नई दिल्ली। अमेरिकी पत्रिका टाइम (TIME) ने भारत में हालिया छात्र और युवा आंदोलनों पर प्रकाशित अपने विश्लेषणात्मक लेख में दावा किया है कि दिल्ली में हुए विरोध प्रदर्शनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक छवि को अभूतपूर्व चुनौती दी। पत्रिका ने अपने लेख का शीर्षक “A Bonfire of Vanities in Delhi” रखा है।
रिपोर्ट में लिखा गया है कि सार्वजनिक धन से चलाए गए व्यापक प्रचार अभियानों के जरिए ‘अर्ध-देवता’ जैसी छवि वाले प्रधानमंत्री को राजधानी की सड़कों पर युवाओं ने व्यंग्य और कटाक्ष का विषय बना दिया। टाइम के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सोशल मीडिया और वायरल वीडियो के जरिए मोदी के राजनीतिक ब्रांड के लगभग हर प्रतीक को निशाना बनाया और उसे पलटने की कोशिश की।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस आंदोलन का सबसे प्रभावी हथियार व्यंग्य (Satire) था। टाइम ने लिखा कि प्रदर्शन का एक अनौपचारिक नारा “56 इंच का छोटा बंदर” और उसके जवाब में “भाग नरेंद्र, भाग नरेंद्र” था। पत्रिका के अनुसार, यह नारा सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो से लोकप्रिय हुआ, जिसमें दो युवतियां यह नारा लगाती दिखाई देती हैं, जबकि एक अन्य व्यक्ति प्रधानमंत्री मोदी को एक छोटे बंदर के रूप में दर्शाने वाला पोस्टर पकड़े हुए नजर आता है।
टाइम का कहना है कि इस तरह के वायरल वीडियो और इंस्टाग्राम रील्स ने आंदोलन को नई पहचान दी और युवाओं ने पारंपरिक विरोध प्रदर्शनों के बजाय डिजिटल संस्कृति, मीम्स और व्यंग्य को अपना प्रमुख हथियार बनाया।
पत्रिका ने आगे लिखा कि हालिया घटनाक्रम ने यह संकेत दिया है कि भारत की Gen Z अब राजनीतिक विमर्श में अधिक मुखर भूमिका निभा रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह आंदोलन केवल शिक्षा और युवाओं के मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने सत्ता, जवाबदेही और लोकतंत्र पर भी नई बहस छेड़ दी।
क्या मोदी टाइम मैगजीन को दिल से माफ़ कर पाएंगे?
मैगजीन ने ’56 इंच का छोटा बंदर, बाल नरेन्दर,बाल नरेन्दर’ वाले नारे को ’56 इंच का छोटा बंदर, भाग नरेन्दर,भाग नरेन्दर’ छाप दिया है।
और दुनिया को वो सब भी बता दिया है जो बताने में भारतीय मीडिया शर्मा रहा था।
-मंजुल, कार्टूनिस्ट


