द टेलीग्राफ की खबर
संजय कुमार सिंह
आज पांच कॉलम की देशबन्धु की लीड का शीर्षक है, वोट चोरी साबित हो चुकी सच्चाई है। खबर के अनुसार – जयराम रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी का पूरा तंत्र अब हताशा और घबराहट में है। इस खबर का फ्लैग शीर्षक है – अमित शाह पर कांग्रेस का पलट वार। इसका कारण उनका भाषण है और उसकी खबर भी साथ है, कांग्रेस 30 साल तक सत्ता में नहीं आएगी। धरना प्रदर्शन से कुछ नहीं होगा, जनता के बीच जाएं। दि एशियन एज में भी अमित शाह की खबर पहले पन्ने पर तीन कॉलम में छपी है। हिन्दुस्तान टाइम्स की लीड खबर है, विपक्ष ने अगले आंदोलन की योजना बनाई तो अमित शाह ने कहा विरोध से कुछ हासिल नहीं होता।
वे दिल्ली में यमुना के लिए 8941 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन कर रहे थे। अमर उजाला में इस खबर का शीर्षक है, मई 2029 तक यमुना को पूरी तरह स्वच्छ कर देंगे। दि एशियन एज के अनुसार उन्होंने कहा, भाजपा की जड़ें लोगों में है, विरोध से कुछ हासिल नहीं होता है। सच्चाई यह है कि सरकार को फोटो से भी डर लगता है। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार दिल्ली के बीकानेर हाउस में प्रियंका गांधी के बेटे रेहान वाड्रा की फोटो प्रदर्शनी थी। अंतिम समय में रेहान से कहा गया कि 105 प्रदर्शित फोटुओं में से 75 हटा दी जाएं। समय इतना कम था कि कुछ भी करना मुश्किल था। उसने हटाई जाने वाली फोटो को उलट कर वहीं रहने देने का सुझाव दिया लेकिन उसे भी नहीं माना गया। यही नहीं, उससे तिरंगे की भी एक फोटो हटाने के लिए कहा गया। हालांकि उसने इसे हटाने से मना कर दिया। खबर के अनुसार, वह सीढ़ियों के पास लगी रही।
स्थिति यह है कि विरोध से काम नहीं चलेगा और सरकार को फोटो प्रदर्शनी से भी दिक्कत है। सोशल मीडिया से कार्टून तक हटवा दिए जाने की सूचना है। तमाम अकाउंट बिना किसी शिकायत बंद या रेस्ट्रिक्ट करवा दिए गए हैं। ऐसी सरकार के मुखिया कह रहे हैं, कांग्रेस के रवैये से सरकार के ईमानदार आलोचकों को नुकसान हो रहा है। यह भी कि श्रीहरिकोटा से जितनी लॉन्चिंग नहीं, उतनी कांग्रेस के फेल प्रोडक्ट की। मेनका गांधी और वरुण गांधी को साथ रखकर नरेन्द्र मोदी वंशवाद का विरोध जिस ढंग से करते रहे हैं उसमें रिहान वाड्रा की प्रदर्शनी या उसके जरिए लांच किए जाने की बात करते तो लगता कि मुद्दे पर हैं। लेकिन उन्हें अभी भी राहुल गांधी से ही दिक्कत है। वे उन्हें फेल बता रहे हैं जबकि उनकी पूरी कोशिशों के बावजूद वोट चोरी का खेल खुल कर सामने आ गया है।
आज द हिन्दू और द टेलीग्राफ के साथ हिन्दुतान टाइम्स में आरटीआई से मिली सूचना की खबर प्रमुखता से है। द टेलीग्राफ ने लिखा है, …. यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग के कदमों के खिलाफ संधू और जोशी द्वारा कम से कम 14 बिंदुओं पर जताई गई असहमति में से एक था।
इसके बावजूद, कैबिनेट सचिवालय ने इस मामले में दखल देने से परहेज किया, जबकि संधू और जोशी का कहना था कि यह ‘सीईसी और ईसी अधिनियम, 2023 की धारा 18(1) और 18(2) का उल्लंघन’ है।
आरटीआई के जवाब से इस मामले से जुड़ा 4 अगस्त का एक कैबिनेट नोट भी सामने आया है। इसमें कहा गया है: “उपर्युक्त बातें चुनाव आयुक्तों की ओर से उनकी व्यक्तिगत हैसियत से कही गई हैं। हालांकि इन्हें पूरी गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन इन्हें पूरे आयोग की ओर से आया कोई औपचारिक संदेश नहीं माना जा सकता है।”
द हिन्दू की खबर के अनुसार, …. अगले ही दिन यानी 4 अगस्त को फाइल में लिखा गया है, “आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसका गठन ऐसा है कि इसे कार्यपालिका के हस्तक्षेप से सुरक्षित रखा गया है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि यह स्वतंत्र रूप से और पारदर्शी तरीके से काम करे।” मोटा-मोटी मामला यह दिख रहा है कि चुनाव आयोग (मुख्य चुनाव आयुक्त) संविधान के अनुसार काम नहीं कर रहे थे और जिन्हें देखना था कि आयोग संविधान के अनुसार काम करे वे उसे स्वतंत्र मान रहे थे। इनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश तो शामिल हैं ही, अब मंत्रिमंडल सचिवालय या कैबिनेट सचिव भी शामिल लग रहे हैं।
कहने की जरूरत नहीं है कि चुनाव आयोग मतदाता सूची को ‘शुद्ध’ करने निकला था और यह सब कर रहा था। एसआईआर से संबंधित और भी खबरें हैं जो पहले पन्ने पर नहीं छपीं इसलिए यहां चर्चा से रह गईं। इस बीच, अमित शाह ने कहा है, मई 2009 तक शुद्ध हो जाएगी यमुना। यह नवोदय टाइम्स की लीड है और इसका उपशीर्षक है, अगले 30 साल तक सत्ता में नहीं आ सकेगी कांग्रेस। आप जानते हैं कि राहुल गांधी ने इसका कारण वोट चोरी कहा था लेकिन अमित शाह ने कहा है कि वे देश में रहते हैं और विदेश नहीं जाते हैं इसलिए चुनाव जीतने का दावा करते हैं। लोयालुहान देश में तड़ी पार होना और फिर क्लिनचिट मिल जाना मुद्दा नहीं हो सकता है।
दैनिक भास्कर की लीड सोने-चांदी की दर में कमी है। शीर्षक है, 3.8 लाख की चांदी 10 माह में 2 लाख से नीचे; सोना शीर्ष से 32 हजार सस्ता। आज के अखबारों में सरकार के प्रचार के फेर में खराब हवा की खबर भी रह गई है। अमर उजाला के अनुसार, हरियाणा और उत्तर प्रदेश समेत चार राज्यों के 13 शहरों की हवा दिल्ली से भी खराब है। इस खबर के अनुसार बांबे हाईकोर्ट ने कहा है कि मुंबई की हवा दिल्ली से जहरीली है, अफसरों को चैन की नीन्द कैसे आती है। अंग्रेजी अखबारों में टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड सरकार की एक अलग चिन्ता है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने कहा है कि अस्पताल ज्यादा पैसे लें, यह गलत है।
नरेन्द्र मोदी के भाषण की खबर आज अंग्रेजी अखबारों में अमर उजाला और इंडियन एक्सप्रेस की तरह नहीं है। नरेन्द्र मोदी के वीडियो का यह वाला अंश भाजपा के लोग सोशल मीडिया पर खूब शेयर कर रहे हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया में आज उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव की मतदाता सूची में राम ने यादव को मारा पुत्र मूर्ख चंद्र यादव का नाम होने की सूचना है। खबर में यूपी-सीईओ के हवाले से कहा गया है, राज्य में 14.8 लाख पंजीकृत वोटर हैं और इनमें 150 से भी कम के ऐसे नाम हैं और यह 0.01 प्रतिशत है। दूसरी ओर, हम चावल के इतने ही दाने से तय करने वाले लोग हैं कि चावल पका है या नहीं। ऐसे में सरकारी बचाव चाहे जो हो, मतदाता सूची कैसी है उसका अनुमान लगाया जा सकता है।
टाइम्स ऑफ इंडिया में आज चापलूसी वाली यह खबर तो पहले पन्ने पर नहीं ही है लेकिन आरटीआई वाली भी नहीं है। मोटे तौर पर आज के अखबारों से केंद्र सरकार का हेडलाइन मैनेजमेंट बिखरता या कमजोर होता लग रहा है। टाइम्स ऑफ इंडिया में सरकार के खिलाफ खबर नहीं है तो इंडियन एक्सप्रेस ने राहुल के खिलाफ भाषण तो तानकर प्रचारक नंबर वन की भूमिका निभाई है। जियो प्लैटफॉर्म्स लिमिटेड का विज्ञापन आज हिन्दी में देशबन्धु और अंग्रेजी में द टेलीग्राफ और दि एशियन एज को छोड़कर बाकी सभी अखबारों में है। अमर उजाला में विज्ञापन तो है ही, चुनाव आयोग के खिलाफ मतदाता सूची में गड़बड़ी वाली खबर पहले पन्ने पर है।
अगर आपको अभी भी लग रहा है कि चुनाव आयोग संवैधानिक संस्था है और उसे एसआईआर करने का अधिकार है तथा वह ठीक काम कर रहा है और आपके पास सारी खबरें हैं तो उत्तर प्रदेश की मतदाता सूची पर विपक्ष की प्रेस कांफ्रेंस और संबंधित खबरें पढ़िए। कल खबर थी कि करीब 13 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची फाइनल होने के बाद बदल दिए गए हैं। इससे जो निश्चित है कि उसका नाम मतदाता सूची में है वह वोट देने पहुंचेगा तो उससे कहा जाएगा कि आपका नाम मतदाता सूची में नहीं है। वह कहेगा मेरा EPIC नंबर यह रहा…. तो उसे बताया जाएगा कि यहां तो नाम कुछ और है।
चुमाव आयोग की ऐसी कई कलाकारी के दम पर अमित शाह दावा कर रहे हैं कि कांग्रेस 30 साल चुनाव नहीं जीतेगी। टाइम्स ऑफ इंडिया की यह खबर पहले पन्ने पर नहीं है। अमित शाह का दावा तो कई अखबारों में है। जबकि भारत में रहने से ही गृहमंत्री बनना होता तो संजीव भट्ट भी दावेदार हो जाएंगे जो लगातार कई साल से जेल में हैं और सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाने की सलाह लोगों ने दी ही थी। देशबन्धु में आज खबर है कि 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के बाद 154 साल पुरानी दरबार मूव की परंपरा बंद हो गई थी। उमर अब्दुल्ला की सरकार ने इसे फिर से शुरू किया और दो साल से जारी है।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।



