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उत्तर प्रदेश में जेके24X7 चैनल का हुआ बुरा हाल

यूपी में शराब से लेकर पार्किंग स्टैंड तक के ठेके भले साल भर में बदलते हों लेकिन नेशनल न्यूज चैनल जेके24×7 का ठेकेदार (फ्रेंचाइजी होल्डर /ब्यूरो) हर महीने बदलता है। मतलब जो ज्यादा पैसा दे, पूरा यूपी उसका। जैसी मर्जी वैसी खबरें चलाए। चैनल को खबरों से कोई लेना देना नहीं। बस पैसा समय पर मिले। कमाल की बात देखिए जेके चैनल वाले फ्रेंचाइजी भी मीडिया के फील्ड के लोगों को नहीं बल्कि दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों जैसे डॉक्टर, नेता, इंजीनियर, या मीडिया से अनभिज्ञ लोगों को देता है और लोग भी मुंगेरी लाल के हसीन सपने आँखों में संजोए मीडिया के माध्यम से समाज में रुतबा, नेताओं-अफसरों से करीबी और करोड़ो कमाने के लालच में अपना प्रोफेशन छोड़कर चले आते हैं।

यूपी में शराब से लेकर पार्किंग स्टैंड तक के ठेके भले साल भर में बदलते हों लेकिन नेशनल न्यूज चैनल जेके24×7 का ठेकेदार (फ्रेंचाइजी होल्डर /ब्यूरो) हर महीने बदलता है। मतलब जो ज्यादा पैसा दे, पूरा यूपी उसका। जैसी मर्जी वैसी खबरें चलाए। चैनल को खबरों से कोई लेना देना नहीं। बस पैसा समय पर मिले। कमाल की बात देखिए जेके चैनल वाले फ्रेंचाइजी भी मीडिया के फील्ड के लोगों को नहीं बल्कि दूसरे क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों जैसे डॉक्टर, नेता, इंजीनियर, या मीडिया से अनभिज्ञ लोगों को देता है और लोग भी मुंगेरी लाल के हसीन सपने आँखों में संजोए मीडिया के माध्यम से समाज में रुतबा, नेताओं-अफसरों से करीबी और करोड़ो कमाने के लालच में अपना प्रोफेशन छोड़कर चले आते हैं।

ये सोचते हैं प्रदेश का हर नेता और अधिकारी उन्हें जानेगा, साथ ही प्रदेश में उनका नाम होगा, बड़े बड़े लोग इन्हें पूछेंगे और वो करोड़ों कमाएंगे। लेकिन ये सपने टूट के तब बिखर जाते हैं जब फ्रेंचाइजी लेने वाले को ये पता चलता है कि न तो उसका नाम हो रहा और न ही वो पैसे कमा पा रहा। इसके बाद भी कुछ लोग हाथ आजमाने इस लाइन में आ जाते हैं। जेके चैनल के यूपी में फ्रेंचाइजी होल्डर पहले एक डॉक्टर थे।

अब इस समय एक अनभिज्ञ अनुभवहीन आनंद कुमार श्रीवास्तव हैं। इनके कई कॉमेडी पीटीसी, वन 2 वन के फनी वीडियो मार्केट में आ गए हैं और व्हाट्सएप ग्रुपों पर खूब चल रहे हैं। अगर पैसे के चक्कर में ठेके पर चैनल दिए जाएंगे तो कैसे कैसे लोग ब्यूरो बनेंगे, ये आप अच्छे से समझ सकते हैं। इनके पास चैनल को एक महीने बाद देने के लिए पैसा तो होता नहीं। 12 लाख महीने पर सुना है चैनल लिए हैं। 14 जुलाई को इनको फिर नेक्स्ट मंथ की पेमेंट करनी थी जो ये कर नहीं पाए। बेचारा, लाए भी तो कहाँ से? भाजपा सरकार आ गई यूपी में। चैनलों को विज्ञापन मिल नहीं रहा। प्राइवेट विज्ञापन चैनल को नहीं मिल रहे सो अलग। रिपोर्टर, कैमरामैन ये क्या रख पाएंगे सैलरी पर, आप सोचिए?

इसने एक महीना तक 3 से 4 रिपोर्टर कैमरामैन रखे। किसी से 10 दिन तो किसी से 15 दिन काम करवा के झगड़ा हाथापाई करके हटा दिया ताकि वेतन न देना पड़े। यहां लखनऊ ऑफिस में हर रोज नया चेहरा आ जाता है और चला जाता है। फिर शुरू होता है फ्री का जुगाड़। घर के लोग ही रिपोर्टर बन जाते हैं और कैमरामैन भी। चैनल के लिए यूपी के जिला संवाददाताओं से खुल कर पैसे मांगे जा रहे हैं। इसका एक ऑडियो भी वायरल हुआ। यह जेके चैनल यूपी में किसी भी सवांददाता को एक रुपया नहीं देता, न सैलरी देता है, न ही खबर पर पेमेंट देता है।

लखनऊ से एक मीडियाकर्मी द्वारा भेजे गए लंबे चौड़े पत्र का संपादित अंश.

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