क्या आज दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवर कंपनियों में शामिल कुछ कारोबारी दिग्गज आने वाले दो-तीन दशकों में इतिहास बन सकते हैं? क्या कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), इलेक्ट्रिक वाहन, स्वच्छ ऊर्जा, बदलती सरकारी नीतियां और तकनीकी क्रांति उन कंपनियों के कारोबार को खत्म कर सकती हैं, जो आज अपने-अपने क्षेत्र में मजबूत स्थिति रखती हैं?
सोशल मीडिया मंच एक्स पर एआई टूल Grok से पूछे गए दो सवालों के जवाब में ऐसी ही एक सूची सामने आई है। पहले सवाल में पूछा गया कि भारत की ऐसी 10 बड़ी कंपनियों के नाम बताए जाएं, जिनका अस्तित्व 2047 तक खत्म हो सकता है। दूसरे सवाल में दुनिया की 10 बड़ी कंपनियों के बारे में यही सवाल 2050 के संदर्भ में पूछा गया।
इन जवाबों में भारतीय कंपनियों की सूची में कोल इंडिया, ओएनजीसी, टीसीएस, इन्फोसिस, आईटीसी, मारुति सुजुकी, बीएचईएल, एलआईसी, विप्रो और बजाज ऑटो के नाम शामिल हैं। वहीं, वैश्विक सूची में एक्सॉनमोबिल, जनरल मोटर्स, कोका-कोला, डिज्नी, बोइंग, जेपी मॉर्गन, वॉलमार्ट, इंटेल, फाइजर और मैकडॉनल्ड्स को शामिल किया गया है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये नाम एआई के अनुमान और काल्पनिक भविष्यवाणियों पर आधारित हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि इन कंपनियों के बंद होने की पुष्टि हो चुकी है या इनके कारोबार का अंत होना तय है।
2047 तक खत्म हो सकती हैं भारत की ये 10 कंपनियां?
- कोल इंडिया (Coal India): शुद्ध-शून्य उत्सर्जन और स्वच्छ ऊर्जा की ओर दुनिया के बढ़ते रुझान से कोयले की मांग घट सकती है। यदि कंपनी समय रहते अपने कारोबार में बदलाव नहीं करती, तो उसके सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
- ओएनजीसी (ONGC): इलेक्ट्रिक वाहनों के विस्तार और तेल की मांग में संभावित गिरावट से तेल एवं गैस के पारंपरिक कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है।
- टीसीएस (TCS): एआई एजेंट और स्वचालित सॉफ्टवेयर विकास पारंपरिक आईटी सेवा मॉडल को बदल सकते हैं। इससे कर्मचारियों के बड़े समूह के जरिए सेवाएं देने वाले कारोबार को चुनौती मिल सकती है।
- इन्फोसिस (Infosys): यदि एआई सॉफ्टवेयर बनाने और तकनीकी सेवाएं देने की लागत बहुत कम कर देता है, तो आउटसोर्सिंग पर आधारित कारोबार के मौजूदा मॉडल को बड़ा बदलाव करना पड़ सकता है।
- आईटीसी (ITC): Grok के अनुमान में तंबाकू पर देशव्यापी प्रतिबंध की काल्पनिक स्थिति को कंपनी के लिए बड़ा खतरा बताया गया। हालांकि, आईटीसी का कारोबार केवल तंबाकू तक सीमित नहीं है; कंपनी खाद्य पदार्थों, होटल और अन्य क्षेत्रों में भी काम करती है।
- मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki): सस्ते इलेक्ट्रिक वाहनों और वाहन उद्योग में तेज बदलाव के बीच यदि कंपनी प्रतिस्पर्धा के अनुरूप खुद को नहीं ढालती, तो उसके पारंपरिक पेट्रोल-डीजल वाहन कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है।
- बीएचईएल (BHEL): यदि ऊर्जा उत्पादन में कोयला आधारित बिजली संयंत्रों की भूमिका घटती है और कंपनी नए ऊर्जा क्षेत्रों में पर्याप्त विस्तार नहीं कर पाती, तो उसके पारंपरिक उपकरण कारोबार को नुकसान पहुंच सकता है।
- भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC): डिजिटल सेवाओं और निजी बीमा कंपनियों के विस्तार से एलआईसी के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। हालांकि, निजी कंपनियों के आने मात्र से एलआईसी का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
- विप्रो (Wipro): एआई के कारण कम मूल्य वाली और दोहराव वाली आईटी सेवाओं की मांग घटने की आशंका है। ऐसे में कंपनी को अपनी सेवाओं और कारोबार के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है।
- बजाज ऑटो (Bajaj Auto): यदि भविष्य में पेट्रोल से चलने वाले दोपहिया वाहनों पर सख्त प्रतिबंध लगते हैं और कंपनी इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर बदलाव में पिछड़ती है, तो उसके मौजूदा कारोबार को बड़ा झटका लग सकता है।
2050 तक दुनिया की इन 10 दिग्गज कंपनियों का कारोबार खत्म हो सकता है?
Grok से पूछे गए दूसरे सवाल में वैश्विक कारोबार की 10 बड़ी कंपनियों को लेकर संभावित खतरे गिनाए गए। इस सूची में ऊर्जा, वाहन, मनोरंजन, बैंकिंग, खुदरा कारोबार, तकनीक, दवा और फास्ट फूड से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।
- एक्सॉनमोबिल (ExxonMobil): फ्यूजन ऊर्जा और दूसरे स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों के बड़े पैमाने पर सफल होने की स्थिति में तेल पर आधारित कारोबार की मांग घट सकती है।
- जनरल मोटर्स (GM): यदि रोबोटैक्सी और बिना चालक वाली परिवहन सेवाएं बड़े पैमाने पर निजी वाहन रखने की जरूरत कम कर देती हैं, तो पारंपरिक कार निर्माता कंपनियों को अपने कारोबार का मॉडल बदलना पड़ सकता है।
- कोका-कोला (Coca-Cola): मीठे पेय पदार्थों पर सख्त सरकारी नीतियों और स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता से कंपनी के कुछ उत्पादों की मांग प्रभावित हो सकती है।
- डिज्नी (Disney): एआई से फिल्म, एनिमेशन और डिजिटल मनोरंजन सामग्री बनाना आसान होने पर पारंपरिक स्टूडियो मॉडल के सामने नई प्रतिस्पर्धा खड़ी हो सकती है।
- बोइंग (Boeing): भविष्य में शहरी हवाई परिवहन और नई विमान तकनीकों के विस्तार से विमानन उद्योग बदल सकता है। हालांकि, इससे पारंपरिक यात्री विमानों की जरूरत पूरी तरह खत्म हो जाएगी, यह अभी केवल अटकल है।
- जेपी मॉर्गन (JPMorgan): क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल वित्तीय सेवाओं और एआई आधारित वित्तीय तकनीकों का विस्तार पारंपरिक बैंकिंग के तौर-तरीकों को बदल सकता है।
- वॉलमार्ट (Walmart): स्वचालित डिलीवरी, ऑनलाइन खरीदारी और एआई आधारित आपूर्ति व्यवस्था से खुदरा कारोबार का स्वरूप बदल सकता है। इससे पारंपरिक दुकानों पर निर्भरता कम होने की आशंका है।
- इंटेल (Intel): चिप उद्योग में तेजी से हो रहे बदलाव और नई कंप्यूटिंग तकनीकों के कारण कंपनी को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। Grok के जवाब में क्वांटम कंप्यूटिंग को संभावित चुनौती बताया गया, हालांकि क्वांटम तकनीक के विकास से इंटेल का कारोबार खत्म होना तय नहीं है।
- फाइजर (Pfizer): व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार विकसित दवाओं और एआई आधारित औषधि अनुसंधान से दवा उद्योग का स्वरूप बदल सकता है। लेकिन ऐसी तकनीकें दवा कंपनियों को खत्म करने के बजाय उनके काम करने के तरीके को भी बदल सकती हैं।
- मैकडॉनल्ड्स (McDonald’s): प्रयोगशाला में तैयार मांस और वैकल्पिक खाद्य पदार्थों का विस्तार फास्ट फूड उद्योग को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, इससे मैकडॉनल्ड्स जैसे वैश्विक ब्रांड का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा, ऐसा मानने के लिए कोई ठोस आधार नहीं है।
क्या सचमुच बंद हो जाएंगी ये कंपनियां?
इन दोनों सूचियों की खास बात यह है कि इनमें अलग-अलग क्षेत्रों की बड़ी कंपनियों को भविष्य की तकनीकों और बाजार में संभावित बदलावों के आधार पर चुना गया है। भारत में कोयले और तेल से जुड़े कारोबार के सामने ऊर्जा परिवर्तन की चुनौती है, जबकि आईटी कंपनियों को एआई के कारण सेवाएं देने के तरीके में बदलाव करना पड़ सकता है। वाहन उद्योग में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती भूमिका और वैश्विक स्तर पर वित्त, मनोरंजन तथा खुदरा कारोबार में डिजिटल तकनीकों का विस्तार भी कंपनियों के लिए नई परिस्थितियां बना रहा है।
लेकिन किसी कंपनी के सामने चुनौती पैदा होने और उसका अस्तित्व खत्म होने में बड़ा अंतर है। कंपनियां नई तकनीक अपनाकर, नए कारोबार शुरू करके, दूसरी कंपनियों का अधिग्रहण करके और बदलती मांग के अनुरूप खुद को ढालकर लंबे समय तक टिक सकती हैं।
इसलिए इन सूचियों को भविष्य का निश्चित फैसला मानने के बजाय एआई की ओर से पेश किए गए संभावित जोखिमों की सूची के रूप में देखना चाहिए।
सवाल यह नहीं कि ये 20 कंपनियां निश्चित रूप से खत्म हो जाएंगी। सवाल यह है कि 2047 और 2050 की दुनिया में टिके रहने के लिए आज की कारोबारी दिग्गज कंपनियां अपने काम करने के तरीके और तकनीक में कितना बदलाव कर पाएंगी।

