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आज के अखबार : युवाओं से जूझने के लिए PM ने नशा मुक्ति की बात की, इंडियन एक्सप्रेस ने लंबित मामलों की

Front page of a newspaper with the headline 'Extortion is back in BJP-run Bengal' and a subheading about TMC's 'tolabaji' culture; by Rajib Chowdhuri; visible article text lines.

भाजपा को बंगाल में तृणमूल पार्टी से दिक्कत थी लेकिन नेतृत्व तृणमूल पार्टी के दलबदलू को ही सौंप दिया। गद्दारों को गले लगाने के लिए तैयार है और काम वही हो रहा है। पहले तृणमूल वाले करते थे, अब भाजपा वाले करते हैं। जनता को क्या मिला? दिल्ली में सरकार बदली डबल इंजन हुआ, फायदा क्या हुआ?

संजय कुमार सिंह

अमृतकाल में बड़ी हुई पीढ़ी के लिए प्रधानमंत्री ने अब नशा विरोधी आईडिया लांच किया है। 100 हफ्तों या रविवार को कला, खेल, संस्कृति और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की गई है। नवोदय टाइम्स में यह खबर लीड के बराबर, टॉप पर चार कॉलम में छपी है। शीर्षक है, नशे से दूर रहें युवा, तभी बनेगा विकसित भारत : मोदी। खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग से जुड़े एक करोड़ युवाओं को संबोधित किया। प्रधानमंत्री ने जो कहा वह दि इंडियन एक्सप्रेस में आज अंदर पेज 5 पर होने की सूचना पहले पन्ने पर है। यह सूचना जिस खबर के साथ छपी है उसमें बताया गया है कि, नशीली दवाइयों और नशा करने वाले पदार्थों से संबंधित 3.9 लाख मामले लंबित हैं। केंद्र सरकार ने राज्यों से कहा है कि नशे से जुड़े अपराधों के लिए विशेष अदालत बनाएं। खबर के अनुसार पंजाब में 60,000 मामले लंबित हैं लेकिन यहां कोई विशेष एनडीपीएस कोर्ट नहीं है जबकि केरल में 50,000 मामले लंबित हैं और वहां सिर्फ दो विशेष अदालतें है। आप जानते हैं कि पेपर लीक के मामलों के लिए हाल में सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा की है। नवोदय टाइम्स की खबर के अनुसार, 137 जजों का ट्रांसफर हो गया है। नशे के खिलाफ सरकार की नई योजना की खबर आज द टेलीग्राफ और दि एशियन एज में लीड है। दि एशियन एज में शीर्षक है, मोदी ने कहा – विकसित भारत के लिए नशा मुक्त भारत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा है, देश ने जब विकसित भारत बनाने का लक्ष्य तय किया है तब यह आवश्यक है कि युवा नुकसानदेह लत से दूर रहें ताकि शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ और पूरी तरह आत्मविश्वास से पूर्ण रहें। दि एशियन एज की खबर के साथ हाईलाइट किया हुआ हिस्सा यह भी है, प्रधानमंत्री ने परिवारों से अपील की कि सामाजिक प्रतिष्ठ की चिन्ता में वे अपने बच्चों की नशे की लत को न छिपाएं और उनके साथ खुलकर बात करें तथा विशेषज्ञ और चिकित्सीय सलाह लें।

द टेलीग्राफ में जेपी यादव की खबर इस प्रकार है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को युवाओं से एक और अपील की। इस बार नशीली दवाओं से दूर रहने की। देश में चौपट होती शिक्षा और ​​परीक्षा व्यवस्था तथा नीट में धांधली के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों से हुए नुकसान के बाद, प्रधानमंत्री ‘जेन-ज़ी’ का समर्थन हासिल करने की कोशिश में लगे हैं। इस क्रम में केंद्र सरकार के ‘नशा मुक्त युवा – विकसित भारत संकल्प अभियान’ की शुरुआत के मौके पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए मोदी ने कहा, “देश को आपकी ऊर्जा, आपकी कल्पनाशीलता और आपकी प्रतिभा की ज़रूरत है। इसलिए, देश और अपनी ज़िंदगी के लिए नशीली दवाओं से दूर रहना बहुत ज़रूरी है।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले 10 दिनों में इंस्टाग्राम के ज़रिए ‘जेन-ज़ी’ से कई बार ‘संपर्क’ किया है। इंस्टाग्राम युवाओं के बीच लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म है और जंतर-मंतर पर हुए विरोध-प्रदर्शन का मुख्य ज़रिया भी रहा है। उन्होंने परीक्षा में सुधार का वादा और घोषणा की है, साथ ही यह भी कहा है कि उन्होंने उनके अपशब्दों वाले नारों को माफ़ कर दिया है।

गौरतलब है कि इससे पहले, केंद्रीय मंत्रिमंडल की एक बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने अपने मंत्रियों और सहयोगियों को इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहने, रील्स पोस्ट करने और युवा पीढ़ी (जेन जी) से सीधे जुड़ने की सलाह दी थी। खबरों के अनुसार, उन्होंने जोर देकर कहा था कि सरकार के कामकाज और योजनाओं का संदेश युवाओं तक प्रभावी ढंग से पहुँचाने के लिए मंत्रियों को भी इस डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करना चाहिए। प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा था कि इंस्टाग्राम पर सक्रिय रहें, युवाओं से जुड़ने के लिए रील पोस्ट करें। वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जेनजी को प्रभावित करने की प्रधानमंत्री की यह कोशिश अखबारों में वैसे नहीं है जैसे अभी तक रहती आई है। अमर उजाला में यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है लेकिन दूसरे पहले पन्ने पर यह पांच कॉलम में छपी है। दैनिक भास्कर में यह खबर दोनों पहले पन्नों पर नहीं है। दैनिक भास्कर की लीड का शीर्षक है, “नीट-पीजी : एक ही शिफ्ट में पेपर, ‘घर के पास’ सेंटर”। फ्लैग शीर्षक है, “पेपर लीक से सबक – स्वास्थ्य मंत्रालय ने किए कई बड़े सुधार। गौर करने वाली बात है कि नीट पीजी में सुधार स्वास्थ्य मंत्रालय कर रहा है, शिक्षा मंत्रालय नहीं। मुख्य खबर के साथ की एक खबर का शीर्षक है, फिंगर प्रिंट नहीं मिले तो आंखों की पुतली स्कैन करके देंगे एंट्री। नीट परीक्षा में असली छात्र की जगह किसी अन्य फर्जी उम्मीदवार (डमी कैंडिडेट या सॉल्वर) को बैठाने का मामला बेहद गंभीर है। कानून में इसे  इम्पर्सनेशन या छद्मवेश धारण करना कहा जाता है। हाल ही में आयोजित हुई नीट-यूजी परीक्षा और पुन: परीक्षा के दौरान भी ऐसे कई बड़े सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। जांच एजेंसियों द्वारा सामने लाई गई इस धोखाधड़ी के मुख्य पहलू बायोमेट्रिक टीम से साठगांठ है : जांच में सामने आया है कि जालसाज परीक्षा केंद्रों पर तैनात बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन टीम के सदस्यों को रिश्वत देकर अपने साथ मिला लेते हैं। खबर में इसे रोकने का कोई आश्वासन नहीं है।

इसी तरह, एक बोल्ड शीर्षक है – अफवाह पर छात्र ध्यान न दें। खबर के अनुसार, नड्डा ने छात्रों से कहा है कि वे पेपर लीक होने के झूठे दावों, अफवाहों पर ध्यान न दें। जाहिर है, इतने भर से ना सॉल्वर गैंग की समस्या दूर होगी और न पेपर लीक होने की। हिन्दुस्तान टाइम्स और द हिन्दू में यह खबर सिंगल कॉलम की है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह दो कॉलम की खबर है। प्रधानमंत्री की इस खबर को अखबारों में पहले पन्ने पर जगह नहीं मिली है तो कारण यही हो सकता है कि यह खबर जिनके लिए है वे इंस्टाग्राम के जरिए ही मिलेंगे। दूसरा कारण यह हो सकता है कि अखबारों ने अब प्रधानमंत्री का प्रचार कम करने का निर्णय हुआ हो। मुझे इसकी संभावना कम लगती है। हालांकि, आज की खबर यही है कि युवाओं को प्रभावित करने के लिए प्रधानमंत्री ने नशे से दूर रहने की अपील की। नशा न बिके, न मिले उसके लिए सरकार ने क्या किया है पता नहीं है। इंडियन एक्सप्रेस इस मामले में छोड़ दिया गया सच बता रहा है। अभी यह बताना बाकी है कि कॉपी चेक करने का काम देने के लिए निविदा की शर्तों में तीन बार बदलाव किया गया था और बहुत संभावना  है कि अयोग्य कंपनी को पैसे लेकर ठेका दिया गया। इससे छात्रों को परेशानी हुई। सिस्टम का मजाक बना। लेकिन अभी तक उसपर भी खबर नहीं है। ये वैसी गड़बड़ियां हैं जिन्हें बच्चों ने ही पकड़ लिए थे। देखते रहिए, समझते रहिए।

टाइम्स ऑफ इंडिया की आज की लीड के अनुसार, एनटीए ने अपने कार्यालयों, परीक्षा सामग्री की सुरक्षा के लिए (अब) टेंडर निकाला है और यह 7.5 करोड़ रुपए की अनुमानित राशि के लिए है। अखबार ने लिखा है कि यह पूरी परीक्षा श्रृंखला में नियंत्रण सख्त करने की कोशिश है। अमर उजाला की लीड का शीर्षक है, नौ साल में 500 परीक्षा केंद्र बनाने थे, योजना बनाकर गिनती भूला एनटीए। इस खबर के अनुसार, एनटीए गठन के ज्यादातर फैसले आज तक लागू नहीं किए गए हैं। इसमें एनटीए डीजी की सहायता के लिए नौ वर्टिकल, एक शासी मंडल और शिक्षाविद अध्यक्ष की नियुक्ति का प्रावधान भी अटका पड़ा है। फिर भी इसकी कमाई बढ़ती जा रही है। खबर के अनुसार, वर्ष 2018 में गठन के समय सरकार ने एनटीए को 25 करोड़ रुपए दिए थे। उसके बाद से एजेंसी परीक्षार्थियों से मिलने वाले आवेदन शुल्क से कमाई कर रही है। 2019-20 में एनटीए की आय 504 करोड़ थी जो 2023-24 में बढ़कर 1117 करोड़ रुपए हो गई है। सीबीआई जांच की हालत ऐसी है कि परीक्षा से जुड़े 158 केस की जांच तो पूरी हो गई है लेकिन सुनवाई अटकी हुई है। आप समझ सकते हैं कि पेपर लीक रोकने के लिए कुछ किया ही नहीं गया था। ना पहले, ना अब। और बात इतनी ही नहीं है। नीट परीक्षा में पेपर सेटर को भी लीक में शामिल माना गया है। इसे व्यवस्था की सबसे बड़ी नाकामी कहा जा सकता है कि पेपर सेट करने का काम ऐसे व्यक्ति को दे दिया गया जो लीक कर सकता है। भ्रष्टाचार के कारण यह संभव है और इसे रोकने के लिए कुछ कुछ किए जाने की खबर अभी तक नहीं है। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए परीक्षा प्रणाली में बदलाव, सख्त कानून और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से दुरुस्त करने की आवश्यकता होती है। अभी तक जो हुआ है वह सख्त कानून है लेकिन सुनवाई ही रुकी पड़ी है और फास्ट ट्रैक कोर्ट बने लेकिन तबादला हो गया। देरी के कारण ऐसे ही बनते हैं। अदालतों में देरी के कारण ऐसे ही बनते हैं।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।   

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