रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के मोतीबाग स्थित प्रेस क्लब परिसर में शनिवार शाम हवाई फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। आरोप है कि पलाश तिवारी नाम के युवक ने पिस्टल निकालकर हवा में गोली चलाई और वहां मौजूद लोगों को डराने की कोशिश की। मामले में प्रेस क्लब के अध्यक्ष मोहन तिवारी की शिकायत पर कोतवाली थाना पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
घटना शाम करीब 5:30 बजे की बताई जा रही है। शिकायत के मुताबिक, उस समय प्रेस क्लब परिसर में पत्रकारों, कर्मचारियों और अन्य लोगों की आवाजाही थी। इसी दौरान पलाश तिवारी ने कुछ अन्य लोगों के साथ वहां पहुंचकर पिस्टल से हवाई फायरिंग की। अचानक गोली चलने से परिसर में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
सार्वजनिक स्थान पर फायरिंग की शिकायत
प्रेस क्लब अध्यक्ष मोहन तिवारी ने पुलिस को दिए लिखित आवेदन में घटना को गंभीर बताते हुए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। शिकायत में कहा गया है कि प्रेस क्लब जैसे सार्वजनिक स्थान पर हथियार निकालकर गोली चलाना वहां मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकता था।
सदस्यता को लेकर चल रहा था विवाद

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, पलाश तिवारी प्रेस क्लब की सदस्यता हासिल करना चाहता था। बताया जा रहा है कि लंबे समय से सदस्यता नहीं मिलने के कारण वह नाराज था। आरोप है कि 24 अक्टूबर की शाम वह प्रेस क्लब पहुंचा और इसी मुद्दे पर विवाद करने लगा। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, फायरिंग से ठीक पहले उसने प्रेस क्लब के कोषाध्यक्ष और कार्यालय सचिव पर पिस्टल तान दी और उन्हें जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद परिसर में हवाई फायरिंग किए जाने की बात सामने आई है।
BNS और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज
कोतवाली थाना पुलिस ने शिकायत के आधार पर पलाश तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125 और 351(2) तथा आर्म्स एक्ट की धारा 25 और 27 के तहत अपराध दर्ज किया है। मामले की जांच उप निरीक्षक सुरेंद्र यादव को सौंपी गई है।
पुलिस घटना से जुड़े सीसीटीवी फुटेज खंगालने, फायरिंग में इस्तेमाल पिस्टल का पता लगाने और घटना के कारणों की जांच कर रही है। फिलहाल, घटना को लेकर पुलिस की जांच जारी है। खबर पब्लिश किए जाने तक आरोपी को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है।
गिरीश पंकज-
दैनिक विश्व केसरी की इस खबर ने मेरे जैसे अनेक पत्रकारों को दुखी किया होगा. रायपुर में पिछले 46 वर्षों से निरंतर पत्रकारिता करते हुए मेरे सामने कभी ऐसा नहीं हुआ कि प्रेस क्लब में कोई गुंडागर्दी, मारपीट या फायरिंग की नौबत आई हो.
जब कभी यहां चुनाव होते थे, तो आम सहमति से हो जाया करते थे. किसी वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि फलाना अध्यक्ष होगा, तो वह अध्यक्ष हो जाता था. लगभग सभी तैयार हो जाते थे. लेकिन पिछले कुछ वर्षों से प्रेस क्लब की राजनीति में बेहद गिरावट आई है. प्रेस क्लब के चुनाव भी कुछ इस अंदाज़ से होने लगे हैं, गोया नगर निकाय का चुनाव हो रहा है. पता नहीं प्रेस क्लब का पदाधिकारी बन के कौन क्या तीर मार लेगा?
मैं दो बार रायपुर श्रमजीवी पत्रकार संघ का अध्यक्ष रहा, एक बार अविभाजित मध्य प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार संघ का प्रांतीय महासचिव भी रहा. मेरे अनेक मित्र कहते रहे कि आपको अब प्रेस क्लब का चुनाव लड़ना चाहिए. तब मैं हर बार यही कहता रहा कि मैं पत्रकार संघ से जुड़ा रहना पसंद करूंगा क्योंकि मेरा रास्ता संघर्ष का है. पत्रकारों के हित के लिए लड़ने का रास्ता. लेकिन अब हालत यह है कि प्रेस क्लब में शामिल होने के लिए तरह-तरह की जोड़-तोड़ हो रही है. एक कोई बंदा हवाई फायर भी कर रहा है.
इस घटना से एक बात समझ में आती है कि पत्रकारिता में कैसे-कैसे गुंडे, माफिया किस्म के लोग घुसना चाहते हैं. इसलिए प्रेस क्लब के वर्तमान सदस्यों को बहुत गंभीरता के साथ आत्म मंथन करने की जरूरत है कि वे कैसे लोगों को सदस्य बनाएं और कैसे लोगों को अपने से दूर रखें. प्रेस क्लब को बौद्धिक लोगों का केंद्र होना चाहिए. वहां एक छोटी-सी लाइब्रेरी भी बन गई है. वहां पत्रकारों को जाकर बैठना चाहिए और किताबें पढ़नी चाहिए. घंटों कैरम खेलकर, चाय पीकर समय बर्बाद करना पत्रकारिता नहीं है.


