Connect with us

Hi, what are you looking for?

वेब-सिनेमा

छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के दौरान ANI की कवरेज सबसे शर्मनाक रही!

Two people sit facing each other in an interview setup, with a small table and pink flower, a large ANI collage in the background, and a news logo top-right.

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए छात्र आंदोलन और पुलिस कार्रवाई की कवरेज को लेकर देश की प्रमुख समाचार एजेंसी एशियन न्यूज इंटरनेशनल (ANI) सवालों के घेरे में आ गई है। फैक्ट-चेकिंग वेबसाइट ऑल्ट न्यूज ने अपनी एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में दावा किया है कि जिस दिन दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और बल प्रयोग किया, उस दिन ANI ने घायल छात्रों का एक भी उल्लेख अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर नहीं किया।

रिपोर्ट के अनुसार, 20 जुलाई को सुबह 7 बजे से रात 11:59 बजे तक ANI ने कुल 404 पोस्ट साझा किए। इनमें से 180 पोस्ट दिल्ली से जुड़ी घटनाओं पर थीं और 102 पोस्ट सीधे NEET पेपर लीक विरोध प्रदर्शन तथा ‘चलो संसद’ मार्च से संबंधित थीं। हालांकि, इनमें से एक भी पोस्ट में प्रदर्शनकारियों के घायल होने या पुलिस कार्रवाई में छात्रों को लगी चोटों का जिक्र नहीं किया गया।

प्रदर्शन की जगह सुरक्षा व्यवस्था पर रहा फोकस

रिपोर्ट में कहा गया है कि ANI की शुरुआती कवरेज मुख्य रूप से संसद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती, मेट्रो स्टेशनों के बंद होने, सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य और उनकी पत्नी गीतांजलि आंगमो की याचिका तक सीमित रही।

करीब 10:20 बजे ANI ने पहली बार बताया कि प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हुई और भीड़ नियंत्रण के लिए लाठीचार्ज किया गया। इसके बाद CJP प्रवक्ता सौरव दास और एक डीसीपी की बैठक की जानकारी भी साझा की गई।

पुलिस कार्रवाई तेज हुई, लेकिन कवरेज गायब

ऑल्ट न्यूज का दावा है कि जैसे-जैसे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव बढ़ा, सोशल मीडिया पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित बल प्रयोग के वीडियो तेजी से वायरल होने लगे। लेकिन इसी दौरान दोपहर 12:50 बजे से 2:18 बजे तक ANI की ओर से सड़क पर चल रही कार्रवाई को लेकर कोई पोस्ट नहीं की गई।

करीब डेढ़ घंटे बाद एजेंसी ने केवल इतना बताया कि प्रदर्शनकारी तितर-बितर हो गए, लेकिन यह नहीं बताया कि उन्हें हटाने के लिए किस तरह की कार्रवाई की गई।

पुलिस के दावों को प्रमुखता, छात्रों की चोटों का जिक्र नहीं

रिपोर्ट के मुताबिक, दिनभर ANI ने दिल्ली पुलिस के दो तथाकथित ‘फैक्ट चेक’ भी प्रमुखता से साझा किए, जिनमें पुलिस ने कुछ वायरल दावों का खंडन किया था।

दोपहर बाद एजेंसी का फोकस पुलिसकर्मियों के घायल होने पर केंद्रित हो गया। पहले एक सब-इंस्पेक्टर के घायल होने की खबर दी गई और देर रात तक 118 पुलिसकर्मियों के घायल होने का विस्तृत ब्यौरा भी प्रकाशित किया गया। इसके विपरीत, प्रदर्शनकारियों के घायल होने संबंधी कोई आंकड़ा या जानकारी साझा नहीं की गई।

पुलिस वाहनों के नुकसान पर कई पोस्ट

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ANI ने प्रदर्शन के बाद क्षतिग्रस्त पुलिस वाहनों, सड़क पर फैले मलबे और कथित नुकसान को दिखाने वाली कम से कम सात पोस्ट प्रकाशित कीं। लेकिन छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई या घायल प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और जानकारी उसकी कवरेज से पूरी तरह गायब रहीं।

ऑल्ट न्यूज ने उठाए बड़े सवाल

ऑल्ट न्यूज का कहना है कि देश के अधिकांश टीवी चैनल वीडियो और विजुअल्स के लिए ANI पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि देश की सबसे बड़ी वीडियो समाचार एजेंसी किसी बड़े घटनाक्रम के एक महत्वपूर्ण पक्ष को कवरेज से बाहर रखती है, तो इसका सीधा असर आम दर्शकों तक पहुंचने वाली जानकारी पर पड़ता है।

रिपोर्ट के अंत में सवाल उठाया गया है कि क्या यह केवल संपादकीय निर्णय था या फिर किसी विशेष नैरेटिव को स्थापित करने की कोशिश? ऑल्ट न्यूज का कहना है कि वर्षों के सबसे बड़े छात्र आंदोलनों में से एक के दौरान पुलिस पर लगे गंभीर आरोपों को लगभग पूरी तरह नजरअंदाज करना मीडिया की निष्पक्षता पर नई बहस खड़ी करता है।

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन