कोच्चि। केरल हाईकोर्ट ने मेटा (Meta) को वरिष्ठ पत्रकार और न्यू इंडियन एक्सप्रेस के पूर्व संपादक एन. माधवन कुट्टी का फेसबुक अकाउंट अंतरिम रूप से बहाल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने माना कि कुछ पोस्ट पर आपत्ति होने के आधार पर पूरे अकाउंट को ब्लॉक करना प्रथम दृष्टया अधिकारों का अतिक्रमण प्रतीत होता है।
31 जुलाई को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति जियाद रहमान ए.ए. ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि आपत्ति केवल कुछ पोस्टों पर थी, लेकिन पूरा अकाउंट ब्लॉक कर दिया गया। अदालत ने टिप्पणी की कि यह कार्रवाई प्रथम दृष्टया निर्धारित अधिकारों से आगे बढ़कर की गई है।
मामला नवंबर 2025 में किए गए एक फेसबुक पोस्ट से जुड़ा है। माधवन कुट्टी ने दिल्ली विस्फोटों से संबंधित एक मलयालम अखबार की कटिंग साझा करते हुए लिखा था कि बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण की कोशिश नाकाम रही है और यह घटना किसी स्वार्थी तत्व की साजिश हो सकती है। इसके बाद केरल पुलिस के अनुरोध पर मेटा ने उनका अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया था।
सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से कहा गया कि याचिकाकर्ता द्वारा अपलोड की गई कुछ सामग्री के कारण अकाउंट ब्लॉक करने का निर्देश दिया गया था। हालांकि अदालत ने कहा कि यदि केवल कुछ पोस्ट आपत्तिजनक हैं तो पूरे अकाउंट को बंद करना उचित नहीं है।
अंतरिम राहत देते हुए हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस जिन पोस्टों को आपत्तिजनक मानती है, उनके URL और विवरण मेटा को उपलब्ध कराए जाएं। मेटा उन पोस्टों को हटाए, लेकिन पूरा अकाउंट बंद न करे। अदालत ने मेटा को अकाउंट तत्काल चालू करने का आदेश दिया और कहा कि भविष्य में भी किसी आपत्तिजनक सामग्री पर पोस्ट-दर-पोस्ट कार्रवाई की जाए, न कि पूरे अकाउंट पर।
सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से दलील दी गई कि अकाउंट छह महीने से अधिक समय से ब्लॉक है, इसलिए आईटी (इंटरमीडियरी गाइडलाइंस एंड डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड) नियम, 2021 के तहत डेटा उपलब्ध नहीं भी हो सकता है। वहीं, याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अकाउंट भारत के बाहर अब भी उपलब्ध है, इसलिए डेटा सुरक्षित है।
अदालत के आदेश के बाद भी अकाउंट बहाल नहीं होने पर माधवन कुट्टी ने कहा कि अदालत ने वास्तविक स्थिति को समझते हुए महत्वपूर्ण हस्तक्षेप किया है, लेकिन आदेश जारी होने के चार दिन बाद भी भारत में उनका अकाउंट ब्लॉक है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब डिजिटल अधिकार कार्यकर्ता सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट और पोस्ट ब्लॉक किए जाने की बढ़ती घटनाओं को लेकर चिंता जता रहे हैं। उनका कहना है कि कई मामलों में सरकार की आलोचना या व्यंग्यात्मक सामग्री को भी बिना स्पष्ट कारण बताए आईटी एक्ट की धारा 69ए के तहत “Withheld in India” नोटिस के साथ हटाया जा रहा है। अप्रैल 2026 में द हिंदू की एक रिपोर्ट में भी दावा किया गया था कि भारत में मेटा सरकारी एजेंसियों के फ्लैग किए गए कंटेंट पर कई मामलों में तत्काल कार्रवाई करता है।


