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उत्तर प्रदेश

जल जीवन मिशन: ED के रडार पर ये 13 फर्में, ठेकों से लेकर भुगतान तक का हिसाब तलब

उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत काम करने वाली 13 फर्मों और संस्थाओं के दस्तावेज ED ने तलब किए। टेंडर, अनुबंध, काम और सरकारी भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच।

Construction site with bent orange stairwell and scattered metal sheets and debris after a collapse; solar panels lie on the ground.

टेंडर, अनुबंध राशि, तकनीकी व वित्तीय बोलियों और भुगतान के दस्तावेज मांगे; पानी की टंकियों के निर्माण में गड़बड़ी से लेकर सरकारी धन के इस्तेमाल तक की पड़ताल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत कराए गए कार्यों और उनसे जुड़े सरकारी भुगतान की जांच का दायरा बढ़ता नजर आ रहा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मिशन में काम करने वाली 13 कंपनियों, फर्मों और संस्थाओं से संबंधित दस्तावेज तलब किए हैं। इनमें नोएडा, ग्रेटर नोएडा, लखनऊ, दिल्ली, अहमदाबाद, मुंबई, अमरावती और महाराजगंज से जुड़ी संस्थाएं शामिल हैं।

दैनिक जागरण की 26 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, ED ने इन संस्थाओं को काम दिए जाने की प्रक्रिया, टेंडर, अनुबंध की शर्तों, निर्धारित राशि, कराए गए कार्यों और उनके एवज में किए गए भुगतान से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं। जांच के इस दायरे में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी योजनाओं के तहत काम किस प्रक्रिया से आवंटित किए गए और भुगतान के दावे वास्तविक कार्यों के अनुरूप थे या नहीं।

इन 13 फर्मों और संस्थाओं के दस्तावेज तलब

ED ने जिन कंपनियों और संस्थाओं से संबंधित दस्तावेज मांगे हैं, उनमें शामिल हैं:

  1. मैसर्स इन्फोटेक सॉल्यूशंस, नोएडा
  2. मैसर्स विल्सन ग्रीन इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद
  3. मैसर्स एक्शन फॉर रूरल डेवलपमेंट, ग्रेटर नोएडा
  4. मैसर्स ऐपइन्वेंटिव टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, नोएडा
  5. मैसर्स न्यू जेनेसिस, दिल्ली
  6. मैसर्स प्योर लाइफ सोसाइटी, अमरावती
  7. मैसर्स संग्यान, लखनऊ
  8. मैसर्स एम्बर प्रेस प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ
  9. मैसर्स सार्वजनिक शिक्षोन्नयन संस्थान, लखनऊ
  10. मैसर्स वेलफेयर एंड इलस्ट्रेशन ऑफ नीडी ग्रामीण सोसाइटी, लखनऊ
  11. मैसर्स स्वजन फाउंडेशन, लखनऊ
  12. मैसर्स फॉल्कन, मुंबई
  13. मैसर्स जानकी प्रसाद मेमोरियल रिसर्च एंड एजुकेशनल ट्रस्ट, महाराजगंज
टेंडर से लेकर बिलों तक की जांच

रिपोर्ट के अनुसार, ED ने इन संस्थाओं को काम देने के लिए जारी प्रस्ताव आमंत्रण दस्तावेज, निविदा संबंधी नियम एवं शर्तें, अनुबंध राशि, सौंपे गए कार्यों और उनके निष्पादन का विवरण मांगा है। इसके अलावा अनुबंध मिलने से पहले प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव, तकनीकी एवं वित्तीय बोलियों और कार्यों के भुगतान के लिए जमा किए गए बिलों की प्रतियां भी तलब की गई हैं।

इन दस्तावेजों के जरिए काम आवंटित करने की प्रक्रिया, संबंधित संस्थाओं की भूमिका और सरकारी धन के भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल की जा सकती है।

पानी की टंकियों की गुणवत्ता और भुगतान भी जांच के दायरे में

ED की जांच केवल फर्मों के दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक, एजेंसी ने वर्ष 2019 से अब तक उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत बनी उन पानी की टंकियों का विवरण भी मांगा है, जो ढह गईं, जिनमें रिसाव हुआ या जिन्हें असुरक्षित घोषित किया गया।

उत्तर प्रदेश जल निगम (ग्रामीण) से टंकियों के निर्माण, टेंडर, प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति, डिजाइन, गुणवत्ता परीक्षण, थर्ड पार्टी निरीक्षण और भुगतान का ब्योरा मांगा गया है। क्षतिग्रस्त टंकियों के मामलों में दर्ज FIR, सरकारी धन के नुकसान और उसकी वसूली की स्थिति की जानकारी भी तलब की गई है।

ED ने 27 अगस्त को जल निगम (ग्रामीण) के प्रबंध निदेशक को पत्र लिखकर धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 54 के तहत जानकारी मांगी थी।

अब जांच के नतीजों पर नजर

जल जीवन मिशन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों तक नल से पेयजल पहुंचाना है। ऐसे में इस योजना के तहत काम करने वाली संस्थाओं को दिए गए ठेकों, कराए गए कार्यों और सरकारी भुगतान का पारदर्शी हिसाब महत्वपूर्ण है। खासकर उन मामलों में, जहां पानी की टंकियों के ढहने, रिसाव या असुरक्षित होने की शिकायतें सामने आई हैं।

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