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पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल को BBC और ध्रुव राठी द्वारा एस वाई कुरैशी के इंटरव्यू पर एतराज क्यों है?

Screenshot of Kanwal Sibal's tweet criticizing a London-based journalist Dhruv Rathee, claiming he’s advertising the podcast and that India should ban his platforms; includes an embedded tweet from Sibal.

संजय कुमार सिंह-

जब पूर्व विदेश सचिव भी ट्रोल हो गए…

कंवल सिबल की तकलीफ (असल में भक्ति) देखने लायक है। इन्हें बीबीसी और ध्रुव राठी से एसवाई कुरैशी के इंटरव्यू पर बहुत एतराज है। विदेश में बदनाम किए जाने से तकलीफ स्वाभाविक है। अभी तक तो मैं कंवल सिबल को ही देख रहा था। मैं जानता था कि एसवाई कुरैशी साहब (और दोनों इंटरव्यू करने वाले) सक्षम हैं निपट लेंगे। कुरैशी साहब ने जवाब भी दिया – दो रुपए वाले ट्रोल मुझे वर्षों ट्रोल करते रहे हैं। क्या मुझे खुश होना चाहिए कि अब एक पूर्व विदेश सचिव ट्रोल कर रहे हैं। बात सही है। फिर भी, टीवी मोहनदास पाई ने पूछा है, क्या आपके झूठ को सामने लाना ‘ट्रोलिंग’ है?

वे कहते हैं, जब सुप्रीम कोर्ट भी एसआईआर से सहमत है, तो आपको क्या दिक्कत है? (मुझे तो इसीलिए दिक्कत है और दिक्कत सुप्रीम कोर्ट से भी है। लेकिन उसे संवैधानिक सुरक्षा मिली हुई है, ट्रोल नहीं कर सकता और इसीलिए कोई नहीं कर पा रहा है और एनसीईआरटी की किताब में सच लिखने से कितनी परेशानी हुई कौन नहीं जानता है। लेकिन वह अलग मुद्दा है। फिर भी) मोहनदास पई पूछ रहे हैं, क्या आप खुद ही जज, जूरी और अभियोजक – सब कुछ हैं? अगर आपको इतना ही यकीन है कि बहुत सारे लोग छूट गए हैं, तो वे कहाँ हैं?

(इन्हें पता ही नहीं है कि मरे बताए गए लोग सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जा चुके हैं और कुछ नहीं हुआ। अब पता चला है कि मरे हुए लोगों ने खुद ही अपना नाम हटाने का आवेदन कर रखा है। इसके बावजूद मोहनदास जी ने लिखा है)- कृपया कोर्ट के सामने कोई ठोस संख्या पेश करें। खोखली बातों की कोई अहमियत नहीं होती। एक पूर्व सीईसी (मुख्य चुनाव आयुक्त) के तौर पर आप पर शर्म आती है। झूठ बोलने से पहले डेटा तो दिखाएं। बहुत ही शर्मनाक! मेरा सवाल है कि डेटा किसे दिखाना है और मोहनदास जी को क्यों दिखाया जाए?

शर्मनाक तो यह है कि इन्हें अभी तक वास्तविकता का पता ही नहीं है और उस व्यवस्था का समर्थन कर रहे हैं जिसके मुखिया पर भ्रष्टाचार का आरोप है। डेटा सार्वजनिक है। प्रणय राय का विश्लेषण चर्चा में है। लेकिन इन्हें डेटा चाहिए। इससे पहले कंवल सिबल ने लिखा था, दुख हो रहा है कि लंदन में रहने वाले पत्रकार से भारत को बदनाम करने की बात कर रहे हैं। मुझे दुख हो रहा है कि एक खाया-पीया-अघाया-बुढ़ाया भी वोट चोर सरकार का समर्थन कर रहा है और ट्रोल जैसा व्यवहार कर रहा है। सिबल साब को समझ नहीं आ रहा है कि ध्रुव राठी के मंचों को भारत में प्रतिबंधित क्यों नहीं किया जा रहा है।

इन्हें पता नहीं है कि छोटे-मोटे यू ट्यूबर को तो परेशान किया ही जा रहा है। ध्रुव राठी को भी किया गया। इस पर भी उसने वीडियो बनाकर आज ही जारी किया है। उसे भी बैन किया गया तो कोई और सच कहने आ जाएगा। वैसे भी सरकार जरूरत समझेगी तो करेगी, कंवल साब आप क्यों परेशान हैं? सरकार कमजोर नहीं है ना रिटायर हुई है। देश के लिए कुछ कर नहीं सकते तो सरकार की तानाशाही ही देखिए। चुप रहिए। ये सरकार समर्थन लायक नहीं है – अभी भी समझ में नहीं आया है, बताना जरूरी था क्या?

ये रहा इंटरव्यू आप भी देखिए…

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