देहरादून। उत्तराखंड रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के सरकारी कार्यक्रमों में लगाई गई रोडवेज बसों का भुगतान लंबित होने का मुद्दा उठाया है। परिषद ने देहरादून के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बकाया राशि का तत्काल भुगतान कराने की मांग की है।
आपको बता दें कि धामी सरकार का ये हाल तब है जब खुद की छवि चमकाने के लिए टीवी और अखबारों पर अरबों रुपये हर वर्ष लुटाये जाने की बातें भड़ास प्रकाशित करता रहा है।
परिषद के अनुसार, 7 मार्च 2026 को आयोजित “जन-जन की सरकार, चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी के दौरान यात्रियों के आवागमन के लिए उत्तराखंड परिवहन निगम की 299 बसें लगाई गई थीं। इसके एवज में 1,44,02,431 रुपये का बिल संबंधित विभाग को भेजा गया था।
इसी तरह 14 अप्रैल 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम के लिए निगम की 255 बसें उपलब्ध कराई गई थीं। इस सेवा के बदले 1,38,18,460 रुपये का बिल भी संबंधित विभाग को भेजा गया, लेकिन अब तक भुगतान नहीं हुआ है।
परिषद का कहना है कि दोनों कार्यक्रमों के मद में कुल 2.82 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान लंबित है। परिवहन विभाग से संपर्क करने पर बताया गया कि भुगतान संबंधी फाइल मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) कार्यालय भेजी जा चुकी है और वहां से प्रोटोकॉल अधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है।
रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद ने पत्र में कहा है कि उत्तराखंड परिवहन निगम पहले से गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा है। कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में सरकारी कार्यक्रमों में सेवाएं देने के बावजूद भुगतान लंबित रहने से निगम की आर्थिक स्थिति और खराब हो रही है।
परिषद ने जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप कर बकाया राशि का शीघ्र भुगतान सुनिश्चित कराने की मांग की है।



मार्च में धामी सरकार के “चार साल बेमिसाल” कार्यक्रम में लगी रोडवेज बसों का भुगतान अभी तक नहीं हुआ। गृहमंत्री अमित शाह इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि थे।
अप्रैल में दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस वे के उदघाटन के कार्यक्रम में लगी रोडवेज बसों का भुगतान भी सरकार ने अभी तक नहीं किया। इस कार्यक्रम में पीएम मोदी मुख्य अतिथि थे।
और,,,,उत्तराखंड रोडवेज में दो महीने से कार्मिकों के वेतन के लाले पड़े हैं। दोनों कार्यक्रम में रोडवेज की 299 बसों को लगाया गया था जिसका 2,82,20,891 ₹ का भुगतान बकाया है। चिट्ठी पतरिया महीनों से घूम रही है लेकिन सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है।
-अजीत सिंह राठी, पत्रकार
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