नई दिल्ली: देश के जाने-माने रक्षा और राजनीतिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार राजीव रंजन ने मुख्यधारा के टेलीविजन मीडिया से डिजिटल मीडिया की ओर एक बड़ा कदम उठाया है। NDTV इंडिया में करीब 19 साल तक Defence Editor के तौर पर काम करने के बाद उन्होंने चैनल को अलविदा कह दिया है। अपने इस नए सफर की घोषणा उन्होंने अपने नए डिजिटल वेंचर ‘BharatDefX’ के जरिए की, जहां वे रक्षा, सामरिक मामलों और आंतरिक सुरक्षा पर विश्लेषणात्मक व ग्राउंड रिपोर्टिंग पेश करेंगे।
19 साल का सफर और ‘वतन के रखवाले’ की ऐतिहासिक पहचान
राजीव रंजन ने अपने विदाई संदेश में कहा कि NDTV और उसका पहचान बन चुका ‘लाल माइक’ उनके जीवन का अहम हिस्सा रहे हैं। साल 2007 में NDTV से जुड़ने के बाद उन्होंने हिंदी टीवी पत्रकारिता में रक्षा रिपोर्टिंग का दायरा पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने NDTV पर 100 एपिसोड वाला चर्चित शो ‘वतन के रखवाले’ तैयार और होस्ट किया, जिसने आम दर्शकों को भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना के जीवन, हथियारों व मुश्किल चुनौतियों से रूबरू कराया।
चाहे सियाचिन की हाड़ कंपाने वाली ठंड हो, एलओसी (LoC) पर आतंकियों से मुठभेड़, बेलगाम का कमांडो कोर्स हो या मिजोरम का जंगल वॉरफेयर स्कूल—उन्होंने स्टूडियो के एसी रूम से बाहर निकलकर सीधे सीमा और ट्रेनिंग सेंटर्स से ग्राउंड रिपोर्टिंग की।

विनोद दुआ से शुरुआत और 25 साल का फील्ड अनुभव
IIMC (इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन) से पत्रकारिता की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिग्गज पत्रकार स्वर्गीय विनोद दुआ के मार्गदर्शन में अपने करियर की शुरुआत की थी।
- जम्मू-कश्मीर का जमीनी अनुभव: 1999 में उन्होंने ANI जॉइन किया और कश्मीर के बेहद संवेदनशील दौर में ग्राउंड रिपोर्टिंग की। ऑपरेशन पराक्रम से लेकर डोडा के ढडकई गांव (जहां मूक-बधिरों की संख्या अधिक थी) की मानवीय समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया।
- सहारा समय: सहारा समय में उन्होंने ‘डिफेंस डायरी’ जैसा शो प्रस्तुत कर सैन्य मामलों को एक नई धार दी।
- सम्मान: अपनी निष्पक्ष और बेबाक पत्रकारिता के लिए उन्हें NT अवॉर्ड, ENBA अवॉर्ड और चंद्रशेखर सम्मान से भी नवाजा जा चुका है।
टीवी छोड़ डिजिटल प्लेटफॉर्म (BharatDefX) की राह क्यों चुनी? - राजीव रंजन के मुताबिक, आज के टेलीविजन दौर में रक्षा और आंतरिक सुरक्षा जैसे गंभीर विषयों के लिए स्क्रीन पर स्पेस लगातार सीमित होता जा रहा है। टीवी पर रक्षा मामलों की चर्चा अमूमन तभी होती है जब कोई बड़ा युद्ध छिड़ जाए या कोई फाइटर जेट क्रैश हो जाए।
उन्होंने भरोसा दिलाया है कि ‘BharatDefX’ पर: - हर हफ्ते रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक और गंभीर एक्सप्लेनर्स (Explainers) मिलेंगे।
- सेना के जांबाज सैनिकों, परमवीर चक्र विजेताओं और युद्ध के दिग्गजों (Veterans) की अनसुनी कहानियां सामने लाई जाएंगी।
- भू-राजनीति (Geopolitics) और सीमावर्ती हलचलों पर बिना किसी औपचारिकता या सनसनी के सीधी और ईमानदार बात होगी।
राजीव रंजन ने कहा, “मेरा पता बदल गया है, मंच बदल गया है, लेकिन मैं आज भी वही राजीव रंजन हूं जिसके लिए खबर कोई पेशा नहीं बल्कि एक जुनून है।”
राजीव रंजन की जुबानी सुनिए उन्होंने क्यों छोड़ा एनडीटीवी, देखें ये वीडियो-

