सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर में संचालित माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के कम्युनिटी मेडिसिन विभाग में तैनात प्रो. डॉ. मो. नौशाद आलम ने जनपद में संचालित यू-ट्यूबर डिस्कवरी भारत व फेसबुक डिस्कवरी लाइव के संचालक ओमैर सिद्दीकी को लीगल नोटिस भेजा है। जनपद सिद्धार्थनगर के सिविल कोर्ट कैंपस के अधिवक्ता के माध्यम से भेजा गया लीगल नोटिस नौगढ़ तहसील के गांव मधुबेनिया, निकट- मेकरानी पेट्रोल पंप निवासी यू-ट्यूबर एवं सोशल अकाउंट हैंडलर ओमैर सिद्दीकी को भेजा गया है।

नोटिस में यू-ट्यूब डिस्कवरी भारत व फेसबुक डिस्कवरी लाइव पर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर के विरुद्ध चलाई गई मनगढ़ंत खबरों का उल्लेख करते हुए निर्धारित समय के अंदर जवाब देने का उल्लेख है। समय भीतर जवाब न देने पर प्रोफेसर अन्य वैधानिक कार्यवाही कर सकेंगे। इससे यू-ट्यूबर की मुश्किलें बढ़ गई है।
यू-ट्यूबर को अधिवक्ता के जरिए भेजे गए लीगल नोटिस में तीन बिंदुओं का उल्लेख है। जिसमें बताया गया है कि प्रसारित संबंधित वीडियो क्लीप पूर्णतया निराधार एवं मनगढ़ंत, स्वरचित कथन के तथ्यों पर आधारित है। जिसकी जांच पड़ताल व पूरी जानकारी लिए बगैर सनसनी अंदाज में पेश किया गया है। पेश करने का अंदाज ऐसा लग रहा है कि जैसे प्रोफेसर घोषित अपराधी हो। यू-ट्यूबर व सोशल मीडिया अकाउंट हैंडलर के कथनानुसार संबंधित विवादित मामला अभी भी किसी कमेटी के विचाराधीन है। या फिर यू-ट्यूबर ने बिना किसी वैधानिक ट्रायल एवं दोषसिद्धि के ही बायस (पार्टी बनकर) तथ्यों को अपने तौर तरीके से मन-गढ़ कर प्रस्तुत किया है। यू-ट्यबर यह कर सकते हैं। यह कृत्य पूर्णतया आपराधिक प्रवृत्ति का है। यह पेशेवर कर्तव्य के पूर्णतया प्रतिकूल एवं गैर जिम्मेदाराना है।
मेडिकल कॉलेज में उच्च पदासीन व्यक्ति के गोपनीय दस्तावेज के हस्ताक्षरों के विवाद को कुत्सित अंदाज में तूल दिया गया है। यह आपराधिक साजिश की परिधि में आता है।
इससे प्रोफेसर की अपूर्णीय क्षति हुई है। उनकी सामाजिक व प्रतिष्ठा धूमिल हुई है। उनकी अमूल्य मानहानि हो चुकी है। जिसके जिम्मेदार यू-ट्यूबर ओमैर सिद्दीकी हैं। इसकी भरपाई की भी जिम्मेदारी यू-ट्यूबर पर वैधानिक तौर पर आयद होती है।
उक्त यू-ट्यूबर के कई वीडियो क्लिप देखने के बाद पता चला है कि यह पार्टी बनकर कार्य करता है। जिसके विरुद्ध खबरें चलाता है उसका कभी पक्ष नहीं लेता है। इससे साफ है कि यह खबरें चलाकर लोगों को ब्लैकमेल करते हुए पैसे की वसूली करता है।
नोटिस देखें…



प्रकरण पर पत्रकार/यूट्यूबर उमेर सिद्दीकी का पक्ष
आदरणीय यशवंत जी,
आपकी वेबसाइट भड़ास4मीडिया पर मेरे खिलाफ प्रकाशित खबर के संबंध में, डॉ. नौशाद आलम द्वारा भेजे गए लीगल नोटिस का तथ्यात्मक जवाब मैं आपके समक्ष रख रहा हूँ।
जिस चिरकुट पत्रकार ने यह खबर आपतक भिजवाया है, वह भी अच्छी तरह जानता है कि मैं बिना पुख्ता सबूत ठोस साक्ष्य और गहन रिसर्च के कोई भी खबर उजागर नहीं करता,15 दिन में जवाब मांगने वाले डॉ. नौशाद आलम लीगल नोटिस की गीदड़ भभकी देकर अपने फर्जीवाड़े और काले कारनामों को छुपा नहीं सकते।
मैं पूरे प्रमाणों के साथ उनके घोर फर्जीवाड़े,आपराधिक कृत्य और सहकर्मियों के उत्पीड़न को इसी तहर लगातार उजागर करता रहूंगा।
अब आइए एक नजर डालते हैं सिद्धार्थनगर के माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर नौसाद आलम के फर्जीवाड़े पर।
1. डॉक्टर नौसाद आलम पदोन्नति पाने के लिए एक ही रिसर्च पेपर की हेडिंग बदलकर उसे 3 अलग-अलग शीर्षकों से प्रकाशित कराया है। यह सीधे तौर पर आईपीसी की धारा 419/420 के तहत आपराधिक धोखाधड़ी है,जिसमें सेवा समाप्ति और जेल का स्पष्ट नियम है।
2. दूसरा सबसे बड़ा फ्रॉड विवादित शोध-पत्र के लिए 20 जुलाई 2017 को मेजर एसडी सिंह मेडिकल कॉलेज फर्रुखाबाद से की अनुमति दिखाई गई है। सच यह है कि 20 जुलाई 2017 को डॉ. नौशाद आलम उस मेडिकल कॉलेज में तैनात ही नहीं थे। इसका पुख्ता दस्तावेजी प्रमाण मेरे पास मौजूद है।
3. डॉक्टर नौसाद आलम का तीसरा फ्राड अनुभव प्रमाण-पत्र पर फर्जी और कूटरचित हस्ताक्षर मेजर एसडी सिंह मेडिकल कॉलेज के चेयरमैन के जिस हस्ताक्षर से इन्होंने अपना अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया है,वह हस्ताक्षर चेयरमैन का है ही नहीं। फर्जी हस्ताक्षर के तुलनात्मक साक्ष्य मेरे पास सुरक्षित हैं।
4. डॉक्टर नौसाद आलम ने एक ब्राह्मण समाज की महिला प्रोफेसर को इस हद तक प्रताड़ित किया कि उन्हें मजबूरी में अपना इस्तीफा देकर दूसरी जगह जाना पड़ा। पीड़ित महिला ने जिलाधिकारी को लिखित शिकायती पत्र देकर डॉ. नौशाद आलम पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
इससे पहले नौशाद आलम वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ.अमित सिंह को लगातार परेशान कर रहे हैं और वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. हसमतुल्लाह पर भी झूठे-बेबुनियाद आरोप लगाकर उनका उत्पीड़न कर चुके हैं।
मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूँ कि डॉ. नौशाद आलम के इस फर्जीवाड़े और जालसाजी के एक-एक दस्तावेजी साक्ष्य मैं आवश्यकता पड़ने पर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने के लिए पूरी तरह तैयार हूँ।
डाक्टर नौशाद आलम के जेल जाने तक जारी रहेगा ये खुलासा।
लीगल नोटिस भेजकर डॉ.नौशाद आलम अपने कर्मकांडों पर पर्दा नहीं डाल सकते। तथ्यों और सबूतों के आधार पर उनके इस फर्जीवाड़े की परतें मैं तब तक लगातार उजागर करता रहूँगा, जब तक कि अपने आपराधिक कृत्यों के लिए वह सलाखों के पीछे न चले जाएं।
पत्रकारिता के नैतिक सिद्धांतों और राइट टू रिप्लाई के तहत आपसे अनुरोध है कि मेरे इस पक्ष और साक्ष्यों को अपनी वेबसाइट पर प्रमुखता से स्थान दें ताकि सच जनता और प्रशासन के सामने आ सके।


