम्र के बच्चों को इस तरह की धमकियां देते हैं। क्या फायदा तुम्हारे इतने बड़े प्रधानमंत्री और गृहमंत्री होने का, अगर तुमको बच्चों को इस तरह की धमकियां देनी पड़ती हैं।”

ध्यान रहे, धमकी दिए जाने का यह दावा दीपके का आरोप है। भाजपा ने इसका खंडन करते हुए उनसे धमकी देने वालों के नाम बताने को कहा था। इसी तरह पुलिस कार्रवाई में पैलेट-गन के इस्तेमाल के दावे को भी भाजपा ने खारिज किया था।

29-31 जुलाई: मोदी को कहा- PM पद छोड़िए, इन्फ्लुएंसर बन जाइए

इसके बाद दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया सक्रियता को निशाना बनाया। मोदी के सोशल मीडिया वीडियो पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के रूप में काम करने के बजाय मोदी इन्फ्लुएंसर के तौर पर बेहतर काम कर रहे हैं और उन्हें प्रधानमंत्री पद छोड़ देना चाहिए ताकि देश की जिम्मेदारी कोई दूसरा संभाल सके।

मोदी के देर रात एंटी पेपर-लीक बिल को लेकर संदेश पर दीपके ने व्यंग्य करते हुए लिखा, ”आपकी स्किन देश के भविष्य से ज़्यादा चमकदार है।” यानी मोदी की सोशल मीडिया मौजूदगी को दीपके ने राजनीतिक उपलब्धि के बजाय ‘इन्फ्लुएंसर’ वाली भूमिका के रूप में पेश किया।

3 अगस्त: ‘मेरी डिग्री दिखाऊंगा, आपके नेता अपनी दिखाएंगे?’

डिग्री और शैक्षणिक योग्यता को लेकर उठे विवाद पर ETV भारत से बातचीत में दीपके ने कहा कि उनकी डिग्री असली है और वे उसका प्रमाण देने को तैयार हैं।

उन्होंने सवाल दागा, ”क्या आपके नेता अपनी असली डिग्री दिखाएँगे? मैं अपनी डिग्री सर्टिफिकेट और एजुकेशनल लोन का सबूत दिखाने को तैयार हूं।” विदेशी फंडिंग के आरोप को लेकर भी उन्होंने एक बार फिर गृह मंत्रालय की जवाबदेही पर सवाल उठाया।

6 सितंबर: ‘दिमागी नक्सल’ वाली लड़ाई

यहां एक जरूरी तथ्य-सुधार भी। ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी अभिजीत दीपके की नहीं, बल्कि CJP प्रवक्ता सौरव दास की थी। SRCC में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा ‘दिमागी नक्सल’ शब्द इस्तेमाल किए जाने के बाद दास ने इसे सवाल पूछने वाली युवा पीढ़ी के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा बताते हुए कहा कि किसी प्रधानमंत्री द्वारा ऐसा कहना ”सबसे शर्मनाक कामों में से एक” है। इसलिए इस बयान को दीपके के खाते में डालना गलत होगा।

2-3 अक्टूबर: मुंबई के शिवाजी पार्क से मोदी पर सीधा वार

अब आते हैं अक्टूबर के उस प्रदर्शन पर, जिसने ‘कॉकरोच’ आंदोलन को फिर सुर्खियों में ला दिया। मुंबई के शिवाजी पार्क में जुटी भीड़ को संबोधित करते हुए दीपके ने प्रधानमंत्री मोदी के ‘चाय बेचने’ वाले राजनीतिक नैरेटिव पर ऐसा तंज कसा कि सोशल मीडिया पर उनका वीडियो तेजी से चर्चा में आया।

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक दीपके ने कहा, ”हमारे पैसे पर बस दुनिया घूम रहा है ये इंसान। एक तो मैंने चाय बेची है, मैंने चाय बेची है, बोल-बोलकर ये इंसान प्राइम मिनिस्टर बन गया। अरे क्यों बेची चाय, हमने कहा था क्या चाय बेचने के लिए? स्कूल चले जाते, कुछ पढ़-लिख लेते, नौकरी कर लेते।”

लाइव हिन्दुस्तान के मुताबिक उन्होंने आगे कहा, ”बार-बार ये कहना कि मैं गरीब मां का बेटा हूं. अरे तुम्हारी वजह से आज सारे बच्चे गरीब मां के बेटे बन रहे हैं।” मोदी के पहनावे और फैशन सेंस को लेकर भी उन्होंने व्यंग्यात्मक टिप्पणी की। अब शाह की बारी थी।

‘मोटा भाई, इस बार लाठी चलाने का ऑर्डर मत देना’

उसी सभा में अमित शाह को सीधे संबोधित करते हुए दीपके ने कहा, ”मोटा भाई, इस बार पुलिस को लाठी चलाने का ऑर्डर मत देना। एक गलती तुमने कर दी थी, 20 जुलाई को बच्चों पर लाठियां चलाने का ऑर्डर देकर। दोबारा ऐसी गलती मत करना। दोबारा गलती की, तो भाई साहब इस बार तेरा ही इस्तीफा होगा।”

यानी जुलाई में जिस आरोप को लेकर दीपके शाह का इस्तीफा मांग चुके थे, अक्टूबर में उसी मुद्दे को मुंबई के मंच से फिर उठाया गया, लेकिन इस बार चेतावनी के अंदाज में। दिल्ली पुलिस के DCP सचिन शर्मा को भी दीपके ने नहीं छोड़ा। उन्होंने उन्हें ‘अमित शाह का फेवरेट’ और ‘संघी’ बताया और पुलिस की वर्दी को लेकर भी तंज कसा।

लेकिन एक बात साफ-साफ है, अब यहां पत्रकारिता की वह बारीकी जरूरी है जिसे सोशल मीडिया अक्सर निगल जाता है। दीपके ने अमित शाह के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई की जिम्मेदारी शाह पर डाली है। उन्होंने खुद को धमकियां मिलने का आरोप लगाया है।

उन्होंने मोदी के ‘चाय बेचने’ वाले नैरेटिव पर तीखा व्यंग्य किया है। मोदी को प्रधानमंत्री की जगह इन्फ्लुएंसर बनने की सलाह दी है। और अक्टूबर में शाह को दोबारा लाठी चलाने के खिलाफ खुली चेतावनी दी है। लेकिन ”मोदी-शाह का आतंक खत्म करने” या ”गुजराती जोड़ी का आतंक” जैसे शब्द दीपके के रिकॉर्डेड बयानों में नहीं मिलते। यह खबर का राजनीतिक/संपादकीय फ्रेम हो सकता है, दीपके का प्रत्यक्ष उद्धरण नहीं।

इसी तरह धमकियों, विदेशी फंडिंग और पैलेट-गन से जुड़े दावे दीपके के आरोप हैं। भाजपा ने धमकी के आरोपों को खारिज किया है और नाम बताने को कहा है। पैलेट-गन के दावे का भी भाजपा ने खंडन किया था। फिर भी जुलाई से अक्टूबर तक दीपके के बयानों को एक साथ रखकर देखें तो एक पैटर्न साफ दिखाई देता है- पेपर लीक से शुरू हुई लड़ाई मोदी-शाह की राजनीतिक जवाबदेही तक पहुंची और फिर मुंबई की सड़क पर प्रधानमंत्री के पुराने ‘चायवाले’ नैरेटिव से लेकर गृह मंत्री को इस्तीफे की खुली चेतावनी तक जा पहुंची।

राजनीति में बड़े नेताओं के खिलाफ बोलना कोई असाधारण बात नहीं। असली सवाल यह है कि आने वाले दिनों में ‘कॉकरोच’ की यह आवाज कितनी दूर तक जाती है और मोदी-शाह की सत्ता-राजनीति के सामने इसका अगला वार क्या होता है।

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