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उत्तर प्रदेश

पाँच बार के अध्यक्ष तिवारी जी को आख़िरी बार पत्रकारों की आवाज़ उठाते कब देखा सुना?

ममता त्रिपाठी-

यूपी में एक पत्रकार एसोसिएशन भी है, जो बिल्कुल गूँगी हो चुकी है। सरकारी मान्यता और सरकारी घर की मजबूरी शायद एकजुट होने में बाधा उत्पन्न करती है…लेकिन आज नहीं तो कल सबका नम्बर आएगा…

करिए स्तुतिगान

ओ री सखी मंगल गाओ री,
धरती अम्बर सजाओ री


अभिषेक उपाध्याय-

उसी के पाँच बार के अध्यक्ष हैं तिवारी जी।

उन्हें आख़िरी बार सरकार के अत्याचार के शिकार पत्रकारों की आवाज़ उठाते कब देखा सुना था, किसी को याद नहीं!!

इस बीच @yashbhadas भाई ने एक नोटिस ज़रूर छापी थी जो उन्हें सरकार की ओर से सरकारी घर ख़ाली करने और लाखों का बकाया चुकाने के लिए भेजी गई थी।

हालाँकि घर फिर भी नहीं ख़ाली करना पड़ा। कुछ तो हुआ ही होगा!!

स्थिति ये है कि पत्रकार दिलीप सैनी की जघन्य हत्या पर भी तिवारी जी की आवाज़ का कुछ अता पता नहीं है!!

वे अयोध्या में CM को टैग कर उनके रथ खींचने के भाव विभोर कर देने वाले दृश्य की जानकारी देते ज़रूर नज़र आ रहे हैं ।


योगेश पांडेय-

केवल अध्यक्ष तक सीमित नहीं बल्कि कमेटी और मान्यता प्राप्त जितने पत्रकार हैं उनमें पत्रकारों की संख्या कम पत्तलकारों की और व्यवसायियों की ज्यादा है!

अधिकतर अपनी मान्यता और मकान बचाकर दुकान चला रहे बस, असल पत्रकार लिखने पढ़ने वाला चाहे मरे या जिये इनसे कोई मतलब नहीं..!!


हेमंत तिवारी जी की खोज इस प्रकरण के कारण की जा रही है-

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