उमेश के रे-
पहले sources सरकार की खामियां उजागर करते थे, अमृतकाल में Sources सरकार का बचाव कर रहे हैं.
ऐसा कौन सा source है भाई, जो सरकार का बचाव करते हुए अज्ञात रहना चाह रहा है?
वाह पत्रकारिता जी वाह!!
यशवंत सिंह-
इस देश में कुछ गड़बड़ चल रहा है।
भारत में कभी इतनी कमजोर सरकार न थी कि सरकार को दरकिनार कर अमेरिका का विदेश मंत्री सीधे एक पूंजीपति अंबानी से मिलने उसके ऑफिस पहुँच जाए। प्रोटोकॉल की दैया मैया हो गई।
अमेरिका वाला एलन मस्क ने कहा था मोदी नहीं, अंबानी ही असली पीएम है। उसकी बात सही साबित करते हुए वहाँ का विदेश मंत्री सीधे अघोषित पीएम अंबानी से मिलने पहुँच गया। भारतीय विदेश मंत्री को वहीं तलब कर लिया गया।
एप्स्टीन फाइल्स की नई तस्वीरें बताती हैं कि मोदी का खास आदमी पुरी उस कुख्यात आइलैंड के संचालक से अकेले में मिला था। ये एक एक कर फोटो लीक कर क्या अमेरिका हमारे देश के पीएम को ब्लैकमेल कर रहा है? क्या साहेब की भी तस्वीरें हैं?
और हमारे देश के बड़े बड़े सत्ताधारी मीडिया दलाल आज फिर सब कुछ से आँख मूँद केवल विपक्ष को गरियाने के काम कर लगाये जा चुके हैं और बीच बीच में वक़्त मिले तो मोदी मार्ग नामक कीर्तन में मय झाल मंजीरा नाचने को निर्देशित किए जा चुके हैं।

विचित्र समय है। जिन्हें पत्रकार कहा जाता था, वे आज सत्ता की गोद में बैठकर मारे उत्तेजना के, हस्तमैथुन करते हुए उस जनता के सिर पर ही स्खलित हो भारी वीर्यपात मूत्रपात कर रहे हैं जिनकी आवाज़ उठाने के लिए ये कभी मीडिया में आए थे!
वाक़ई, सत्ताएँ बड़े बड़ों को स्खलित करा देती हैं!
संजय कुमार सिंह-
कैसे-कैसे प्रचारक और कितना फूहड़ बचाव
ये फोटुएं लगभग एक ही समय की दो तरफ से ली गई हैं। जाहिर है कमरे में कोई प्रतिनिधिमंडल नहीं है और हरदीप पुरी किसी प्रतिनिधिमंडल के साथ भी गए हों तो वाशरूम जाने या ऐसे ही किसी बहाने से एपस्टीन से अकेले में मिले। इससे उनका पिछला बयान और खुलासा गलत साबित हो जाता है। हरदीप पुरी आशुतोष रांका और सौरव दास नहीं हैं कि बांड भरा था इसलिए उल्लंघन करने पर जेल हो गई और भक्त लोग कह रहे हैं कि ठीक ही हुआ या ये तो होना ही था।

हरदीप पुरी मंत्री हैं। विदेश सेवा में थे और रिटायर होने पर मंत्री बन गए। सवाल है कि मंत्री बनने की उनकी योग्यता क्या थी और अगर प्रधानमंत्री किसी को मंत्री बना सकते हैं तो हरदीप पुरी की योग्यता एप्सटीन से उनकी जान पहचान थी? अगर कोई और कारण है तो बताया जाना चाहिए। अगर यही है तो कोई भी जानना चाहेगा कि एप्सटीन ने देश के लिए या प्रधानमंत्री के लिए क्या काम किया। नहीं किया तो पुरी मिलने क्यों गए थे।
एक प्रचारक ने लिखा है, मिलना स्वयं में कोई अपराध नहीं। वह भी तब जब संभवतः आपको पता ही न हो कि कौन है। पर अमेरिका द्वारा 2014 के इस फोटो को आज रिलीज किया जाना जब मार्को रुबियो भारत में भटक रहा है, कब यह रुचि कर हो जाता है। विपक्ष इसका कितना दोहन करेगा वह देखना है क्योंकि इस बात को वो निचोड़ चुके हैं।
मुद्दा यह है कि आप 2014 में एक ऐसे व्यक्ति से क्यों मिल रहे हैं जो 2008 में अपराधी घोषित हो गया था। जहां तक मार्को रुबियो की बात है, वे सीधे अंबानी से मिलने क्यों गए, अंबानी क्यों मिल रहे हैं। इसका जवाब नहीं है तो एलन मस्क ने जो कहा और लिखा था उसे याद कीजिए। चीजें बहुत स्पष्ट लगती हैं। अमेरिका मोदी को प्रधानमंत्री वाला सम्मान नहीं दे रहा है, शायद कमजोर करने के लिए इस समय यह फोटो जारी किया गया है।
जाहिर है, कुछ तो गड़बड़ है। प्रधानमंत्री वास्तविक स्थिति बताकर देश का साथ मांग सकते हैं। मजबूर नहीं लगते तो माना जा सकता था कि उन्हें जरूरत नहीं है। अब घिरे हुए लग रहे हैं। इसलिए देश हित में उन्हें तथ्य बताना चाहिए या इस्तीफा दे देना चाहिए। हरदीप पुरी की तरह झूठ बोलने या बचने की कोशिश में मामला और खराब होगा। अगर गलती हो ही गई है तो देश के लिए इतना बनता है। नहीं हुई है तो सच बताना चाहिए।
इतने गंभीर मुद्दे को बांड भरने के बाद झंडा क्यों फहराया और फहराया तो जेल सही है जैसे मुद्दों से नहीं दबाया जा सकता है। अगर बांड मुद्दा है तो एंटायर पॉलिटिकल साइंस की डिग्री का शपथ पत्र भी मुद्दा है। मामला एक दो या छोटा मोटा नहीं है। हाल में खबर थी, भाजपा टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए हत्या आरोपी की उम्रकैद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। बलात्कार के एक आरोपी को गवर्नर बनया जा चुका है। इसलिए आप बहुत मजबूत होंगे पर कमजोरी दिखने लगी है वैसे ही जैसे पुरी साब का झूठ पकड़ा गया।
संभव है, फोटो खुफिया कैमरे से लिया गया हो। लेकिन इसे अमेरिकी न्याय विभाग ने जारी किया है और लाखों एप्सटीन फाइलों में एक है। दूसरी फोटुओं से पता चलता है कि यह एप्सटीन का दफ्तर या बैठक भी हो तो वह लड़कियों के साथ इसी कमरे में रंगरेलियां मनाता था। हरदीप पुरी इस कमरे में डेलीगेशन के साथ गए या डेलीगेशन को दूसरे कमरे में छोड़कर गए – इस कमरे में मिले तो सर्किट पूरा हो जाता है। बत्ती जल गई है। गोदी वालों को भले न दिखे।
एक भक्त ने लिखा है, कोट-पैन्ट में हैं इसलिए मीटिंग के लिए ही गए होंगे। अब उन्हें कौन बताए कि स्विमिंग करने भी गए होते तो कॉस्ट्यूम अंदर होगा और लोग घर के स्विमिंग पूल में भी नंगे नहीं जाते हैं। ऊपर के कपड़े वहीं उतारते हैं या कॉस्ट्यूम वहीं पहनते हैं। अगर बचाव करने के पैसे मिल रहे हैं तो ऐसे ही तर्क दिए जाएंगे। देखते रहिए। पढ़ते रहिए। मनोरंजन पूरा है। भक्तों की नीचता का स्तर भी पता चल रहा है।
अमेरिकी विदेश मंत्री रूबियो भारत की यात्रा पर हैं और वह राजनीतिक सत्ता प्रतिष्ठान के बजाय कारपोरेट और उसमें भी मुकेश अंबानी से मिलने आए हैं। उनकी न मोदी से मुलाकात होनी है और न ही उनको वह कोई तवज्जो दे रहे हैं। जयशंकर से उन्होंने मुंबई में बुलाकर मुलाकात की। यह जो कुछ हो रहा है वह भारत और उसके इतिहास में अभूतपूर्व है। यह बताता है कि पीएम मोदी और उनकी सरकार ने अमेरिका के सामने पूरा सरेंडर कर दिया है। सुनिये इसके क्या-क्या मतलब निकाले जा रहे हैं। और किस तरह से भारत की पूरी संप्रभुता दांव पर लग गयी है।
-महेंद्र मिश्र (वरिष्ठ पत्रकार)



