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उत्तर प्रदेश

यूपी में SIR में घपला: पीलीभीत में दो डिप्टी कलेक्टरों मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी समेत तीन के ख़िलाफ़ FIR दर्ज

निर्मलकांत शुक्ला–

उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत की 127-पीलीभीत विधानसभा क्षेत्र (सदर) में मतदाता नामावलियों में कथित अनियमितताओं को लेकर तीन निर्वाचन अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से कोतवाली सदर में दी गई तहरीर में तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मयंक गोस्वामी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हेमंत कुमार और कंप्यूटर सहायक अनिल कुमार को नामजद किया गया है। आरोप है कि मतदाता सूची से संबंधित प्रपत्रों के निस्तारण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। मामले में उपजिलाधिकारी अमरिया की जांच आख्या को आधार बनाया गया है।

आरोपी डिप्टी कलेक्टर मयंक गोस्वामी
आरोपी डिप्टी कलेक्टर हेमंत चौधरी

तहरीर के मुताबिक, मतदाता नामावलियों में व्याप्त अशुद्धियों के संबंध में प्राप्त शिकायतों की अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व)/उप जिला निर्वाचन अधिकारी से जांच कराई गई। जांच आख्या के अनुसार, वर्तमान में भी कुछ स्थानों पर मतदाता सूची से संबंधित प्रविष्टियों में गड़बड़ी सामने आई। तहरीर में उल्लेख है कि सीएमएल2099718 की ऑनलाइन जांच करने पर मतदाता का नाम रईस अली, पुत्र श्री इब्ने अली अंकित पाया गया, जबकि फार्म संख्या एसके1314509 की ऑनलाइन जांच में मतदाता का नाम गुलफान असलम, पुत्र श्री हमीद असलम अंकित पाया गया।

इसी प्रकार फार्म संख्या एसजेडके0064064 की ऑनलाइन जांच में मतदाता का नाम आशिक अली, पिता महमूद अली के स्थान पर गलत नाम दर्ज पाया गया। तहरीर में इन प्रविष्टियों को अनियमितता के उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है।

तहरीर में उपजिलाधिकारी अमरिया की 22 अक्टूबर 2026 की जांच आख्या का हवाला देते हुए बताया गया है कि 31 मई 2026 से 29 अगस्त 2026 के मध्य कुल 13,779 प्रपत्रों की प्रविष्टियां की गईं। इनमें तत्कालीन उपजिलाधिकारी अमरिया मयंक गोस्वामी के कार्यकाल में 4,717 प्रपत्रों की प्रविष्टियां की गईं। इसके बाद 17 जुलाई 2026 से तत्कालीन उपजिलाधिकारी अमरिया के रूप में हेमंत कुमार के कार्यकाल में 9,062 प्रपत्रों की प्रविष्टियां किए जाने का उल्लेख है।

इन सभी प्रपत्रों में से कुल 10,470 प्रपत्र स्वीकृत और 3,309 प्रपत्र अस्वीकृत किए गए। तहरीर के अनुसार, संबंधित कार्यालय द्वारा जिन प्रपत्रों पर कार्रवाई की गई, उनमें से कुछ के ऑनलाइन और ऑफलाइन अभिलेख उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई। इस स्थिति को जांच में गंभीरता से लिया गया।

तहरीर में भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों का हवाला दिया गया है। इसमें निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों की जिम्मेदारी बताने वाले निर्देश 11.4.6 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों द्वारा निस्तारित दावों और आपत्तियों की गुणवत्ता की जांच की जानी चाहिए। इसके तहत कम से कम 10 प्रतिशत प्रपत्रों की जांच, आवश्यकतानुसार क्षेत्रीय सत्यापन और अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें करने का प्रावधान बताया गया है।

निर्देशों में यह भी कहा गया है कि कार्य औपचारिकता के तौर पर नहीं किया जाना चाहिए तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई और सुधारात्मक कदम शीघ्र उठाए जाने चाहिए। मतदाता सूची को त्रुटिरहित बनाने की अंतिम जिम्मेदारी निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी की बताई गई है।

तहरीर में आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों ने निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया। इसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 32 तथा भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के अंतर्गत कार्रवाई योग्य बताते हुए तत्कालीन निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी मयंक गोस्वामी, सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी हेमंत कुमार और कंप्यूटर सहायक अनिल कुमार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई। तहरीर पर सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी कृष्ण कुमार कश्यप के हस्ताक्षर दर्ज हैं।

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