लखनऊ। करीब ₹4,700 करोड़ की लागत से बने 63 किलोमीटर लंबे लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के उद्घाटन के महज 24 दिन बाद सड़क 84 स्थानों पर धंसने का मामला सामने आया है। सड़क में दरारें, धंसाव और क्षति की घटनाओं के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बड़ा फैसला लेते हुए मरम्मत पूरी होने तक एक्सप्रेसवे पर टोल वसूली रोक दी है।
दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई 2026 को किया गया था। लगातार बारिश के बाद सड़क कई स्थानों पर धंस गई और किनारों की मिट्टी बहने लगी। इसके बाद NHAI ने निर्माण एजेंसी PNC इंफ्राटेक को नोटिस जारी किया और मरम्मत पूरी होने तक कंपनी को किसी प्रकार का भुगतान नहीं करने का निर्णय लिया।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सप्रेसवे की मरम्मत पर करीब ₹3 करोड़ खर्च होने का अनुमान है और यह पूरी लागत PNC इंफ्राटेक को ही वहन करनी होगी।
PNC इंफ्राटेक पर कार्रवाई
NHAI के क्षेत्रीय अधिकारी के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया है कि परियोजना में कथित लापरवाही के चलते PNC इंफ्राटेक के प्रोजेक्ट मैनेजर और दो इंजीनियरों को हटा दिया गया है। साथ ही कंपनी को दो वर्ष तक NHAI की नई परियोजनाओं में शामिल नहीं किए जाने (नॉन-परफॉर्मर श्रेणी में रखने) का निर्णय लिया गया है।
84 जगह मिलीं खामियां
रिपोर्ट के अनुसार, एक्सप्रेसवे पर कई प्रकार की तकनीकी खामियां सामने आई हैं। इनमें सड़क का धंसना, पुलों के पास दरारें, मिट्टी का कटाव, रिटेनिंग वॉल के पास नुकसान और सर्विस रोड के हिस्सों में क्षति शामिल है। NHAI ने सभी स्थानों की सूची तैयार कर मरम्मत कार्य शुरू करा दिया है।
उद्घाटन में शामिल थे कई बड़े नेता
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन 13 जुलाई को केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया था।
उठ रहे हैं सवाल
उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एक्सप्रेसवे के कई स्थानों पर धंसने और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई के बाद परियोजना की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। विपक्ष और सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं कि यदि निर्माण में इतनी गंभीर कमियां थीं, तो परियोजना का उद्घाटन किस आधार पर किया गया और गुणवत्ता नियंत्रण की जिम्मेदारी किसकी थी।
हालांकि, केंद्र सरकार या NHAI की ओर से निर्माण गुणवत्ता को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान अभी सामने नहीं आया है। वहीं, PNC इंफ्राटेक की ओर से भी इस मामले पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ऐसा नहीं था कि लखनऊ कानपुर एक्सप्रेसवे जल्दबाजी में बनाया गया। बकायदा साढ़े 4 साल से ज्यादा का समय लिया गया। खूब सारे टेस्ट हुए, उसकी रिपोर्ट अच्छी बताई गई।
लेकिन जब शुरू हुआ तो सारी पोल खुल गई। इतनी खराबी तो गाँव की लोकल सड़क पर नहीं निकलती जितना इस एक्सप्रेसवे में निकली है। बस इसीलिए इसे बनाने वाली कंपनी पर कार्रवाई हुई। इंजीनियर से लेकर प्रोजेक्ट मैनेजर तक पर गाज गिरी।
-राजेश साहू, पत्रकार, दैनिक भास्कर


