नाज़िया खान-
हम उन बुज़ुर्गों में से हैं, जिन्होंने इस लड़के की जर्नी दस साल से देखी है। पढ़ो-लिखो, आइयेस-वाइएस बनो वाले फेज़ में, जब इसे लगता था, दिल टूटने से आईएएस बन जाता है इंसान।
उस वक़्त भी इश्क़-मोहब्बत लिखे या करंट अफेयर्स पर, अपनी एज से ज़्यादा मैच्युरिटी दिखती थी। फिर बहुत कुछ हुआ, ट्रैक चेंज हुआ करियर का। स्ट्रगल फेज़ भी आया।
फिर पाँच साल पहले महामानव को निर्लज्ज बोल दिया भाई ने, उस ट्वीट ने तहलका मचा दिया, FIR हो गई, नौकरी से हाथ धोया, आज तक ने बाहर का रास्ता दिखा दिया और रातों-रात देश भर में फेमस कर दिया। भाईसाब ट्विटर पर दद्दा बन गए। लाखों फॉलोअर्स मिल गए। मैं तब की-पैड क्रांतिकारी कहती थी।
पता नहीं किस एटीट्यूड में इधर आना छोड़ दिया और ट्विटर पर ही डेरा जमा लिया तो पूछने पर बताया, जब लोग ट्रोल करते हैं तो जो अनजान लोग हैं, जिन्हें कभी जाना नहीं, जिनके अस्तित्व का भी पता नहीं, वे मुझे गालियां दें तो क्या ही फ़र्क़ पड़ता है। उसके कोई मायने ही नहीं। लेकिन जो लोग बरसों से जुड़े हैं, मुझे जानते हैं, जिनसे अटैचमेंट है, वे ट्रोल करें तो बहुत असर पड़ता है। इसलिये पीस ऑफ माइंड के लिये अवॉयड करता हूँ। बात ठीक भी थी।
जो लड़का कहीं किसी सम्मान, अवार्ड को लेने जाने में घबराता था कि भीड़ होगी इतने लोगों की। ‘स’ और ‘श’ के उच्चारण की गड़बड़ी से कैमरा फेस करने से हिचकता था, उसने अपने सारे डर ओवरकम किये। क्वालिटी वीडियो बनाना शुरू किए अपने यू-ट्यूब चैनल पर और फिर हालिया घटनाओं में जिस तरह फील्ड में उतरकर रिपोर्टिंग की, अब यह सम्मान जस्टिफाय हुआ। इस लायक़ बनने के लिये वाक़ई मेहनत की है, इसलिये हर जगह रिकग्निशन मिल रही है।
अभी बहुत कुछ करना है, सुधार का भी बहुत स्कोप है और बेहतर से बेहतरीन बनने का भी। और ग्रोथ भी सही डायरेक्शन में हो रही है। ख़ूब तरक़्क़ी करो, ख़ूब नाम कमाओ। कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान मिलने की बहुत मुबारकबाद।


वर्ष 2025 के लिए मिले “कुलदीप नैयर पत्रकारिता सम्मान” से भारी महसूस कर रहा हूँ। इससे ज़िम्मेदारी और अधिक बढ़ गई है। पूरी कोशिश करूँगा कि बड़े-बुजुर्गों की उम्मीदों का मान रखूँ। आप सबके आशीर्वाद, स्नेह और प्यार को शायद ही कभी चुका पाऊँ। मेरा दिली आभार स्वीकार करें।
-श्याम मीरा सिंह
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