लाल झंडे वाले कबीराना फोटो जर्नलिस्ट सुनील कुमार दत्ता से एक मुलाकात, देखें वीडियो

कबीर के नाम से चर्चित एसके दत्ता उर्फ सुनील कुमार दत्ता आजमगढ़ की एक जानी-मानी शख्सियत हैं. साइकिल से करियर शुरू करने वाले दत्ता साहब दैनिक जागरण, टाइम्स आफ इंडिया, राष्ट्रीय सहारा से लेकर अमर उजाला तक में काम करते हुए कुछ बरस से मोपेड से चलने लगे हैं. जाहिर है, उनके जीवन में, उनकी नैतिकता में, उनके संस्कार में पैसे महत्वपूर्ण नहीं थे, न हैं. वे जीवन को संपूर्णता के साथ जीते-देखते हैं. Continue reading

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आईएफडब्ल्यूजे के महासचिव परमानंद पांडेय ने भी खोला अध्यक्ष के. विक्रम राव के खिलाफ मोर्चा

पत्रकार संगठन इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्टस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के. विक्रम राव की निरंकुश एवं अधिनायकवादी कार्यशैली एवं उन पर लगे वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के कारण संगठन में अब विद्रोह की स्थिति पैदा हो चुकी है। संगठन के सदस्यों का एक बड़ा तबका श्री राव का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है। इससे श्री राव इस तरह बौखला उठे हैं कि वे संगठन को पूरी तरह अपने स्वामित्व वाली संस्था बनाने की कोशिशों से भी अब परहेज नहीं कर रहे हैं।

श्री राव अपनी सारी खीझ अब राष्ट्रीय महासचिव श्री परमानन्द पाण्डे पर निकाल रहे हैं जो संगठन में श्री राव से कहीं अधिक लोकप्रिय हैं। श्री राव द्वारा श्री पाण्डे को अपनी सुनियोजित साजिश का शिकार बनाये जाने की सबसे बड़ी वजह यह है कि श्री पाण्डे ने अध्यक्ष द्वारा की जा रही कथित वित्तीय अनियमितताओं में श्री राव का साथ देने से इनकार कर दिया है। श्री राव गत 1 दिसंबर को इस कदर मनमानी पर उतर आए कि उन्होंने संगठन के दिल्ली स्थित कार्यालय का ताला तुड़वा कर उसकी जगह अपना निजी ताला डाल दिया। संगठन को पारिवारिक संपत्ति बनाने की कोशिशों में जुटे श्री राव के साथ उस सयम उनकी पत्नी एवं पुत्र भी संगठन के दिल्ली कार्यालय पहुंचे थे।

श्री राव के इस कृत्य के पीछे उनकी यह मंशा थी कि महासचिव के रूप में श्री पाण्डे को संगठन की जिम्मेदारियों के निष्ठापूर्ण निर्वहन से रोक दिया जाए। यहां यह भी गौरतलब है कि दिल्ली स्थित आईएफडब्ल्यूजे का कार्यालय आज जिस भवन में लगता है वह दरअसल दो दशक पूर्व आल इंडिया रेल्वेमेन्स फेडरेशन के प्रमुख नेता श्री शिव गोपाल मिश्र एवं नादर्न रेल्वेमेन्स यूनियन के महासचिव श्री एस के त्यागी की उदारता स्वरूप ही संगठन को उपलब्ध हो सका था जबकि संगठन को उसके कार्यालय से बेदखल कर दिया गया था। उस समय श्री राव ने यह बढ़चढक़र दावा किया था कि वे संगठन हेतु शीघ्र ही एक भव्य कार्यालय तैयार करा देंगे परंतु उनका दावा खोखला ही साबित हुआ। वहीं यह संदेह भी व्यक्त किया जाता रहा है कि श्री राव ने संगठन के वर्तमान कार्यालय की मरम्मत एवं रखरखाव के नाम पर संगठन के कोष से बड़ी राशि निकाली है परन्तु वह राशि कहां गई, यह कोई नहीं जानता। विगत वर्ष जब संगठन के कार्यालय का कम्प्यूटर चोरी चला गया था तब अध्यक्ष श्री राव ने अपने लखनऊ कार्यालय से पुराना कम्प्यूटर तक दिल्ली भेजने से इंकार कर दिया था। तब संगठन के एक राष्ट्रीय सचिव श्री कृष्णमोहन झा ने भोपाल से एक कम्प्यूटर और प्रिंटर दिल्ली कार्यालय भिजवाया ताकि संगठन का कामकाज सुचारू रूप से जारी रह सके।

महासचिव श्री परमानंद पाण्डे के विरूद्ध श्री राव ने यह दुष्प्रचार कर रखा है कि श्री पाण्डे दिल्ली कार्यालय का उपयोग अपनी वकालत के पेशे के लिए कर रहे हैं जबकि वास्तविकता यह है कि श्री पाण्डे का अपना निजी चैम्बर भी है परन्तु समय बचाने के उद्देश्य से वे संगठन के कार्यालय से अपने व्यक्तिगत कार्य निपटाते थे। दिल्ली कार्यालय में श्री राव द्वारा अवैधानिक तरीके से ताला डाल दिए जाने के बाद श्री पाण्डे अब अपने निजी चैम्बर से ही अपने व्यावसायिक कार्य निपटा रहे है। यहां विशेष उल्लेखनीय बात यह है कि श्री पाण्डे ने ही मजीठिया आयोग की सिफारिशें लागू करवाने के लिए देश के हजारों पत्रकारों की ओर से लंबी लड़ाई लड़ी है और श्री राव उन्हें उनकी सेवाओं के लिए सम्मानित करने के बजाय उनके विरूद्ध सुनियोजित साजिश के तहत उन्हें बदनाम करने की कोशिशों में जुटे हुए हैं। श्री पाण्डे की निस्वार्थ सेवाओं एवं निर्धन कमजोर वर्ग की मदद हेतु तत्परता को देखते हुए उन्हें रेल्वेमेन्स फेडरेशन द्वारा पुन: एक कार्यालयीन भवन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव किया गया था परन्तु उन्होंने अत्यंत विनम्रतापूर्वक इंकार कर दिया।

आईएफडब्ल्यूजे के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के विक्रम राव के अनैतिक कार्य कलापों एवं अधिनायकवादी कार्यशैली का श्री पाण्डे द्वारा जो सशक्त विरोध किया जा रहा है उससे श्री राव अब अन्दर ही अन्दर इस कदर घबरा उठे है कि वे येनकेन प्रकारेण श्री पाण्डे को महासचिव पद से ही हटवा देने की कोशिशों से भी परहेज नहीं कर रहे है और उनके विरूद्ध मनगढ़ंत भ्रामक एवं असत्य आरोप लगाने पर उतर आए हैं। श्री पाण्डे इस हकीकत से पहले ही अच्छी तरह वाकिफ थे कि श्री राव उनके विरूद्ध दुष्प्रचार कर भ्रम का वातावरण निर्मित करने में कोई भी कसर बाकी नहीं रख छोडेंगे। इसलिए श्री पाण्डे ने एक सर्कुलर जारी कर वास्तविक स्थिति से संगठन के सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों को परिचित करा दिया है। श्री पाण्डे ने इस सर्कुलर में सभी पदाधिकारियों एवं सदस्यों से अपील की है कि अब समय आ गया है कि संगठन को किसी एक व्यक्ति की निजी संपत्ति बनने से रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संगठित  मुहिम चलाई जावे। श्री पाण्डे को संगठन में हर तरफ से जो भारी समर्थन मिल रहा है उससे श्री राव चिन्तित हो उठे हैं। गौरतलब है कि संगठन के दो राष्ट्रीय सचिव श्री हेमन्त तिवारी एवं श्री कृष्णमोहन झा ने राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री के विक्रम राव की अधिनायकवादी कार्यशैली एवं कथित आर्थिक अनियमितताओं के विरूद्ध काफी समय पूर्व से ही बगावत का झंडा उठा रखा है।

कृष्णमोहन झा की रिपोर्ट. संपर्क: krishanmohanjha@gmail.comkrishanmohanjha@gmail.com

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यूपी में महिला एसआई से छेड़छाड़, आरोपी आईपीएस का बचाव

सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर ने डीजीपी, यूपी से एसआई(सीपी), पीटीएस, मेरठ अरुणा राय द्वारा आईपीएस डी पी श्रीवास्तव के विरुद्ध दर्ज कराये गए मुकदमे की विवेचनाधिकारी तत्काल बदलते हुए इसकी विवेचना आईपीएस अलंकृता सिंह अथवा किसी अन्य महिला आईपीएस से कराये जाने और इसका पर्यवेक्षण स्वयं डीजीपी अथवा आईपीएस सुतापा सान्याल से करवाने जाने की भी मांग की है. साथ ही गलत विवेचना के लिए विवेचक पर आपराधिक कार्यवाही करने की मांग की है.

मौजूदा विवेचक सवरणजीत कौर, सीओ ऑफिस, मेरठ ने इस मामले में धारा 354 आईपीसी की अजमानतीय धारा हटाते हुए मात्र धारा 354(ए) की जमानतीय धारा रहने दी जिसके कारण अभियुक्त श्री श्रीवास्तव को तत्काल जमानत मिल गयी. डॉ ठाकुर ने रुपन देओल बजाज बनाम केपीएस गिल मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का हवाला देते हुए कहा है कि जिस प्रकार से श्री श्रीवास्तव ने अन्य अश्लील बातें कहने के साथ अपना हाथ बढ़ा कर सुश्री राय का हाथ अपने हाथ में खीच लिया और चूम लिया और गाल सहला दिया वह धारा 354 आईपीसी में महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बलप्रयोग की श्रेणी में आता है क्योंकि धारा 349 आईपीसी में बल, धारा 350 में आपराधिक बलप्रयोग तथा धारा 351 में हमला की जो परिभाषा दी गयी है उसके अनुसार सुश्री राय के विरुद्ध किया कार्य स्पष्टतया धारा 354 आईपीसी में आता है.

संलग्न- डीजीपी को पत्र

सेवा में,
श्री ए एल बनर्जी,
पुलिस महानिदेशक,
उत्तर प्रदेश,
लखनऊ

विषय-  मु०अ०स० 111/014 धारा 354, 354(ए), 503 तथा 509 आईपीसी थाना- महिला थाना, मेरठ वादिनी सुश्री अरुणा राय, एसआई(सीपी) वर्तमान तैनाती पीटीएस, मेरठ की विवेचना अधिकारी बदलते हुए विवेचना अपने व्यक्तिगत पर्यवेक्षण में करवाए जाने विषयक .

महोदय,

कृपया निवेदन है कि सुश्री अरुणा राय, एसआई(सीपी), वर्तमान तैनाती पीटीएस, मेरठ ने अत्यंत साहसिक कदम उठाते हुए वहां तैनात श्री डी पी श्रीवास्तव, डीआईजी पीटीएस मेरठ द्वारा अपने विरुद्ध दिनांक 23/04/2014 तथा उसके बाद किये गए यौन उत्पीडन के सम्बन्ध में दिनांक 31/05/2014 को मु०अ०स० 111/014 धारा 354, 354(ए), 503 तथा 509 आईपीसी थाना- महिला थाना, मेरठ पंजीकृत कराया.

मुझे इस मामले में सुश्री राय मुझसे काफी समय से विचार-विमर्श कर रही थीं पर हाल में उन्होंने मुझे अपने मेल दिनांक 16/06/2014 द्वारा समस्त वांछित अभिलेख प्रेषित करते हुए मुझे इस सम्बन्ध में किसी भी स्तर पर बात करने और उनकी तरफ से कार्यवाही करने के लिए अधिकृत किया. साथ ही इस मामले को हर स्तर पर उठाने का भी निवेदन किया ताकि इस प्रकरण में पूरी तरह न्याय हो सके. सुश्री राय ने अपने मेल में यह भी कहा है कि वह अब इस मामले में परदे के पीछे नहीं रहेंगी और इस मामले को गंतव्य तक पहुँचाने के लिए अपने नाम सहित सामने आएँगी. उन्होंने मुझे भी अपना नाम स्पष्ट रूप से किसी भी स्तर पर अथवा फोरम पर रखने को अधिकृत किया है क्योंकि उनका मानना है कि इस मामले में चूँकि उनकी कोई भी गलती नहीं है, अतः उन्हें अपना नाम छिपाने अथवा किसी भी प्रकार का कोई भी शर्म महसूस करने का कोई भी कारण नहीं है. उन्होंने मुझे श्री श्रीवास्तव द्वारा उनसे की गयी बातचीत भी न्यायहित में किसी भी स्तर पर प्रस्तुत करने को कहा है और यदि आप उचित समझेंगे तो मैं उक्त बातचीत की रिकॉर्डिंग आपके सामने प्रस्तुत कर दूंगी.

जहां काफी मशाक्कत के बाद उनकी एफआइआर हुई थी वहीँ एफआइआर के बाद भी गड़बड़ी हुई है जिसमे ख़ास कर विवेचनाधिकारी द्वारा किया गया अनुचित और आपराधिक कृत्य भी शामिल है.

इस मुकदमे की विवेचना सुश्री सवरणजीत कौर, सीओ ऑफिस, मेरठ को सुपुर्द की गयी. सुश्री कौर ने इस मामले में गलत विवेचना करते हुए धारा 354 तथा 503 आईपीसी का आरोप अभियोग से हटा दिया है. इसका एक गंभीर दुष्परिणाम यह रहा कि यह अभियोग मात्र जमानतीय धाराओं 354(ए) तथा 509 आईपीसी में शेष रह गया और श्री श्रीवास्तव इसका लाभ उठाते हुए दिनांक 14/06/2014 को मा० न्यायालय में हाजिर हो कर मौके पर ही जमानत प्राप्त करने में सफल हो गए.

सुश्री कौर द्वारा धारा 354 आईपीसी को हटाया जाना पूर्णतया गलत और नियमविरुद्ध है. कारण यह है कि एफआइआर के अनुसार दिनांक 23/04/2014 को अभियुक्त श्री श्रीवास्तव ने सुश्री राय को अपने कार्यालय कक्ष में बुला कर अश्लील और अभद्र बातें कहीं, उन्हें “तुम मादक हो”, रोज़ ऑफिस में चली आना आदि कहा. पर्ची पर ‘आई लव यू लिख’ कर उन्हें दिया. “आई लव यू और हंड्रेड टाइम्स आई लव यू” जैसी बात कही. “मैं ये सब मैं सेक्स के लिए नहीं कह रहा, हाँ तुम ATTRACTIVE हो यहाँ कि बाकी लडकियों से, लेकिन तुम्हें क्या लगता है कि मैं सेक्स खरीद नही सकता| अरे मेरी सैलरी डेढ़ लाख है” जैसी बातें कही.

इतना ही नहीं श्री श्रीवास्तव ने अपना हाथ बढ़ा कर उनका हाथ अपने हाथ में खीच लिया और चूम लिया और गाल सहला दिया और साथ में कहा तुम नहीं समझ सकती कि तुम्हारे लिए मेरी फीलिंग्स क्या हैं.

इसके बाद अगले दिन दिनांक 24/4/2014 को भी असहज करने वाली बातें कही. इसके बाद कई बार बात करने के लिए अफसरों को भेज कर कहलवाया.

पुनः जब आरोपी अधिकारी को पता लगा कि सुश्री राय इस कुकृत्य कि लिखित शिकायत करने जा रही हैं तो उन्होंने उनपर ऊपर शिकायत न करने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. आरोपी अधिकारी द्वारा दिनांक 02/05/2014 को सुश्री राय को शिकायत न करने की धमकी दी गई. दिनांक 02/05/2014 को पुनः सरकारी कक्ष में बुला कर कहा- “तुम्हे यहाँ वहाँ बात करने की जरुरत नहीं है तुम्हारी कोई प्रॉब्लम है तो मैं ही ख़त्म कर दूंगा. मैं यहाँ से चुनाव ख़त्म होते ही अच्छी पोस्टिंग लेकर चला जाऊँगा. मेरे डीजी उत्तर प्रदेश पुलिस और मुख्य सचिव से अच्छे सम्बन्ध हैं मैं एक मिनट में जोन में पोस्टिंग लेकर चला जाऊँगा. मैं रोज़ डीजी उत्तर प्रदेश से फ़ोन से वार्ता करता हूँ. जब तक मैं हूँ तुम क्यों घबराती हो. तुम चलाओ पूरा पी.टी.एस तुम जैसा चाहोगी वैसा होगा.”  बाद में भी सुश्री राय पर अपने स्तर से अपनी पत्नी के माध्यम से मुक़दमा नहीं लिखना का काफी दवाब बनाया.

धारा 354 कहता है- “assault or criminal force to woman with intent to outrage her modesty – whoever assaults or uses criminal force to any woman, intending to outrage or knowing it to be likely that he will there by outrage her modesty shall be punished with imprisonment of either description for a term which shall not be less than one year but which may extent to five year and shall also be liable to fine.”

अर्थात किसी महिला की लज्जा भंग करने के उद्देश्य से हमला या आपराधिक बलप्रयोग. इस अपराध का मुख्य तत्व किसी महिला पर हमला या आपराधिक बलप्रयोग इस आशय से करना है कि इससे उस महिला की लज्जाभंग हो.

जाहिर है कि जब श्री श्रीवास्तव ने जबरदस्ती आगे बढ़ कर अपना हाथ बढ़ा कर उनका हाथ अपने हाथ में खीच लिया और चूम लिया और जबरदस्ती गाल सहला दिया तो इस मामले में स्वतः ही और निश्चित रूप से आपराधिक बलप्रयोग हो गया. ऐसे में इस बात की तनिक भी गुंजाइश नहीं रहती है कि इस अपराध को धारा 354 का अपराध नहीं माना जाए.

यह बात इस कारण भी बहुत स्पष्ट है क्योंकि धारा 349 आईपीसी में बल परिभाषित है जिसमे गति, गति परिवर्तन अथवा गतिहीनता कारित करना शामिल है. धारा 350 आईपीसी में आपराधिक बलप्रयोग निम्नवत परिभाषित है-“Criminal force- whoever intentionally force to any person, without that persons consent, in order to the committing of any offence, or intending by the use of such force to cause,  or knowing it to be likely that by the use of such force he will cause injury, fear or annoyance to the person to whom the force is used, is said to use criminal force to that another.” धारा 351 आईपीसी में हमला की परिभाषा में किसी प्रकार का अंगविक्षेप अथवा तैयारी शामिल हैं.

अर्थात यदि कोई भी व्यक्ति दुसरे व्यक्ति पर बिना उसकी इच्छा और रजामंदी के कोई भी अपराध कारित करने के लिए बल प्रयोग करता है वह आपराधिक बलप्रयोग है. साथ ही कोई व्यक्ति किसी अन्य की ओर कोई अंगविक्षेप करे या उसकी तरफ बढ़ने की कोई तैयारी करे तो वह हमला है. जाहिर है कि इस मामले में श्री श्रीवास्तव द्वारा आपराधिक कृत्य किया गया है और इस बात से स्वयं विवेचनाधिकारी सुश्री कौर भी इनकार नहीं कर रही हैं. यह भी स्पष्ट है कि यह आपराधिक कृत्य बलप्रयोग के माध्यम से हुआ है जहां श्री श्रीवास्तव ने अपने सीट से उठ कर जबरदस्ती अपना हाथ बढ़ा कर सुश्री राय का हाथ अपनी ओर खींचा, फिर उसे जबरदस्ती चूमा. साथ ही पुनः उनकी मर्जी के बगैर आपराधिक बलप्रयोग करते हुए उनका गाल सहलाया. साथ ही यह आपराधिक हमला भी है. जाहिर है इन कारणों से श्री श्रीवास्तव का यह कृत्य धारा 349 आईपीसी में परिभाषित बल, धारा 350 आईपीसी में परिभाषित आपराधिक बलप्रयोग तथा धारा 351 आईपीसी में हमला होने के कारण स्पष्टतया धारा 354 आईपीसी में स्त्री की लज्जा भंग करने के आशय से उस पर आपराधिक बलप्रयोग और हमला की श्रेणी में आता है.

जब इतना कुछ गठित हुआ जो आपराधिक बलप्रयोग था, जिसमे जबरदस्ती बल प्रयोग गुआ और इस दौरान इच्छा के विपरीत बल प्रयोग करते हुए अपराध किया गया तो इस मामले में धारा 354 नहीं होने का कोई कारण तक नही है.

यह बात काफी पहले मिसेज रुपन देओल बजाज एवं एक अन्य बनाम कँवर पाल सिंह गिल एवं अन्य (1996 AIR 309, 1995 SCC (6) 194 ) में मा० सर्वोच्च न्यायालय ने बहुत स्पष्ट रूप से कहा था. इस मामले में एक आईपीएस अफसर श्री केपीएस गिल द्वारा एक आईएएस अफसर सुश्री रुपन बजाज को एक पार्टी में पीछे से चिकोटी काटने के अश्लील हरकत करने पर मा० सर्वोच्च न्यायालय ने श्री गिल को धारा 354 का स्पष्ट दोषी माना था. Since the word `modesty’ has not been defined in the Indian Penal Code we may profitably look into its dictionary meaning. According to Shorter Oxford English Dictionary (Third Edition) modesty is the quality of being modest and in relation to woman means “womanly propriety of behaviour; scrupulous chastity of thought, speech and conduct”. The word `modest’ in relation to woman is defined in the above dictionary as “decorous in manner and conduct; not forward or lewd; shamefast”. Webster’s Third New International Dictionary of the English language defines modesty as “freedom from coarseness, indelicacy or indecency; a regard for propriety in dress, speech or conduct”. In the Oxford English Dictionary (1933 Ed) the meaning of the word `modesty’ is given as “womanly propriety of behaviour; scrupulous chastity of thought, speech and conduct (in man or woman); reserve or sense of shame proceeding from instinctive aversion to impure or coarse suggestions”. In State of Punjab vs. Major Singh (AIR 1967 Sc 63) a question arose whether a female child of seven and a half months could be said to be possessed of `modesty’ which could be outraged. In answering the above question Mudholkar J., who along with Bachawat J. spoke for the majority, held that when any act done to or in the presence of a woman is clearly suggestive of sex according to the common notions of mankind that must fall within the mischief of Section 354 IPC. Needless to say, the `common notions of mankind’ referred to by the learned Judge have to be gauged by contemporary societal standards. The other learned Judge (Bachawat J.) observed that the essence of a woman’s modesty is her sex and from her very birth she possesses the modesty which is the attribute of her sex. From the above dictionary meaning of `modesty’ and the interpretation given to that word by this Court in Major Singh’s case (supra) it appears to us that the ultimate test for ascertaining whether modesty has been outraged is, is the action of the offender such as could be perceived as one which is capable of shocking the sense of decency of a woman. When the above test is applied in the present case, keeping in view the total fact situation, it cannot but be held that the alleged act of Mr. Gill in slapping Mrs. Bajaj on her posterior amounted to `outraging of her modesty’ for it was not only an affront to the normal sense of feminine decency but also an affront to the dignity of the lady -“sexual overtones” or not, notwithstanding.”

जाहिर है कि जो बात मा० सर्वोच्च न्यायालय ने रुपन देओल बजाज में कही वह बात पूरी तरह से सुश्री अरुणा राय के मामले में भी खरी उतरती है क्योंकि यह स्वाभाविक है कि जब एक डीआईजी रैंक का उम्रदराज अफसर एक युवा महिला के हाथ जबरदस्ती पकड़ता है, उसे अपनी ओर खींचता है और उनके गाल सहलाता है तो इससे अधिक एक महिला की लज्जाभंग का कोई भी उपक्रम नहीं हो सकता.

अतः यह अत्यंत कष्ट का विषय है कि इसके बाद भी सुश्री कौर ने इस मामले से धारा 354 हटा दिया, जो सर्वथा गलत और जाहिर तौर पर बेईमानी है. इतना ही नहीं, यह अपने आप में स्वयं एक आपराधिक कृत्य है क्योंकि सभी तथ्यों के रहने के बाद उन्हें जानबूझ कर सिरे से दरकिनार कर किसी अपराधी की मदद करना भी अपने आप में एक अपराध है.

इसके विपरीत धारा 354ए का जो अपराध सुश्री कौर ने लगाया है वह शारीरिक संपर्क/शरीर छूना, सेक्स की मांग, जबरदस्ती पोर्नोग्राफी दिखाए जाने तथा सेक्सी बातें/टिप्पणी करने आदि से जुड़ा हुआ है. यह सही है कि इस प्रकरण में धारा 354ए का भी अपराध हुआ है क्योंकि श्री श्रीवास्तव ने शारीरिक संपर्क/शरीर छूने का काम किया है और साथ ही सेक्सी टिप्पणी भी की है. लेकिन धारा 354ए का अपराध होने के साथ-साथ यह धारा धारा 354 का भी अपराध है क्योंकि जैसा मैंने ऊपर स्पष्ट किया इसमें आपराधिक बलप्रयोग और हमला भी है जिसे सुश्री कौर ने नज़रंदाज़ किया है.

इसके अतिरिक्त यह धारा 503 आईपीसी में आपराधिक अभित्रास का भी अपराध है क्योंकि इसमें श्री श्रीवास्तव द्वारा सुश्री राय के शरीर, ख्याति और नौकरी की क्षति की धमकी भी दी गयी और इसके माध्यम से सुश्री राय को संत्रास कारित किया गया है. मेरी जानकारी के अनुसार सुश्री कौर ने यह धारा भी विवेचना में हटा दी है.

सुश्री राय ने जो आरोप अपने एफआइआर में लगाए हैं उनके लिए उनके पास ना सिर्फ अपना अभिकथन है बल्कि सुश्री सुतापा सान्याल, आईपीएस की अध्यक्षता वाली शिकायत समिति के सामने दिया गया उनका अभिकथन, तमाम लोगों को उनके द्वारा बतायी गयी बात और साथ ही फोन रिकॉर्डिंग के भी पुख्ता सबूत हैं.

अतः यह पूरी तरफ अनपेक्षित है कि सुश्री कौर ने मात्र एक वरिष्ठ आईपीएस अफसर को बचाने के लिए धारा 354 के अपराध को अभियोग से हटा दिया. यह बेहद कष्ट का विषय है कि सुश्री अरुणा राय ने जितनी हिम्मत और साहस का काम करते हुए, सारे जमाने से बिना घबराए, अपने व्यक्तिगत संस्कारों से जूझने के बाद, अपनी कथित बदनामी के भय को दरकिनार करते हुए, पुलिस में मात्र एसआई होने के बाद भी एक आईपीएस के सामने खड़ा होने की हिम्मत करने, समस्त पारंपरिक सोच का डट कर मुकाबला करने और अपना सर्वस्व दांव पर लगाने का जो फौलादी और साहसी कार्य किया, सुश्री कौर स्वयं एक वरिष्ठ पुलिस अफसर होने के बाद भी उसे मटियामेट कर दे रही हैं और हलके से विभागीय दवाब में पूरे मामले की गंभीरता समाप्त करने का कुत्सित और जघन्य प्रयास कर रही हैं.

मुझे विश्वास है कि आप इस मामले में सुश्री कौर के गलत कार्यों का किसी भी प्रकार से सहयोग नहीं करेंगे और मामले की गंभीरता, संवेदनशीलता और महत्ता को देखने हुए तत्काल इसके सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही करेंगे.

अतः उक्त मामले के सन्दर्भ में मैं आपसे निम्न निवेदन करती हूँ-

1.  प्रकरण की गंभीरता तथा प्रस्तुत तथ्यों/साक्ष्यों के आधार पर तत्काल इस मामले का विवेचनाधिकारी बदलने की कृपा करें और यह प्रकरण सुश्री अलंकृता सिंह अथवा किसी अन्य महिला आईपीएस अफसर को विवेचना हेतु देने की कृपा करें

2.  इस प्रकरण की विवेचना अपने स्वयं अथवा वरिष्ठ आईपीएस सुश्री सुतापा सान्याल के पर्यवेक्षण में करवाया जाना सुनिश्चित करें

3. गलत विवेचना करने और गलत ढंग से आपराधिक धारा जानबूझ कर निकाले जाने और अभियुक्त को इसका गलत लाभ देने के लिए वर्तमान विवेचनाधिकारी के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही सहित समस्त विधिक कार्यवाही करने की कृपा करें.

पत्र संख्या- NT/Aruna/01                                       
दिनांक-18/06/2014
भवदीय
डॉ नूतन ठाकुर
5/426, विराम खंड,
गोमती नगर, लखनऊ
# 94155-34525

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राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित होंगे ओम थानवी, राजेंद्र धोड़पकर और सुरेश सलिल

भोपाल। माधवराव सप्रे संग्रहालय की तीसवीं वर्षगांठ पर 19 जून को पत्रकार ओम थानवी, राजेन्द्र धोड़पकर, साहित्यकार सुरेश सलिल को उनके उत्कृष्ट कृतित्व के लिए राष्ट्रीय पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। इस अवसर पर सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’ के पत्रकारीय अवदान पर ओम थानवी का व्याख्यान होगा। प्रकाशन की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में ‘एक भारतीय आत्मा’ माखनलाल चतुर्वेदी की मासिक ‘प्रभा’ के अवदान पर सुरेश सलिल वक्तव्य देंगे।

राजेन्द्र धोड़पकर ‘पत्रकारिता की संस्कृति’ का विश्लेषण करेंगे। सप्रे संग्रहालय की निदेशक डॉ. मंगला अनुजा ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा मंत्री उमाशंकर गुप्ता होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता अमृतलाल वेगड़ करेंगे। कार्यक्रम सप्रे संग्रहालय भवन में सुबह 10 बजे आयोजित किया जाएगा।

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पेड न्यूज मामले में चव्हाण के खिलाफ सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित

चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण के खिलाफ कथित रूप से धन देकर खबर छपवाने के मामले तथा चुनाव खर्चे का गलत ब्यौरा देने की अंतिम सुनवाई की। मुख्य निर्वाचन आयुक्त वीएस संपत तथा चुनाव आयुक्तों एचएस ब्रहमा व एसए जदी की सदस्यता वाली पूर्ण पीठ ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनीं और फैसला सुरक्षित रख लिया। आयोग मुख्यालय में तीन घंटे से अधिक चली सुनवाई के बाद चव्हाण के वकील अभिमन्यु भंडारी ने बताया कि इस मामले में दलीलों का अंतिम दिन था। हमने विस्तार से दलीलें दी और दोनों पक्षों ने अपने बयान दिए। आयोग ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है।

शिकायत पक्ष की ओर से महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री माधवराव किन्हालकर ने कहा कि उन्होंने आयोग के समक्ष सारे साक्ष्य रख दिए हैं तथा वह इस बात को लेकर आशावान है कि चुनाव आयोग की तरफ से उनके पक्ष में निर्णय आएगा। आयोग ने पिछले माह चव्हाण के खिलाफ पांच आरोप तय किए थे। उन्होंने हाल के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र की नांदेड़ सीट से विजय हासिल की थी। आयोग ने शीर्ष न्यायालय के निर्देश पर पिछली मई को उसके समक्ष पेश होने का नोटिस जारी किया था। यह नोटिस उनके खिलाफ 2009 के चुनाव में कथित खचरें को लेकर था जिसे पेड न्यूज की श्रेणी में रखा जाता है। यदि फैसला चव्हाण के पक्ष में नहीं गया तो आयोग उन्हें आरपी एक्ट की धारा 10 ए के तहत तीन वर्ष के लिए चुनाव के अयोग्य घोषित कर देगा, जिससे उनकी लोकसभा सदस्यता चली जाएगी।

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गंगा को निर्मल रहने दो, गंगा को अविरल बहने दो

केंद्र की नई सरकार ने गंगा नदी से जुड़ी समस्‍याओं पर काम करने का फैसला किया है। तीन-तीन मंत्रायल इस पर सक्रिय हुए हैं। एक बार पहले भी राजीव गांधी के प्रधानमंत्रित्‍व काल में गंगा की सफाई की योजना पर बड़े शोर शराबे के साथ काम शुरू हुआ था। गंगा ऐक्‍शन प्‍लान बना। मनमोहन सिंह सरकारने तो गंगा को राष्‍ट्रीय नदी ही घोषित कर दिया। मनो पहले यह राष्‍ट्रीय नदी नहीं रही हो। अब तक लगभग बीस हजार करोड़ रुपए खर्च करने के बावजूद गंगा का पानी जगह-जगह पर प्रदूषित और जहरीला बना हुआ है। गंगा का सवाल ऊपर से जितना आसान दिखता है, वैसा है नहीं। यह बहुत जटिल प्रश्‍न है। गहराई में विचार करने पर पता चलता है कि गंगाको निर्मल रखने के लिए देश की कृषि, उद्योग, शहरी विकास तथा पर्यावरण संबंधी नीतियों में मूलभूत परिवर्तन लाने की जरूरत पड़ेगी। यह बहुत आसान नहीं होगा। केवल रिवर फ्रंट बना कर उसकी सजावट करने का मामला नहीं है। दरअसल, ‘गंगा को साफ रखने’ या ‘क्‍लीन गंगा’ की अवधारणा ही सही नहीं है।

सही नारा या अवधारणा यह होनी चाहिए कि ‘गंगा को गंदा मत करो’। थोड़ी बहुत शुद्धिकरण तो गंगा खुद ही करती है। उसके अंदर स्‍वयं शुद्धिकरण की क्षमता है। जहां गांगा का पानी साफ हो वहां से जल लेकर यदि किसी बोतल में रखें तो यह सालों साल सड़ता नहीं है। वैज्ञानिकों ने हैजे के जीवाणुओं को इस पानी में डालकर देखा तो पाया कि चार घंटे के बाद हैजे के जीवाणु नष्‍ट हो गए थे। अब उस गंगा को कोई साफ करने की बात करे तो इसे नासमझी ही माना जाएगा। अगर कोई यह समझता है कि लोगों के नहाने या कुल्‍ला करने से या भैसों के नहाने या गोबर करने से गंगा या अन्‍य कोई नदी प्रदूषित होती है तो यह ठीक उसी प्रकार हंसने की बात होगी जैसे कोई शहरी आदमी जौ के पौधे को गेहूं का पौधा समझ बैठे या बाजरे के पौधे को मक्‍का या गन्‍ने का पौधा समझ बैठे। गंगा के संबंध में मोदी सरकार के विभिन्‍न मंत्रालयों के अफसर और मंत्रिगण जो घोषणाएं कर रहे हैं, उससे तो ऐसा ही लग रहा है।

कुछ साल पहले आगरा में यमुनानदी में तैर कर नहा रही लगभग 35 भैंसों को पुलिसवाले पकड़कर थाने ले आए थे। और भैंस वालोंने कई दिन बाद बड़ी मुश्किल से भैंसों को थाने से छुड़ाया था। यमुना में जहरीला कचरा बहाने वाले फैक्‍ट्री के मालिक या शहरी मलजल बहाने वाले म्‍युनिसिपल कॉरपोरेशन के अधिकारी पुलिस के निशाने पर कभी नहीं रहे। गंगा तथा अन्‍य नदियों के प्रदूषित और जहरीला होने का सबसे बड़ा कारणहै कल-कारखानों के जहरीले रसायनों का नदी में बिना रोकटोक के गिराया जाना। उद्योगपतियों के प्रतिनिधि बताते हैं कि गंगा के प्रदूषण में इंडस्‍ट्रीयल एफ्लूएंट सिर्फ आठ प्रतिशत जिम्‍मेदार है। यह आंकड़ा विश्‍वास करने योग्‍य नहीं है। दूसरे बात यह कि जब कल कारखानों या थर्मल पावर स्‍टेशनोंका गर्म पानी तथा जहरीला रसायन या काला या रंगीन एफ्लूएंट नदी में जाता है, तो नदी के पानी को जहरीला बनाने के साथ-साथ नदी के स्‍वयं शुद्धिकरण की क्षमता को नष्‍ट कर देता है। नदी में बहुत से सूक्ष्‍म वनस्‍पतिहोते हैं जो सूरज की रोशनी में प्रकाश संश्‍लेषण की क्रिया द्वारा अपना भोजनबनाते हैं, गंदगी को सोखकर ऑक्‍सीजन मुक्‍त करते हैं। इसी प्रकार बहुतेरे जीव जन्‍तु भी सफाई करते रहते हैं। लेकिन उद्योगों के प्रदूषण के कारण गंगा में तथा अन्‍य नदियों में भी जगह-जगह डेड जोन बन गए हैं। कहीं आधा किलोमीटर, कहीं एक किलोमीटर तो कही दो किलोमीटर के डेड जोन मिलते हैं। यहां से गुजरने वाला कोई जीव-जन्‍तु या वनस्‍पति जीवित नहीं बचता। क्‍या उद्योगों, बिजलीघरों का गर्म पानी जहरीला कचरे को नदी में बहाने पर सख्‍ती से रोक लगेगी? क्‍या प्रदूषणके लिए जिम्‍मेदार उद्योगों के मालिकों, बिजलीघरों के बड़े अधिकारियों को जेल भेजने के लिए सख्‍त कानून बनेंगे और उसे मुस्‍तैदी से लागू किया जाएगा।

अगर ऐसा नहीं हुआ तो गंगा निर्मल कैसे रहेगी? गंगा के तथा अन्‍य नदियों के प्रदूषण का बड़ा कारण है खेती में रसायनिक खादों और जहरीले कीटनाशकों का प्रयोग। ये रसायन बरसात के समय बहकर नदी में पहुंच जाते हैं तथा जीव जन्‍तुओं तथा वनस्‍पतियों को नष्‍ट करकेनदी की पारिस्‍थतिकी को बिगाड़ देते हैं। इसलिए नदियों को प्रदूषण मुक्‍त रखने के लिए इन रासायनिक खादों तथा कीटनाशकों पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी को बंद करके पूरी राशि जैविक खाद तथा जैविक कीटनाशकों का प्रयोग करने वाले किसानों को देनी पड़ेगी। और अंतत: रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों पर पूर्ण रोक लगानी पड़ेगी। जैविक खेती में उत्‍पादकता का कम नहीं होती, अनाज, सब्‍जी तथा फल भी जहर मुक्‍त और स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक होते हैं। इसमें सिंचाई के लिए पानी की खपत भी बहुत घटती है और खेती की लागत घटने से मुनाफा भी बढ़ाता है। अगर इस पर कड़ा फैसला लिया गया तभी नदियों को साफ रखा जा सकेगा। शहरों के सीवर तथा नालों से बहने वाले एफ्लूएंट को ट्रीट करके साफ पानी नदी में गिराने के लिए बहुत बातें हो चुकी हैं। केवल गंगा के बगल के क्‍लास–1 के 36 शहरों में प्रतिदिन 2,601.3 एमएलडी गंदा पानी निकलता है, जिसका मात्र 46 प्रतिशत ही साफ करके नदी में गिराया जाता है। क्‍लास–2 के 14 शहरों से प्रतिदिन 122 एमएलडी एफ्लएंट निकलता है। जिसका मात्र 13 प्रतिशत ही साफ करके गिराया जाता है।

गंगा के किनारे के कस्‍बों तथा छोटे शहरों के प्रदूषण की तो सरकार चर्चा भी नहीं करती।शहरी मलजल तथा कचरा ऐसी चीजें हैं, जिसे सोना बनाया जा सकता है। देश के कुछ शहरों में इस कचरे से खाद बनाई जाती है और पानी को साफ करके खेतों की सिंचाई के काम में लगाया जाता है। ऐसा प्रयोग गंगा तथा अन्‍य नदियों के सभी शहरों-कस्‍बों में किया जा सकता है। अब तक यह मामला टलता रहा है। इसमें भी मुस्‍तैदी की सख्‍ती से जरूरत है। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसीमें वरुणा नदी गंगा में मिलती है। वरुणा शहर की सारी गंदगी गंगा में डालती है। क्‍या प्रधानमंत्री का ध्‍यान इस पर गया है? अगर न देखा हो तो जाकर देख लें। गंगा या अन्‍य नदियों पर नीति बनाने और उसके क्रियान्‍वयन से पहले उन करोड़ों करोड़ लोगों की ओर नजर डाललना जरूरी है, जिनकी जिविका और जिनका सामाजिक सांस्‍कृतिक जीवन इनसे जुड़ा है। गंगापर विचार के साथ-साथ गंगा में मिलने वाली सहायक नदियों के बारे में विचार करना जरूरी है। आठ राज्‍यों की नदियों का पानी प्रत्‍यक्ष या अप्रत्‍यक्ष रूप से गंगा में मिलता है। इन नदियों में होने वाले प्रदूषण का असर भी गंगा पर पड़ता है। गंगा पर शुरू में ही टिहरी में तथा अन्‍य स्‍थानों पर बांध और बराज बना दिए गए। इससे गंगा के जल प्रवाह में भारी कमी आयी है। गंगा के प्रदूषण का यह भी बहुत बड़ा करण है।

बांधों और बराजों के कारण नदी की स्‍वाभाविक उड़ाही (डी-सिल्टिंग) की प्रक्रिया रुकी है। गाद का जमाव बढ़ने से नदी की गहराई घटती गई है और बाढ़ तथा कटाव का प्रकोप भयावह होता गया है। यह नहीं भूलना चाहिए कि गंगा में आने वाले पानी का ललगभग आधा नेपाल के हिमालय क्षेत्र की नदियों से आता है। हिमायल में हर साल लगभग एक हजार भूकंप के झटके रिकॉर्ड किये जाते हैं। इन झटकों के कारण हिमालय में भूस्‍खलन होता रहता है। बरसात में यह मिट्टी बहकर नदियों के माध्‍यम से खेतों, मैदानों तथा गंगा में आता है। हर साल खरबों टन मिट्टी आती है। इसी मिट्टी से गंगा के मैदानों का निर्माण हुआ है। यह प्रक्रिया जारी है और आगे भी जारी रहेगी। 1971 में पश्चिम बंगाल में फरक्‍का बराज बना और 1975 में उसकी कमीशनिंग हुई। जब यह बराज नहीं था तो हर साल बरसात के तेज पानी की धारा के कारण 150 से 200 फीट गहराई तक प्राकृतिक रूप से गगा नदी की उड़ाही हो जाती थी। जब से फरक्‍का बराज बना सिल्‍ट की उड़ाही की यह प्रक्रिया रुक गई और नदी का तल ऊपर उठता गया। सहायक नदियां भी बुरी तरह प्रभावित हुईं। जब नदी की गहराई कम होती है तो पानी फैलता है और कटाव तथा बाढ़ के प्रकोप की तीव्रता को बढ़ाता जाता है। मालदह-फरक्‍का से लेकर बिहार के छपरा तक यहां तक कि बनारस तक भी इसका दुष्‍प्रभाव दिखता है।

फरक्‍का बराज के कारण समुद्र से मछलियों की आवाजाही रुक गइ। फीश लैडर बालू-मिट्टी से भर गया। झींगा जैसी मछलियों की ब्रीडिंग समुद्र के खारे पानी में होती है, जबकि हिलसा जैसी मछलियों का प्रजनन ऋषिकेष के ठंडे मीठे पानी में होता है। अब यह सब प्रक्रिया रुक गई तथा गंगा तथा उसकी सहायक नदियों में 80 प्रतिशत मछलियां समाप्‍त हो गई। इससे भोजन में प्रोटीन की कमी हो गई। पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्‍तर प्रदेश में अब रोजाना आंध्र प्रदेश से मछली आती है। इसके साथ ही मछली से जीविका चलाकर भरपेट भोजन पाने वाले लाखों-लाख मछुआरों के रोजगार समाप्‍त हो गए। इसलिए जब गडकरी साहब ने गंगा में हर 100 किलोमीटर की दूरी पर बराज बनाने की बात शुरू की, तब गंगा पर जीने वाले करोड़ों लोगों में घबराहट फैलने लगी है। गंगा की उड़ाही की बात तो ठीक है, लेकिन बराजों की ऋंखला खड़ी करके गंगा की प्राकृतिक उड़ाही की प्रक्रिया को बाधित करना सूझबूझ की बात नहीं है। इस पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। नहीं तो सरकार को जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ेगा और लेने के देने पड़ जाएंगे। आज से 32 साल पहले 1982 में कहलगांव (जिला – भागलपुर {बिहार}) से गंगा मुक्ति आंदोलन की शुरुआत हुई थी। जन प्रतिरोध के कारण 1990 आते-आते गंगा में चल रही जमींदारी और पूरे बिहार के 500 किलोमीटर गंगा क्षेत्र तथा बिहार की सभी नदियों में मछुआरों के लिए मछली पकड़ना कर मुक्‍त कर दिया गया था। गंगा मुक्ति आंदोलन ने ऊपर वर्णित सवालों को लगातार उठाया और लाखों लाख लोग उसमें सक्रिय हुए थे। आज भी वह आग बुझी नहीं है। आग अंदर से सुलग रही है। गंगा के नाम पर गलत नीतियां अपनाई गई तो बंगाल, बिहार और उत्‍तर प्रदेश में यह ठंडी आग फिर से लपट बन सकती है।

लेखक अनिल प्रकाश से संपर्क 09304549662 या anilprakashganga@gmail.com के जरिए किया जा सकता है.

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Open life threat to me from Modi’s dirty department

 

Dear Narendra bhai Hitler Modi

if you think that life threats to me and reporting of Idhar Udhar blog as spam due to which Google has disabled my ad sense account, will able to force me to stop writing against you, then you and your dirty department are living in fool paradise world. I don’t write articles just for the sake of earning from google ads. I have direct ads of Sujata Magazine and web designing also. Even if google close my blog, then also I have an option to create my own website.

I don’t care about my life as well and you may buy the main stream media but you can’t bid for the neutral platforms with your money and muscle power. Your life threats has inspired me even more to keep exposing you and your party. You may kill or arrest me tomorrow but I will let my pen to do all the talking. If you take the life of one blogger for writing against you then there will be thousands of bloggers tomorrow who can make your life hell.

Our real war has started from today and we are going to give you a real tough time from now onwards. Stop me if you can and take this as an open challenge from Idhar Udhar. One random guy has thrown this warning letter to my house today which is not in someone’s hand writing. He has cleverly typed this warning letter. Earlier, some people have spammed the blog due to which FB was reporting my blog link as a spam. They have deliberately added my blog link into adult content sites so that google can take action against my blog.

Divye Joshi

दिव्य जोशी

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www.idharudhar24x7.blogspot.in

divvejoshi@gmail.com

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