संजय कुमार सिंह-
वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र सेंगर जी ने डिजिटल मार्केटिंग के जरिये डायबिटीज के करोडों रोगियों से की जा रही देशव्यापी ठगी पर एक लंबी पोस्ट लिखी थी। आज लिखा कि कल रात से उनके पास अनजान नंबरों से फोन आ रहे हैं और कुछ ले-देकर इस मामले में मुंह बंद रखने को कहा जा रहा है।

आज शाम कमर वहीद नकवी जी की पोस्ट से पता चला कि उनका निधन हो गया। अनिल जैन जी ने इस बारे में लिखा और दोनों पोस्ट के लिंक दिये पर कुछ लोगों का कहना है कि लिंक खुल नहीं रहा है। कई बार पोस्ट के पाठक सीमित रखने के कारण ऐसा होता है। सेंगर जी के निधन के बाद इस पोस्ट की खास अहमियत है। इसलिए मैं इसे कॉपी पेस्ट कर रहा हूं ताकि कोई भी पढ़ सके।
अगर यह सिर्फ संयोग है तो भी निश्चित रूप से नामुमकिन के मुमकिन होने जैसा है। फिलहाल इस विषय पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी। यह भी असाधारण संयोग है कि उनका अंत एक जनहितकारी खबर के बाद हुआ और लंबे समय तक इस कारण भी चर्चा में रहेंगे। बहरहाल सेंगर जी को हार्दिक श्रद्धांजलि और उनकी स्मृति को सादर प्रणाम।
पहली पोस्ट
23 घंटे पहले
अरबों रुपए का स्कैम/आम जनता से लूट!
वीरेंद्र सेंगर-
इस डिजिटल युग में इन दिनों फेसबुक मार्केटिंग के जरिए डाइबिटीज के करोड़ों मरीजों से खुली ठगी की जा रही है। लूट के साथ उनकी जान को खतरे में डाला जा रहा है। पता नहीं क्यों, सरकारी एजेंसी आंखों को बंद किए हैं? विज्ञापन में एआई तकनीकी से महामहिम राष्ट्रपति मुर्मू जी तक का इस्तेमाल महीनों से किया जा रहा है। मुर्मू जी की आवाज में बताया जा रहा है कि डाइबिटीज हमेशा के लिए महज कुछ दिनों में इन कैप्सूल से खत्म हो जाएगी। एक कथित विशेषज्ञ डा. शेट्टी स्क्रीन पर अवतरित होते हैं। दावा किया जाता है कि अरबों रुपयों के खर्च से नयी दवा की रिसर्च हुई है। अब इस रोग की विदाई हमेशा के लिए होने वाली है। लेकिन मेडिकल लाबी खिलाफ हैं ,क्योंकि उनका अरबों नुकसान हो जाएगा। ये मजबूत लाबी किसी समय बाधा डाल सकती है। इसीलिए सुगर के मरीज फंला तारीख तक आर्डर प्लेस कर दें। प्रचार के लिए भी धोखाधड़ी हो रही है।
मशहूर टीवी एंकर रवीश कुमार, रजत शर्मा, एंकरनियों में चित्रा त्रिपाठी और अंजना कश्यप आदि अपने चिर परिचित अंदाज में इस जादुई दवा के बारे में विस्तार से बताती नजर आती हैं। पहली नजर में ये विज्ञापन जालसाजी ही नजर आते हैं। करीब एक महीने से मैं लगातार देख रहा हूं। भारत में डाइबिटीज पिछले वर्षों में महामारी की तरह फैली है। गांव-गांव में ये बीमारी विस्तार ले रही है।आयुष मंत्रालय का आकलन है कि इस मर्ज के पीड़ित बीस करोड़ हैं।ये जानलेवा भी है। इसीलिए पैसे ठगने के लिए कुछ बड़े माफिया सक्रिय हो गये हैं।
मैं खुद चार दशक से पीड़ित हूं। इंसील्यून भी ले रहा हूं। मुश्किल से नियंत्रण हो पाता है। घर पर बेटी के कूरियर आते रहते हैं। एक दिन बातों बातों में उसने बताया कि इस दवा के रोज पचास से ज्यादा कूरियर आते हैं। एक महीने की दवाएं करीब पांच हजार की होती हैं। लोग ये विश्वास करके मंगा लेते हैं कि सौदा बुरा नहीं हैं।
अच्छे खासे पढ़ें लिखे भी झांसे में आ रहे हैं। एक पल्स मीटर भी आ रहा है। दावा है कि ये जापानी मशीन है। इसमें उंगली भर रखने से वीपी और ब्लड सुगर की भी गणना आ जाएगी। बगैर खून निकाले।इसकी कीमत 1200की रखी गयी है। एक सप्ताह में घर बैठे ये आइटम आ जाते हैं। पार्सल आने पर पेमेंट करना होता है। जानकारी के अनुसार कूरियर कंपनी को दोगुना फीस मिलती है।
ठगी पर लोग मन मसोस लेते हैं। अपने डाक्टर से बात करके मैंने 15 दिनों के अंदर पैसे खर्च करके दोनों पार्सल मंगवाए। रेगुलर दवाएं भी खाता रहा। मुझे जादुई दवा से पिछले 18 दिनों में कोई अंतर नहीं पड़ा। जापानी जादुई मशीन आज ही आयी है। वो नान स्टार्टर साबित हुई। वरिष्ठ एंकर रवीश जी ने अपने शो में कहा है कि वे किसी दवा का विज्ञापन नहीं करते। उन्हें ऐसी जानकारी मिली है।ये सरकारी जांच एजेंसियों की असफलता है कि ये फर्जी वाड़ा देश के पैमाने पर जारी है। अनुमान है कि एक महीने में ही अरबों की ठगी हो चुकी है।पूरा सिस्टम अफीम खाए जैसा पड़ा है।
दूसरी पोस्ट
(सात घंटे पहले)
दोस्तों बताओ कितने में बिकूं? कल रात मैंने दवाओं के नाम पर अरबों रुपए के देश व्यापी स्कैम की पोस्ट लिखी थी।अपना खुद का अनुभव लिखा था। इसके लिए छः हजार खर्च भी किये थे।इस पोस्ट से पता चला ये डिजिटल रैकेट बहुत बड़ा है।रात से ही मुझे अनजान नंबरों से फोन आए।ये आफर दिया जा रहा है कि लाख दो लाख में डील कर लो।क्यों धंधा खोटा कर रहे हो?जब मैंने फोन करने वाली मोहतरमा को डांटा।वो बोली,अपना भी कट ले लो।और शांत बैठकर इस आयु में भजन करो अंकल। कहोगे तो रकम बढ़ जाएगी।न भी मानोगे, तो अपुन का धंधा चलता रहेगा । सबके ऊपर तक तार जुड़े हैं।जिस देश में पत्थर के गणेश जी को दूध पिलाने के लिए करोड़ों लोग मंदिरों में जाते हैं,अंकल वहां सब चलेगा।तुम पत्रकार कुछ नहीं उखाड़ पाओगे। पहले मनुहार करने वाली मोहतरमा ,आज दोपहर में गुस्से में थी।मैं भ्रष्ट और लकवाग्रस्त सिस्टम को समझ रहा हूं।आप लोग बताओ!एक लाख में बिकूं या दो लाख में बिकूं।या डील करके चार लाख करा लूं। मोहतरमा तंज कर गयीं हैं कि अंकल पत्रकार आप नहीं बिकोगे तो क्या? धंधा रोक नहीं देंगे।ऊपर भी बिकने वाले बैठे हैं।वो ताना मार गयी। बताओ क्या करूं?
नदीम अख़्तर-
वरिष्ठ पत्रकार श्री Virendra Sengar साहब का अचानक चला जाना खल गया। अभी-अभी उनकी एक पोस्ट पढ़ी, जो एक ज़िंदा पत्रकार की कलम थी। पत्रकार तो इस जहां में कई साँस ले रहे हैं, पर उनमें ज़िंदा कितने हैं, ये पाठक जानते हैं। क़रीब आठ घंटे पहले लिखी उनकी इस पोस्ट में दवा के कारोबार के गोरखधंधे की कहानी थी। लेकिन जैसे ही मैंने पेज स्क्रॉल किया, नीचे श्री Rajeevnayan Bahuguna Reborn जी की पोस्ट दिखी, जिसमें सेंगर साहब के आकस्मिक निधन का समाचार था। यकीन नहीं हुआ कि ऊपर जिनकी पोस्ट अभी-अभी पढ़ी है, ठीक नीचे उनके निधन की खबर है।
सेंगर साहब से मेरी निजी मुलाक़ात तो नहीं रही, कभी संयोग नहीं बना लेकिन मेरी पोस्ट पर आकर वह मेरा हौसला बढ़ा जाते थे। वे पुराने ज़माने के खाँटी पत्रकार थे और उसूलों से समझौता नहीं करते थे।
नीचे उनकी पोस्ट (शायद आख़िरी) का स्क्रीनशॉट लगा रहा हूं। उनको विनम्र श्रद्धांजलि.



