नई दिल्ली। कांग्रेस नेता और कर्नाटक सरकार में मंत्री Priyank Kharge ने समाचार एजेंसी PTI की ओर से जारी माफी पर सवाल उठाते हुए कहा है कि गलत सूचना से जो नुकसान होना था, वह पहले ही हो चुका है और अब केवल माफी मांगने से उसकी भरपाई नहीं हो सकती।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में प्रियंक खरगे ने लिखा कि यह गलत जानकारी केवल राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया पर कई स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स ने भी इसे व्यापक रूप से साझा किया। उन्होंने विशेष रूप से कंटेंट क्रिएटर लक्ष्य (lakhshya speaks) का भी उल्लेख किया।
खरगे ने सवाल उठाया कि जब कोई भ्रामक सूचना वायरल हो जाती है, तब उसे फैलाने वाले सभी लोगों को जवाबदेह कैसे ठहराया जाएगा और उससे हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा।
उन्होंने अपने पोस्ट में कहा, “PTI, अब आपकी माफी का क्या उपयोग? नुकसान तो पहले ही हो चुका है।”
प्रियंक खरगे ने आगे कहा कि भारत में जिम्मेदार पत्रकारिता धीरे-धीरे एक मिथक बनती जा रही है।
अपने पोस्ट के अंत में उन्होंने प्रसिद्ध लेखक जोनाथन स्विफ्ट के एक चर्चित उद्धरण का उल्लेख किया, जिसमें कहा गया है कि झूठ बहुत तेजी से फैलता है, जबकि सच उसके पीछे-पीछे चलता है। जब तक सच्चाई लोगों तक पहुंचती है, तब तक झूठ अपना असर छोड़ चुका होता है।
पीटीआई का बयान-

श्री प्रियंक खरगे के बयान की पहले गलत व्याख्या की गई थी। 3 अगस्त 2026 को एक्स (X) पर किए गए हमारे पहले पोस्ट में “aspirants” (अभ्यर्थी) शब्द गलती से उनके बयान से जोड़ दिया गया था।
हमने वह पोस्ट वापस ले लिया है। इस त्रुटि के लिए हमें गहरा खेद है।
पीटीआई की माफी से पहले प्रियंक का ट्वीट-
बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार में मंत्री और कांग्रेस नेता Priyank Kharge ने आरोप लगाया है कि उनके बयान को जानबूझकर तोड़-मरोड़कर फर्जी खबर के रूप में पेश किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ मीडिया संस्थानों ने उनके बयान का गलत अर्थ निकालकर लोगों को गुमराह करने की कोशिश की है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में प्रियंक खरगे ने कहा कि उनसे सवाल पूछा गया था कि विजयपुरा घटना को लेकर भाजपा और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक उनके इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इसके जवाब में उन्होंने कहा था कि “यदि भाजपा मेरे इस्तीफे की मांग को लेकर 25 दिन का भूख हड़ताल करने को तैयार है, तो मैं इस पर विचार करूंगा।”
खरगे ने स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणी केवल भाजपा की राजनीतिक रणनीति पर थी, न कि छात्रों के खिलाफ। उन्होंने कहा कि उनके बयान को इस तरह पेश किया गया, मानो वह छात्रों के बारे में टिप्पणी कर रहे हों।
उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पीएसआई भर्ती घोटाले के दौरान भाजपा ने विधान सौधा को “व्यापार सौधा” बना दिया था, जबकि उनकी सरकार सभी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
प्रियंक खरगे ने यह भी बताया कि उन्होंने गृह विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि उनके बयान को कथित रूप से गलत तरीके से प्रसारित करने वाली समाचार एजेंसियों और संबंधित व्यक्तियों की जांच कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की गलत जानकारी का उद्देश्य केवल सरकार की छवि खराब करना नहीं, बल्कि सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों छात्रों के बीच चिंता और अस्थिरता पैदा करना भी है।
अपने पोस्ट के अंत में खरगे ने कहा, “फेक न्यूज पत्रकारिता नहीं है। यह जनता को गुमराह करने और सार्वजनिक विश्वास को कमजोर करने के उद्देश्य से फैलाया गया दुष्प्रचार है।”


