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आज के अखबार : E20 पर ‘आप’ का धरना, प्रदर्शन और मार्च तथा SIAM की चिट्ठी पर ‘खबर’ का कचरा करना

Left: Arvind Kejriwal and Manish Sisodia among a crowd around a large pile of bundled petitions at a protest over E20 petrol in New Delhi; right: a smartphone showing a 404 Page Not Found error.

हर काम में जबरदस्ती। लोकतांत्रिक होने का दिखावा भी नहीं। योग्यता, क्षमता नहीं हो तब भी।

संजय कुमार सिंह

आज ई-20 के विरोध को कुचलने की सरकारी कोशिश, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चर्रस (SIAM) पर संभावित दबाव और चिट्ठी वापस लिए जाने की बड़ी खबर नहीं के बराबर छपी है। देशबन्धु में यह खबर टॉप पर दो कॉलम में है। शीर्षक है, ई-20 के विरोध में धरने पर बैठे केजरीवाल। आज यह खबर अमर उजाला और दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर नहीं है। नवोदय टाइम्स में यह पहले पन्ने पर दो कॉलम में है लेकिन उसके बराबर में दो कॉलम में भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी का बयान है, गुमराह कर रहे हैं केजरीवाल। केजरीवाल के हवाले से जो खबर है और जिसके खिलाफ सुधांशु त्रिवोदी के इस बयान को बराबर महत्व दिया गया है, उसका शीर्षक है – ई-20 का विरोध जारी रहेगा। जाहिर है, सुधांशु त्रिवेदी इसे गुमराह करना नहीं कह रहे होंगे। खबर भी ऐसी नहीं है। अभी यह मुद्दा नहीं है। खबर के अनुसार, आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक, अरविन्द केजरीवाल और पार्टी के नेताओं ने देश में ई-20 की बिक्री के खिलाफ 2.30 लाख से अधिक ज्ञापन सौंपने के लिए करीब 100 लोगों के साथ प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकाला था, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें फिरोज शाह मार्ग पर ही रोक दिया। इस खबर के साथ सुधांशु त्रिवेदी का जो बयान छपा है उसके अनुसार, दुनिया भर के कई देशों में एथनॉल मिला हुआ ईंधन इस्तेमाल हो रहा है। भाजपाई राजनीति और प्रचारकों की यह विशेषता है कि दुनिया के कई देशों में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होता है, कहने पर इनके तर्क दूसरे होते हैं। वह भी तब जब ईवीएम का विरोध भाजपा ही करती थी। उसी ने इसकी खामियां सार्वजनिक की थीं। अब वही इसकी समर्थक बन गई है। आज यह खबर कई कारणों से महत्वपूर्ण है और पहले पन्ने पर होनी चाहिए थी। और खबर सिर्फ ज्ञापन देने, रोक दिए जाने या धरना देने की नहीं है। खबर यह है कि SIAM ने मंगलवार देर रात एक बयान जारी करके ई-20 से संबंधित पत्र पर अपनी ‘स्थिति’ स्पष्ट की। भारतीय वाहन निर्माता उद्योग की इस संस्था ने कहा है कि मीडिया रिपोर्ट्स में उसकी चिट्ठी के कुछ हिस्सों को ही चुना गया था। SIAM ने ज़ोर देकर कहा कि रिपोर्ट्स में बताए गए आंकड़ों की सही तरह से जांच-पड़ताल ज़रूरी है। खबरों के अनुसार, SIAM ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सामने E20 पेट्रोल को लेकर चिंताएं जताई थीं। रिपोर्ट्स में क्लोराइड और नमी के ज़्यादा लेवल और फ़्यूल इंजेक्टर, फ़्यूल पंप और एग्ज़ॉस्ट से जुड़े पार्ट्स को बदलने की बढ़ती ज़रूरत का ज़िक्र किया गया था। ई-20 के खिलाफ यह और ऐसी ही शिकायत रही है। इसपर काफी कुछ लिखा जा चुका है। SIAM की चिट्ठी से पहले कही गई बातों की पुष्टि हो रही थी। इसीलिए उसका उपयोग किया गया। बाद में SIAM ने स्पष्ट किया कि उसका कम्युनिकेशन स्टेकहोल्डर्स के बीच होने वाली रेगुलर टेक्निकल बातचीत का हिस्सा था।

कोलकाता के अंग्रेजी अखबार, द टेलीग्राफ ने इसे अंदर के पन्ने पर छापा गया है। फ्लैग शीर्षक है, केजरीवाल ने जबरन थोपने की आलोचना की, ट्रम्प का संबंध बताया। मुख्य शीर्षक है, पुलिस ने आप के ई20 मार्च को रोका। इस खबर के अनुसार केजरीवाल ने कहा, “हमारे पास प्रधानमंत्री को देने के लिए 2,33,238 याचिकाएं हैं। एक महीने पहले, हमने ई20 ब्लेंडेड पेट्रोल को जबरन थोपने के मुद्दे पर चर्चा के लिए समय मांगा था, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला। आज, जब हम ये याचिकाएं सौंपना चाहते हैं, तो पुलिस ने कहा कि वे हमसे नहीं मिलेंगे। वे ये याचिकाएं एक ट्रक में भर कर उन तक पहुंचाएंगे,”। केजरीवाल ने आगे कहा, “यह तानाशाही रवैये को दिखाता है। जिस तरह उन्होंने पूरे NEET पेपर लीक मामले में तानाशाही दिखाई थी, उसी तरह वे E20 के मुद्दे पर भी अड़े रहकर वैसा ही रवैया अपना रहे हैं।” उन्होंने सवाल किया कि अगर E20 से इंजन के पुर्जे खराब हो रहे हैं और माइलेज कम हो रहा है, तो इसे “जबरन क्यों थोपा” जा रहा है। ऐसा लगता है कि इसकी एकमात्र वजह प्रधानमंत्री मोदी पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दबाव है… वे भारत को अमेरिका से इथेनॉल खरीदने और उसे यहां बेचने के लिए मजबूर कर रहे हैं।” केजरीवाल ने जो कहा वह यूं ही नहीं है। नितिन गडकरी ने ई-20 से खराब होने वाली एक भी गाड़ी दिखाने के लिए कहा था। यू-ट्यूबर मनीष कश्यप और दूसरे लोगों ने इसपर वीडियो बनाया तो उन्हें डराया, धमकाया और परेशान किया गया। अपशब्द कहे गए और एफआईआर तक करवाई गई। एक शिकायतकर्ता ने माफी मांग ली तो उसका सरकार और सरकार समर्थकों ने पूरा प्रचार किया। लेकिन तहसीन पूनावाला काफी समय से खराब गाड़ियों की शिकायत लेकर गाड़ी और गाड़ी वालों के साथ मिलने के लिए नितिन गडकरी से समय मांग रहे हैं। उन्हें समय मिलना तो दूर दिल्ली पुलिस द्वारा रोका जाता रहा है और घर में ही नजरबंद करने तक का आरोप वे लगा चुके हैं। इसके बाद अरविन्द केजरीवाल के साथ यह सब हुआ। खबर तहसीन पूनावाला की भी नहीं छपी, किसी मीडिया वाले ने नितिन गडकड़ी या एपस्टीन मंत्री से इस बारे में पूछा हो तो उसकी खबर नहीं है। लगभग ऐसा ही डिजिटल बैंकिंग के साथ हुआ था। उसकी भी शिकायत नहीं सुनी गई और डिजिटल बैंकिंग से समस्या कम पढ़े लिखे लोगों को है सो उनकी सुनवाई तो नहीं ही हुई यह प्रचारित भी किया गया कि पूर्व वित्त मंत्री ने इसकी आलोचना की थी जबकि अब भी गांव-गांव इसका उपयोग हो रहा है। सच्चाई यह है कि भिन्न शहरों गांवों में जो इक्का-दुक्का समस्या होती है उसकी कोई सुनवाई नहीं है और खबर तब बनती है जब कोई किसी मृत खाताधारक का शब कब्र से निकालकर बैंक पहुंच जाता है। अगर दिल्ली में नेताओं को महीनों मंत्री से शिकायत करने के लिए समय नहीं मिले तो आप समझ सकते हैं कि गांव देहात में क्या हालत होगी। पर वह अलग मुद्दा है।

दिल्ली के मेरे पांच अंग्रेजी अखबारों में यह खबर दि एशियन एज और टाइम्स ऑफ इंडिया में ही पहले पन्ने पर है। द हिन्दू में अंदर होने की सूचना है। हालांकि यह भी केजरीवाल की चेतावनी ही है, सरकार जो कर रही है वह नहीं है। दि एशियन एज में खबर सिंगल कॉलम की है लेकिन फोटो तीन कॉलम की है और टॉप पर है। शीर्षक सिंगल कॉलम का है, दिल्ली पुलिस ने प्रधानमंत्री निवास तक केजरीवाल के ई20 मार्च को रोक दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर दो कॉलम की छोटी सी है। शीर्षक है, SIAM ने कहा ईंधन में मिलावट, बाद में वापस लिया। अखबार ने इसके साथ छपी खबर के जरिए सरकारी पक्ष बताया है, ज्यादा क्लोरिन के दो ही मामले पाए गए हैं। भारत सरकार अगर प्रधानमंत्री की फेसबुक पोस्ट डिलीट होने पर मेटा के वैश्विक अधिकारियों को समन करे तो SIAM को अपनी शिकायत के बाद सरकारी खंडन आने पर क्या कहना है यह कौन नहीं समझ जाएगा। इसका नतीजा यह हुआ कि तहसीन पूना वाला ने एक खबर को शेयर कर कहा था कि वे जो सब कहते रहे हैं उसकी पुष्टि SIAM ने भी की है। उन्होंने इस खबर का लिंक शेयर किया था जो टीवी 18 (https://cnbctv18.com) का था। रिपोर्ट वापस लिए जाने के बाद खबर हटा दिए जाने का संदेश दिख रहा है और लोग तहसीन को बता रहे हैं, सरकार इतनी डरी हुई है कि इस आलेख को हटवा दिया। यह अलग बात है कि इंटरनेट पर डाली गई कोई चीज शायद ही जड़ मूल से खत्म होती हो। कुछ लोग अब दूसरा लिंक शेयर कर रहे हैं लेकिन वह मुद्दा नहीं है। मुद्दा यह है कि सरकार क्या कर रही है, क्यों कर रही है और जब उसके पास क्षमता योग्यता नहीं है तो भी क्यों कर रही है। फिर भी करना ही है तो कुछ योग्य लोगों की सेवा क्यों नहीं ले रही है। इससे अलग, आज जब दिल्ली के ज्यादातर अखबारों ने दिल्ली की खबर को लीड नहीं बनाया है तो ज्यादातर अखबारों में तमिलनाडु की खबर लीड है। उसपर आने से पहले बता दूं कि अमर उजाला की लीड थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के विमान के वायु टर्बुलेंस में घिरने से 17 लोगों के जख्मी होने की खबर है। दैनिक भास्कर की लीड पांच महीने में तेल, दाल, दूध चीनी महंगी होने की खबर है। देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, चढ़ावा चोरी पर चढ़ा सियासी पारा। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, होर्मुज को खोलने पर ईरान ओमान समझौते के करीब।

अंग्रेजी अखबारों में द टेलीग्राफ की लीड, उपचुनाव में हार पर सहयोगियों द्वारा सतर्क करने की कोशिश। प्रधानमंत्री ने नीतिश कुमार से मुलाकर की। यही खबर दि एशियन एज में लीड है। इसका शीर्षक है, बांकीपुर की ‘अनअपेक्षित’ हार के अगले दिन नीतिश ने मोदी से मुलाकात की। फ्लैग शीर्षक दो बुलेट प्वाइंट हैं – 1) जनता जल एकीकृत प्रमुख ने कहा, शिष्टाचार मुलाकात थी 2. भाजपा ने समीक्षा के आदेश दिए; आरोप प्रत्यारोप शुरू। अंग्रेजी अखबारों में इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया और द हिन्दू की लीड एक ही खबर है। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, उदयनिधि स्टालिन को ‘महिलाओं के प्रति अपमानजनक’ टिप्पणी के लिए हिरासत में लिया गया। उपशीर्षक है, मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर डीएमके नेता को रात में ज़मानत पर रिहा कर दिया गया; उदयनिधि ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि उनका मकसद किसी को ठेस पहुँचाना नहीं था; डीएमके और टीवीके दोनों के कार्यकर्ताओं ने पूरे तमिलनाडु में विरोध प्रदर्शन किया। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड का शीर्षक है, सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट पर रोक लगाने के लिए नियम कड़े किए, आरबीआई से एसओपी तैयार करने के लिए कहा गया। मुझे लगता है कि अब इसका कोई फायदा नहीं है और जिन्हें गिरफ्तार कर लूटा जा सकता था सब लुट गए। अब जो बचे हैं उन्हें पता है कि मामला फर्जी है। वरना पहली बार जब मेरे एक परिचित के पास फोन आया तो मुझे भी सोचना पड़ा था कि अगर किसी ने फंसाने के लिए ही ऐसा करने की योजना बनाई हो तो बचा कैसे जाएगा। मुझे लगता है कि यह मामला भी तारीख पर तारीख का शिकार हुआ और सुप्रीम कोर्ट ने खुद ऐसा किया है तो पता नहीं किसके लिए। ऐसी खबर को अब लीड बनाने का भी कोई मतलब नहीं है। और मैंने इस शीर्षक के बारे में जो लिखा वह खबर के लिए ही है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश अलग मुद्दा है और वह मेरी चर्चा का विषय नहीं होता है। हिन्दुस्तान टाइम्स में आज पहले पन्ने से पहले अधपन्ना है और अधपन्ने पर आधा ही विज्ञापन है। बाकी की खबरों में भी ई20 वाली खबर नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया में भी पहले पन्ने से पहले का पन्ना हिन्दुस्तान टाइम्स जैसा ही है। लेकिन यहां भी अधपन्ने पर ई20 की खबर नहीं है। लीड का शीर्षक है, दो हजार रुपए से ऊपर के यूपीआई भुगतान के लिए सरकार शुल्क लेने की इजाजत दे सकती है।

Man with glasses wearing a light blue shirt sits in a chair in front of a bookshelf-filled background; a red caption badge is visible at the bottom.

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।   

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