हैदराबाद: 24 और 25 अक्टूबर को आयोजित महिला पत्रकारों के राष्ट्रीय सम्मेलन में समान वेतन, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम से जुड़े कानून के सख्त क्रियान्वयन और ऑनलाइन उत्पीड़न से सुरक्षा की मांग उठाई गई। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आईं 65 महिला पत्रकारों और तेलंगाना की 70 महिला मीडिया पेशेवरों समेत 135 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। दो दिवसीय सम्मेलन में कार्यस्थल पर भेदभाव, पेशेवर सुरक्षा और संस्थागत चुनौतियों पर चर्चा के बाद केंद्र और राज्य सरकारों, पुलिस तथा मीडिया संस्थानों से महिला पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और समानता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कई प्रस्ताव पारित किए गए।
मीडिया संस्थानों में POSH कानून लागू करने की मांग
सम्मेलन में सभी मीडिया संस्थानों में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम, 2013 यानी POSH Act को अनिवार्य रूप से लागू करने की मांग की गई। इसके तहत आंतरिक शिकायत समितियों (ICC) को प्रभावी बनाने और उनमें योग्य बाहरी लैंगिक विशेषज्ञों को शामिल करने पर जोर दिया गया। राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर महिला पत्रकारों की सुरक्षा एवं न्याय के लिए स्वतंत्र प्रकोष्ठ बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया।
मीडिया संस्थानों से शिकायत निवारण व्यवस्था के अनुपालन की वार्षिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई। सम्मेलन ने कहा कि कार्यस्थल पर उत्पीड़न की शिकायतों की जांच गोपनीय, निष्पक्ष और निर्धारित समयसीमा के भीतर होनी चाहिए। शिकायत करने वाली महिलाओं को मनमाने ढंग से नौकरी से निकालने या पदोन्नति से वंचित करने जैसी प्रतिशोधात्मक कार्रवाइयों से सुरक्षा देने की भी मांग की गई।
प्रदर्शन और रिपोर्टिंग के दौरान महिला पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा
सम्मेलन में दिल्ली में सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न और सितंबर में एक पुलिस थाने में महिला ग्राउंड रिपोर्टरों के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा कथित मारपीट की घटनाओं की निंदा की गई। इन मामलों में स्वतंत्र जांच कराने, जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित करने और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की गई।
महिला पत्रकारों ने राजनीतिक नेताओं, कॉरपोरेट संस्थाओं और आपराधिक समूहों की ओर से मिलने वाली धमकियों तथा डराने-धमकाने की घटनाओं से सुरक्षा के लिए व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करने पर भी जोर दिया। पत्रकारों की शिकायतों के निपटारे के लिए पुलिस में विशेष प्रकोष्ठ बनाने और शारीरिक धमकियों या प्रतिशोधात्मक मुकदमों का सामना कर रहे पत्रकारों को सरकारी खर्च पर कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई गई।
ऑनलाइन उत्पीड़न के खिलाफ कार्रवाई की मांग
महिला पत्रकारों को निशाना बनाकर साइबर पीछा करने, निजी जानकारी सार्वजनिक करने, तस्वीरों से छेड़छाड़ करने और डीपफेक सामग्री प्रसारित करने जैसी घटनाओं पर सम्मेलन ने चिंता जताई। ऐसे मामलों की जांच के लिए विशेष साइबर अपराध इकाइयां बनाने और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने की मांग की गई।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से मानहानिकारक और बिना सहमति के प्रसारित यौन सामग्री को तेजी से हटाने की अपील की गई। मीडिया संस्थानों से महिला पत्रकारों को साइबर सुरक्षा उपकरण, डिजिटल खतरों की निगरानी और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने को कहा गया। खास तौर पर डिजिटल और खोजी पत्रकारिता करने वाली महिलाओं की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
समान वेतन और वरिष्ठ पदों पर प्रतिनिधित्व
सम्मेलन में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मीडिया संस्थानों में समान काम के लिए समान वेतन सुनिश्चित करने की मांग की गई। वेतन, पदोन्नति और भर्ती प्रक्रिया में लैंगिक असमानता की पहचान के लिए हर साल पारदर्शी जेंडर ऑडिट कराने का प्रस्ताव रखा गया।
महिला पत्रकारों को राजनीति, रक्षा और खोजी पत्रकारिता जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की रिपोर्टिंग के समान अवसर देने की मांग भी की गई। मीडिया संस्थानों से अपने निदेशक मंडलों और वरिष्ठ संपादकीय पदों पर महिलाओं का उचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट नीतियां बनाने की अपील की गई।
मातृत्व लाभ, मासिक धर्म अवकाश और पेंशन
सम्मेलन में मातृत्व लाभ से जुड़े प्रावधानों को प्रभावी ढंग से लागू करने और कार्यस्थलों पर बच्चों की देखभाल के लिए क्रेच की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की गई। महिला पत्रकारों के लिए हर महीने एक दिन के सवेतन मासिक धर्म अवकाश की व्यवस्था करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय नीति बनाने का प्रस्ताव भी रखा गया।
इसके अलावा पत्रकारों को स्वास्थ्य कार्ड, मानसिक स्वास्थ्य सहायता और काम के दौरान लगे सदमे से उबरने के लिए परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई। आर्थिक असुरक्षा से निपटने के लिए सेवानिवृत्त और वरिष्ठ महिला पत्रकारों को शामिल करते हुए एकीकृत राष्ट्रीय पत्रकार पेंशन योजना बनाने, समूह स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध कराने और स्वतंत्र पत्रकारों के लिए आपातकालीन सहायता कोष स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया।
दिवंगत मीडिया पेशेवरों के परिवारों को समय पर और बिना भेदभाव के आर्थिक सहायता देने की मांग भी सम्मेलन के प्रस्तावों में शामिल रही।
नौकरी की सुरक्षा और आवास की सुविधा पर जोर
सम्मेलन ने कार्यरत पत्रकारों के कानूनी अधिकारों को प्रभावी ढंग से लागू करने और सरकारी मान्यता यानी एक्रेडिटेशन देने की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने की मांग की। मान्यता के आवेदनों को मनमाने ढंग से खारिज किए जाने से बचाने के लिए सुरक्षा उपाय अपनाने पर भी जोर दिया गया।
केंद्र और राज्य सरकारों के आवास बोर्डों से पात्र महिला पत्रकारों के लिए विशेष कोटा और किफायती आवास योजनाएं शुरू करने की अपील की गई। क्षेत्रीय भाषाओं के मीडिया संस्थानों में काम करने वाली और कम वेतन पर फील्ड रिपोर्टिंग करने वाली महिला पत्रकारों पर विशेष ध्यान देने की मांग की गई।
मीडिया प्रबंधन से अस्थायी और असुरक्षित अल्पकालिक अनुबंधों की जगह पारदर्शी तथा कानूनी रूप से बाध्यकारी रोजगार समझौते अपनाने को कहा गया, ताकि मनमाने ढंग से नौकरी से निकाले जाने की घटनाओं पर रोक लग सके।
सम्मेलन के अंत में सरकारों, मीडिया प्रबंधन, कानून लागू करने वाली एजेंसियों और पत्रकार संगठनों से पारित प्रस्तावों को लागू करने की अपील की गई। सम्मेलन का मुख्य जोर महिला पत्रकारों की सुरक्षा, समानता और पत्रकारिता में उनकी स्वतंत्रता के रास्ते में आने वाली संस्थागत बाधाओं को दूर करने पर रहा।



