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विवादों में बोइंग कंपनी : कार्य-पद्धति पर सवाल उठाने वाले पूर्व कर्मचारी अपने घरों में संदेहास्पद स्थितियों में मृत पाए जा रहे हैं!

विजय सिंह ठकुराय-

2018 और 2019 में लायन एयर तथा इथोपियन एयरलाइन्स के दो विमान दुर्घटनाग्रस्त हुए थे, जिसमें 346 लोगों की टोटल मौत हो गयी थी, इन दोनों दुर्घटनाओं में एक चीज कॉमन थी – बोइंग का विमान।

इन दोनों दुर्घटनाओं का कारण खराब फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम था, जो प्लेन को लिफ्ट प्रदान करने की बजाय नीचे धकेल रहा था। आज भी अहमदाबाद में क्रैश हुए विमान की आप आखिरी फुटेज देखें तो साफ प्रतीत होगा कि विमान उठने की बजाय अचानक नीचे जाना शुरू हो जाता है। मेरा अनुमान है कि इस दुर्घटना में इंजन फेलियर की बजाय सॉफ्टवेयर सिस्टम या हार्डवेयर की प्रॉपर इंस्टालेशन में ही कोई कमी निकलेगी।

बोइंग कंपनी पिछले कुछ समय से निरंतर विवादों में घिरी रही है। कभी इनके प्लेन क्रैश हो जाते हैं, कभी सॉफ्टवेयर में दिक्कत आ जाती है। गुणवत्ता से समझौता करने और खराब प्लेन पार्ट्स इस्तेमाल करने के इन पर निरन्तर कई आरोप लगे हैं, जिनका क्रिमिनल चार्ज ये झेल रहे हैं और ढाई अरब डॉलर सेटेलमेंट के तौर पर पहले से खर्च कर चुके हैं।

बोइंग की कार्य-पद्धति पर सवाल उठाने वाले पूर्व बोइंग कर्मचारी अपने घरों में संदेहास्पद स्थितियों में मृत पाए जा रहे हैं। फेडरल एविएशन एजेंसी कई बार बोइंग के विमानों पर सवाल उठा चुकी है। पिछले साल सुनीता विलियम्स जो स्पेस में फंसी रहीं थीं, उसका कारण भी सुनीता को वापस लाने वाले बोइंग द्वारा निर्मित स्टार-लाइनर में खराबी थी, जो इंजन लीक तथा थ्रस्टर प्रॉब्लम के कारण ग्रॉउंडेड कर दिया गया था। पिछले साल मलेशियन एयरलाइन्स के बोइंग विमान का चलती उड़ान के दौरान इमरजेंसी एक्सिट का पैनल उखड़ गया था।

आप सर्च करेंगे तो पाएंगे कि बोइंग का हर साल कोई न कोई कांड सामने आ रहा है। आखिर इस बारे में कोई बात क्यों नहीं हो रही? कोई आक्रोश क्यों नहीं दिखता? कितनी मौतों का और इंतजार है? क्या यह बोइंग को बदनाम करने की कोई कॉरपोरेट कांस्पीरेसी है? अथवा वाकई बोइंग यात्रियों की जान को खतरे में डाल मुनाफा कमाने के लिए आपराधिक नीतियां अपना रहा है?

इस दुर्घटना के बाद भी हुक्मरानों के कान न खुलें और बोइंग के हर विमान को ग्राउंड कर के उनकी विस्तृत सेफ्टी इंस्पेक्शन किये बिना ही एयरलाइन्स को आपरेशन जारी करने की इजाजत मिल जाये तो समझ जाइयेगा…

नोटों के बंडल ने इंसानों की जिंदगी की कीमत चुका दी है।


विवेक त्रिपाठी-

एयर इंडिया के बोइंग ड्रीमलाइनर 787 विमान की फ्लाइट AI 171 क्रैश होने के पीछे क्या कोई साजिश है!! या फिर ये महज एक हादसा है.. अगर हादसा है तो किसकी जिम्मेदारी है!! और अगर साजिश है तो इसके पीछे कौन है?? ये सवाल सबके दिमाग में कौंध रहा है. इन सवालों का जवाब विमान के ब्लैक बॉक्स में छिपा है.. हालांकि, ब्लैक बॉक्स अभी मिला नहीं है. उसकी तलाश चल रही है.

अमूमन विमान बर्ड हिट, खराब मौसम, इंजन फेल, नेविगेशन सिस्टम में गड़बड़ी, लैंडिंग गियर या विंग्स में खराबी, पायलट की गलती, एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) की चूक या ऐसी ही अन्य वजहों से क्रैश होते हैं. अहमदाबाद टु लंदन की फ्लाइट क्रैश होने के पीछे अगर कोई साजिश नहीं है तो कारण इनमें से एक हो सकता है. खास बात ये है कि क्रैश होने से पहले यही फ्लाइट कुछ देर पहले दिल्ली से अहमदाबाद एयरपोर्ट पर लैंड हुई थी..

लंदन के रेड हिल साउथ ईस्ट में रहने वाले भारतीय मूल के एक एंटरप्रेन्योर आकाश वत्स भी इसी फ्लाइट से दिल्ली से अहमदाबाद आए थे और उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर विमान में तमाम खामियों का एक वीडियो भी पोस्ट किया है. इस वीडियो में आकाश दिखा रहे हैं कि सीट पर लगा हुआ टीवी काम नहीं कर रहा है.. अटेंडेंट को बुलाने वाला रिमोट भी खराब है और एसी भी बंद है.. टेक ऑफ से पहले विमान की पूरी तरह से जांच की गई थी.. इस मामले में विमानन कानून बहुत सख्त हैं. जांच में विमान को क्लियरेंस मिलने के बाद ही टेक ऑफ हुआ था.. और चंद मिनट में ही विमान क्रैश हो गया.

बोइंग ड्रीमलाइनर 787 करीब 11 साल पुराना विमान था. टेक ऑफ के चंद सेकेंड बाद विमान 425 फीट की ऊंचाई तक पहुंचा. इसी ऊंचाई पर विमान आउट ऑफ कंट्रोल हो गया. विमान आगे बढ़ना बंद हो गया. हवा में लहराता विमान 475 फिट प्रति मिनट की गति से नीचे जा गिरा.. पायलट के पास इतना भी वक्त नहीं था कि वो कुछ सोच पाता. पायलट सिर्फ मे डे मे डे ही कह पाया.. और चंद सेकेंड में ही विमान हॉस्टल की बिल्डिंग से जा टकराया. क्रैश का वीडियो देखेंगे तो हादसा कुछ समझ आ सकता है..

सवाल ये है कि इतनी ऊंचाई पर जाकर क्या विमान के इंजन बंद हो गए थे?? पायलट ने तेजी से नीचे गिरते विमान को ऊपर उठाने की कोशिश जरूर की होगी.. लेकिन शायद वक्त बहुत कम था.. मात्र 50 से 55 सेकेंड.. ये भी आशंका है कि विमान का वजन ज्यादा होगा.. वजन का अंदाजा लगाने में तो चूक नहीं हुई!! इसकी भी पड़ताल चल रही है. कोई सॉफ्टवेयर ग्लिच तो नहीं था, इस दिशा में भी पड़ताल हो रही है.. टेक ऑफ के वक्त इंजन पूरी तरह से थ्रस्ट जनरेट कर पाया था या नहीं.. ये भी जांच का विषय है..

ये सारी जानकारियां विमान के ब्लैक बॉक्स से मिलेंगी. ब्लैक बॉक्स विमान के कॉकपिट में होता है और किसी भी तरह के हादसे में नष्ट नहीं होता. ब्लैक बॉक्स में दो तरह के रिकॉर्डर होते हैं.
पहला फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर, जो विमान का सारा महत्वपूर्ण तकनीकि डाटा रिकॉर्ड करता है. इसमें विमान की दिशा, गति, ऊंचाई, ईंधन का स्तर और अन्य जानकारियां शामिल होती हैं.. इस डाटा के विश्लेषण से पता चलता है कि विमान ने किस परिस्थितियों में उड़ान भरी थी और क्रैश के समय क्या हो रहा था.
दूसरा कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर.. इसमें कॉकपिट के भीतर की बातें रिकॉर्ड होती हैं. इसमें पायलट और सह पायलट के बीच होने वाली बातचीत के अलावा अलार्म की आवाजें और अन्य महत्वपूर्ण संकेत शामिल होते हैं.. इससे जांचकर्ताओं को ये समझने में मदद मिलती है कि पायलट ने किन परिस्थितियों में क्या निर्णय लिया और अगर कोई तकनीकी समस्या पैदा हुई तो पायलट ने उस पर अपनी क्या प्रतिक्रिया दी..


अविश्वसनीय.. अकल्पनीय. इसे ऊपरवाले का करिश्मा ही कहा जाएगा.. बोइंग ड्रीमलाइनर 787 की फ्लाइट AI 171 क्रैश में एक यात्री जीवित बच गया.. जीवित बचे यात्री का नाम है रमेश विश्वास कुमार.. रमेश विश्वास कुमार ने कहा टेक ऑफ के 30 सेकेंड बाद ही विमान में जोरदार धमाका हुआ.. चारों तरफ लाशें ही लाशें दिख रही थीं.. सब कुछ जल रहा था..

एयर इंडिया के बोइंग ड्रीम लाइनर 787 विमान में 1,26,907 लीटर फ्यूल था.. टेक ऑफ के वक्त विमान की ऊंचाई 625 फीट थी.. टेक ऑफ के तुरंत बाद विमान क्रैश हो गया.. विमान एयरपोर्ट के पास ही बीजे मेडिकल कॉलेज के पांच मंजिला यूजी हॉस्टल के मेस वाले हिस्से पर गिरा.. क्रैश के दौरान हॉस्टल में मौजूद 20 मेडिकल स्टूडेंट की मौत हो गई जबकि 20 स्टूडेंट्स घायल हो गए जिनका इलाज चल रहा है.. प्लेन क्रैश हुआ तो उसमें भारी मात्रा में मौजूद फ्यूल ने आग पकड़ ली. तेज धमाके से विमान के परखच्चे उड़ गए. विमान ज्वालामुखी की तरह धधक उठा.. जिस हॉस्टल पर विमान गिरा, वहां का ये खौफनाक वीडियो देखिए..


नितिन त्रिपाठी-

वर्ष 1916 में एक मजदूर के बेटे विलियम बोइंग ने बोइंग कंपनी की स्थापना की क्योंकि विलियम का जुनून था फ्लाइंग. एक समय ऐसा आया जब जहाज़ और बोइंग पर्यायवाची हो गए.

पर जैसा सभी पब्लिक कंपनियों के साथ होता है, समय के साथ नए नए सीईओ आते गए. बीच में एक ऐसा सीईओ आया जिसके लिए जहाज की क्वालिटी, सेफ्टी से ज्यादा महत्वपूर्ण रहा नंबर. ज्यादा से ज्यादा रेवन्यू और ज्यादा से ज़्यादा प्रॉफिट. जिससे मार्केट में शेयर होल्डर खुश हों, कंपनी की वैल्यू बढ़े.

बोइंग एक इंजीनियरिंग कंपनी की जगह एक फाइनेंस कंपनी हो गई. मैनेजर / टॉप पोस्ट पर इंजीनियर की जगह फाइनेंस के व्यक्ति जाने लगे जिनके लिए इंजीनियरिंग डिटेल्स उतने महत्वपूर्ण न थे जितना कि रेवन्यू.

और ऐसे में आरम्भ होती है कॉस्ट कटिंग, क्वालिटी से समझौता. जहाज़ एक ऐसी चीज है जिसमें यदि थोड़ी भी गड़बड़ हुई तो हादसे में सैंकड़ों की मृत्यु होती है. बोइंग की ड्रीमलाइनर तो हादसों की पर्यायवाची बन गई.

हालत यहाँ तक बदतर हुवे कि अमेरिका में ही बोइंग पर इतना भरोसा न रहा कि सौ साल पुरानी कंपनी के बनाये स्पेस क्राफ्ट पर भरोसा किया जाये. सुनीता विलियम इतना लंबे समय अंतरिक्ष में इसी लिए फसी रहीं कि पहले उन्हें बोइंग के स्पेस क्राफ्ट से आना तय था पर बोइंग के स्पेस क्राफ्ट नासा के मानकों पर खरे नहीं उतर रहे थे तो स्पेस एक्स जैसी नई कंपनी को जिम्मेदारी दी गई कि वह यान बना कर अंतरिक्ष यात्रियों को वापस लाए.

2023 में एयर इंडिया ने 34 बिलियन डालर का कांट्रैक्ट बोइंग को डीलर इस कंपनी को नया जीवन दान दिया.

और एयर इंडिया का अहमदाबाद दुर्घटना का जहाज भी बोइंग ही है. जांच से पता चलेगा कि मानवीय चूक थी या मेंटेनेंस की या प्लेन में तकनीकी खराबी. पर बैटल ऑफ़ परसेप्शन में माना यही जा रहा है कि बोइंग का जहाज दुर्घटना ग्रस्त हुआ. पहले से ही धक्के खा रही बोइंग कंपनी के शेयर आज सुबह अमेरिकन स्टॉक मार्केट में पाँच प्रतिशत और गिर गए.

यह एक लेसन सभी के लिए होना चाहिए कि केवल रेवन्यू और मुनाफ़े पर नहीं फ़ोकस रखना चाहिए बल्कि क्वालिटी रहेगी तो नाम रहेगा. नाम रहेगा तो रेवन्यू और प्रॉफिट स्वयमेव आ जाएगा.

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