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सफलता और मौत : डॉक्टरी की सबसे बड़ी डिग्री पाने वाली प्रीति कश्यप का भरी जवानी में किडनी फेल से निधन, उनका छह साल पहले लिखा पढ़ें!

Post from Priti Kashyap (17 Aug 2020) about her 14-year medical career, sacrifices, and advice to aspiring doctors.

डॉ प्रदीप चौधरी-

डॉ. प्रीति कश्यप का बहुत कम उम्र में गंभीर किडनी की बीमारी के चलते निधन हो गया। यह बेहद दुखद है। उन्हें मेरी विनम्र श्रद्धांजलि और शोक संतप्त परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएँ।

डॉ. प्रीति ने कई साल पहले यह पोस्ट लिखी थी, जब उन्हें किडनी की गंभीर बीमारी का पता चला था।

इतनी गंभीर बीमारी का पता चलते ही आधा मनोबल तो वैसे ही टूट जाता है। और अगर आप खुद डॉक्टर हों, तो बीमारी का मतलब, उसका संभावित भविष्य और उसके परिणाम आपके सामने और भी स्पष्ट होते हैं।

मैडम ने अपनी पोस्ट में लिखा था कि MCh तक पहुँचने के लिए उन्होंने अपने शरीर के साथ कितना कठोर व्यवहार किया। मैं यह नहीं कह रहा कि अगर ऐसा न किया होता तो यह बीमारी कभी नहीं होती। ऐसा दावा करना गलत होगा। लेकिन इतना ज़रूर कहूँगा कि शरीर को लगातार नींद से वंचित रखना, दर्द निवारक दवाओं का बार-बार सेवन, लगातार तनाव और अनियमित जीवनशैली कई बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।

मॉडर्न मेडिसिन की भाषा में बहुत-सी बीमारियाँ ऑटोइम्यून होती हैं, कुछ आनुवंशिक होती हैं और कुछ के कारण आज भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। लेकिन जितनी मेरी समझ है, हमारे शरीर में कई बार बीमारियों का एक “लोडेड गन” पहले से मौजूद होता है। ट्रिगर दबेगा या नहीं, कब दबेगा, इसमें परिस्थितियों की बड़ी भूमिका होती है। उस लोडेड गन पर हमारा नियंत्रण नहीं होता, लेकिन परिस्थितियों पर कुछ हद तक ज़रूर होता है।

यह कहानी सिर्फ डॉ. प्रीति की नहीं है। मैं ऐसे बहुत लोगों को जानता हूँ जिन्होंने ज़्यादा देर तक पढ़ने के लिए नशे का सहारा लिया। आज वे अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं, लेकिन उस दौर की कीमत उनका शरीर आज भी चुका रहा है।

आजकल पूरी रात जागकर पढ़ने का एक कल्चर बन गया है। यह हर हाल में आपके लिए अच्छा नहीं हो सकता। किसी को कम नुकसान होगा, किसी को ज़्यादा, लेकिन शरीर इसकी कीमत ज़रूर वसूलता है।

कुछ दिन पहले सोलह साल की एक बच्ची ओपीडी में आई। वह नीट की तैयारी कर रही थी। हाई ब्लड प्रेशर और एंग्जायटी की शिकायत थी। पूछने पर बोली, “रात भर पढ़ती हूँ। डॉक्टर बन जाऊँ, उसके बाद मर भी जाऊँ तो कोई बात नहीं।”

यह उसकी अपनी लाइन थी।

मुझे लगा, हमने सफलता की परिभाषा कहीं बहुत गलत बना दी है। डॉक्टर बनने के लिए रात-दिन मेहनत करनी पड़ती है, इसमें कोई दो राय नहीं। लेकिन अपने शरीर को खत्म करना उस मेहनत का अनिवार्य हिस्सा नहीं है।

नौकरी की बात करें तो वहाँ स्थिति और भी कठिन है। आजकल ओपीडी में आने वाली बहुत-सी युवा महिलाओं की समस्याओं के पीछे वर्क-लाइफ बैलेंस का बिगड़ना एक बड़ा कारण दिखाई देता है। हार्मोनल गड़बड़ियाँ, अनिद्रा, एंग्जायटी, माइग्रेन, हाई बीपी, पीसीओएस जैसी समस्याओं में तनाव की भूमिका बार-बार सामने आती है।

विश्वास कीजिए, क्रॉनिक स्ट्रेस धीरे-धीरे हमारी ज़िंदगी को खा रहा है।

सरकार, संस्थानों और अस्पतालों को इस दिशा में गंभीरता से सोचना चाहिए। काम के घंटे, नाइट शिफ्ट, लगातार ड्यूटी और पर्याप्त विश्राम के लिए बेहतर नियम बनने चाहिए।

और सबसे ज़्यादा ज़रूरत मेडिकल शिक्षा में है। जूनियर डॉक्टरों से सीखने के नाम पर अमानवीय कार्यघंटे लेना किसी भी स्वस्थ व्यवस्था की निशानी नहीं है। अच्छे डॉक्टर बनाने के लिए उनका जीवित और स्वस्थ रहना भी उतना ही ज़रूरी है।

डॉ प्रीति कश्यप ने 17 अगस्त 2020 को जो कुछ लिखा था एफबी पर, उसका हिंदी अनुवाद पढ़ें-

डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे सभी युवाओं और इस सफर पर पहले से आगे बढ़ रहे लोगों से मैं कुछ साझा करना चाहती हूं। मेरी बात शायद थोड़ी अटपटी लगे।

अपने 14 वर्षों के करियर में मैंने बहुत मेहनत की और वह सब हासिल किया, जो चाहती थी। चिकित्सा की सर्वोच्च डिग्री—एमसीएच—प्राप्त की। परिवार और एक बेटा मिला, लेकिन यह सब मेरे स्वास्थ्य की कीमत पर हुआ।

पढ़ते-पढ़ते न जाने कब जिंदगी बीत गई। जब जीने का समय मिला, तब पता चला कि मैं अंतिम चरण की किडनी की बीमारी से पीड़ित हूं।

मुझे याद है, पढ़ाई के दौरान मैंने अनगिनत दर्दनिवारक गोलियां खाईं। बुखार में भी लंबे समय तक काम किया। न जाने कितनी रातें बिना सोए गुजारीं। चाय और बिस्कुट के सहारे जीवन चलता रहा। मुझे कभी उच्च रक्तचाप या कोई दूसरी बीमारी नहीं थी।

लोग कहते हैं कि मैं एक अच्छी सर्जन हूं, लेकिन इसकी कीमत मेरी किडनियों ने चुकाई। अब मेरा भविष्य क्या होगा, मैं नहीं जानती। मगर इतना जरूर जानती हूं कि अपने प्यारे मरीजों के इलाज के लिए मैंने जितनी कठिनाइयां झेलीं, अब शायद उतनी प्रभावी भी नहीं रह पाऊंगी।

इसलिए सभी युवाओं से मेरा अनुरोध है कि मेरे अनुभव से सीख लें। अपने जीवन के हर दिन का आनंद उठाएं। पढ़ाई जीवन का एक हिस्सा है, पूरा जीवन नहीं।

ईश्वर आप सभी का भला करे।

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