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सम्पादक जी ने खबर छापने के लिए लाख रुपये ले लिए!

सेवा में
श्रीमान सम्पादक जी।

महोदय, मै आपको अवगत कराना चाहता हूँ की मैं आपके सम्मानित अख़बार के नैनी कार्यालय में कार्य कर रहा था। 8 मई 2015 को ज्वाइन किया था। ज्वाइन करने के कुछ दिन तक सब ठीक चला लेकिन बाद में टूर पर जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था करने की बात करने लगे। दो बार तो हमने काम को बचाये रखने के लिए दोस्तों से और अपने घरवालो से लेकर किसी तरह से गाड़ी करा दी। लेकिन उसके बाद सम्पादक जी ने पैसे की मांग करना शुरू कर दिया।

सेवा में
श्रीमान सम्पादक जी।

महोदय, मै आपको अवगत कराना चाहता हूँ की मैं आपके सम्मानित अख़बार के नैनी कार्यालय में कार्य कर रहा था। 8 मई 2015 को ज्वाइन किया था। ज्वाइन करने के कुछ दिन तक सब ठीक चला लेकिन बाद में टूर पर जाने के लिए गाड़ी की व्यवस्था करने की बात करने लगे। दो बार तो हमने काम को बचाये रखने के लिए दोस्तों से और अपने घरवालो से लेकर किसी तरह से गाड़ी करा दी। लेकिन उसके बाद सम्पादक जी ने पैसे की मांग करना शुरू कर दिया।

जिला पंचायत और प्रधानी के चुनाव में भी हमने करीब दो लाख का विज्ञापन दिया जिसमे भी सम्पादक जी ने खबर छापने के लिए विज्ञापन के नाम पर एक लाख रूपये ले लिए। प्रत्याशी भी अपनी खबरों को प्रकाशित कराना चाहते थे। तब प्रत्याशियों की खबर विज्ञापन के साथ लगी। इतना ही नहीं, ब्लाक प्रमुख के चुनाव में जसरा की खबरों को लगवाने के लिए रूपये लिए थे। घूरपुर में लड़के की ज्वाइनिंग के लिए भी तीस हजार रूपये लिए थे। इसके बाद इन्होंने नैनी के एक हिस्ट्रीशीटर पप्पू गजिया से मिलने के लिए कहा तो इन्हें उसके फार्म हॉउस पर शनिवार के दिन मुलाक़ात करवाया था। उनसे मिलवाने के बाद मैं पूरी तरह से परेशान हो गया।

इनकी मांगें बढ़ता देख मैं इनकी बातों को रिकार्ड करने लगा। इन्होंने मुझे अपने घर पर बुलाकर बेटी का खाता खुलवाने और किसी सोसाइटी में दान देने के नाम पर 30 हजार रूपये पप्पू गजिया से मांगने को कहा तो मैं टालमटोल करते हुए मामले को टरकाने लगा। लेकिन सर ने कई बार दबाव बनाया। अंत में इन्हें खुद की बातों की रिकार्डिंग के बारे में जानकारी हुई तो मुझे घर पर बुलाकर मेरा मोबाईल चेक किया और फार्मेट मार दिया। कोई भी बात करने के लिए मुझे घर पर ही बुलाते थे। रिकार्डिंग की जानकारी होने पर इन्होंने हमें 25 अप्रैल को हटा दिया। आज मुझे उलटा बदनाम कर रहे हैं।

सर यही नौकरी ही मेरे लिए एकमात्र सहारा थी। श्रीमान जी से अनुरोध है की मेरी बातों और इस रिकार्डिंग पर विश्वास करते हुए मुझे न्याय दिलाने की कृपा करें। प्रार्थी आपका सदैव आभारी रहेगा।

प्रार्थी
मिथलेश त्रिपाठी
[email protected]
इलाहाबाद।

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1 Comment

1 Comment

  1. ravi

    June 19, 2016 at 10:12 am

    mithilesh tripathi amar ujala allahabad se juda raha hai.yahan allahabad me patrakarita ka arth hi dhan ugahi,police ki da lali,blackmailing aur sampardayikta ko badhawa dena rah gaya hai sarwadhik bikri aur bhasha ke sanskar ka dawa karne wale akhbaro ka.

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