नितिन गड्ढाकरी का NHAI बीजेपी के लिए दलाली जुटाने की बढ़िया मशीन बन चुका है।
आज लखनऊ–कानपुर के जिस एक्सप्रेसवे बनाने वाली बीजेपी सांसद की कंपनी PNC को ब्लैकलिस्टेड किया गया है, उसे 16 जुलाई को ही 3483 करोड़ का नया ठेका मिला है।
बीजेपी सांसद और मोदी के दोस्त नवीन जैन की इस कंपनी को सिर्फ 2% का जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया।
यह नहीं बताया गया कि 3483 करोड़ के उन 2 प्रोजेक्ट्स का क्या होगा, जो PNC इंफ्राटेक कंपनी को मिले हैं।
मोदी सत्ता का करप्शन NDA के गले तक आ चुका है।
-सौमित्र राय, वरिष्ठ पत्रकार


नई दिल्ली। करीब ₹4,700 करोड़ की लागत से बने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक हलकों में दावा किया जा रहा है कि उद्घाटन के कुछ ही दिनों के भीतर एक्सप्रेसवे कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके चलते मरम्मत कार्य शुरू करना पड़ा और मरम्मत पूरी होने तक टोल वसूली भी रोक दी गई।
इसी बीच राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। आरोप लगाया जा रहा है कि जिस PNC इंफ्राटेक पर एक्सप्रेसवे के निर्माण में कथित लापरवाही के आरोप लगे हैं और जिसे कथित तौर पर “नॉन-परफॉर्मर” घोषित करने की प्रक्रिया चल रही है, उसी कंपनी को ₹3,483 करोड़ की दो नई सड़क परियोजनाएं भी आवंटित कर दी गई हैं।
इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर कई लोगों ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और NHAI से जवाब मांगा है। एक पोस्ट में सवाल किया गया कि यदि किसी कंपनी के काम को लेकर इतनी गंभीर आपत्तियां हैं, तो उसे नई परियोजनाएं किस आधार पर दी गईं। पोस्ट में यह भी पूछा गया कि यदि ऐसा हुआ है तो क्या यह सरकारी ठेकों के आवंटन की प्रक्रिया पर सवाल नहीं खड़े करता।
हालांकि, NHAI की ओर से अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है कि PNC इंफ्राटेक को नई परियोजनाएं किन परिस्थितियों में दी गईं और क्या उसे वास्तव में “नॉन-परफॉर्मर” घोषित करने की कोई प्रक्रिया चल रही है।
वहीं, सरकार या NHAI की ओर से एक्सप्रेसवे की क्षति, टोल स्थगन और नई परियोजनाओं के आवंटन के बीच संबंध को लेकर भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो यह मामला सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता, ठेका आवंटन प्रक्रिया और सार्वजनिक धन के उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है। दूसरी ओर, जब तक आधिकारिक जांच या दस्तावेज सामने नहीं आते, तब तक इन आरोपों को दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
हैलो NHAI,
जिस PNC इंफ्राटेक को ₹4,700 करोड़ की लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे परियोजना के कथित खराब निष्पादन के कारण “नॉन-परफॉर्मर” घोषित करने की तैयारी की जा रही है, उसी कंपनी को ₹3,483 करोड़ की दो नई परियोजनाएं क्यों आवंटित की गईं?
अगर यह भ्रष्टाचार नहीं है, तो फिर क्या है?
-पियूष राय, वरिष्ठ पत्रकार
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