सूरज कुमार बुद्ध-
आकाश आंनद के साथ अन्याय!
गैंगस्टर अतीक अहमद ने दलितों की अनेकों जमीनें कब्जाई हुई थी, उसने दलितों और गरीब मजलूमों पर अथाह जुल्म किया था। अतीक अहमद बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड का मुख्य हत्यारा भी रहा है..
लेकिन फिर भी बहन जी ने उसकी पत्नी शाइस्ता परवीन को प्रयागराज महापौर चुनाव हेतु टिकट दिया था। जब पत्रकारों ने बहन जी से इस पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा था कि अतीक अहमद के अपराधों की सजा उसकी पत्नी को क्यों दी जाएगी? बाद में अदालत द्वारा अतीक अहमद को उम्रकैद की सजा दिए जाने के बाद बहन जी ने शाइस्ता परवीन का टिकट काट दिया।


अब आज आकाश आनंद जी को पार्टी से निकाले जाने पर बहन जी ने कहा कि उन्हें अशोक सिद्धार्थ जी की गलतियों की वजह से पदमुक्त किया गया। अब सवाल यह है कि बहन जी जब गैंगस्टर अतीक अहमद के अपराधों की सजा उसकी बीवी शाइस्ता परवीन को नहीं दे रहीं थीं, फिर आप अशोक सिद्धार्थ जी की गलतियों की सजा आकाश आनंद को क्यों दे रही हैं? आकाश आनंद के साथ ऐसा भेदभाव क्यों बहन जी?
माननीया बहनजी ने ही अशोक सिद्धार्थ जी की बेटी प्रज्ञा से आकाश आनंद की शादी करवाई थी। आज आप ही कह रही हैं कि उस लड़की का आकाश आनंद पर प्रभाव पड़ेगा। यह बात सर्वथा अनुचित है।



माननीया बहन जी, आप हमारी आदर्श हैं, सर्वमान्य नेता हैं लेकिन मैं बहुत ही सम्मान के साथ यह कहना चाहता हूँ कि बसपा में शुरू से ही आकाश आनंद जी के साथ अन्याय हो रहा है। अगर कुछ गलतियां थीं भी तो आप उन्हें डांट फटकार कर सही दिशा दिखातीं। आकाश आनंद को कभी Immature बताकर पदमुक्त कर देना तो कभी ससुर को दोषी बताकर उनकी पत्नी प्रज्ञा को बीच में घसीटते हुए उन्हें पूर्णतः पदमुक्त कर देना उनकी छवि का मजाक बनाने जैसा है। यह सरासर अन्याय है।
आदरणीय बहन जी, जब आकाश आनंद जी को बार बार इसी तरह अपमानित करना था तो आपने उनकी शादी अशोक सिद्धार्थ जी की बेटी से कराई ही क्यों? इस पूरे प्रकरण में उस बेटी की तो कोई गलती भी नहीं है, फिर इस विवाद में प्रज्ञा को क्यों घसीटा जा रहा है?
आकाश आनंद जी को BSP से साइडलाइन कर दिए जाने से पूरा समाज आहत है। आज युवाओं को BSP से जोड़ने की वही तो एक कड़ी थे, अफसोस आपने उन्हें भी अपमानित करके किनारे कर दिया। मैं बहन जी के इस फैसले से पूर्णतः असहमत हूँ। आपका यह फैसला न तो पार्टी के हित में है और न ही बहुजन समाज के हित में।
पीयूष त्रिपाठी-
यह पहली बार नहीं है जब बहन जी ने अपने फैसले से चौंकाया है। मुझे याद आता है 2003 का अगस्त। उस समय मैं लखनऊ में दैनिक जागरण में पत्रकारिता में हाथ पांव मार रहा था। तब वह बीजेपी के सहयोग से उत्तर प्रदेश में सरकार चला रही थीं । शायद उनकी पार्टी की कोई रैली थी। रैली से एक दिन पहले उन्होंने प्रेस कांफ्रेंस में पत्रकारों से हंसते हुए कहा कि आप लोग कल रैली में जरूर आइएगा। वहां आपको बहुत मसाला मिलेगा।
अगले दिन रैली में कार्यकर्ताओं के बीच में उन्होंने भाजपा से गठबंधन तोड़ने की घोषणा कर दी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया।
उसके बाद सपा की सरकार बन गई जो 2007 तक रही। उसके बाद बहन जी पूरी ताकत के साथ सत्ता में लौटीं और पूरे पांच साल सरकार चलाई। तब भी राजनीतिक विश्लेषकों को उनके सत्ता में लौटने का आभास नहीं था लेकिन वह पूरी ताकत के साथ सत्ता में लौटीं और सबको चौंकाया।



Punit ahukla
March 4, 2025 at 8:21 pm
Aakash aanand ne kitna mal diya likhne ke liye. Ye to batao.