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शेखर गुप्ता मोदी के समर्थन में, दैनिक जागरण वाले संजय गुप्ता को लगातार टक्कर दे रहे हैं!

Hindi newspaper front page with the bold headline 'बदलाव वही ला सकता हैं, जो चुनाव जीतते हैं' and a photo of a man speaking in a parliament chamber; includes a columnist portrait and article text.

दयाशंकर मिश्रा-

गुप्ता ब्रदर्स …

‘द प्रिंट’ के एडिटर-इन-चीफ़ शेखर गुप्ता का आज ‘दैनिक भास्कर’ में लेख पढ़िए। यह लेख सड़क पर संघर्ष को व्यर्थ बता रहा है। यह चुनाव आयोग, बेरोज़गारी, विदेश नीति की आलोचना को अर्थहीन बता रहा है।

भारत में अब तक सत्ता परिवर्तन के केंद्र सड़क, संवाद और जनता ही रही है। यह पहली बार है, पत्रकार सरकार से समस्याओं के समाधान की जगह विपक्ष पर हमले कर रहे हैं । सड़क पर उतरने को व्यर्थ बता रहे हैं । यह लेख ‘मोदी नहीं तो कौन’ की संदर्भ सहित व्याख्या है। प्रधानमंत्री को विकल्प से परे दिखाने का प्रयास है।

शेखर गुप्ता प्रधानमंत्री के समर्थन में, संजय गुप्ता को लगातार टक्कर दे रहे हैं। संजय गुप्ता कल ही नागपुर में ‘दैनिक जागरण’ की संपादकीय नीति की घोषणा करके आए हैं।

संजय गुप्ता ने जो नागपुर में किया, शेखर गुप्ता उसे दूसरे रूप में ‘शब्दों की चाशनी’ में परोसकर जनता के सामने रख रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विफलता पर सवाल नहीं किए जा सकते, इसलिए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर निशाना साधा जा रहा है।

शेखर गुप्ता की ‘रिजीम चेंज’ पत्रकारिता का उदाहरण4 अप्रैल 2012 का यह ‘इंडियन एक्सप्रेस’ है। ऐसी ख़बर जिसका कोई प्रमाण कभी सामने नहीं आ सका। लेकिन ख़बर से एक वातावरण तैयार किया गया, सेना में कथित नाराज़गी, असंतोष और सरकार की विफलता का। सब कुछ ठीक नहीं है, यह संदेश दिया गया। आगे चलकर इन सबका RSS-बीजेपी ने राजनीतिक दुरुपयोग किया। शेखर गुप्ता ने कभी इस पर अफ़सोस नहीं किया।

भारतीय जनता की स्मृति कमजोर है। टेलीविज़न, नफ़रत की राजनीति ने उसे अल्ज़ाइमर दौर में पहुँचा दिया है। ‘गुप्ता ब्रदर्स’ इसका पूरा दोहन करते हैं।

भारतीय अख़बार और पत्रकारों में ‘गुप्ता ब्रदर्स’ बनने की होड़ लगी है। इसलिए चैनल देखते समय, अख़बार पढ़ते समय सावधान रहें।

अपने विवेक को सँभालिए, हर दिन उस पर हमले तेज़ होते जाएँगे। याद रहे, ‘भारतीय मीडिया IT सेल का एक्सटेंशन है।’


Front page of The Indian Express reporting that two Army units moved toward Delhi without notifying the government; photo shows officers in uniform saluting at a ceremony.

रिजीम चेंज तो शेखर गुप्ता करवा चुके हैं जनवरी 2012 में।
भारतीय पत्रकारिता की सबसे मूर्खतापूर्ण स्टोरी और शेखर गुप्ता की बाइलाइन।
गुप्ता जी के मुताबिक जनरल वीके सिंह दो यूनिट सिपाहियों के साथ मनमोहन सरकार का तख़्ता पलट करने निकल पड़े थे!
वीके सिंह इन्हें Coupta कहते हैं।
-प्रशांत टंडन, वरिष्ठ पत्रकार

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