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‘अमृत विचार’ को लेकर खींचतान, अखबार के जिम्मेदार करा रहे घमासान

उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में अमृत विचार अखबार को लेकर खींचतान मची हुई है। यहां पर एक महीने के अंदर संस्थान के कर्मचारियों ने तीन ब्यूरो चीफ बनाए हैं। हैरत की बात यह है कि जो तीन ब्यूरो चीफ बनाए गए, उसमें एक को दूसरे के हटाने के संबंध में कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। इस घटना का खुलासा तब हुआ जब पद से बिना किसी नोटिस और कारण के हटाए गए पत्रकारों ने न्यायिक प्रक्रिया अपनाने की राह तय की।

जिले में इस अखबार में 5 जून वर्ष 2022 से सुषमा पांडे बतौर ब्यूरो चीफ काम कर रही थी। उस दौरान अमृत विचार अखबार का जिले में कोई अस्तित्व नहीं था। सुषमा ने महिला होने के बावजूद कड़ी मेहनत करते हुए संस्थान को हर तरीके से ही फायदा पहुंचाने का भी काम किया। वर्तमान में अमृत विचार के जब अच्छे खासे पाठक हो गए। सुषमा पांडे मान्यता प्राप्त पत्रकार भी हैं।

सुषमा पांडे अपना कार्यभार संभाले रहीं। इसी दौरान जिला सूचना अधिकारी को 24 जून 2023 में एक पत्र अमृत विचार के प्रधान संपादक शंभू दयाल बाजपेई की ओर से जारी किया गया। जिसमे दैनिक भास्कर में काम कर चुके व पीलीभीत अमर उजाला में बतौर स्तरीय संवाददाता काम कर रहे शिवम अवस्थी को अमृत विचार का सीतापुर जिला ब्यूरो प्रभारी और हिंदुस्तान अखबार में वरिष्ठ संवाददाता के तौर पर अपनी सेवा दे चुके सैयद जीशान कदीर को अमृत विचार का ब्यूरो सह प्रभारी नियुक्त कर दिया।

शिवम अवस्थी और जीशान कदीर से एक नए कार्यालय का उद्घाटन भी करा दिया गया। माननीयों को बुलाया गया। अधिकारी भी शामिल हुए। ये सारे दिशा निर्देश प्रधान संपादक शंभू दयाल बाजपेई और लखनऊ में बैठे महाप्रबंधक त्रिनाथ शुक्ला ने दिए थे। दोनों ने एक से दो दिन काम भी किया। सुषमा से यह बताया जाता रहा कि ब्यूरो तुम ही हो। शिवम और जीशान से यह कहा गया कि सुषमा को हटाया गया है अब ब्यूरो तुम ही हो।

इसी 20 जुलाई में जिले में एक और नए कार्यालय का उद्घाटन भी हो गया जिसमें न्यूज़ नेशन और दैनिक भास्कर में काम कर रहे अभिषेक सिंह को जिला संवाददाता की नियुक्ति दे दी गई। इसका पत्र भी जिला सूचना अधिकारी कार्यालय को दे दिया गया। जिला सूचना अधिकारी लाल कमल भी अब असमंजस में हैं कि आखिरकार अमृत विचार अखबार का ब्यूरो चीफ कौन है, कौन सा कार्यालय सही है, या फिर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों के मुताबिक काम कर रहा है या नहीं। इधर सुषमा पांडे यह भी बताती हैं कि इससे उनकी सामाजिक छवि भी खराब हुई है और संस्थान के अधिकारियों ने दुर्व्यवहार भी किया है। वही इस बारे में शिवम बताते हैं कि कई वर्षों की पत्रकारिता के अनुभव में ऐसा कभी नहीं हुआ कि किसी भी संस्था ने ठोस निर्णय न लिया हो और इस तरीके से पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार किया हो।

वर्तमान में संस्था के जीएम पर आरोप है कि वे सुषमा पांडे और शिवम अवस्थी से तमीज से बात भी नहीं करते।

सुषमा पांडे और शिवम अवस्थी द्वारा दिए गए इनपुट पर आधारित.

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2 Comments

2 Comments

  1. खुशदीप सिंह

    July 28, 2023 at 11:25 pm

    पूरे समूह में इस तरह की घटनाएं हो रही है। ये महज बानगी भर है। कथित यूनिटों में इंचार्ज पद के लिए घमासान जारी है। बुलबुला जब फूटेगा तो पता चलेगी जन्नत की हकीकत।

  2. Ravi

    July 29, 2023 at 2:21 pm

    सब शंभू दलाल वाजपेई की महिमा है, पहले कैनविज डुबाया, अब अमृत विचार का सत्यानाश करेगा ये शराब और लौंडिया बाजी में डूबा संपादक

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