राकेश कायस्थ-
अब समय आ गया है कि देश गोदी मीडिया की चिंता छोड़कर गोदी अदालतों पर बात करे। मीडिया का विकल्प तो आपको फिर भी मिल जाएगा, न्यायालय का विकल्प कहाँ से लाएँगे?
हया का लिबास तेजी से उतर रहा है और काले कोट वाले बड़े-बड़े हाकिम नंगे दिखाई दे रहे हैं। बड़ी अदालत जब किसी मामले पर बहुत कड़ा ऑब्जर्वेशन लेती है तो देश समझ जाता है कि फैसला ठीक इसका उल्टा होगा।
बड़े न्यायिक ओहदो पर ‘खाऊ-पकाऊ’ लोगों की नियुक्ति अब अपवाद नहीं बल्कि नियम है। इसलिए बड़ी अदालतों के बर्बाद होने पर जज बिरादरी की ओर से कोई चिंता उभरकर सामने नहीं आती है।
कई साल पहले सुप्रीम कोर्ट के वकील का बयान बहुत चर्चित हुआ था। वकील ने अदालत में कहा था “मी लॉर्ड को कभी बुर्का पहनकर कोर्ट कैंपस में घूमना चाहिए और ये सुनना चाहिए कि कोर्ट के बारे में लोग अब किस तरह की बातें कर रहे हैं।”
ये वाकया 2014 से पहले का था। उसके बाद से ना जाने कितना पानी बह चुका है। जो बातें ढँकी छिपी थी अब आम हो चुकी है। वरिष्ठ वकील खुलकर कहने लगे हैं कि बड़े जजों को ब्लैक मेल करने के लिए बीजेपी ने बकायदा एक सेल बना रखा है।
संघ के लाडले नफरती और चर्चित यू ट्यूबर पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का भाषण आप में से ज्यादातर लोगों ने सुना होगा जब वो बता रहे हैं कि रंजन गोगोई को मोदी ने एक चिट दिया, जिसमें उनका कच्चा-चिट्ठा था। इसके बाद गोगोई ने राम जन्मभूमि पर फैसला दिया और फिर राज्यसभा गये। ब्लैकमेल करके ‘राष्ट्रहित’ में फैसला करवा लेने वाले पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के इस दावे पर हॉल में मौजूद श्रोतागण ने भरपूर तालियाँ बजाई थीं। समझना मुश्किल नहीं है कि मोदी ने इस देश को किसी ‘बनाना रिपब्लिक’ से भी गया गुजरा बना दिया है।
न्यायालय के सम्मान की चिंता अब सबसे ज्यादा बीजेपी-आरएसएस के गुंडों को सता रही है। किसी भी कुर्सी का सम्मान उसी वक्त है, जब तक उस पर बैठा आदमी अपने पद के अनुरूप आचरण करता हो। मुझे ये बहुत साफ दिखाई दे रहा है कि जनता का अगला बड़ा हल्ला बोल इस देश में इंसाफ की कुर्सी पर बैठे भ्रष्टतम लोगों के खिलाफ होगा।
हिटलर ने अपना विपक्ष बनाया। मीडिया बनाया। अपना पुलिस बल बनाया, जिसे “गेस्टापो” नाम दिया गया। उसने अपने धार्मिक और सामाजिक संगठन भी बनाए। अपने अखबार निकाले। और अंत में न्यायपालिका पर भी संपूर्ण कब्जा कर लिया। ताकि जर्मनी की सत्ता पर अनियमित काल तक कब्जा बना रहे। लेकिन विधि का विधान कौन जानता है। हिटलर का अंत दिल दहला देने वाला रहा। उसे खुदकुशी करनी पड़ी। इसी तरह इटली के तानाशाह मुसोलिनी को तो उनके देश के लोगों ने मौत के बाद भी शहर के चौराहे पर लटका कर रखा। इतिहास खुद को दोहराता है। ये सच है। और ये भी उतना ही बड़ा सच है कि हर तानाशाह का अंत होता है। समय चाहे जितना लग जाए। इसलिए हौसला बनाए रखना बेहद जरूरी है।
-संजय कुमार

