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सियासत

ITBP के डीजी शत्रुजीत कपूर को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए, जब उनका भाषण उनके ही बल के हैंडल पर अपलोड नहीं हो सकता तो चीफ बने रहने का क्या मतलब रह जाता है?

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों के साथ कई जगहों पर आमने-सामने की स्थिति अब भी जारी होने की बात कही थी ITBP प्रमुख ने, 50 साल पुराने हथियारों पर भी उठाए सवाल; वीडियो हटाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने दी सफाई…

Uniformed officer in camouflage speaks from a green podium to rows of soldiers in a conference hall.

भारत-चीन सीमा पर वास्तविक स्थिति को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार सवालों के घेरे में है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के एक भाषण का वीडियो पहले आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा किया गया और बाद में हटा दिया गया। इस वीडियो में कपूर ने अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमने-सामने की स्थिति बने रहने की बात कही थी। वीडियो हटाए जाने के बाद सीमा पर जारी तनाव और सरकार की ओर से दी जा रही जानकारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

भड़ास4मीडिया ने भी इस पूरे घटनाक्रम और अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों की गतिविधियों से जुड़ी खबरें प्रकाशित की हैं। सवाल यह है कि ITBP के प्रमुख के संबोधन का वीडियो आधिकारिक अकाउंट से क्यों हटाया गया? क्या यह सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया थी या भाषण में कही गई बातों के कारण ऐसा किया गया? फिलहाल, वीडियो हटाए जाने के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अरुणाचल में चीन के साथ कई जगहों पर जारी है आमना-सामना

ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने 22 अक्टूबर को राजस्थान के अलवर में बल के जवानों के सम्मान समारोह में संबोधन दिया था। समाचार रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश में कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आए और ऐसी स्थिति अब भी जारी है। उन्होंने इस दौरान ITBP की शौर्य कमांडो टीमों के प्रदर्शन की सराहना भी की।

कपूर के इस बयान को इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर जारी तनाव को लेकर एक वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी की सार्वजनिक टिप्पणी थी। उनका बयान सामने आने के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज हो गई।

‘द हिंदू’ की रिपोर्ट में 6-7 किलोमीटर अंदर तंबू लगाने का दावा

इस विवाद के बीच द हिंदू की एक रिपोर्ट भी चर्चा में है। सरकारी सूत्रों के हवाले से प्रकाशित इस रिपोर्ट में दावा किया गया कि अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले के तक्सिंग क्षेत्र में चीनी सैनिकों ने भारत की समझ के मुताबिक वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) से लगभग 6-7 किलोमीटर अंदर तंबू लगा दिए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में माजा के पास नियमित गश्त के दौरान भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने आ गए थे। कुछ समय बाद चीनी सैनिक बड़ी संख्या में लौटे और वहां तंबू लगाए। इस घटनाक्रम को लेकर भारतीय सैनिकों की गश्त और सीमा पर चीनी गतिविधियों के बारे में सवाल उठे हैं।

हालांकि, यहां यह अंतर समझना जरूरी है कि 6-7 किलोमीटर अंदर तंबू लगाए जाने का दावा द हिंदू की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से आया है। ITBP प्रमुख के सार्वजनिक बयान में इस दूरी की पुष्टि नहीं की गई थी।

50 साल पुराने हथियारों पर भी उठाए सवाल

ITBP प्रमुख का संबोधन केवल सीमा पर जारी तनाव तक सीमित नहीं था। उन्होंने बल के हथियारों और आधुनिकीकरण की जरूरत पर भी बात की। समाचार रिपोर्टों के अनुसार, कपूर ने कहा कि 50 वर्ष से अधिक उम्र के जवान जिन हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं, वे कई मामलों में वही हैं, जिनका इस्तेमाल उन्होंने बल में शामिल होते समय किया था। उन्होंने हथियारों के आधुनिकीकरण की जरूरत पर जोर दिया।

कपूर ने आधुनिक युद्ध की चुनौतियों को देखते हुए ड्रोन, ड्रोन-रोधी प्रणालियों, विशेष पर्वतीय कमांडो और सीमा चौकियों पर भूमिगत संरचनाओं के विकास की योजनाओं का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि बदलते युद्ध के तरीकों के अनुरूप ITBP की क्षमताओं को मजबूत करना जरूरी है।

यह बयान सीमा पर तैनात जवानों के संसाधनों और सुरक्षा तैयारियों को लेकर भी चर्चा का विषय है। जब चीन के साथ सीमा पर तनाव की खबरें सामने आ रही हैं, तब हथियारों के आधुनिकीकरण और सैनिकों को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराने का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है।

वीडियो हटने के बाद विदेश मंत्रालय को देनी पड़ी सफाई

ITBP के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से वीडियो हटाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 23 अक्टूबर को भारत-चीन सीमा की स्थिति पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चीनी सेना की ओर से स्थापित गश्त के तौर-तरीकों से अलग व्यवहार किए जाने पर सीमा के हालात समय-समय पर प्रभावित होते हैं।

जायसवाल ने कहा कि भारत और चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा से जुड़े लंबित मुद्दों को सुलझाने तथा गलतफहमी और गलत आकलन से बचने के लिए मौजूदा राजनयिक और सैन्य व्यवस्थाओं के माध्यम से बातचीत कर रहे हैं। उन्होंने सीमा पर शांति बनाए रखने को दोनों देशों के व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया।

विदेश मंत्रालय की इस प्रतिक्रिया के बाद भी वीडियो हटाए जाने का कारण स्पष्ट नहीं हुआ। मंत्रालय ने सीमा प्रबंधन और दोनों देशों के बीच बातचीत की प्रक्रिया पर बात की, लेकिन ITBP के आधिकारिक अकाउंट से वीडियो हटाने के सवाल का स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया।

सरकार से जवाब मांगने का वक्त

इस घटनाक्रम ने सीमा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक करने और उसे लेकर सरकारी पारदर्शिता पर बहस छेड़ दी है। यदि सीमा पर कई स्थानों पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच आमना-सामना जारी है, तो देश को स्थिति की स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए। साथ ही, वीडियो हटाए जाने के पीछे का कारण भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

पूर्व केंद्रीय मंत्री और पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह ने भी अरुणाचल प्रदेश में चीनी गतिविधियों और कथित तौर पर भारतीय सैनिकों की गश्त प्रभावित होने को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। इन आरोपों और दावों पर सरकार की ओर से तथ्यात्मक जवाब जरूरी है।

सवाल सिर्फ ITBP के एक वीडियो का नहीं है। सवाल यह है कि अरुणाचल प्रदेश की सीमा पर वास्तविक स्थिति क्या है, भारतीय सैनिकों की गश्त में कोई बाधा आ रही है या नहीं, और देश को इन घटनाओं की जानकारी किस रूप में दी जा रही है।

सीमा सुरक्षा राष्ट्रीय महत्व का विषय है। ऐसे मामलों में सरकार को अटकलों के बजाय तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि देश की सुरक्षा से जुड़े सवालों का जवाब मिल सके।


ITBP के एक्स हैंडल पर उनके ही चीफ़ शत्रुजीत कपूर का भाषण नहीं है। तस्वीरें हैं। महानिदेशक शत्रुजीत कपूर का वीडियो इसी ट्वीटर पर वायरल है। राजनीतिक दलों के हैंडल पर है। ITBP एक सम्मानित और साहसिक बल है। क्या उसे अपने चीफ़ के भाषण को यहाँ अपलोड नहीं करना चाहिए? उनका बल चीन से मुकाबला कर रहा है और अपने ही चीफ का भाषण ग़ायब करना पड़े, इससे दुखद कुछ नहीं हो सकता। कोई मुझे बताए कि क्या इससे जवानों के मनोबल पर असर नहीं पड़ेगा? मामूली बात है कि जिस चीफ़ के फ़ैसले पर साढ़े तीन हज़ार किलोमीटर सीमा की सुरक्षा निर्भर करती हैं, उनका भाषण ITBP के किसी सोशल मीडिया हैंडल पर नहीं है। क्या पहले था, अगर था तो इसे क्यों हटाया गया? क्या किसी सरकार को आलोचना से बचाने के लिए इतने महत्वपूर्ण बल का मनोबल गिराया जा सकता है। इसी बात पर महानिदेशक शत्रुजीत कपूर को अपने पद से इस्तीफ़ा दे देना चाहिए कि जब उनका भाषण उनके ही बल के सोशल मीडिया पर अपलोड नहीं हो सकता तो चीफ बने रहने का क्या मतलब रह जाता है। ITBP को स्थिति साफ़ करनी चाहिए। बताना चाहिए कि भाषण की रिकार्डिंग कहाँ है?
-रवीश कुमार, वरिष्ठ पत्रकार

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