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आयोजन

मेरा रंग फाउंडेशन 10वां वार्षिकोत्सव: अभिव्यक्ति, असहमति और युवाओं की राजनीतिक भागीदारी पर चर्चा!

Panelists seated behind a long table with microphones and water bottles, in front of a large event banner featuring portraits and Hindi text.
Two women in red and white traditional Indian dance costumes perform a duet on stage with ornate jewelry and headdresses.

नई दिल्ली। क्या नई पीढ़ी केवल सोशल मीडिया पर अपनी बात रखने तक सीमित है या वह सत्ता, राजनीति और सामाजिक व्यवस्था से भी सीधे सवाल कर रही है? बदलती तकनीक और मीडिया के दौर में युवाओं की भूमिका क्या हो रही है और उनके सामने अभिव्यक्ति की कितनी जगह है—इन सवालों पर मेरा रंग फाउंडेशन के दसवें वार्षिकोत्सव में आयोजित संवाद में चर्चा हुई। ‘बदलाव की आहट : नई पीढ़ी, नए सवाल’ विषय पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में हुए कार्यक्रम में पत्रकारिता, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े वक्ताओं ने युवा पीढ़ी के बदलते तेवर और सार्वजनिक जीवन में उसकी भूमिका पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में 4PM न्यूज़ सहयोगी के रूप में जुड़ा।

वरिष्ठ पत्रकार और न्यूज़लॉन्ड्री हिंदी के मैनेजिंग एडिटर अतुल चौरसिया के संचालन में हुई चर्चा में स्वतंत्र पत्रकार एवं यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह, लोकगायिका और राजनीतिक-सामाजिक व्यंग्य के लिए चर्चित नेहा सिंह राठौर, समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नेहा यादव, राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती और कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम शामिल हुए।

चर्चा की शुरुआत करते हुए अतुल चौरसिया ने सवाल रखा कि युवा राजनीति, मीडिया, समाज और रचनात्मक क्षेत्र को किस तरह प्रभावित कर रहे हैं और इससे आने वाले समय की दिशा कैसे तय हो सकती है। राजनीतिक दलों से जुड़े वक्ताओं से उन्होंने यह भी जानना चाहा कि राजनीतिक पार्टियों में युवाओं की भागीदारी अपेक्षित स्तर पर क्यों नहीं दिखाई देती।

‘जेन-ज़ी की तस्वीर को महानगरों से बाहर भी देखिए’

नेहा सिंह ने जेन-ज़ी की प्रचलित छवि पर सवाल उठाते हुए कहा कि नई पीढ़ी का अर्थ केवल वह युवा नहीं है जो ढीले-ढाले कपड़े पहनता है, संगीत सुनता है और बहुत ‘कूल’ दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि इस परिभाषा में उन युवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए जो छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं और अपनी आजीविका के लिए अलग-अलग तरह के काम करते हुए संघर्ष कर रहे हैं।

समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नेहा यादव ने सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि महिलाओं को चुप कराने का सबसे आसान तरीका उनके चरित्र पर सवाल खड़ा करना बना दिया गया है। राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन में सक्रिय महिलाओं को असहमति या वैचारिक आलोचना से अधिक कई बार व्यक्तिगत और चरित्र से जुड़े हमलों का सामना करना पड़ता है।

लोक गायिका नेहा ने भी इस बात से सहमति जताते हुए कहा कि हमारे समाज की संरचना ऐसी है कि वह मुखर स्त्री को आसानी से स्वीकार नहीं करती। उन्होंने स्त्रियों की स्वतंत्र अभिव्यक्ति और सत्ता तथा समाज से सवाल पूछने के रास्ते में आने वाली चुनौतियों पर अपनी बात रखी।

गालियां मिल रही हैं मतलब आपकी बात असर कर रही है

आरजेडी की राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रियंका भारती ने सोशल मीडिया और राजनीतिक जीवन में मिलने वाली ट्रोलिंग और अपशब्दों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “अगर आपको गालियां पड़ रही हैं, इसका मतलब है कि आप सही कर रहे हैं। जिस दिन गालियां पड़नी बंद हो जाएंगी, हम समझेंगे कि शायद हमारी धार कमजोर पड़ रही है।”

उन्होंने कहा कि उनके लिए अपमानजनक संबोधनों से डरने के बजाय उन्हें अपने ढंग से परिभाषित करना प्रतिरोध का एक तरीका है। प्रियंका ने कहा कि अगर उन्हें ‘शूर्पणखा’ कहा जाता है तो वे उसे ऐसी साहसी स्त्री के प्रतीक के रूप में देखती हैं जो अपनी इच्छाओं और सेक्सुअलिटी को स्वीकार करती है। इसी तरह अगर बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के नाम को जोड़कर उन्हें अपशब्द कहे जाते हैं तो वे आंबेडकर की वैचारिक विरासत को गर्व के साथ स्वीकार करती हैं।

युवा अभिव्यक्ति के लिए जगह तलाश रहा है

स्वतंत्र पत्रकार और यूट्यूबर श्याम मीरा सिंह ने कहा कि आज का युवा अपनी अभिव्यक्ति के लिए अपना स्पेस तलाश रहा है और आंदोलनों को भी इसके एक महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जाना चाहिए। चर्चा में डिजिटल माध्यमों के उभार, परंपरागत मीडिया से अलग स्वतंत्र अभिव्यक्ति के नए मंचों और युवा पीढ़ी के सामाजिक-राजनीतिक सवालों पर भी बातचीत हुई।

वरिष्ठ पत्रकार अतुल चौरसिया ने अलग-अलग वक्ताओं के अनुभवों को जोड़ते हुए युवा पीढ़ी और राजनीतिक दलों के रिश्ते, मीडिया के बदलते स्वरूप और सार्वजनिक विमर्श में युवाओं की भागीदारी से जुड़े सवाल सामने रखे।

कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव शाहनवाज़ आलम ने राजनीति और युवा भागीदारी से जुड़े सवालों पर अपनी बात रखी। पत्रकारिता और लेखन की पृष्ठभूमि से सक्रिय राजनीति में आए आलम ने लोकतंत्र, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक दलों में नई पीढ़ी की भूमिका के संदर्भ में चर्चा में हिस्सा लिया।

दस साल के सफर से शुरू हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम की शुरुआत में मेरा रंग फाउंडेशन की संस्थापक एवं मैनेजिंग ट्रस्टी शालिनी श्रीनेत ने संस्था के दस वर्षों के सफर को याद किया। उन्होंने बताया कि मेरा रंग की शुरुआत 2016 में सोशल मीडिया पर एक छोटे से प्रयास के रूप में हुई थी, जिसका उद्देश्य खास तौर पर महिलाओं और नई पीढ़ी को अपनी बात रखने के लिए एक मंच उपलब्ध कराना था। बीते दस वर्षों में संस्था ने महिला अधिकार, घरेलू हिंसा, लैंगिक समानता, मीडिया, साहित्य, राजनीति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े विषयों पर संवाद और जागरूकता के कार्यक्रम किए हैं।

मुख्य संवाद से पहले ‘द त्रिपाठी सिस्टर्स’ – आयुषी त्रिपाठी और टियारा त्रिपाठी ने स्त्री शक्ति पर केंद्रित एक संक्षिप्त ओडिसी नृत्य प्रस्तुति दी। शास्त्रीय नृत्य से लंबे समय से जुड़ी दोनों कलाकारों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम के मूल विषय को कला और नृत्य की अभिव्यक्ति से जोड़ा।

ज्योति गोयल को ‘रंग साहस’ सम्मान

इस अवसर पर महिला अधिकारों और जेंडर जस्टिस के क्षेत्र में सक्रिय अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता ज्योति गोयल को ‘रंग साहस’ सम्मान प्रदान किया गया। ज्योति गोयल लंबे समय से घरेलू हिंसा, महिला अधिकार, कानूनी जागरूकता और लैंगिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर काम करती रही हैं। उन्हें यह सम्मान हिंदी के कवि-कथाकार अरुण आदित्य ने प्रदान किया।

Award ceremony on a stage: man in maroon shirt and brown trousers alongside two women; the woman in purple holds a certificate as the other in a magenta saree presents it.
Panel speaker: woman in orange kurta and pink scarf reads from papers into a microphone at a conference table with water bottles nearby

कार्यक्रम की अंतिम प्रस्तुति फौजिया दास्तानगो की रही। उन्होंने अपनी विशिष्ट दास्तानगोई शैली में स्त्रीवादी कविताओं का पाठ किया। अलग-अलग कविताओं के जरिए प्रस्तुति में स्त्रियों के जीवन की सामाजिक विडंबनाओं, उनके संघर्ष, इच्छाओं और स्वतंत्रता के सवालों को सामने लाया गया।

आयोजन में मीडिया और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ बड़ी संख्या में युवा और विभिन्न क्षेत्रों के लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 4PMन्यूज और एसिड अटैक सर्वाइवर्स के पुनर्वास और सशक्तीकरण के लिए काम करने वाले छांव फाउंडेशन की भी सहभागिता रही।

कार्यक्रम के अंत में कथाकार और उपन्यासकार विवेक मिश्र ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। उन्होंने वक्ताओं, कलाकारों, सहयोगी संस्थाओं और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।

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